Chapter-14 – Source of Energy ,10th class ncert/cbse notes in Hindi part-3

अध्याय-14 कक्षा-10
ऊर्जा के स्रोत -part-3

⦁वैक्ल्पिक अथवा गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत – 

1. सौर ऊर्जा 

2. समुद्रों से ऊर्जा – i) ज्वारीय ऊर्जा ,ii) तरंग ऊर्जा , iii) महासागरीय तापीय ऊर्जा 

3. भूतापीय ऊर्जा 

4. नाभिकीय ऊर्जा 

1. सौर ऊर्जा – सूर्य द्वारा उत्सर्जित उष्मा तथा प्रकाश ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते है ।

सौर ऊर्जा युक्तियाँ – सौर ऊर्जा को प्रत्यक्ष रूप से प्रयोग प्रयोग करने के लिए अनेक प्रकार की युक्तियों का विकास किया गया है । यह युक्तियाँ – सौर कुकर, सौर भट्टियाँ , सौर जल उष्मक , सौर ऊर्जा संयंत्र तथा सौर-सेल इत्यादि ।

सौर-सेल – ऐसी युक्ति जिसके द्वारा सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित किया जा सकता हो ,उसे सौर-सेल कहते है । इसे बनाने के लिए सिलिकॉन (Si) धातु का प्रयोग कियया जाता है ।

सौर-पैनल – 

जब बहुत अधिक संख्या में सौर-सेल को संयोजित करते है तो यह व्यवस्था सौर पैनल कहलाती है । जिनसे व्यावहारिक उपयोग के लिए विद्युत प्राप्त हो जाती है ।

सौर सेल / सौर पैनल के लाभ – 

1. इनका रख-रखाव सस्ता होता है ।

2. इन्हें अगम्य व सुदूर स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है ।

3. वैज्ञानिक तथा पौद्योगिकी अनुप्रयोगों के लिए इनका उपयोग किया जाता है ।

4. मानव द्वारा निर्मित उपग्रहों तथा अंतरिक्ष अन्वेषक युक्तियों जैसे मार्स ऑर्बिटरों में  सौर सेलों का उपयोग प्रमुख ऊर्जा स्रोत के रूप में होता है ।

5. रेडियों अथवा बेतार संचार तंत्रों अथवा सुदूर क्षेत्रों के टी.वी. रिले केन्द्रों में सौर सेल पैनल उपयोग किए जाते है ।

6. ट्रेफिक सिंग्नलों व ट्रेफिक लाइटों को जलाने में सौर सेल प्रयुक्त किए जाते है ।

7. सौर सेलों का उपयोग घरों में विद्युत उत्पन्न करने में भी किया जाता है । सौर सेलों को संयोजित कर सौर पैनल बनाने में सिल्वर (चाँदी) धातु का उपयोग किया जाता है अतः यह महँगे होते है इसलिए इनका घरेलु उपयोग अभी तक सीमित है ।

⦁सौर कुकर –  

सौर कुकर में सूर्य की किरणों को फोकसित करने के लिए दर्पणों का उपयोग किया जाता है । सौर कुकर की सतह काली होती है ,जिससे इनका ताप और उच्च हो जाता है । सौर कुकरों मे काँच की शीट का ढ़क्कन होता है । यह युक्ति दिन के कुछ निश्चिच समय तक ही उपयोग होती है । सौर ऊर्जा के उपयोग की इस सीमा पर सौर सेलों का उपयोग करके पार पाया जाता है । सौर सेल, सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करते है । धूप में रखे जाने पर किसी सौर सेल से 0.5 -1.0 V तक की वोल्टता विकसित होती है  तथा लगभग 0.7 W विद्युत उत्पन्न कर सकते है ।

2. समुद्रो से ऊर्जा –

i) ज्वारीय ऊर्जा – घूर्णन गति करती पृथ्वी पर मुख्य रूप से चन्द्रमा के गुरूत्वीय खिंचाव के कारण सागरों में जल का स्तर चढ़ता व गिरता है ,इस परिघटना को ज्वार-भाटा कहते है । ज्वार-भाटे में जल के स्तर के चढ़ने व गिरने से हमें ज्वारीय ऊर्जा प्राप्त होती है । ज्वारीय ऊर्जा का दोहन सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बांध का निर्माण करके किया जाता है । बांध के द्वार पर स्थापित टरबाइन ज्वारीय ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित कर देते है ।

ii) तरंग ऊर्जा – समुद्र तट के निकट विशाल तरंगों की गतिज ऊर्जा का उपयोग टरबाइनों को घुमाकर विद्युत जनित्र के द्वारा विद्युत उत्पन्न करने में किया जा सकता है ।

iii) महासागरीय तापीय ऊर्जा – समुद्रों अथवा महासगरों का पृष्ठ जल सूर्य द्वारा तप्त हो जाता है जबकि इनके गहराई वाले भाग का जल अपेक्षाकृत ठंडा होता है । ताप में इस अंतर का उपयोग सागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण विद्युत संयंत्र (Ocean Thermal Energy Conversion Plant या OTEC विद्युत संयंत्र) में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जाता है । OTEC विद्युत संयंत्र केवल तभी प्रचालित होते है जब महासागर के पृष्ठ पर स्थित जल तथा 2 किलोमीटर तक की गहराई पर  स्थित जल के ताप में 200C का अंतर हो । पृष्ठ के तप्त जल का उपयोग अमोनिया (NH3) जैसे वाष्पशील द्रवों को उबालने में किया जाता है । इस प्रकार बनी द्रवों की वाष्प जनित्र के टरबाइन को घुमाती है । महासागर की गहराइयों से ठंडे जल को पंपों से खींचकर वाष्प को ठंडा करके फिर से द्रव में संघनित किया जाता है ।

3. भूतापीय ऊर्जा – भौमिकीय परिवर्तनों के कारण भूपर्पटी में गहराइयों पर तप्त क्षेत्रों में पिघली चट्टानों ऊपर धकेल दी जाती है जो कुछ क्षेत्रों में एकत्रित हो जाती है , इन क्षेत्रों को तप्त स्थल कहते है । जब भूमिगत जल इन तप्त स्थलों के संपर्क में आता है तो भाप उत्पन्न होती है । कभी-कभी इस तप्त जल को पृथ्वी के पृष्ठ से बाहर निकलने के लिए निकास मार्ग मिल जाता है ,इन निकास मार्गों को गरम चश्मा अथवा उष्ण स्रोत कहते है । कभी-कभी यह भाप चट्टानों के बीच में फँस जाती है जहाँ इसका दाब अत्यधिक हो जाता है । तप्त स्थलों तक पाइप डालकर इस भाप को बाहर निकाल लिया जाता है । उच्च दाब पर निकली यह भाप विद्युत जनित्र के टरबाइन को घुमाती है जिससे विद्युत का उत्पादन होता है ।

न्यूजीलेंड तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में भूतापीय ऊर्जा पर आधारित कई विद्युत शक्ति संयंत्र कार्य कर रहे है ।

4. नाभिकीय ऊर्जा – जब कोई रेडियो सक्रिय पदार्थ विकिर्ण उत्सर्जित करता है तब उसका द्रव्यमान घटता है । द्रव्यमानों का अंतरΔm, ऊर्जा E में परिवर्तित हो जाता है । ऊर्जा E को ही नाभिकीय ऊर्जा कहते है ।

आइन्सटीन ने द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध को निम्न समीकरण द्वारा प्रदर्शित किया है ।

E =ΔmC2      Δm = द्रव्यमानों का अंतर

C = निर्वात् में प्रकाश का वेग(3×1O8 m/s)

नाभिकीय विज्ञान में ऊर्जा को प्रायः इलेक्ट्रॉन वॉल्ट (eV) के मात्रकों में व्यक्त किया जाताहै ।

1eV = 1.6×10-19 J

नाभिकीय ऊर्जा की बड़ी ईकाई मेगा इलेक्ट्रॉन वॉल्ट (MeV) है ।

1MeV = 106×eV

= 106×1.6×10-19 J

= 1.6×10-13 J

नाभिकीय ऊर्जा की प्राप्ति – नाभिकीय ऊर्जा नाभिकीय विखण्डन व नाभिकीय संलयन से प्राप्त होती है ।

i) नाभिकीय विखण्डन – वह अभिक्रिया जिसमें किसी भारी परमाणु (यूरेनियम, प्लूटोनियम, थोरियम) के नाभिक को निम्न ऊर्जा न्यूट्रॉन से बमबारी कराकर हल्के नाभिकों में तोड़ा जाता है , नाभिकीय विखण्डन कहलाती है । इसमें विशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है जिसका उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाता है ।

नाभिकीय विद्युत संयंत्र नाभिकीय विखण्डन पर आधारित होते है । भारत में नाभिकीय विद्युत संयंत्र तारापुर (महाराष्ट्र), नरौरा (उत्तर प्रदेश), राणा प्रताप सागर (राजस्थान) , कलपक्कम (तमिलनाडू), काकरापार (गुजरात) तथा कैगा (कर्नाटक) में स्थित है । जिनकी विद्युत उत्पादन करने की क्षमता हमारे देश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता का मात्र 3% से भी कम है ।

ii) नाभिकीय संलयन – वह अभिक्रिया जिसमें दो हल्के नाभिकों के संलयन से एक भारी नाभिक का निर्माण होता है ,उसे नाभिकीय संलयन कहते है । यह अपेक्षाकृत उच्च ताप पर संपन्न होती है । अतः नाभिकीय संलयन अभिक्रिया पृथ्वी पर संभव नहीं है । यह अभिक्रिया सूर्य व तारों पर विशाल ऊर्जा का स्रोत है ।

example-

1H1 + 1H1  = 2H3 + n(न्यूट्रॉन) + ऊर्जा

नाभिकीय विद्युत संयंत्र से हानि – 

1. नाभिकीय अपशिष्टों का भंडारण तथा निपटारा उचित प्रकार से नहीं होता है अतः इससे पर्यावऱण संदूषित हो सकता है ।

2. इसमें नाभिकीय विकिरणों के रिसाव का खतरा रहता है । ये विकिरण कैंसर जैसे भयानक रोग को जन्म दे सकती है ।

 

One thought on “Chapter-14 – Source of Energy ,10th class ncert/cbse notes in Hindi part-3

  • September 22, 2019 at 7:58 pm
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    An interesting discussion is worth comment. I think that you should write more on this topic, it might not be a taboo subject but generally people are not enough to speak on such topics. To the next. Cheers

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