वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) : कक्षा 10 अध्याय 1 गणित
📘 परिचय (Introduction)- वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) गणित का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। यह अध्याय न केवल बोर्ड परीक्षा बल्कि JEE, NEET, CUET, SSC, Railway, NDA तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी आधारभूत माना जाता है। इस अध्याय में हम विभिन्न प्रकार की संख्याओं तथा उनके गुणों को सरल भाषा में समझते हैं। साथ ही संख्याओं से संबंधित महत्वपूर्ण प्रमेयों और सिद्धांतों का अध्ययन भी करते हैं।
इस लेख में हम प्राकृतिक संख्या, पूर्ण संख्या, पूर्णांक, परिमेय संख्या, अपरिमेय संख्या, वास्तविक संख्या, अभाज्य संख्या, भाज्य संख्या, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic), प्रमेय 1.2 तथा √2 के अपरिमेय होने का प्रमाण को आसान हिंदी में उदाहरणों सहित समझेंगे। यह लेख NCERT, CBSE तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को विषय को समझने और परीक्षा की तैयारी करने में आसानी होगी।
वास्तविक संख्याएँ ( Real Numbers):
गणित में जिन संख्याओं का उपयोग हम दैनिक जीवन में गिनती, माप और गणना के लिए करते हैं, उन्हें मिलाकर वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers) कहा जाता है।
इनमें धनात्मक, ऋणात्मक, पूर्णांक, भिन्न तथा दशमलव सभी प्रकार की संख्याएँ शामिल होती हैं।
वास्तविक संख्याओं के प्रकार
प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers)
गिनती की संख्याएँ
1, 2, 3, 4, 5, …
पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers)
प्राकृतिक संख्याएँ तथा शून्य
0, 1, 2, 3, 4, …
पूर्णांक (Integers)
धनात्मक, ऋणात्मक तथा शून्य
…, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, …
परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers)
वे संख्याएँ जिन्हें p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ q ≠ 0
उदाहरण:
1/2, 3/4, -5, 0.25
अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers)
वे संख्याएँ जिन्हें p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
इनके दशमलव अनंत तथा अनावर्ती होते हैं।
उदाहरण:
√2, π, √5
√2 = 1.41421356…
π = 3.1415926535…
Note – इन सभी परिमेय और अपरिमेय संख्याओं को मिलाकर वास्तविक संख्याएँ बनती हैं।
संख्या रेखा पर वास्तविक संख्याएँ
चित्र – संख्या रेखा पर वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers on Number Line) का हिंदी डायग्राम।
हर वास्तविक संख्या को संख्या रेखा (Number Line) पर एक निश्चित बिंदु द्वारा दर्शाया जा सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
- वास्तविक संख्याएँ धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकती हैं।
- इन पर जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी क्रियाएँ की जा सकती हैं।
- वास्तविक संख्याएँ गणित और विज्ञान का आधार हैं।
उदाहरण
-7, 0, 5, 3/8, √3, 2.75
दशमलव के प्रकार (Types of Decimals)
दशमलव संख्याएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं:
सांत दशमलव (Terminating Decimal)
वे दशमलव संख्याएँ जिनके दशमलव के बाद अंक सीमित होते हैं अर्थात कुछ अंकों के बाद समाप्त हो जाते हैं।
उदाहरण:
0.5, 2.75, 7.125
अनंत दशमलव (Non-Terminating Decimal)
वे दशमलव संख्याएँ जिनके दशमलव के बाद अंक कभी समाप्त नहीं होते।
उदाहरण:
0.3333…, 1.41421356…
अनंत दशमलव के प्रकार
(क) आवर्ती दशमलव (Recurring Decimal)
वे दशमलव जिनमें एक या अधिक अंक बार-बार दोहरते हैं।
उदाहरण:
0.6666…, 0.121212…
विशेषता:
- अंकों का एक निश्चित क्रम बार-बार आता है।
- ये परिमेय संख्याएँ होती हैं।
(ख) अनावर्ती दशमलव (Non-Recurring Decimal)
वे दशमलव जिनमें अंक किसी निश्चित क्रम में बार-बार नहीं दोहरते।
उदाहरण:
1.41421356…, 3.14159265…
Note –
- आवर्ती अनंत दशमलव → परिमेय संख्या
- अनावर्ती अनंत दशमलव → अपरिमेय संख्या
अभाज्य संख्या (prime number) :
ऐसी संख्या जो केवल 1 और स्वयं से पूरी तरह विभाजित हो, उसे अभाज्य संख्या कहते हैं।
अथवा
अभाज्य संख्या वह होती है जिसके ठीक 2 गुणनखंड हों ।
2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19…
जैसे:
5 → 1 और 5 से कटती है ✅ अथवा इसके दो गुणनखण्ड (1 और 5) हैं
7 → 1 और 7 से कटती है ✅ अथवा इसके दो गुणनखण्ड (1 और 7) हैं
लेकिन:
6 → 1, 2, 3 और 6 से कटती है ❌
इसलिए 6 अभाज्य नहीं है।
Note – 👉 2 सबसे छोटी और एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
Note – 1 prime number (अभाज्य संख्या) नहीं है क्योंकि 1 का सिर्फ एक ही गुणनखंड है: 1
इसलिए 1 अभाज्य संख्या नहीं है।
नोट:
⭐ 2 सबसे छोटी और एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
⭐ 1 अभाज्य संख्या नहीं है।
🔹 भाज्य संख्या (Composite Number)
👉 ऐसी संख्या जो 1, स्वयं और किसी दूसरी संख्या से भी विभाजित हो जाए।
अर्थात
👉 जिसके दो से अधिक गुणनखंड हों।
उदाहरण:
✔ 4 → 1, 2, 4
✔ 6 → 1, 2, 3, 6
✔ 8 → 1, 2, 4, 8
✔ 12 → 1, 2, 3, 4, 6, 12
📖 यूक्लिड विभाजन प्रमेय (Euclid’s Division Lemma)
यूक्लिड विभाजन प्रमेय दो धनात्मक पूर्णांकों के बीच विभाजन की प्रक्रिया को समझाने वाला एक महत्वपूर्ण प्रमेय है। इसकी सहायता से किसी भी दो संख्याओं का HCF (महत्तम समापवर्तक) ज्ञात किया जा सकता है।
सूत्र:
a = bq + r
जहाँ,
- a = भाज्य (Dividend)
- b = भाजक (Divisor)
- q = भागफल (Quotient)
- r = शेषफल (Remainder)
शर्त: 0 ≤ r < b
🧮 HCF एवं LCM (महत्तम समापवर्तक एवं लघुत्तम समापवर्त्य)
HCF (Highest Common Factor) वह सबसे बड़ी संख्या होती है जो दी गई सभी संख्याओं को पूर्णतः विभाजित करती है, जबकि LCM (Least Common Multiple) वह सबसे छोटी संख्या होती है जो दी गई सभी संख्याओं से पूर्णतः विभाजित हो जाती है।
दो संख्याओं के लिए संबंध:
HCF × LCM = पहली संख्या × दूसरी संख्या
या
HCF(a, b) × LCM(a, b) = a × b
जहाँ,
- HCF = महत्तम समापवर्तक
- LCM = लघुत्तम समापवर्त्य
- a = पहली संख्या
- b = दूसरी संख्या
📘 प्रमेय 1.1 (अंकगणित की आधारभूत प्रमेय)
“प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के एक गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है तथा यह गुणनखंडन अभाज्य गुणनखंडों के आने वाले क्रम के बिना अद्वितीय होता है।”
आसान भाषा में स्पष्टीकरण: (इसका मूल विचार यूनानी गणितज्ञ यूक्लिड द्वारा दिया गया था।)
👉 हर भाज्य संख्या को अभाज्य गुणनखंडों (prime factors) के गुणा के रूप में लिखा जा सकता है।
👉 और यह तरीका अद्वितीय होता है।
उदाहरण
12 = 2 × 2 × 3
या
12 = 3 × 2 × 2 ✔
सिर्फ क्रम बदला है।
📘 प्रमेय 1.2
मान लीजिए p एक अभाज्य संख्या है। यदि p, a² को विभाजित करती है, तो p, a को भी विभाजित करेगी।
आसान भाषा में स्पष्टीकरण:
👉 अगर कोई अभाज्य संख्या (prime number) किसी संख्या के वर्ग (square) को विभाजित करती है , तो वह उस संख्या को भी विभाजित करेगी ।
उदाहरण
p = 3
a = 6
a² = 36
✔ 3, 36 को विभाजित करता है
✔ 3, 6 को भी विभाजित करेगा ।
एक लाइन में
यदि p | a², तो p | a
📘 प्रमेय 1.3 : √2 एक अपरिमेय संख्या है
उत्पत्ति
मान लेते हैं कि √2 परिमेय संख्या है।
तब
√2 = a/b
जहाँ
✔ a और b पूर्णांक हैं , b ≠ 0 और a और b सह-अभाज्य हैं
( सह-अभाज्य 👉 यानी दोनों में 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड (common factor) नहीं है )
दोनों पक्षों का वर्ग:
2 = a²/b²
b² से गुणा:
2b² = a²
अर्थात
a², 2 से विभाजित है।
प्रमेय 1.2 के अनुसार
2, a को भी विभाजित करेगी।
अतः
a = 2c
अब रखने पर
2b² = (2c)²
2b² = 4c²
b² = 2c²
अर्थात
b², 2 से विभाजित है।
2, b को भी विभाजित करेगी।
अब
✔ a भी 2 से कटता है
✔ b भी 2 से कटता है
मतलब दोनों में उभयनिष्ठ गुणनखंड 2 है।
लेकिन शुरू में दोनों सह-अभाज्य थे।
यह विरोधाभास है।
इसलिए पहली मान्यता (√2 एक परिमेय संख्या है ) गलत है।
निष्कर्ष
✅ √2 एक अपरिमेय संख्या है।
महत्वपूर्ण तथ्य एवं सूत्र
1. यूक्लिड विभाजन प्रमेय (Euclid’s Division Lemma)
जहाँ,
- a = भाज्य (Dividend)
- b = भाजक (Divisor)
- q = भागफल (Quotient)
- r = शेषफल (Remainder)
शर्त:
0 ≤ r < b
2. दो संख्याओं के HCF एवं LCM का संबंध
HCF × LCM = पहली संख्या × दूसरी संख्या
जहाँ,
- HCF (Highest Common Factor) = महत्तम समापवर्तक
- LCM (Least Common Multiple) = लघुत्तम समापवर्त्य
3. HCF का सूत्र (Prime Factorisation Method)
HCF = सभी उभयनिष्ठ (Common) अभाज्य गुणनखंडों की सबसे छोटी घातों का गुणनफल
जहाँ,
- HCF = महत्तम समापवर्तक
4. LCM का सूत्र (Prime Factorisation Method)
LCM = सभी अभाज्य गुणनखंडों की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल
जहाँ,
- LCM = लघुत्तम समापवर्त्य
5. परिमेय संख्या का मानक रूप (Standard Form of Rational Number)
जहाँ,
- p = पूर्णांक
- q = शून्य के अतिरिक्त पूर्णांक (q ≠ 0)
6. सांत दशमलव (Terminating Decimal)
यदि
q=2m×5n
तो दशमलव सांत (Terminating) होगा।
जहाँ,
q = हर (Denominator)
m, n = 0 या उससे बड़े पूर्णांक (0, 1, 2, 3, …)
उदाहरण
1.
10 = 2¹ × 5¹
अर्थात् हर में केवल 2 और 5 के गुणनखंड हैं, इसलिए दशमलव सांत (Terminating) होगा।
2.
8 = 2³ × 5⁰
अर्थात् हर में केवल 2 का गुणनखंड है, इसलिए दशमलव सांत (Terminating) होगा।
3.
25 = 2⁰ × 5²
अर्थात् हर में केवल 5 का गुणनखंड है, इसलिए दशमलव सांत (Terminating) होगा।
ध्यान दें: किसी परिमेय संख्या p/q में यदि हर (q) के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और/या 5 हों, तो उसका दशमलव प्रसार सांत (Terminating Decimal) होता है।
7. असांत आवर्ती दशमलव (Non-Terminating Recurring Decimal)
यदि हर (q) के अभाज्य गुणनखंडों में 2 तथा 5 के अतिरिक्त कोई अन्य अभाज्य संख्या हो, तो दशमलव असांत आवर्ती (Non-Terminating Recurring) होगा।
❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. यूक्लिड विभाजन प्रमेय (Euclid’s Division Lemma) का कथन लिखिए।
उत्तर: किसी भी दो धनात्मक पूर्णांकों � और � (जहाँ �) के लिए �, जहाँ � होता है।
Q2. अभाज्य गुणनखंड विधि (Prime Factorisation Method) द्वारा HCF कैसे ज्ञात किया जाता है?
उत्तर: सभी उभयनिष्ठ (Common) अभाज्य गुणनखंडों की सबसे छोटी घातों का गुणनफल HCF होता है।
Q3. अभाज्य गुणनखंड विधि द्वारा LCM कैसे ज्ञात किया जाता है?
उत्तर: सभी अभाज्य गुणनखंडों की सबसे बड़ी घातों का गुणनफल LCM होता है।
Q4. दो धनात्मक पूर्णांकों के HCF एवं LCM में क्या संबंध होता है?
उत्तर: दो संख्याओं के लिए HCF × LCM = पहली संख्या × दूसरी संख्या।
Q5. किसी परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार सांत (Terminating) कब होता है?
उत्तर: जब हर के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और/या 5 हों, तब दशमलव प्रसार सांत होता है।
Q6. किसी परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार असांत आवर्ती (Non-terminating Recurring) कब होता है?
उत्तर: जब हर में 2 और 5 के अतिरिक्त कोई अन्य अभाज्य गुणनखंड हो, तब दशमलव प्रसार असांत आवर्ती होता है।
Q7. क्या प्रत्येक परिमेय संख्या एक वास्तविक संख्या होती है?
उत्तर: हाँ, प्रत्येक परिमेय संख्या वास्तविक संख्या होती है, लेकिन प्रत्येक वास्तविक संख्या परिमेय नहीं होती।
Q8. क्या √5 एक परिमेय संख्या है? कारण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: नहीं, √5 एक अपरिमेय संख्या है क्योंकि इसे p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
Q9. क्या दो अभाज्य संख्याओं का HCF सदैव 1 होता है?
उत्तर: हाँ, दो भिन्न अभाज्य संख्याओं का HCF सदैव 1 होता है।
Q10. संख्या रेखा पर वास्तविक संख्याओं को कैसे निरूपित किया जाता है?
उत्तर: परिमेय एवं अपरिमेय दोनों संख्याओं को उपयुक्त ज्यामितीय विधियों द्वारा संख्या रेखा पर निरूपित किया जा सकता है।
🏁 निष्कर्ष
वास्तविक संख्याएँ कक्षा 10 गणित का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें यूक्लिड विभाजन प्रमेय, HCF एवं LCM, परिमेय एवं अपरिमेय संख्याएँ तथा संख्या रेखा जैसी मूल अवधारणाएँ शामिल हैं। यह अध्याय CBSE बोर्ड परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे MCQ, 2 अंक, 3 अंक तथा 5 अंक तक के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। बेहतर तैयारी के लिए NCERT के उदाहरण, अभ्यास प्रश्न तथा बोर्ड PYQs का नियमित अभ्यास अवश्य करें।

