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⚗️ प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris): रासायनिक नाम, सूत्र, निर्माण, गुण, उपयोग एवं संपूर्ण जानकारी

परिचय (Introduction) – प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris) एक महत्वपूर्ण अकार्बनिक रासायनिक यौगिक है, जिसका रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (Calcium Sulphate Hemihydrate) है। इसका रासायनिक सूत्र CaSO₄·½H₂O होता है। इसका निर्माण जिप्सम (Gypsum) को लगभग 373 K (100°C) पर गर्म करके किया जाता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस सफेद रंग का महीन चूर्ण होता है, जो जल मिलाने पर शीघ्र कठोर हो जाता है। इसका उपयोग टूटी हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने, मूर्तियाँ, सजावटी वस्तुएँ, मॉडल तथा भवन निर्माण कार्यों में किया जाता है। NCERT, CBSE बोर्ड तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

🧪 प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris) क्या है?

प्लास्टर ऑफ पेरिस कैल्शियम सल्फेट का अर्ध-जलयोजित (Hemihydrate) रूप है। यह जिप्सम को नियंत्रित ताप पर गर्म करने से प्राप्त होता है तथा पानी मिलाने पर पुनः जिप्सम में बदल जाता है।

📌 प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक परिचय

गुण विवरण
सामान्य नाम प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP)
रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट
अंग्रेज़ी नाम Calcium Sulphate Hemihydrate
रासायनिक सूत्र CaSO₄·½H₂O
मोलर द्रव्यमान 145.15 g/mol
रंग सफेद
प्रकृति अकार्बनिक यौगिक
गंध गंधहीन
घुलनशीलता जल में बहुत कम घुलनशील

🔬 प्लास्टर ऑफ पेरिस की खोज

“Plaster of Paris” नाम फ्रांस के Paris शहर के निकट पाए जाने वाले जिप्सम के विशाल भंडार के कारण पड़ा। वहीं इसका बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाता था।

🏭 प्लास्टर ऑफ पेरिस का निर्माण (Preparation of Plaster of Paris)

प्लास्टर ऑफ पेरिस  (Plaster of Paris) की निर्माण प्रक्रिया का हस्तनिर्मित रंगीन लेबलयुक्त आरेख, जिसमें जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को 373 K (100°C) पर गर्म करके प्लास्टर ऑफ पेरिस बनने की रासायनिक अभिक्रिया दर्शाई गई है।

चित्र – प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO₄·½H₂O) की निर्माण प्रक्रिया एवं रासायनिक अभिक्रिया का हस्तनिर्मित रंगीन लेबलयुक्त आरेख

प्लास्टर ऑफ पेरिस का निर्माण जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को लगभग 373 K (100°C) पर गर्म करके किया जाता है।

रासायनिक अभिक्रिया

CaSO₄·2H₂O  →(373 K)  CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O

⚗️ प्लास्टर ऑफ पेरिस के भौतिक गुण (Physical Properties)

  1. सफेद रंग का महीन चूर्ण।
  2. गंधहीन होता है।
  3. जल में बहुत कम घुलनशील।
  4. जल मिलाने पर शीघ्र कठोर हो जाता है।
  5. आसानी से साँचे (Mould) का आकार ले लेता है।

🧪 प्लास्टर ऑफ पेरिस के रासायनिक गुण (Chemical Properties)

  1. जल के साथ अभिक्रिया (Setting of POP)

पानी मिलाने पर प्लास्टर ऑफ पेरिस पुनः जिप्सम में परिवर्तित होकर कठोर हो जाता है।

रासायनिक अभिक्रिया

CaSO₄·½H₂O + 1½H₂O → CaSO₄·2H₂O

  1. अधिक ताप पर अपघटन

अत्यधिक गर्म करने पर प्लास्टर ऑफ पेरिस अपना क्रिस्टलीय जल खोकर निर्जल कैल्शियम सल्फेट बना सकता है।

⭐ प्लास्टर ऑफ पेरिस के उपयोग (Uses of Plaster of Paris)

🩺 1. चिकित्सा क्षेत्र

टूटी हुई हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने में।

🗿 2. मूर्तियाँ एवं सजावटी वस्तुएँ

मूर्तियाँ, खिलौने एवं सजावटी सामग्री बनाने में।

🏛️ 3. भवन निर्माण

दीवारों एवं छत की सजावट तथा फॉल्स सीलिंग बनाने में।

🎨 4. साँचे (Moulds) बनाने में

सिरेमिक, मिट्टी एवं धातु की ढलाई के साँचे तैयार करने में।

🧪 5. प्रयोगशालाओं में

विभिन्न मॉडल एवं शैक्षणिक उपकरण बनाने में।

⭐ प्लास्टर ऑफ पेरिस का महत्व

  • शीघ्र कठोर होने वाला पदार्थ।
  • हल्का एवं मजबूत।
  • आकार देना आसान।
  • चिकित्सा एवं निर्माण उद्योग में अत्यंत उपयोगी।

📌 प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

✅ रासायनिक नाम — कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट

✅ रासायनिक सूत्र — CaSO₄·½H₂O

✅ जिप्सम को 373 K पर गर्म करने से बनता है।

✅ पानी मिलाने पर पुनः जिप्सम बन जाता है।

✅ टूटी हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने में उपयोग।

✅ मूर्तियाँ एवं फॉल्स सीलिंग बनाने में उपयोग।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र क्या है?

CaSO₄·½H₂O

  1. प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम क्या है?

कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट

  1. प्लास्टर ऑफ पेरिस किससे बनाया जाता है?

जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) से।

  1. POP पानी मिलाने पर क्या बनाता है?

जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) बन जाता है।

  1. प्लास्टर ऑफ पेरिस का सबसे प्रमुख उपयोग क्या है?

टूटी हुई हड्डियों पर प्लास्टर चढ़ाने में।

📝 निष्कर्ष

प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO₄·½H₂O) एक अत्यंत महत्वपूर्ण अकार्बनिक रासायनिक यौगिक है, जिसका निर्माण जिप्सम को लगभग 373 K पर गर्म करके किया जाता है। पानी के संपर्क में आने पर यह पुनः जिप्सम बनकर कठोर हो जाता है। इसकी यह विशेषता इसे चिकित्सा, भवन निर्माण, मूर्तिकला एवं विभिन्न औद्योगिक कार्यों में अत्यंत उपयोगी बनाती है। इसकी संरचना, निर्माण, गुण, रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं उपयोग NCERT, CBSE बोर्ड तथा SSC, Railway, UPSC, NEET, CUET एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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