अयस्क – जिन खनिजों में किसी विशेष धातु की मात्रा अधिक रूप में होती है, जिसे निकालना लाभकारी होता है, उन्हें अयस्क कहते हैं ।
विद्युत अपघटनी अपचयन या विद्युत अपघटनी परिष्करण विधि-
कॉपर, जिंक, टिन, निकैल, सिल्वर, गोल्ड आदि जैसी अनेक धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता । इस प्रक्रम में , अशुद्ध धातु को एनोड तथा शुद्ध धातु को कैथोड बनाया जाता है । जिस धातु का शुद्धिकरण किया जाता है उसी धातु का लवण विलयन विद्युत अपघटय के रूप में उपयोग किया जाता है । चित्रानुसार उपकरण को व्यवस्थित कर लेते है । जब विद्युत अपघटय से धारा प्रवाहित की जाती है तब अशुद्ध धातु का एनोड अपघटित होने लगता है ,जिससे मुक्त आयन विद्युत अपघटय के माध्यम से कैथोड पर निक्षेपित होने लगते है । कुछ अविलेय अशुद्धियाँ अपघटन के दौरान एनोड के नीचे जमा हो जाती है, जिसे एनोड पंक कहते है ।
कुछ समय बाद अशुद्ध धातु एनोड पतला व शुद्ध धातु का कैथोड मोटा हो जाता है । विद्युत अपघटन की प्रक्रिया पूर्ण होने पर शुद्ध धातु का कैथोड निकाल लेते है जो कि विद्युत अपघटनी परिष्करण से प्राप्त शुद्ध धातु है ।

