Class 10 Maths Notes

Class 10 Maths Chapter 3: दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म

📘 परिचय –दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म – दैनिक जीवन में अनेक समस्याएँ ऐसी होती हैं जिनमें दो अज्ञात राशियों (Unknown Quantities) का मान ज्ञात करना होता है। जैसे दो वस्तुओं का मूल्य निकालना, किसी व्यक्ति की वर्तमान आयु ज्ञात करना, दूरी और समय के बीच संबंध स्थापित करना अथवा किसी व्यापार में लाभ और हानि का निर्धारण करना।

ऐसी समस्याओं को गणितीय रूप देने के लिए दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म (Pair of Linear Equations in Two Variables) का उपयोग किया जाता है। इस अध्याय में आप सीखेंगे कि किसी वास्तविक जीवन की समस्या को दो रैखिक समीकरणों में कैसे बदला जाता है तथा उनके हल को ग्राफीय विधि, प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method) तथा विलोपन विधि (Elimination Method) द्वारा कैसे प्राप्त किया जाता है। अध्याय की शुरुआत वास्तविक जीवन की स्थितियों से की गई है, जहाँ दो अज्ञात राशियों के आधार पर रैखिक समीकरण बनाए जाते हैं। 

📚 विषय सूची (Table of Contents)

  • भूमिका
  • दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म क्या है
  • रैखिक समीकरण का सामान्य रूप
  • दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म का सामान्य रूप
  • वास्तविक जीवन में उपयोग
  • समीकरण कैसे बनाए जाते हैं?
  • दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म को हल करने की विधियाँग्राफीय विधि (Graphical Method),प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method) ,विलोपन विधि (Elimination Method)

📖 भूमिका

मान लीजिए किसी मेले में एक व्यक्ति विशाल झूले (Giant Wheel) तथा रिंग गेम (Hoopla) दोनों खेलता है। प्रत्येक खेल का शुल्क अलग-अलग है तथा कुल खर्च ज्ञात है। यदि प्रत्येक खेल कितनी बार खेला गया, यह ज्ञात करना हो तो केवल एक समीकरण पर्याप्त नहीं होती।

ऐसी स्थिति में दो अलग-अलग अज्ञात राशियाँ बनती हैं, जिनके लिए दो रैखिक समीकरण बनाए जाते हैं। इन्हीं दोनों समीकरणों को मिलाकर दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म कहा जाता है। अध्याय की भूमिका इसी प्रकार की वास्तविक जीवन समस्या से प्रारम्भ होती है।

📖 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म क्या है?

जब किसी गणितीय समस्या में दो चर (Variables) जैसे x तथा y उपस्थित हों तथा दोनों के लिए अलग-अलग रैखिक समीकरण लिखे जाएँ, तब उन दोनों समीकरणों को मिलाकर दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म कहते हैं।

इनका उद्देश्य दोनों अज्ञात राशियों का ऐसा मान ज्ञात करना होता है जो दोनों समीकरणों को एक साथ संतुष्ट करे।

📖 रैखिक समीकरण का सामान्य रूप

दो चर वाला एक रैखिक समीकरण सामान्यतः निम्न रूप में लिखा जाता है—

ax + by + c = 0

जहाँ,

a, b तथा c नियतांक (Constants) हैं।

a तथा b दोनों एक साथ 0 नहीं हो सकते।

x तथा y चर (Variables) हैं।

📖 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म का सामान्य रूप

यदि दो रैखिक समीकरण हों—

a₁x + b₁y + c₁ = 0

a₂x + b₂y + c₂ = 0

तो इन्हें दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म कहते हैं।

इन दोनों समीकरणों का हल वह मान होगा जो दोनों समीकरणों को एक साथ संतुष्ट करे।

📊 महत्वपूर्ण सारणी

पद अर्थ
चर (Variables) x तथा y
नियतांक (Constants) a, b तथा c
एक रैखिक समीकरण ax + by + c = 0
रैखिक समीकरण युग्म दो रैखिक समीकरणों का समूह
हल (Solution) x एवं y का वह मान जो दोनों समीकरणों को संतुष्ट करे

📖 वास्तविक जीवन में उपयोग

  • दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है, जैसे—
  • दो वस्तुओं का मूल्य ज्ञात करना।
  • आयु सम्बन्धी प्रश्न हल करना।
  • दूरी, समय तथा चाल से जुड़े प्रश्न।
  • व्यापार एवं लाभ-हानि।
  • टिकट, वस्तुओं एवं शुल्क से सम्बन्धित समस्याएँ।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं के गणितीय प्रश्न।

📖 समीकरण कैसे बनाए जाते हैं?

किसी भी शब्द-समस्या (Word Problem) को हल करने के लिए निम्न चरण अपनाए जाते हैं—

चरण 1: अज्ञात राशियों को x तथा y मान लें।

चरण 2: प्रश्न में दिए गए तथ्यों के आधार पर दो रैखिक समीकरण बनाएँ।

चरण 3: दोनों समीकरणों को किसी उपयुक्त विधि द्वारा हल करें।

चरण 4: प्राप्त उत्तर का प्रश्न की शर्तों के अनुसार सत्यापन करें।

📖 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म को हल करने की विधियाँ

इसके अंतर्गत तीन मुख्य Heading रहेंगी:

  1. 📖 ग्राफीय विधि (Graphical Method)
  2. 📖 प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method)
  3. 📖 विलोपन विधि (Elimination Method)

📖 ग्राफीय विधि (Graphical Method)

ग्राफीय विधि (Graphical Method) में प्रत्येक रैखिक समीकरण को एक सीधी रेखा (Straight Line) के रूप में ग्राफ पर दर्शाया जाता है। इन दोनों रेखाओं की स्थिति (Position) देखकर यह निर्धारित किया जाता है कि दिए गए रैखिक समीकरण युग्म का एक हल, कोई हल नहीं या अनंत (अपरिमित) हल होंगे।

दोनों रेखाओं की स्थिति के आधार पर तीन संभावित परिस्थितियाँ बनती हैं। 

📖 स्थिति 1 : दोनों रेखाएँ एक बिंदु पर प्रतिच्छेद (Intersect) करें

यदि दोनों रेखाएँ केवल एक बिंदु पर एक-दूसरे को काटती हैं, तो उस बिंदु के निर्देशांक (Coordinates) ही दोनों समीकरणों का एकमात्र हल (Unique Solution) होते हैं।

इस प्रकार के समीकरण युग्म को संगत (Consistent) तथा स्वतंत्र (Independent) समीकरण युग्म कहते हैं।

उदाहरण

x − 2y = 0

3x + 4y − 20 = 0

इन दोनों रेखाओं का प्रतिच्छेद केवल एक बिंदु पर होता है, इसलिए इनका केवल एक हल प्राप्त होता है। �

📖 स्थिति 2 : दोनों रेखाएँ समान (Coincident) हों

यदि दोनों रेखाएँ पूरी तरह एक-दूसरे के ऊपर स्थित हों, तो उनके प्रत्येक बिंदु समान होते हैं।

इस स्थिति में दोनों समीकरणों के अपरिमित (Infinite) हल होते हैं।

ऐसे समीकरण युग्म को संगत (Consistent) तथा आश्रित (Dependent) समीकरण युग्म कहते हैं।

उदाहरण

2x + 3y − 9 = 0

4x + 6y − 18 = 0

दूसरा समीकरण पहले समीकरण का दोगुना है, इसलिए दोनों रेखाएँ एक ही रेखा को प्रदर्शित करती हैं। 

📖 स्थिति 3 : दोनों रेखाएँ समांतर (Parallel) हों

यदि दोनों रेखाएँ समान ढाल (Slope) वाली हों लेकिन एक-दूसरे को कभी न काटें, तो उनका कोई प्रतिच्छेद बिंदु नहीं होता।

इस स्थिति में दोनों समीकरणों का कोई हल नहीं होता।

ऐसे समीकरण युग्म को असंगत (Inconsistent) समीकरण युग्म कहते हैं।

उदाहरण

x + 2y − 4 = 0

2x + 4y − 12 = 0

दोनों रेखाएँ समांतर हैं, इसलिए इनका कोई साझा बिंदु नहीं है। 

दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म की रेखाओं की तीन संभावित स्थितियों को दर्शाने वाला रंगीन शैक्षिक डायग्राम। इसमें प्रतिच्छेदी (Intersecting), समांतर (Parallel) और संपाती (Coincident) रेखाओं के ग्राफ, प्रत्येक स्थिति में हलों की संख्या तथा गुणांकों के अनुपात के आधार पर हल की प्रकृति को सरल सारणी सहित समझाया गया है।

चित्र – दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म में प्रतिच्छेदी, समांतर और संपाती रेखाओं की तीन स्थितियों का चित्र।

📊 महत्वपूर्ण सारणी

रेखाओं की स्थिति हलों की संख्या समीकरण युग्म का प्रकार
एक बिंदु पर प्रतिच्छेद केवल एक हल संगत एवं स्वतंत्र (Consistent & Independent)
समान (Coincident) अपरिमित हल संगत एवं आश्रित (Consistent & Dependent)
समांतर (Parallel) कोई हल नहीं असंगत (Inconsistent)

📖 गुणांकों के अनुपात द्वारा हल की पहचान

यदि दो रैखिक समीकरण निम्न रूप में हों—

a₁x + b₁y + c₁ = 0

a₂x + b₂y + c₂ = 0

तो इनके गुणांकों के अनुपात से रेखाओं की स्थिति ज्ञात की जा सकती है।

  1. केवल एक हल

यदि

a₁/a₂ ≠ b₁/b₂

तो दोनों रेखाएँ एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करेंगी तथा केवल एक हल होगा।

  1. अपरिमित हल

यदि

a₁/a₂ = b₁/b₂ = c₁/c₂

तो दोनों रेखाएँ समान होंगी तथा अपरिमित हल प्राप्त होंगे।

  1. कोई हल नहीं

यदि

a₁/a₂ = b₁/b₂ ≠ c₁/c₂

तो दोनों रेखाएँ समांतर होंगी तथा कोई हल नहीं होगा। 

📊 महत्वपूर्ण सारणी

गुणांकों का संबंध रेखाओं की स्थिति हल
a₁/a₂ ≠ b₁/b₂ प्रतिच्छेद एक हल
a₁/a₂ = b₁/b₂ = c₁/c₂ समान (Coincident) अपरिमित हल
a₁/a₂ = b₁/b₂ ≠ c₁/c₂ समांतर कोई हल नहीं

 

📖 ग्राफीय विधि के लाभ

  • किसी रैखिक समीकरण युग्म का हल दृश्य रूप में समझने में सहायता मिलती है।
  • रेखाओं की स्थिति देखकर हलों की संख्या तुरंत ज्ञात की जा सकती है।
  • यह विधि गणितीय अवधारणाओं को सरल एवं स्पष्ट बनाती है।
  • विद्यालयी परीक्षाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में इस विधि का विशेष महत्व है।

📖 ग्राफीय विधि की सीमाएँ

  • यदि प्रतिच्छेद बिंदु भिन्नात्मक (Fractional) हो, तो सही मान पढ़ना कठिन हो सकता है।
  • बड़े या दशमलव मानों के लिए ग्राफ बनाना समय लेने वाला होता है।
  • सटीक उत्तर प्राप्त करने के लिए बीजगणितीय विधियाँ अधिक उपयुक्त होती हैं।

📖 प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method)

प्रतिस्थापन विधि (Substitution Method) दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म को हल करने की एक महत्वपूर्ण बीजगणितीय विधि है। इस विधि में पहले किसी एक समीकरण से एक चर का मान दूसरे चर के रूप में व्यक्त किया जाता है। इसके बाद इस मान को दूसरे समीकरण में रखकर (प्रतिस्थापित करके) एक चर का मान ज्ञात किया जाता है। अंत में प्राप्त मान को किसी एक मूल समीकरण में रखकर दूसरे चर का मान प्राप्त किया जाता है। यह विधि विशेष रूप से तब सरल होती है जब किसी समीकरण से किसी एक चर का मान आसानी से निकाला जा सके। 

📖 प्रतिस्थापन विधि के चरण

प्रतिस्थापन विधि द्वारा किसी रैखिक समीकरण युग्म को हल करने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं—

चरण 1

दोनों समीकरणों में से किसी एक समीकरण का चयन करें तथा उसमें से किसी एक चर (x या y) का मान दूसरे चर के रूप में व्यक्त करें।

चरण 2

प्राप्त मान को दूसरे समीकरण में प्रतिस्थापित (Substitute) करें।

अब समीकरण केवल एक चर में रह जाएगा, जिसे आसानी से हल किया जा सकता है।

चरण 3

प्राप्त चर का मान पहले चरण में प्राप्त समीकरण में रखकर दूसरे चर का मान ज्ञात करें।

चरण 4

प्राप्त x तथा y के मानों को दोनों मूल समीकरणों में रखकर सत्यापन (Verification) करें।

📖 उदाहरण

निम्न रैखिक समीकरण युग्म को प्रतिस्थापन विधि द्वारा हल कीजिए—

7x − 15y = 2

x + 2y = 3

समाधान

चरण 1

दूसरे समीकरण से

x + 2y = 3

अतः

x = 3 − 2y

चरण 2

अब x का यह मान पहले समीकरण में रखें—

7(3 − 2y) − 15y = 2

21 − 14y − 15y = 2

21 − 29y = 2

−29y = −19

y = 19/29

चरण 3

अब y का मान

x = 3 − 2y

में रखें—

x = 3 − 2 × (19/29)

x = 49/29

उत्तर

x = 49/29

y = 19/29 

📖 प्रतिस्थापन विधि का सत्यापन

प्राप्त मानों को दोनों मूल समीकरणों में रखने पर दोनों समीकरण संतुष्ट होते हैं।

इसलिए

x = 49/29 तथा y = 19/29

दिए गए रैखिक समीकरण युग्म का सही हल है। 

📖 प्रतिस्थापन विधि कब उपयोग करें?

  • प्रतिस्थापन विधि का उपयोग निम्न परिस्थितियों में अधिक उपयुक्त होता है—
  • जब किसी समीकरण से x या y का मान आसानी से निकाला जा सके।
  • जब किसी चर का गुणांक 1 या −1 हो।
  • जब समीकरण सरल हों।
  • जब भिन्नात्मक गणनाएँ कम हों।

📖 प्रतिस्थापन विधि के लाभ

  • समझने में सरल एवं व्यवस्थित विधि है।
  • छोटे एवं सरल प्रश्नों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
  • बोर्ड परीक्षाओं में सर्वाधिक प्रयुक्त विधियों में से एक है।
  • किसी भी रैखिक समीकरण युग्म पर लागू की जा सकती है।

📖 प्रतिस्थापन विधि की सीमाएँ

  • यदि गुणांक बड़े हों तो गणना लंबी हो सकती है।
  • भिन्न (Fractions) आने पर हल करना कठिन हो सकता है।
  • जटिल प्रश्नों में विलोपन विधि अधिक सुविधाजनक रहती है।

📊 महत्वपूर्ण सारणी

चरण कार्य
1 एक समीकरण से किसी एक चर का मान ज्ञात करें।
2 प्राप्त मान को दूसरे समीकरण में प्रतिस्थापित करें।
3 एक चर का मान ज्ञात करें।
4 दूसरे चर का मान ज्ञात करें।
5 दोनों मानों का सत्यापन करें।

📖 विलोपन विधि (Elimination Method)

विलोपन विधि (Elimination Method) दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म को हल करने की सबसे प्रभावी बीजगणितीय विधियों में से एक है। इस विधि में किसी एक चर (x या y) को दोनों समीकरणों से समाप्त (Eliminate) किया जाता है, जिससे केवल एक चर वाला समीकरण प्राप्त होता है। इसके बाद उस चर का मान ज्ञात करके दूसरे चर का मान आसानी से निकाला जाता है। यह विधि विशेष रूप से तब अधिक उपयोगी होती है जब दोनों समीकरणों में किसी एक चर के गुणांकों को समान या विपरीत बनाना आसान हो। 

📖 विलोपन विधि के चरण

विलोपन विधि द्वारा किसी रैखिक समीकरण युग्म को हल करने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं—

चरण 1

दोनों समीकरणों में किसी एक चर (x या y) के गुणांकों को समान अथवा विपरीत बनाने के लिए आवश्यक संख्या से गुणा करें।

चरण 2

यदि गुणांक समान हों, तो दोनों समीकरणों को घटाएँ। यदि गुणांक विपरीत हों, तो दोनों समीकरणों को जोड़ें।

इससे एक चर समाप्त (Eliminate) हो जाएगा।

चरण 3

प्राप्त एक चर वाले समीकरण को हल करके उसका मान ज्ञात करें।

चरण 4

प्राप्त मान को किसी एक मूल समीकरण में रखकर दूसरे चर का मान ज्ञात करें।

चरण 5

प्राप्त x तथा y के मानों का दोनों मूल समीकरणों में सत्यापन करें।

📖 उदाहरण

निम्न रैखिक समीकरण युग्म को विलोपन विधि द्वारा हल कीजिए—

9x − 4y = 2000

7x − 3y = 2000

समाधान

चरण 1

पहले समीकरण को 3 से तथा दूसरे समीकरण को 4 से गुणा करें।

प्राप्त समीकरण—

27x − 12y = 6000

28x − 12y = 8000

चरण 2

अब पहले समीकरण को दूसरे समीकरण से घटाएँ—

(28x − 12y) − (27x − 12y) = 8000 − 6000

x = 2000

चरण 3

अब x = 2000 को पहले समीकरण में रखें—

9(2000) − 4y = 2000

18000 − 4y = 2000

4y = 16000

y = 4000

उत्तर

x = 2000

y = 4000 

📖 विलोपन विधि का सत्यापन

प्राप्त मानों को दोनों मूल समीकरणों में रखने पर दोनों समीकरण संतुष्ट होते हैं।

अतः

x = 2000 तथा y = 4000

दिए गए रैखिक समीकरण युग्म का सही हल है। 

📖 विलोपन विधि कब उपयोग करें?

  • विलोपन विधि निम्न परिस्थितियों में अधिक उपयुक्त होती है—
  • जब किसी एक चर के गुणांक समान या आसानी से समान बनाए जा सकते हों।
  • जब गुणांक बड़े हों।
  • जब प्रतिस्थापन विधि में अधिक भिन्न (Fractions) बनने की संभावना हो।
  • बोर्ड परीक्षा में लंबे प्रश्नों को शीघ्र हल करने के लिए।

📖 विलोपन विधि के लाभ

  • बड़े गुणांकों वाले प्रश्नों में भी प्रभावी।
  • अधिकांश प्रश्नों का हल शीघ्र प्राप्त किया जा सकता है।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में सर्वाधिक उपयोग की जाने वाली विधियों में से एक।
  • व्यवस्थित एवं सटीक उत्तर प्राप्त होते हैं।

📖 विलोपन विधि की सीमाएँ

  • कभी-कभी गुणांकों को समान बनाने के लिए बड़े गुणन की आवश्यकता होती है।
  • यदि सावधानी न रखी जाए तो जोड़-घटाव में त्रुटि हो सकती है।
  • छोटे प्रश्नों में प्रतिस्थापन विधि अधिक सरल हो सकती है।

📖 प्रतिस्थापन विधि और विलोपन विधि में अंतर

आधार प्रतिस्थापन विधि विलोपन विधि
मुख्य प्रक्रिया एक चर का मान दूसरे चर के रूप में लिखकर प्रतिस्थापित किया जाता है। एक चर को जोड़ या घटाकर समाप्त किया जाता है।
उपयुक्त स्थिति जब किसी चर का गुणांक 1 या −1 हो। जब गुणांकों को आसानी से समान बनाया जा सके।
गणना कभी-कभी भिन्न अधिक बनते हैं। अधिकांश प्रश्नों में सरल एवं तेज।
उपयोग सरल प्रश्नों में अधिक उपयोगी। बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिक उपयोगी।

✅ महत्वपूर्ण तथ्य

✅ दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म में दो रैखिक समीकरण तथा दो चर (x और y) होते हैं।

✅ किसी रैखिक समीकरण का सामान्य रूप ax + by + c = 0 होता है, जहाँ a और b दोनों एक साथ शून्य नहीं हो सकते।

✅ दो रैखिक समीकरणों का समान हल ही रैखिक समीकरण युग्म का हल कहलाता है।

✅ ग्राफीय विधि में प्रत्येक रैखिक समीकरण एक सीधी रेखा को प्रदर्शित करता है।

✅ यदि दोनों रेखाएँ एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो केवल एक अद्वितीय (Unique) हल प्राप्त होता है।

✅ यदि दोनों रेखाएँ संपाती (Coincident) हों, तो अपरिमित (Infinite) हल प्राप्त होते हैं।

✅ यदि दोनों रेखाएँ समांतर (Parallel) हों, तो कोई हल नहीं होता।

✅ यदि a₁/a₂ ≠ b₁/b₂, तो समीकरण युग्म का एकमात्र हल होता है।

✅ यदि a₁/a₂ = b₁/b₂ = c₁/c₂, तो समीकरण युग्म के अपरिमित हल होते हैं।

✅ यदि a₁/a₂ = b₁/b₂ ≠ c₁/c₂, तो समीकरण युग्म का कोई हल नहीं होता।

✅ प्रतिस्थापन विधि में एक चर का मान दूसरे चर के रूप में लिखकर दूसरे समीकरण में रखा जाता है।

✅ विलोपन विधि में किसी एक चर को जोड़ या घटाकर समाप्त किया जाता है।

✅ प्रतिस्थापन तथा विलोपन दोनों बीजगणितीय विधियाँ हैं।

✅ ग्राफीय विधि अवधारणा को समझने के लिए उपयोगी है, जबकि बीजगणितीय विधियाँ अधिक सटीक परिणाम देती हैं।

✅ बोर्ड परीक्षाओं में प्रतिस्थापन तथा विलोपन दोनों विधियों से प्रश्न पूछे जाते हैं।

📝 सभी महत्वपूर्ण सूत्र

  1. रैखिक समीकरण का सामान्य रूप

ax + by + c = 0

  1. दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म का सामान्य रूप

a₁x + b₁y + c₁ = 0

a₂x + b₂y + c₂ = 0

  1. केवल एक हल की शर्त

a₁/a₂ ≠ b₁/b₂

  1. अपरिमित हल की शर्त

a₁/a₂ = b₁/b₂ = c₁/c₂

  1. कोई हल नहीं होने की शर्त

a₁/a₂ = b₁/b₂ ≠ c₁/c₂

❓अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म क्या होता है?

दो ऐसे रैखिक समीकरण जिनमें समान दो चर (x तथा y) हों, उन्हें दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म कहते हैं।

  1. रैखिक समीकरण का सामान्य रूप क्या है?

रैखिक समीकरण का सामान्य रूप ax + by + c = 0 होता है, जहाँ a और b दोनों एक साथ शून्य नहीं हो सकते।

  1. यदि दो रेखाएँ एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो कितने हल होंगे?

ऐसी स्थिति में समीकरण युग्म का केवल एक अद्वितीय (Unique) हल होता है।

  1. यदि दो रेखाएँ समांतर हों, तो क्या निष्कर्ष होगा?

दोनों रेखाएँ कभी नहीं मिलतीं, इसलिए समीकरण युग्म का कोई हल नहीं होता।

  1. यदि दो रेखाएँ संपाती (Coincident) हों, तो कितने हल होंगे?

दोनों रेखाएँ पूरी तरह एक-दूसरे पर स्थित होती हैं, इसलिए अपरिमित (Infinite) हल प्राप्त होते हैं।

  1. प्रतिस्थापन विधि और विलोपन विधि में क्या अंतर है?

प्रतिस्थापन विधि में एक चर का मान दूसरे चर के रूप में लिखकर दूसरे समीकरण में रखा जाता है, जबकि विलोपन विधि में किसी एक चर को जोड़ या घटाकर समाप्त किया जाता है।

  1. निम्न समीकरण युग्म का हल ज्ञात कीजिए:

x + y = 7

x − y = 3

उत्तर:

दोनों समीकरणों को जोड़ने पर 2x = 10, अतः x = 5 तथा y = 2।

  1. निम्न समीकरण युग्म के हलों की संख्या बताइए:

2x + 4y = 8

4x + 8y = 16

उत्तर:

दोनों समीकरण समान रेखा को प्रदर्शित करते हैं, इसलिए अपरिमित हल होंगे।

  1. निम्न समीकरण युग्म के हलों की संख्या ज्ञात कीजिए:

x + 2y = 5

2x + 4y = 12

उत्तर:

a₁/a₂ = b₁/b₂, लेकिन c₁/c₂ समान नहीं है, इसलिए कोई हल नहीं होगा।

  1. निम्न समीकरण युग्म को विलोपन विधि से हल कीजिए:

2x + y = 9

x + y = 6

उत्तर:

दोनों समीकरणों को घटाने पर x = 3 तथा y = 3 प्राप्त होता है।

🎯 प्रतियोगी परीक्षा टिप्स

  • गुणांकों के अनुपात की तीनों शर्तों को अच्छी तरह याद रखें।
  • ग्राफीय विधि में रेखाओं की तीनों स्थितियों (प्रतिच्छेदी, समांतर एवं संपाती) का अंतर स्पष्ट रखें।
  • प्रतिस्थापन और विलोपन दोनों विधियों का नियमित अभ्यास करें।
  • हल प्राप्त करने के बाद मूल समीकरणों में रखकर सत्यापन अवश्य करें।
  • बोर्ड परीक्षा में चरणबद्ध (Step-wise) समाधान लिखने पर पूरे अंक मिलने की संभावना अधिक रहती है।

🏁 निष्कर्ष

दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म गणित का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है, जो वास्तविक जीवन की अनेक समस्याओं को हल करने में उपयोगी है। इस अध्याय में ग्राफीय विधि, प्रतिस्थापन विधि तथा विलोपन विधि द्वारा समीकरणों का हल ज्ञात करना सिखाया जाता है। साथ ही, गुणांकों के अनुपात के आधार पर यह भी निर्धारित किया जा सकता है कि किसी समीकरण युग्म का एक हल होगा, कोई हल नहीं होगा या अपरिमित हल होंगे। इन अवधारणाओं की अच्छी समझ न केवल CBSE बोर्ड परीक्षा बल्कि JEE Foundation, NTSE, Olympiad तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।

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