General knowledge of biology for competitive exam Part-4

⦁ पादप एवं जन्तु कोशिका में मुख्य अन्तर-

क्रं.सं. पादप कोशिका जन्तु कोशिका
1. इसमें कोशिका भित्ति पायी जाती है । इसमें कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है ।
2. इसमें लवक (Plastid) पायी जाती है । इसमें लवक अनुपस्थित होती है ।
3. तारककाय (Centrosome) तथा तारककेन्द्र (Centrioles) अनुपस्थित होते हैं । तारककाय (Centrosome) तथा तारककेन्द्र (Centrioles) उपस्थित होते हैं ।
4. रिक्तिका (Vacuoles) बड़ी होती है । रिक्तिका छोटी होती है अथवा अस्थायी होती है ।
5. इसका आकार लगभग आयताकार होता है । इसका आकार लगभग वृताकार होता है ।

⦁ कोशिका विभाजन (Cell Division) – कोशिका विभाजन को सर्वप्रथम 1855 ई. में रूडोल्फ विरचाऊ ने देखा ।
परिभाषा- केरियोकाइनेसिस (Karyokinesis = केन्द्रक विभाजन) तथा साइटोकाइनेसिस (Cytokinesis = कोशिकाद्रव्य विभाजन) द्वारा कोशिकाओं के जनन (बहुगुणन) को कोशिका विभाजन कहते हैं ।
अथवा
एक कोशिका (जनन कोशिका) से दो अथवा अधिक कोशिकाओं (पुत्री अथवा संतति कोशिकाओं) के निर्माण को कोशिका विभाजन कहते है । पादपों में यह विभाज्योतक तथा जनन कोशिकाओं में पाया जाता है ।

कोशिका विभाजन के तीन मुख्य चरण हैं –
i. जीनोम द्विगुणन (Duplication)
ii. केन्द्रक विभाजन (Karyokinesis)
iii. कोशिका विभाजन (Cytokinesis)

कोशिका विभाजन के प्रकार – कोशिका विभाजन मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है –
i. असूत्री अथवा प्रत्यक्ष कोशिका विभाजन (Amitosis)
ii. समसूत्री अथवा सूत्री अथवा कायिक कोशिका विभाजन (Mitosis or mitotic or somatic cell division)
iii. अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis)

i. असूत्री अथवा प्रत्यक्ष कोशिका विभाजन (Amitosis) – यह विभाजन अविकसित कोशिकाओं जैसे – जीवाणु, नील हरित शैवाल, यीस्ट, अमीबा तथा प्रोटोजोआ में होता है ।

ii. समसूत्री अथवा सूत्री अथवा कायिक कोशिका विभाजन (Mitosis or mitotic or somatic cell division) – समसूत्री कोशिका विभाजन का सर्वप्रथम अध्ययन पादप कोशिका में स्ट्रासबर्गर (1870 ई.) ने तथा जन्तु कोशिका में फ्लेमिंग (1882 ई.) ने किया । समसूत्री कोशिका विभाजन की खोज का श्रेय फ्लेमिंग को दिया जाता है । सूत्री विभाजन में धागे सदृश्य गुणसूत्रों के बनने तथा उनके विभाजन के कारण फ्लेमिंग ने इसे माइटोसिस नाम दिया । यह विभाजन कायिक कोशिकाओं में होता है ।

परिभाषा- वह प्रक्रम जिसके अन्तर्गत जनक कोशिका के गुणसूत्र, संख्या में दुगुने होकर इस प्रकार विभाजित होते हैं कि नवजात दो पुत्री कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका के बराबर होती है, माइटोसिस कहलाती है ।

अध्ययन की सुविधा के लिए समसूत्री विभाजन को पाँच चरणों में बाँटते हैं, जो निम्न हैं –
a. अन्तरावस्था (Interphase)
b. पूर्वावस्था (Prophase)
c. मध्यावस्था (Metaphase)
d. पश्चावस्था (Anaphase)
e. अन्त्यावस्था (Telophase)

समसूत्री विभाजन की पश्चावस्था सबसे छोटी होती है ,वह केवल 2-3 मिनट की होती है ।

iii. अर्द्धसूत्री अथवा न्यूनकारी विभाजन (Meiosis or Reduction division) – फार्मर तथा मूर (1905 ई.) ने कोशिकाओं में अर्द्धसूत्री विभाजन को Meiosis नाम दिया । इसकी खोज Oscar Hertwig (1876 ई.) ने सी-अर्चिन के अण्डे में की थी । अगस्त वीजमैन ने 1890 ई. में प्रजनन और वंशानुक्रम के लिए अर्द्धसूत्री विभाजन के महत्व को बताया ।
यह विभाजन लैंगिक रूप से जनन करने वाले सजीवों की द्विगुणित जनन कोशिकाओं (Diploid germ cells) तथा थैलोफाइटा के युग्मनजों में होता है ।
अर्द्धसूत्री विभाजन निम्न दो चरणों में पूर्ण होता है –
1. अर्द्धसूत्री विभाजन-I (अर्द्धसूत्री विभाजन प्रथम)
2. अर्द्धसूत्री विभाजन-II (अर्द्धसूत्री विभाजन द्वितीय)
1. अर्द्धसूत्री विभाजन-I – इसमें गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है ,इसलिए इसे न्यूनकारी विभाजन (Reduction division) अथवा विषमरूपी विभाजन (Heterotypic division) कहते हैं । इसमें चार अवस्थाएँ होती हैं –
i. प्रोफेज-I
ii. मेटाफेज-I
iii. एनाफेज-I
iv. टेलोफेज-I

i. प्रोफेज-I – यह सबसे लंबी प्रावस्था होती है जो कई घंटो से लेकर कई वर्षों तक की हो सकती है । यह पाँच उप प्रावस्थाओं में पूरी होती है-
a. लेप्टोटीन (Leptotene)
b. जाइगोटीन (Zygotene)
c. पैकीटीन (Pachytene)
d. डिप्लोटीन (Diplotene)
e. डायकाइनेसिस (Diakinesis)

a. लेप्टोटीन (Leptotene) – गुणसूत्र उलझे हुए पतले धागों की तरह दिखाई पड़ते हैं । इन्हें क्रोमोनिमेटा कहते हैं । गुणसूत्रों की संख्या द्विगुणित होती है ।

b. जाइगोटीन (Zygotene) – समजात गुणसूत्र एक साथ एक साथ होकर जोड़े बनाते हैं । इसे सिनेप्सिस (Synapsis) कहते हैं । सेंट्रियोल एक दूसरे से अलग होकर केन्द्रक के विपरीत ध्रुवों पर चले जाते हैं । प्रोटीन एवं RNA संश्लेषण के फलस्वरूप केन्द्रिका बड़ी हो जाती है ।

c. पैकीटीन (Pachytene) – प्रत्येक जोड़े के गुणसूत्र छोटे और मोटे हो जाते हैं । द्विज(जोड़े) का प्रत्येक सदस्य अनुदैर्घ्य रूप से विभाजित होकर दो अनुजात गुणसूत्रों या क्रोमेटिडों में बँट जाता है । इस प्रकार दो समजात गुणसूत्रों के एक द्विज (जोड़े) से अब चार क्रोमैटिड बन जाते हैं । इनमें दो अपभगिनी (Non-sister) तथा दो भगिनी (sister) क्रोमेटिड होते हैं ।
रिलेशनल कॉइलिंग के फलस्वरूप चारों क्रोमेटिड की आमने-सामने की दो भीतरी अपभगिनी क्रोमेटिड्स कई बिन्दूओं पर टूट जाती हैं जिससे इनके कई टुकड़े (खण्ड) हो जाते हैं । अपभगिनी क्रोमैटिड्स में इन खण्डों का आदान-प्रदान होता है । इसे ही क्रोसिंग ऑवर कहते हैं । इस प्रकार जीन का नए ढ़ंग से वितरण हो जाता है । इस क्रिया में रिकॉम्बिनेज एंजाइम भाग लेते हैं ।

नोट- क्रॉसिंग ऑवर हमेशा नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच होता है ।

d. डिप्लोटीन (Diplotene) – समजात गुणसूत्र अलग होने लगते हैं , परन्तु जोड़े के दो सदस्य पूर्ण रूप से अलग नहीं हो पाते, क्योंकि वे कहीं-कहीं एक-दूसरे से X के रूप में उलझे रहते हैं । ऐसे स्थानों को काइएज्माटा (chiasmata) कहते हैं । काइएज्माटा की औसत संख्या को बारंबारता (chiasmata frequency) कहते हैं ।

e. डायकाइनेसिस (Diakinesis) – इसमें काइएज्माटा का सीमान्तीकरण (terminalisation) हो जाता है । केन्द्रक कला व केन्द्रिका लुप्त हो जाती है ।

ii. मेटाफेज-I – मिओसिस की मेटाफेज प्रथम मोटे रूप में माइटोसिस की मेटाफेज के समान होती है ।

iii. एनाफेज-I – इस प्रावस्था में सेन्ट्रोमीयर का विभाजन नहीं होता है जबकि माइटोसिस की एनाफेज में इनका विभाजन होता है । इसके अलावा सभी क्रियाएँ माइटोसिस की एनाफेज के समान होती है । सेन्ट्रोमीयर के विभक्त नहीं होने से एनाफेज प्रथम में एक गुणसूत्र की दोनों भगिनी क्रोमेटिड्स पृथक नहीं होती हैं, फलस्वरूप दोनों एक ही ध्रुव पर पहुँचती है ।

iv. टेलोफेज-I – यह माइटोसिस की एनाफेज के समान होती है ।

2. अर्द्धसूत्री विभाजन-II (अर्द्धसूत्री विभाजन द्वितीय) – यह विभाजन माइटोसिस के समान होता है ।

⦁ समसूत्री तथा अर्द्धसूत्री विभाजन में अन्तर-

क्रं.सं. समसूत्री विभाजन अर्द्धसूत्री विभाजन
1. यह विभाजन कायिक कोशिकाओं में होता है । यह विभाजन जनन कोशिकाओं में होता है ।
2. इस विभाजन में कम समय लगता है । इस विभाजन में अधिक समय लगता है ।
3. इस विभाजन के द्वारा एक कोशिका से दो कोशिकाएँ बनती हैं । इस विभाजन में एक कोशिका से चार कोशिकाओं का निर्माण होता है ।
4. संतति में कोशिका में जनक जैसे ही गुणसूत्र होने के कारण आनुवांशिक विविधता नहीं होती है । संतति कोशिकाओं में जनकों से भिन्न गुणसूत्र होने के कारण आनुवांशिक विविधता होती है
5. इस विभाजन में गुणसूत्रों के बीच आनुवांशिक पदार्थों का आदान-प्रदान (Crossing over) नहीं होता है । इस विभाजन में गुणसूत्रों के बीच आनुवांशिक पदार्थों का आदान-प्रदान (Crossing over) होता है ।
6. इसकी प्रोफेज अवस्था छोटी होती है । इसकी प्रोफेज अवस्था लंबी होती है ।

 

3 thoughts on “General knowledge of biology for competitive exam Part-4

  • November 19, 2020 at 8:53 am
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    Is it ok to add some more detail? Your attitude should be accepted without question…but..There are more lessons that contradict this. With respect- thanks for your time.

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  • November 21, 2020 at 8:25 pm
    Permalink

    I figure that you are so self-aggrandizing with this reasoning just to stand out.

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  • November 28, 2020 at 11:15 am
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    This post says so much more information than other people, and it’s incredibly helpful to me. Will return to see future writing from you! can I share this?

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