Specific cells and their functions in animals, part-2

20. चीफ या सेन्ट्रल या जाइमोजन कोशिका – यह आमाशय की फण्डिक ग्रंथियों में पाई जाती है । इनके द्वारा एंजाइमस का स्त्रावण होता है ।
21. ऑक्सिन्टिक कोशिका या पेराइटल कोशिका – यह आमाशय की फण्डिक ग्रंथियों में पाई जाती है । इसके द्वारा HCl का स्त्रावण होता है ।
22. आर्जेन्टोफिन या एन्टरोफिन कोशिकाएँ – यह आमाशय की फण्डिक ग्रंथियों में पाई जाती है । यह सिल्वर या क्रोमियम लवणों के द्वारा अभिरंजित  की जा सकती है । इन कोशिकाओं द्वारा सेरोटोनिन हारमोन का स्त्रावण होता है । यह हाररमोन रक्त वाहिनियों के संकुचन में सहायक होता है ।
23. कुफ्फर्स कोशिकाएँ – यह हिपेटिक सायन्यूसॉइड्स की दीवार में एण्डोथिलियमकोशिकाओं के बीच में पायी जाती है । यह भक्षाणु (फेगोसाइट्स) प्रकार की होती है ।
24. प्रीकल या स्पाइनी कोशिकाएँ – यह कोशिकाएँ स्तनधारियों की त्वचा में स्ट्रेटम स्पाइनोसम परत में पायी जाती है । यह स्ट्रेटम जर्मिनेटम या स्ट्रेटम मैल्पीद्यी का भाग है । इन कोशिकाओं में तीव्र विभाजन की क्षमता होती है ।
25. मारकेल या लैंगरहैंस कोशिकाएँ – यह कोशिकाएँ स्तनधारियों की त्वचा में स्ट्रेटम मैल्पीद्यी स्तर में पायी जाती है । इन्हें गोल्ड क्लोराइड्स द्वारा अभिरंजित किया जा सकता है ।
26.मेलेनोसाइट्स – यह मेलेनिन वर्णक युक्त कोशिकाएँ होती है । इनका उद्भव न्युरल क्रेस्ट द्वारा होता है ।
27. मायोएपिथिलियल कोशिकाएँ – यह कोशिकाएँ स्वेद ग्रंथियों के ग्रंथिल भाग के चारों ओर पायी जाती है । इनके संकुचन से स्वेद स्त्रावण होता है । यह स्तन ग्रंथियो में कूपिकाओं को घेरे रहती है ।
28. ओडोन्टोब्लास्ट कोशिकाएँ – यह दांत की पल्प गुहा में पायी जाती है । इनके द्वारा डेन्टीन का स्त्रावण होता है । यह दांत की वृद्धि के लिए उत्तरदायी होता है ।
29. सरटोली कोशिकाएँ या सबटेन्टेक्यूलर कोशिकाएँ – यह स्तनधारियों के वृषण में शुक्रजनक नलिकाओं में पायी जाती है । यह शुक्राणुओं को पोषण व आसंजन प्रदान करती है । इनके द्वारा मृत व रोगग्रस्त शुक्राणुओं को भक्षण किया जाता है । इनके द्वारा ABP, इन्हिबिन व एन्टीमुलेरियन कारक का स्त्रावण किया जाता है ।
30. लेडिंग कोशिकाएँ – यह वृषण में शुक्रजनक नलिकाओं के बीच में पायी जाने वाले अन्तराली स्थान में पायी जाती है । इसके द्वारा टेस्टीस्टेरॉन हारमोन का स्त्रावण होता है । इन्हें अन्तराली कोशिकाएँ भी कहते है ।
31. श्लाका कोशिकाएँ – यह रेटिना में पायी जाती है । इसमें रोडोप्सीन नामक वर्णक पाया जाता है । यह अंधेरे में देखने में सहायक है ।
32. शंकू कोशिकाएँ – यह रेटिना में पायी जाती है व दिन में देखने में सहायक है । इसमें इरिथ्रोलेब , सायनोलेब व क्लोरोलेब वर्णक पाए जाते है जो क्रमशः लाल,नीला व हरा रंग का विभेदन करते है ।
33. फाइब्रोब्लास्ट – यह कोशिकाएँ योजी उत्तक में पायी जाती है । इनका कार्य तंतु निर्माण करना है ।
34. हिस्टियोसाइट्स – यह कोशिकाएँ योजी उत्तक में पायी जाती है । व यह भक्षाणु प्रकार की होती है ।
35. कोन्ड्रोसाइट्स – यह उपास्थियों में पायी जाती है । यह लेक्यूनी में स्थित होती है ।
36. ओस्टियोब्लास्ट – इनका कार्य अस्थियों में तंतु व अकार्बनिक लवणों का स्त्रावण करना है । यह उन स्थानों पर पायी जाती है ,जहाँ नई अस्थियों का निर्माण होता है ।
37. ओस्टियोसाइट्स – यह पूर्ण निर्मित अस्थियों में केनेलीक्यूलाई में स्थित होती है । इनका निर्माण ओस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं से होता है ।
38. अमीलोब्लास्ट – इन कोशिकाओं द्वारा दांत के इनेमल का स्त्रावण होता है ।

One thought on “Specific cells and their functions in animals, part-2

  • September 25, 2019 at 10:38 am
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