अध्याय-10 प्रकाश- परावर्तन तथा अपवर्तन, 10th class ncert science chapter-10 part-2

⦁ अवत्तल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिंब की स्थिति , आकार तथा प्रकृति –

1. जब वस्तु अनन्त पर हो-

2. जब वस्तु अनन्त व C के मध्य हो-

3. जब वस्तु C पर हो –

4. जब वस्तु C व F के मध्य हो

5. जब वस्तु F पर हो –

6. जब वस्तु F व P के मध्य हो-

⦁ उत्तल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिंब की स्थिति , आकार तथा प्रकृति –

1. जब वस्तु अनन्त पर हो-

2. जब वस्तु अनन्त तथा ध्रुव के मध्य हो-

⦁ अवत्तल दर्पण के उपयोग-
1. टॉर्च, सर्चलाइट तथा वाहनों के अग्रदीपों (Headlights) में ।
2. शेविंग दर्पणों के रूप में ।
3. दंत विशेषज्ञ द्वारा दंतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने में ।
4. सौर भट्टियों में सूर्य के प्रकाश को केन्द्रित करने में ।
⦁ उत्तल दर्पण के उपयोग-
वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में ।
⦁ गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तन के लिए चिन्ह परिपाटी-
गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश के परावर्तन पर विचार करते समय हम एक निश्चित चिन्ह परिपाटी का पालन करते हैं जिसे नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी कहते है ।

इसमें निम्न बिन्दू हैं-
1. बिंब (वस्तु) सदैव दर्पण के बायीं ओर रखा जाता है । इसका अर्थ है कि दर्पण पर बिंब से प्रकाश बाईं ओर से आपतित होता है ।
2. मुख्य अक्ष के समान्तर सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती है ।
3. आपतित प्रकाश की दिशा में दूरियाँ धनात्मक होती है । व आपतित प्रकाश की विपरित दिशा में दूरियाँ ऋणात्मक होती है ।
4. मुख्य अक्ष के अभिलम्बवत् ऊपर की ओर दूरियाँ धनात्मक व नीचे की ओर दूरियाँ ऋणात्मक होती है ।

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