Chapter-15- Our Environment part-2-10th class notes in Hindi || 10th class ncert science notes in Hindi chapter-15 part-2

अध्याय-15

हमारा पर्यावरण part-2

⦁ विभिन्न पोषी स्तरों पर ऊर्जा प्रवाह का अध्ययन – किसी पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह के अध्ययन को निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत समझ सकते है –
1. एक स्थलीय पारितंत्र में हरे पौधे की पत्तियों द्वारा प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा का लगभग 1 % भाग खाद्य ऊर्जा में परिवर्तित होता है ।
2. जब हरे पौधे प्राथमिक उपभोक्ता द्वारा खाए जाते है तो उनसे प्राप्त होने वाली ऊर्जा की एक बड़ी मात्रा उष्मा के रूप में ह्रासित हो जाती है और कुछ मात्रा का उपयोग पाचन ,विभिन्न जैविक कार्यों में , वृद्धि व जनन में होता है ।
3. खाए हुए भोजन की मात्रा का लगभग 10 % ही जैव मात्रा में बदल पाता है तथा अगले स्तर के उपभोक्ता को उपलब्ध हो पाता है । अतः हम कह सकते हैं कि प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध कार्बनिक पदार्थों की मात्रा का औसतन 10% ही उपभोक्ता के अगले स्तर तक पहुँचता है ।
4. चूँकि उपभोक्ता के अगले स्तर के लिए ऊर्जा की बहुत कम मात्रा उपलब्ध हो पाती है अतः आहार श्रृंखला सामान्यतः तीन अथवा चार चरण की होती है । प्रत्येक चरण पर ऊर्जा का ह्रास इतना अधिक होता है कि चौथी पोषी स्तर के बाद उपयोगी ऊर्जा की मात्रा बहुत कम हो जाती है ।
5. चूँकि निचले पोषी स्तर पर जीवों की संख्या अधिक होती है अतः उत्पादक स्तर पर ऊर्जा की मात्रा अधिक होती है ।
6. ऊर्जा प्रवाह के आरेखीय चित्र से ज्ञात होता है कि ऊर्जा का प्रवाह निचले पोषी स्तर से उच्च पोषी स्तर की ओर होता है अथवा ऊर्जा प्रवाह हमेशा एक दिशिक(एक ही दिशा में) होता है ।
7. स्वपोषी जीवों द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा पुनः सौर ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होती तथा शाकाहारियों को स्थानांतरित की गई ऊर्जा पुनः स्वपोषी जीवों को उपलब्ध नहीं होती है । यह विभिन्न पोषी स्तरों पर क्रमिक स्थानांतरित होती है , अपने से पहले पोषी स्तर के लिए उपलब्ध नहीं होती है ।

⦁ पारितंत्र में अपमार्जक की भूमिका – पारितंत्र में अपमार्जकों का विशिष्ट स्थना है । पारितंत्र में जीवाणु तथा अन्य सूक्ष्म जीव अपमार्जकों का कार्य करते है । ये पेड़-पौधों एवं जीव-जंतुओं के मृत शरीरों पर आक्रमण कर जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों पदार्थों में बदल देते है । इसी प्रकार कचरा जैसे सब्जियों एवं फलों के छिलके, जंतुओं के मल-मूत्र ,पौधों के सड़े-गले भाग अपमार्जकों द्वारा विघटित किए जाते है । इस प्रकार पदार्थों के पुनः चक्रण में अपमार्जक सहायता करते है और वातावरण को स्वच्छ रखते है ।

⦁ ओजोन – ओजोन ( O3 ) के अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से निर्मित होते है । ओजोन एक घातक विष है । परन्तु वायुमण्डल के ऊपरी स्तर में ओजोन एक आवश्यक प्रकार्य सम्पादित करती है । यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है । ये पराबैंगनी विकिरणें (UV rays) जीवों के लिए हानिकारक होती है । ये मानव में त्वचा कैंसर उत्पन्न करती है ।

ओजोन गैस निर्माण की प्रक्रिया – वायुमण्डल के उच्च स्तर पर पराबैंगनी विकिरण के प्रभाव से ऑक्सीजन (O2) के अणुओं से ओजोन बनती है । उच्च ऊर्जा वाले पराबैंगनी विकिरण ऑक्सीजन अणुओं (O2) विघटित कर स्वतंत्र ऑक्सीजन परमाणु (O) बनाते है । ऑक्सीजन के ये स्वतंत्र परमाणु पराबैंगनी विकिरणों की उपस्थिति में ऑक्सीजन अणुओं से संयुक्त होकर ओजोन (O3 ) बनाते है ।
O2 + पराबैंगनी विकिरणें    O + O
O +   O2   →   O3 (ओजोन)

ओजोन गैस का अपक्षय – 1980 से वायुमण्डल में ओजोन की मात्रा में तीव्रता से गिरावट आने लगी । क्लोरोफ्लुोरो कार्बन (CFCs) जैसे मानव संश्लेषित रसायनों को इसका मुख्य कारक माना गया है । इसका उपयोग रेफ्रिजरेटर (शीतलन) एवं अग्निशमन के लिए किया जाता है । ये CFCs ही ओजोन परत के अपक्षय के लिए मुख्य कारक है ।
1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वानुमति बनी की CFCs के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए ।

⦁ कचरा प्रबंधन – किसी भी नगर एवं कस्बे में जाने पर चारों ओर कचरे के ढ़ेर दिखाई देते है । विभिन्न पर्यटन स्थलों पर बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थों की खाली थैलियाँ इधर-उधर पड़ी रहती है । पैकेजिंग के तरीकों में बदलाव से अजैव निम्नीकरणीय कचरे की मात्रा में वृद्धि हुई । जिसका निपटान करना एक गंभीर समस्या बन गया है
हम निम्न उपायों को अपनाकर कचरे के अपशिष्ट निपटान में मदद कर सकते है –
1. जैव निम्नीकणीय व अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों को अलग-अलग करके समाप्त करना ।
2. अजैव निम्नीकणीय अपशिष्ट पदार्थों को का पुनः चक्रण के बाद पुनः उपयोग करना चाहिए । जैसे प्लास्टिक , धातुएँ आदि ।
3. जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों जैसे रसोई की बेकार सामग्री , खाना बनाने के बाद बची सामग्री , पत्तियाँ आदि को जमीन में गड्ढ़ा खोदकर इन्हें दबाकर खाद तैयार किया जा सकता है । जिससे पौधों को उच्च कोटी की खाद उपलब्ध हो सके ।
4. कचरे को आग से जलाकर नष्ट किया जा सकता है एवं बायोगैस का उत्पादन कर कचरा निपटान की समस्या को कम किया जा सकता है ।

जैव निम्नीकरणीय व अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में अन्तर (Differences between Biodegradable and Non-biodegradable wastages) –

क्र.सं. जैव निम्नीकरणीय पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ
1. वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते है, जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते है । ऐसे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित नहीं होते है ,अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते है ।
2. इसकी उत्पत्ति जैविक होती है । ये सामान्यतः मानव द्वारा निर्मित होते है ।
3. ये प्रकृति में इकट्ठे नहीं होते है । इनका ढ़ेर लग जाता है एवं प्रकृति में इकट्ठे हो जाते है ।
4. ये जैव आवर्धन (biomagnification) प्रदर्शित नहीं करते है । घुलनशील अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं अर्थात् जैव आवर्धन प्रदर्शित करते है ।
5. प्रकृति में इनका पुनः चक्रण संभव है । प्रकृति में इन पदार्थों का पुनः चक्रण संभव नहीं है ।
6. उदाहरण – मल-मूत्र , कागज, शाक ,फल आदि । उदाहऱण – प्लास्टिक , D.D.T. , ऐल्युमिनियम के डिब्बे आदि ।

 

अध्याय-15- हमारा पर्यावरण part-1

2 thoughts on “Chapter-15- Our Environment part-2-10th class notes in Hindi || 10th class ncert science notes in Hindi chapter-15 part-2

  • November 12, 2019 at 4:19 am
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  • November 12, 2019 at 1:16 pm
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