Genetic code and its importance

आनुवांशिक कूट (Genetic code) या आनुवांशिक संहिता – DNA में क्षारों के अनुक्रम व अनुलेखन के बाद m-RNA में DNA के पूरक क्षारों के अनुक्रम की व्यवस्था प्रोटीन संश्लेषण प्रक्रिया में संश्लेषित प्रोटीन में अमीनो-अम्ल के अनुक्रम को निर्धारित करती है अतः क्षारों के इस अनुक्रम को आनुवांशिक कूट या आनुवांशिक संकेत कहते हैं । […]

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Human Heart Structure and Function with Diagram : class 10th Science in Hindi

मानव ह्रदय (Human heart) ह्रदय (Heart) – मानव का ह्रदय वक्षीय गुहा में, दोनों फुफ्फुसों के बीच अधर तल पर कुछ बाईं ओर स्थित होता है । ह्रदय दो-स्तरीय आवरण ह्दयावरण (Pericardium) से ढ़का रहता है । दोनों आवरणों के मध्य पाया जाने वाला द्रव ह्रदयावरणी द्रव (Pericardial fluid) कहलाता है । यह ह्रदय को

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Human Genetics (मानव आनुवंशिकी) in Hindi : GK Science Biology

मानव आनुवांशिकी (Human Genetics) – मानव में आनुवांशिक लक्षणों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचरण की विधियों और कारणों के अध्ययन को मानव आनुवांशिकी कहते हैं । ⇒ मानव में 46 गुणसूत्र अथवा 23 जोड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं । जिनमें 44 गुणसूत्र अथवा 22 जोड़े गुणसूत्र अलिंग गुणसूत्र (ऑटोसोम्स) कहलाते हैं । जबकि गुणसूत्र का 23 वां

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Genetics: Mendel’s Law of Inheritance in Hindi (आनुवंशिकी: मेंडल के आनुवंशिकता के नियम)

आनुवांशिकी : मोनोहाइब्रिड क्रॉस एवं डाइहाइब्रिड क्रॉस और मेंडल के नियम आनुवांशिकी (Genetics) – वे लक्षण जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचरित होते हैं, आनुवांशिक लक्षण कहलाते हैं । आनुवांशिक लक्षणों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचरण की विधियों और कारणों के अध्ययन को आनुवांशिकी (Genetics) कहते हैं । आनुवांशिकता के बारे में सर्वप्रथम जानकारी आस्ट्रिया निवासी ग्रेगर जोहान मेंडल (1822-1884)

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Difference between Biodegradable & Non-biodegradable Wastage

⦁ जैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Biodegradable Wastage) – वे प्रक्रम जिनका जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटन हो जाता है जैव निम्नीकणीय पदार्थ कहलाते हैं । यदि विघटन या अपघटन की दर कम हो जाए तब ये पदार्थ एकत्रित होकर प्रदूषक का कार्य करते हैं । उदाहरण – शाक, फल, मलमूत्र, कपड़ा, कागज आदि । ⦁ अजैव निम्नीकरणीय

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difference between Autogamy and Xenogamy with definition

परागण (Pollination) – परागकोश से झड़ने के पश्चात् परागकणों का स्त्रीकेसर के वृतीकाग्र तक स्थानान्तरण ,परागण कहलाता है । परागण को तीन भागों में बांटा जा सकता है – 1. स्वपरागण (Autogamy or self-pollination) – जब किसी एक पुष्प के परागकण उसी पुष्प की वृतीकाग्र तक स्थानान्तरित होते हैं तो उसे स्वपरागण कहते हैं ।

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जैव विकास (Organic Evolution) and जैव-विकास के सिद्धांत (Theory of Organic Evolution )//Biology g.k.

जैव विकास (Organic Evolution) ⦁ जैव विकास (Organic Evolution) – प्रारंभिक, निम्न कोटी के जीवों से क्रमिक परिवर्तनों द्वारा अधिकाधिक जीवों की उत्पत्ति को जैव विकास कहा जाता है । जीव-जन्तुओं की रचना कार्यिकी एवं रासायनिक, भ्रूणीय विकास, वितरण आदि में विशेष क्रम व आपासी संबंध के आधार पर सिद्ध किया गया है कि जैव

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परावर्तन के लिए नई कार्तिकीय चिन्ह परिपाटी//difference between real and virtual image

⦁ गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तन के लिए चिन्ह परिपाटी- गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश के परावर्तन पर विचार करते समय हम एक निश्चित चिन्ह परिपाटी का पालन करते हैं जिसे नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी कहते है । इसमें दर्पण के ध्रुव P को मूलबिन्दू माना जाता है । इसमें निम्न बिन्दू हैं- 1. बिंब (वस्तु) सदैव

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मानव में लिंग निर्धारण//manav me ling nirdharan in hindi

⦁ मानव में लिंग निर्धारण- मानव 23 जोड़े गुणसूत्र (46 गुणसूत्र) होते हैं । मानव में गुणसूत्र दो प्रकार के होते हैं – लिंगसूत्र (लिंग गुणसूत्र) तथा अलिंगसूत्र (अलिंग गुणसूत्र) । 1. लिंग सूत्र (लिंग गुणसूत्र) (Sex cromosome) – वे गुणसूत्र जो लिंग का निर्धारण करते हैं ,लिंगसूत्र कहलाते हैं । मानव में गुणसूत्र का

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Flowers and their Parts functions with Labelled Diagram

⦁ पुष्प की अनुदैर्घ्य काट का नामांकित चित्र तथा विभिन्न भागों की विशेषता एवं कार्य – पुष्प के विभिन्न भागों की विशेषता एवं कार्य – 1. पुष्पवृन्त (Pedicel) विशेषता – पुष्पवृन्त डण्ठलनुमा होता है । कार्य – पुष्प को पौधे से जोड़ता है । 2. पुष्पासन (Receptecle) विशेषता – यह पुष्प का आसन होता है

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