General knowledge of biology for competitive exam Part-3

⦁ DNA एवं RNA अणु की संरचना
1. RNA (Ribonuclic Acid = RNA) अणु की संरचना – कोशिकीय RNA अधिकतर एक सूत्री (ssRNA) अणु होता है । कतिपय वाइरसों जैसे रिओवाइरस तथा वून्ड ट्यूमर वाइरस (Reovirus and wound tiumour virus) में यह द्विसूत्री (dsRNA) होता है ।
RNA, चार मोनोमेरिक राइबोन्यूक्लिओटाइड्स की एक अशाखित पॉलिन्यूक्लिओटाइड श्रृंखला होती है । प्रत्येक राइबोन्यूक्लियोटाइड में एक पेन्टोज शर्करा (Pentose sugar) , एक अणु फॉस्फेट समूह एवं एक नाइट्रोजन क्षारक होता है । उल्लेखनीय है कि DNA की न्यूक्लियोटाइड्स को डीऑक्सीन्यूक्लियोटाइड्स तथा RNA की न्यूक्लियोटाइड्स को राइबोन्यूक्लियोटाइड्स कहते हैं ।

RNA का रासायनिक संगठन – रासायनिक विश्लेषण ज्ञात होता है कि RNA का अमु निम्नांकित पदार्थों से बना होता है –
i) फॉस्फेट – फॉस्फोरिक अम्ल
ii) पेन्टोज शर्करा – राइबोज
iii) नाइट्रोजनी क्षारें – प्यूरीन्स एवं पिरिमिडीन्स

नाइट्रोजनी क्षारें – ये नाइट्रोजनी कार्बनिक यौगिक है जो दो प्रकार की होती हैं – प्यूरिन्स एवं पिरिमिडीन्स ।
प्यूरिन्स – ये क्षारें दो प्रकार की होती हैं – एडिनीन (Adenine, A) एवं गुएनीन (Guanine, G) ।
पिरिमिडीन्स – यें क्षारें (बेस = क्षार) तीन प्रकार की होती हैं – थाइमीन (Thymine, T) , साइटोसीन (Cytosine, C) तथा यूरेसिल (Uracil, U) ।
DNA की भाँति RNA अणु में भी चार प्रकार की नाइट्रोजनी क्षारें होती हैं । तीन क्षारें जैसे A,G,C RNA व DNA दोनों अणुओं में समान होती हैं । RNA में A व G नामक प्यूरीन्स एवं U व C नामक पिरिमिडीन्स पायी जाती हैं ।

राइबोन्यूक्लिओटाइड्स – RNA का अणु एक सूत्री होता है जो अनेक राइबोन्यूक्लियोटाइडों के संयोजन से बना होता है । एक न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside) और फॉस्फोरिक अम्ल का संघनन उत्पाद न्यूक्लियोटाइड कहलाता है । जबकि एक नाइट्रोजनी क्षारक व शर्करा का संघनन उत्पाद न्यूक्लियोसाइड कहलाता है ।
बहुन्यूक्लियोटाइड (Polynucleotide) – बहुत से न्युक्लियोटाइड्स एक रैखिक तथा लंबी श्रृंखला बनाते हुए आपस में जुड़ जाते हैं । उनकी इस श्रृंखला को बहुन्यूक्लियोटाइड सूत्र कहा जाता है ।
RNA का निर्माण (Transcription) – DNA से ही RNA का निर्माण होता है । इस क्रिया में DNA की एक श्रृंखला पर RNA की न्यूक्लियोटाइड आकर जुड़ जाती हैं । इस प्रकार एक अस्थायी DNA-RNA संकर का निर्माण होता है । इसमें नाइट्रोजन बेस थायमिन के स्थान पर यूरेसिल होता है । कुछ समय बाद RNA की समजात श्रृंखला अलग हो जाती है ।

RNA के प्रकार – ये तीन के प्रकार होते हैं –
i. r-RNA (Ribosomal RNA) – ये राइबोसोम पर लगे रहते हैं और प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करते हैं ।
ii. t-RNA (Transfer RNA) – यह प्रोटीन संश्लेषण में विभिन्न प्रकार के अमीनों अम्ल को राइबोसोम पर लाते हैं, जहाँ पर प्रोटीन बनता है ।
नोट- प्रोटीन बनने की अंतिम क्रिया को ट्रान्सलेशन कहते हैं ।
iii. m-RNA (Messenger RNA) – यह केन्द्रक के बाहर विभिन्न आदेश लेकर अमीनो अम्ल को चुनने में मदद करता है ।

2. DNA अणु की संरचना – इसे डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड (Deoxyribonucleic acid = DNA) कहते हैं । पादप वाइरसों के अतिरिक्त DNA सभी पादपों, जंतुओं, प्रोकेरियोट्स तथा अधिकांश जंतु वाइरसों व जीवाणुभोजियों (Bacteriophages) में पाया जाता है । कुहन के अनुसार DNA का आण्विक भार 6×106 डाल्टन्स होता है ।

DNA का रासायनिक संगठन – सन् 1953 में जे.डी. वाटसन एवं क्रिक ने DNA की द्विकुंडलित संरचना मॉडल (Double Helix Model) प्रतिपादित किया । इस काम के लिए उन्हें सन् 1962 में नोबेल पुरूस्कार मिला ।
इनके अनुसार DNA में पोलिन्यूक्लियोटाइडों की दो श्रृंखलाएँ प्रतिसमानान्तर (Antiparallel) दिशाओं में हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं । DNA में A व G नामक प्यूरीन्स एवं T व C नामक पिरिमिडीन्स पायी जाती हैं । DNA में A व T के मध्य दो हाइड्रोजन आबंध (A=T) एवं C व G के मध्य तीन हाइड्रोजन आबंध (C≡G) पाए जाते हैं ।

रासायनिक विश्लेषण के अनुसार DNA निम्नांकित तीन प्रकार के यौगिकों द्वारा निर्मित होता है ।
1. पेन्टोज शर्करा – डीऑक्सीराइबोज 
2. फॉस्फेट – फॉस्फोरिक अम्ल
3. नाइट्रोजनी क्षार – प्यूरीन्स तथा पिरिमिडीन्स

DNA का अणु एक बहुलक (Polymer) है जिसका निर्माण अनेक न्यूक्लियोटाइड एकलकों (Nucleotide Monomers) के पंक्तिबद्ध होने से होता है ।
DNA के अणु में संयोजित विभिन्न रासायनिक घटकों के संयोजन को स्पष्ट रूप से समझने के लिए तीन पदों का उपयोग किया जाता है, ये हैं –
i. न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside) – एक नाइट्रोजनी क्षारक व पेन्टोज शर्करा के अणु के संयोजन से बने अणु को न्यूक्लियोसाइड कहते हैं ।
ii. न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide) – एक न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside) और फॉस्फोरिक अम्ल का संघनन उत्पाद न्यूक्लियोटाइड कहलाता है ।
iii. बहुन्यूक्लियोटाइड (Polynucleotide) – बहुत से न्युक्लियोटाइड्स एक रैखिक तथा लंबी श्रृंखला बनाते हुए आपस में जुड़ जाते हैं । उनकी इस श्रृंखला को बहुन्यूक्लियोटाइड सूत्र कहा जाता है ।

नोट – प्रयोगशाला में सर्वप्रथम DNA का संश्लेषण हरगोविन्द खुराना ने किया ।

DNA का कार्य – यह सभी आनुवांशिकी क्रियाओं का संचालन करता है । जीन इसकी इकाई है । यह प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है ।

DNA एवं RNA में अन्तर –

क्रं.सं. DNA RNA
1. इसमें डीऑक्सीराइबोज शर्करा होती है । इसमें राइबोज शर्करा होती है ।
2. इसमें बेस (क्षार) एडिनीन, ग्वानीन, थायमिन एवं साइटोसीन होते हैं । इसमें बेस थायमिन की जगह यूरेसिल आ जाता है ।
3. यह मुख्यतः केन्द्रक में पाया जाता है । यह केन्द्रक व कोशिकाद्रव्य दोनों में पाया जाता है ।
4. DNA आनुवांशिक पदार्थ है । RNA केवल कुछ ही वाइरसों में आनुवांशिक पदार्थ होता है (उदाहरण – TMV) अन्यथा यह प्रोटीन संश्लेषण करता है ।
5. इसमें A का युग्लन T से व C का G से होता है । एक रज्जुकी होने से क्षारों में प्रायः युगलन नहीं होता है ।
6. DNA एक ही प्रकार का होता है । RNA तीन प्रकार (mRNA,rRNA, tRNA) के होते हैं ।
7. DNA अणु से पुनरावृति द्वारा DNA व अनुलेखन द्वारा RNA बनता है । RNA में पुनरावृति व अनुलेखन की क्रियाएँ नहीं होती हैं ।

 

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