वास्तविक संख्याएँ ( Real Numbers)

कक्षा 10 गणित अध्याय 1 : वास्तविक संख्याएँ | प्रमेय 1.1, 1.2 और 1.3 आसान हिंदी में

📚 कक्षा 10 गणित अध्याय 1 : वास्तविक संख्याएँ

गणित में जिन संख्याओं का उपयोग हम दैनिक जीवन में गिनती, माप और गणना के लिए करते हैं, उन्हें वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) कहते हैं।

इस अध्याय में हम समझेंगे:

✅ अभाज्य संख्या

✅ भाज्य संख्या

✅ अंकगणित की आधारभूत प्रमेय

✅ प्रमेय 1.2

✅ √2 एक अपरिमेय संख्या

🔹 अभाज्य संख्या (Prime Number)

👉 ऐसी संख्या जो केवल 1 और स्वयं से पूरी तरह विभाजित हो।

अथवा

👉 जिसके ठीक 2 गुणनखंड हों।

उदाहरण:

✔ 2

✔ 3

✔ 5

✔ 7

✔ 11

जैसे:

✔ 5 → 1 और 5 ( अर्थात् 5 के दो गुणनखण्ड 1 व 5 हैं )

✔ 7 → 1 और 7 ( अर्थात् 7 के दो गुणनखण्ड 1 व 7 हैं )

❌ 6 → 1, 2, 3 और 6 ( अर्थात् 6 अभाज्य संख्या नहीं है क्योंकि इसके दो से ज्यादा गुणनखण्ड हैं )

नोट:

⭐ 2 सबसे छोटी और एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।

⭐ 1 अभाज्य संख्या नहीं है।

🔹 भाज्य संख्या (Composite Number)

👉 ऐसी संख्या जो 1, स्वयं और किसी दूसरी संख्या से भी विभाजित हो जाए।

अर्थात

👉 जिसके दो से अधिक गुणनखंड हों।

उदाहरण:

✔ 4 → 1, 2, 4

✔ 6 → 1, 2, 3, 6

✔ 8 → 1, 2, 4, 8

✔ 12 → 1, 2, 3, 4, 6, 12

📘 प्रमेय 1.1 (अंकगणित की आधारभूत प्रमेय)

“प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है तथा यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम के बिना अद्वितीय होता है।”

आसान भाषा में स्पष्टीकरण: (इसका मूल विचार यूनानी गणितज्ञ यूक्लिड द्वारा दिया गया था।)

👉 हर भाज्य संख्या को अभाज्य गुणनखंडों (prime factors) के गुणा के रूप में लिखा जा सकता है।

👉 और यह तरीका अद्वितीय होता है।

उदाहरण

12 = 2 × 2 × 3

या

12 = 3 × 2 × 2 ✔

सिर्फ क्रम बदला है।

📘 प्रमेय 1.2

मान लीजिए p एक अभाज्य संख्या है। यदि p, a² को विभाजित करती है, तो p, a को भी विभाजित करेगी।

आसान भाषा में स्पष्टीकरण:

👉 अगर कोई अभाज्य संख्या (prime number) किसी संख्या के वर्ग (square) को विभाजित करती है , तो वह उस संख्या को भी विभाजित करेगी ।

उदाहरण

p = 3

a = 6

a² = 36

✔ 3, 36 को विभाजित करता है

✔ 3, 6 को भी विभाजित करेगा ।

एक लाइन में

यदि p | a², तो p | a

📘 प्रमेय 1.3 : √2 एक अपरिमेय संख्या है

उत्पत्ति

मान लेते हैं कि √2 परिमेय संख्या है।

तब

√2 = a/b

जहाँ

✔ a और b पूर्णांक हैं , b ≠ 0 और a और b सह-अभाज्य हैं

( सह-अभाज्य 👉 यानी दोनों में 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड (common factor) नहीं है )

दोनों पक्षों का वर्ग:

2 = a²/b²

b² से गुणा:

2b² = a²

अर्थात

a², 2 से विभाजित है।

प्रमेय 1.2 के अनुसार

2, a को भी विभाजित करेगी।

अतः

a = 2c

अब रखने पर

2b² = (2c)²

2b² = 4c²

b² = 2c²

अर्थात

b², 2 से विभाजित है।

2, b को भी विभाजित करेगी।

अब

✔ a भी 2 से कटता है

✔ b भी 2 से कटता है

मतलब दोनों में उभयनिष्ठ गुणनखंड 2 है।

लेकिन शुरू में दोनों सह-अभाज्य थे।

यह विरोधाभास है।

इसलिए पहली मान्यता (√2 एक परिमेय संख्या है ) गलत है।

निष्कर्ष

✅ √2 एक अपरिमेय संख्या है।

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