अध्याय-3
धातु एवं अधातु
प्रश्न-9. प्रत्यूष ने सल्फर चूर्ण को स्पैचुला में लेकर गर्म किया ।
चित्रानुसार एक परखनली को उल्टा करके उसने उत्सर्जित गैस को एकत्र किया ।
(a) गैस की क्रिया क्या होगी ।
i. सूखे लिटमस पत्र पर ।
ii. आर्द्र लिटमस पत्र पत्र ।
(b) ऊपर की अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक अभिक्रिया लिखिए ।
उत्तर- (a) (i) उत्सर्जित गैस SO2 होगी जो कि सूखे लिटमस पत्र पर कोई क्रिया नहीं करेगी ।
(ii) आर्द्र लिटमस पत्र यदि नीला है तो यह गैस उसे लाल कर देती है क्योंकि SO2 अम्लीय ऑक्साइड है ।
(b) अभिक्रियाओं के संतुलित रासायनिक समीकरण
S (s) + O2 (g) → SO2 (g)
SO2 (g) + H2O → H2SO3 (aq) (हाइड्रोजन सल्फाइट)
प्रश्न-10. लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके बताइए ।
उत्तर- लोहे को जंग से बचाने के निम्न तरीके हैं –
i. लोहे पर तेल अथवा ग्रीस लगाना ।
ii. लोहे पर पेन्ट करके ।
प्रश्न-11. ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ कैसा ऑक्साइड बनाती है ।
उत्तर- अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर दो प्रकार के ऑक्साइड बनाती हैं – अम्लीय व उदासीन ।
उदाहरण के लिए –
i) अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके सहसंयोजक ऑक्साइड बनाती हैं ,जो पानी में घुलकर अम्ल बनाते हैं ।
C + O2 → CO2
CO2 + H2O → H2CO3 (कार्बोनिक अम्ल)
ii) कुछ अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके उदासीन ऑक्साइड का निर्माण करती हैं , जैसे- कार्बन मोनो ऑक्साइड (CO) , जल (H2O) आदि ।
प्रश्न-12. कारण बताइए –
a. प्लैटिनम, सोना तथा चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है ।
b. सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम को तेल के अन्दर संग्रहित किया जाता है ।
c. ऐलुमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है ,फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने के लिए किया जाता है ।
d. निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है ।
उत्तर-
a. प्लैटिनम, सोना तथा चाँदी सक्रियता श्रेणी में नीचे होते हैं अर्थात् इनकी क्रियाशीलता बहुत कम होती है । अतः ये वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन , नमी तथा अम्ल आदि से आसानी से क्रिया नहीं करते है । इनका संक्षारण भी नहीं होता है जिससे इनकी चमक बरकरार रहती है । ये धातुएँ आघातवर्धनीय तथा तन्य होती हैं । इन्हीं कारणों से इनका उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है ।
b. सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम बहुत क्रियाशील धातुएँ हैं । ये वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी से क्रिया करके ऑक्साइड तथा हाइड्रोक्साइड बनाते हैं । ये अभिक्रियाएँ तेजी से होती हैं । अतः खुले में रखने पर ये आग पकड़ लेती हैं । अतः इन्हें सुरक्षित रखने तथा आकस्मिक आग को रोकने के लिए इन्हें किरोसिन तेल में संग्रहित किया जाता है । किरोसिन तेल में ये अभिक्रिया नहीं करती है और संरक्षित रहती है ।
c. ऐलुमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है लेकिन फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने में किया जाता है क्योंकि सामान्य ताप पर इस धातु पर ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती है । यह परत धातु को पुनः ऑक्सीकरण से सुरक्षित रखती है । यह परत इसे संक्षारण से भी बचाती है । यह धातु ऊष्मा की अच्छी सुचालक भी है । इसी कारण ऐलुमिनियम कारण ऐलुमिनियम को बर्तन बनाने में प्रयुक्त करते हैं ।
d. निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है क्योंकि सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान है ।
प्रश्न-13. आपने ताँबे के मलिन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करते अवश्य देखा होगा । यह खट्टे पदार्थ बर्तन को साफ करने में क्यों प्रभावी है ।
उत्तर- ताँबा (कॉपर) वायु में उपस्थित आर्द्र CO2 से अभिक्रिया करके कॉपर कार्बोनेट बनाता है जिसके कारण बर्तन मलिन हो जाते है । जब बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करते हैं तो इनमें उपस्थित सिट्रिक अम्ल बर्तन पर उपस्थित कॉपर कार्बोनेट से क्रिया करके उसे विलेय कर देता है ,जिससे बर्तन साफ हो जाता है ।
प्रश्न-14. रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए ।
उत्तर – रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में अन्तर –
| क्रंसं. | धातुएँ | अधातुएँ |
| 1. | धातुएँ विद्युत धनी होती है अतः ये आसानी से इलेक्ट्रोन देकर धनायन बनाती हैं । | जबकि अधातुएँ विद्युत ऋणी होती है अतः ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती है । |
| 2. | धातुएँ वायु में दहन से क्षारीय ऑक्साइड बनाती है । | जबकि अधातुएँ वायु में दहन से अम्लीय एवं उदासीन ऑक्साइड बनाती है । |
| 3. | धातुओं के ऑक्साइड जल से क्रिया करके क्षार बनाते है तथा अम्ल से क्रिया करके लवण बनाते है । | जबकि अधातुओं के ऑक्साइड जल से क्रिया करके अम्ल बनाते है तथा क्षार से क्रिया करके लवण बनाते है । |
| 4. | धातुएँ जल से क्रिया करके ऑक्साइड तथा H2 देती हैं | जबकि अधातुओं में ऐसा नहीं होता है । |
| 5. | धातुएँ तनु हाइड्रोजन अम्लों से क्रिया करके लवण व H2 बनाती है | जबकि अधातुएँ तनु अम्लों से क्रिया नहीं करतीं । |
प्रश्न-15. एक व्यक्ति प्रत्येक घर में सुनार बनकर जाता है । उसने पुराने एवं मलिन सोने के आभूषणों में पहले जैसी चमक पैदा करने का ढ़ोंग रचाया । कोई संदेह किए बिना ही एक महिला अपने सोने के कंगन उसे देती है जिसे वह एक विशेष विलयन में डाल देता है । कंगन नए की तरह चमकने लगते हैं लेकिन उनका वजन अत्यंत कम हो जाता है । वह महिला बहुत दुःखी होती है तथा तर्क-वितर्क के पश्चात् उस व्यक्ति को झुकना पड़ता है । एक जासूस की तरह क्या आप उस विलयन की प्रकृति के बारे में बता सकते है ।
उत्तर- उस व्यक्ति द्वारा प्रयुक्त किया गया विलयन अम्लराज होता है जो कि सांद्र HCl तथा सांद्र HNO3 का मिश्रण होता है जो इन्हें क्रमशः 3:1 के अनुपात में मिलाने पर बनता है । सोना (गोल्ड) अम्लराज (ऐक्वा-रेजिया) में घुलनशील है इसलिए महिला के कंगनों का भार कम हो जाता है ।
प्रश्न-16. गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है परन्तु इस्पात (लोहे की मिश्रधातु ) का नहीं । इसका कारण बताइए ।
उत्तर- ताँबा बहुत कम अभिक्रियाशील धातु है । यह जल के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करता है तथा यह विद्युत एवं ऊष्मा का सुचालक भी है । इसके विपरीत इस्पात में आसानी से जंग लग जाता है तथा यह ताँबे (कॉपर) की अपेक्षा ऊष्मा का कम चालक है । इसलिए गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग किया जाता है ।
