अध्याय-8 जीव जनन कैसे करते हैं,10th class ncert science chapter-8 part-1

⦁ DNA = डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल(Deoxiribonuclic acid)

⦁ DNA के अणुओं में आनुवांशिक गुणों का संकेत होता है जो जनक से संतति पीढ़ी में जाता है ।
⦁ कोशिका के केन्द्रक के DNA में प्रोटीन संश्लेषण हेतु सूचना निहित होती है ।
⦁ जनन की मूल घटना DNA की प्रतिकृति बनाना है । DNA प्रतिकृति बनाने के लिए कोशिकाऐं विभिन्न रासायनिक क्रियाओं का उपयोग करती है । जनन कोशिका में इस प्रकार DNA की दो प्रतिकृतियाँ बनती है तथा उनका एक-दूसरे से अलग होना आवश्यक है । DNA प्रतिकृति बनने के साथ-साथ दूसरी कोशिकीय संरचनाओं का सृजन भी होता रहता है । इसके बाद DNA प्रतिकृतियाँ विलग हो जाती है । परिणामतः एक कोशिका विभाजित होकर दो कोशिकाऐं बनाती है ।
⦁ DNA प्रतिकृति की प्रक्रिया में कुछ विभिन्नता आ जाती है । परिणामतः DNA प्रतिकृतियाँ एकसमान तो होंगी परंतु मौलिक DNA का समरूप नहीं होंगी ।
⦁ DNA प्रतिकृति में कुछ विभिन्नताऐं इतनी उग्र होती है कि DNA की नयी प्रतिकृति अपने कोशिकीय संगठन के साथ समायोजित नहीं हो पाती है और इस प्रकार की संतति कोशिका मर जाती है ।
⦁ जनन के दौरान उत्पन्न होने वाली विभिन्नताऐं जैव विकास का आधार होती है ।
विभिन्नताओं का महत्व –  विभिन्नताऐं संतति को जनक से श्रेष्ठ बनाती है । विभिन्नताओं के कारण ही जीव संतति अपने निकेत अथवा आवास में अनुकूल रूप रह पाती है । विभिन्नताऐं जैव विकास का आधार होती है । विभिन्नताओं के कारण ही जीव दुर्गम स्थानों पर रह पाते है । अतः विभिन्नताऐं जीव की उत्तरजीविता बनाए रखने में उपयोगी है ।
उदा. शीतोष्ण जल में पाए जाने वाले जीवाणुओं की कोई समष्टि है तथा वैश्विक उष्मीकरण(global warming) के कारण जल का ताप बढ़ जाता है तो अधिकतर जीवाणु व्यष्टि मर जाऐंगे परंतु उष्ण प्रतिरोधी क्षमता वाले कुछ परिवर्त ही जीवित रहते है ।

एक कोशिक जीवों में प्रजनन की विधि(एक कोशिक जीवों में कोशिका विभाजन)-
एकल कोशिक जीवों में कोशिका विभाजन अथवा विखंडन द्वारा नए जीवों की उत्पत्ति होती है ।
कोशिका विभाजन- वह प्रक्रिया जिसके द्वारा जनक कोशिका विभाजित होकर दो या दो से अधिक संतति कोशिकाऐं उत्पन्न करती है , कोशिका विभाजन कहलाती है ।
उदा. अमीबा में कोशिका विभाजन किसी भी तल से हो सकता है ।

विखंडन- वह प्रक्रिया जिसके द्वारा जनक कोशिका खंडित होकर दो या दो से अधिक संतति कोशिकाऐं उत्पन्न करती है , विखंडन कहलाती है । उदा. पैरामिशियम
द्विखंडन- जब एक कोशिक जीव दो समान संतति कोशिकाओं में विभक्त होता है तो इसे द्विखंडन कहते है । उदा. पैरामिशियम, युग्लीना
कालाजार के रोगाणु लेस्मानिया में कोशिका के एक सिरे पर कोड़े के समान सूक्ष्म संरचना होती है ,इनमें द्विखंडन एक निर्धारित तल से होता है ।
बहुखंडन- जब एक कोशिक जीव एक साथ अनेक संतति कोशिकाओं में विभाजित होता है तो इसे बहुखंडन कहते है ।
उदा. मलेरिया परजीवी प्लाज्मोडियम

मुकुलन- कुछ एक कोशिक जीवों में उभारनुमा संरचना निकलती है जिसे मुकुल कहते है और यह अलग होकर अपने जनक के समान ही वृद्धि करती है । जनन की इस विधि को ही मुकुलन कहते है ।
उदा. यीस्ट
खंडन- सरल संरचना वाले बहुकोशिक जीवों का अनेक टुकड़ों में खंडित होना और प्रत्येक खंड का नए जीव में परिवर्तित होना खंडन कहलाता है ।
उदा. स्पाइरोगाइरा
Note- यह विध सभी बहुकोशिक जीवों में नहीं पाई जाती है ।
मुकुलन – कुछ सरल बहुकोशिक जीवों में शरीर की सतह पर अंकुर के समान संरचनाऐं बनती है ,इनको मुकुल कहते है और ये मुकुल जनक जीव से पृथक होकर स्वतंत्र रूप से प्रवर्धित होते है व एक नये जीव का निर्माण करते है , इस प्रक्रिया को ही मुकुलन कहते है ।
उदा. हाइड्रा

पुनरूदभवन(पुनर्जनन)-  यदि कुछ सरल प्राणियों को टुकड़ों में काट दिया जाए या फिर वे टुकड़ों में खंडित हो जाए और यदि प्रत्येक टुकड़ा विकसित होकर पूर्ण जीव का निर्माण कर ले तो इसे पुनरूदभवन कहते है ।
उदा. प्लेनेरिया , हाइड्रा

 

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