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carbon ke aprup class 10 #कार्बन के अपररूप

कार्बन के अपररूप – प्रकृति में कार्बन तत्व विभिन्न भौतिक गुणों के साथ विभिन्न रूपों में पाया जाता है । कार्बन के परमाणुओं के परस्पर आबंधन के तरीकों में अन्तर होता है ।

कार्बन के विभिन्न अपररूप निम्न हैं –

1. हीरा – हीरे में कार्बन का प्रत्येक परमाणु कार्बन के चार अन्य परमाणुओं के साथ आबंधित होकर चतुष्फलकीय ज्यामिति बनाता है । जिससे एक दृढ़ त्रिआयामी संरचना बनती है । हीरा अब तक का ज्ञात सर्वाधिक कठोर पदार्थ है । इसका गलनांक उच्च होता है । इसका उपयोग धार तेज करने के लिए अपघर्षक (Abrasive) आदि के रूप में होता है ।

शुद्ध कार्बन को अत्यधिक उच्च दाब एवं ताप पर उपचारित करके हीरे को संश्लेषित किया जा सकता है । ये संश्लेषित हीरे आकार में छोटे होते हैं, लेकिन ये प्राकृतिक हीरों से अभेदनीय होते हैं ।

2. ग्रेफाइट – इसमें कार्बन के प्रत्येक परमाणु का आबंध कार्बन के तीन अन्य परमाणुओं के साथ एक ही तल में होता है ,जिससे षट्कोणीय संरचना बनती है । इनमें तीन एकल आबंध और एक द्विआबंध होता है, जिसके कारण कार्बन की संयोजकता पूर्ण होती है । ग्रेफाइट की संरचना में षट्कोणीय तल एक-दूसरे के ऊपर व्यवस्थित होते हैं ।
षट्कोणीय संरचना के कारण इसमें कार्बन परमाणुओं के बीच की दूरी अधिक होती है । परतों के मध्य इस दूरी के कारण विपरीत परतों में स्थित कार्बन परमाणुओं के बीच सहसंयोजक बंधों के बनने की संभावना समाप्त हो जाती है । और चौथा संयोजक इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र छूट जाता है । इस कारण ग्रेफाइट में इलेक्ट्रॉन का प्रवाह आसानी हो जाता है और ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक बन जाता है । ग्रेफाइट मुलायम तथा चिकना भी होता है ।

3. फुलरीन – यह कार्बन अपररूप का अन्य वर्ग है । सबसे पहले C-60 की पहचान की गई जिसमें कार्बन परमाणु फुटबॉल के रूप में होते हैं । फुलरीन की संरचना पिंजरानुमा होती है । इसे बकमिन्स्टर फुलरीन (Buckminster fullerene) अथवा बकी बॉल (Bucky ball) भी कहते हैं ।


इसमें छः सदस्यीय बीस वलय तथा पाँच सदस्यीय बारह वलय होती हैं ।

 

कार्बन के अपररूप for class 11 and upper class (पढ़ने के लिए क्लिक करें)

 

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