जीव जनन कैसे करते हैं (How Do Organisms Reproduce) : कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 7

📘 परिचय –जीव जनन कैसे करते हैं (How Do Organisms Reproduce)जनन (Reproduction) वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव नई संतति (Offspring) उत्पन्न करते हैं। यह किसी व्यक्तिगत जीव के जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक नहीं है, लेकिन प्रजाति (Species) की निरंतरता के लिए आवश्यक है। जनन के दौरान कोशिका अपने डीएनए की प्रतिलिपि (DNA Copy) बनाती है और नई कोशिका के लिए आवश्यक कोशिकीय संरचना भी तैयार होती है। डीएनए की प्रतिलिपि पूरी तरह समान न होने के कारण संततियों में कुछ विविधताएँ (Variations) उत्पन्न हो सकती हैं। ये विविधताएँ बदलती परिस्थितियों में प्रजाति के अस्तित्व के लिए उपयोगी हो सकती हैं।

📚 विषय सूची

  • 🧬 जनन (Reproduction)
  • 🔬 डीएनए की प्रतिलिपि और विविधता (DNA Copying and Variation)
  • 🔄 अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
  • ✂️ अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियाँ
  • 🌱 कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)
  • 🍄 बीजाणु निर्माण (Spore Formation)
  • ❤️ लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
  • 🌸 पुष्पीय पौधों में लैंगिक जनन
  • 🌼 परागण और निषेचन (Pollination and Fertilisation)
  • 🌱 बीज और फल का निर्माण
  • 👨 मानव में जनन (Reproduction in Human Beings)
  • 👨‍🦱 पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System)
  • 👩‍🦰 महिला जनन तंत्र (Female Reproductive System)
  • 🩸 मासिक धर्म और जनन चक्र (Menstruation and Reproductive Cycle)
  • 🤰 निषेचन, भ्रूण विकास और अपरा (Fertilisation, Embryo Development and Placenta)
  • 🛡️ प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health)
  • 💊 गर्भनिरोधक विधियाँ (Contraceptive Methods)
  • 🦠 यौन संचारित संक्रमण (Sexually Transmitted Infections)
  • ✅ महत्वपूर्ण तथ्य
  • ❓ FAQs
  • 🎯 प्रतियोगी परीक्षा टिप्स
  • 🏁 निष्कर्ष
  • Practice MCQ

🧬 जनन (Reproduction)

जीवों द्वारा अपनी ही प्रजाति के नए जीवों को उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया को जनन (Reproduction) कहते हैं।

🌱 जनन का महत्व

  • जनन से नई संतति का निर्माण होता है।
  • इससे एक पीढ़ी के बाद दूसरी पीढ़ी का निर्माण होता रहता है।
  • किसी प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है।
  • जनन के दौरान आनुवंशिक जानकारी (Genetic Information) अगली पीढ़ी तक पहुँचती है।
  • जनन की प्रक्रिया में डीएनए की प्रतिलिपि (DNA Copying) बनती है।
  • डीएनए की प्रतिलिपि में छोटे अंतर आने से विविधता (Variation) उत्पन्न हो सकती है।
  • विविधता बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में प्रजाति के कुछ सदस्यों के जीवित रहने में सहायता कर सकती है। 

🧬 डीएनए की प्रतिलिपि (DNA Copying)

जनन के दौरान डीएनए में उपस्थित आनुवंशिक जानकारी की नई प्रतिलिपि तैयार होने की प्रक्रिया को डीएनए की प्रतिलिपि (DNA Copying) कहते हैं।

🔬 मुख्य बिंदु

  • डीएनए (DNA) में जीव की आनुवंशिक जानकारी होती है।
  • नई संतति बनने के लिए इस जानकारी की एक नई प्रतिलिपि तैयार होती है।
  • केवल डीएनए की प्रतिलिपि बनना पर्याप्त नहीं है।
  • नई कोशिका को कार्य करने के लिए आवश्यक कोशिकीय संरचना (Cellular Apparatus) भी चाहिए।
  • इसलिए डीएनए की प्रतिलिपि बनने के साथ नई कोशिका के लिए आवश्यक संरचनाएँ भी तैयार होती हैं। 

🔬 डीएनए की प्रतिलिपि में विविधता

डीएनए की प्रतिलिपि बनाने वाली जैविक प्रक्रिया पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं होती। इसलिए नई प्रतिलिपि में मूल डीएनए से कुछ छोटे अंतर आ सकते हैं। यही अंतर विविधता (Variation) का आधार बनते हैं। 

🌿 विविधता के प्रमुख बिंदु

  • नई संतति अपने जनक से पूरी तरह समान होना आवश्यक नहीं है।
  • डीएनए की प्रतिलिपि में होने वाले छोटे अंतर विविधता उत्पन्न करते हैं।
  • प्रत्येक विविधता लाभदायक हो, यह आवश्यक नहीं है।
  • कुछ विविधताएँ जीव के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
  • कुछ विविधताएँ बदलते पर्यावरण में लाभदायक हो सकती हैं।
  • किसी एक जीव के बजाय पूरी जनसंख्या (Population) के स्तर पर विविधता अधिक महत्वपूर्ण होती है।
  • उपयोगी विविधताएँ प्रजाति के अस्तित्व (Survival) में सहायता कर सकती हैं। 

🌍 विविधता का महत्व

  • एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले आनुवंशिक अंतर को विविधता (Variation) कहते हैं।
  • पर्यावरण समय के साथ बदल सकता है। ऐसी स्थिति में किसी जनसंख्या के सभी जीव यदि बिल्कुल समान हों, तो अचानक हुए परिवर्तन का प्रभाव पूरी जनसंख्या पर पड़ सकता है।
  • यदि जनसंख्या में पहले से कुछ विविधताएँ मौजूद हों, तो उनमें से कुछ जीव बदली हुई परिस्थितियों के अनुकूल हो सकते हैं। ऐसे जीव जीवित रहकर आगे जनन कर सकते हैं।
  • इसलिए विविधता किसी प्रजाति के बदलते पर्यावरण में बने रहने की संभावना बढ़ा सकती है। 

🌡️ सरल उदाहरण

यदि किसी जीव की जनसंख्या में कुछ सदस्य अधिक तापमान सहन करने में सक्षम हों और वातावरण का तापमान अचानक बढ़ जाए, तो अन्य सदस्यों की तुलना में ये जीव अधिक आसानी से जीवित रह सकते हैं।

इससे यह समझ आता है कि विविधता का महत्व पूरी प्रजाति के स्तर पर अधिक दिखाई देता है।

🔄 जनन और विविधता का संबंध

इसे संक्षेप में इस क्रम से समझा जा सकता है:

जनन (Reproduction)

डीएनए की प्रतिलिपि (DNA Copying)

छोटे आनुवंशिक अंतर

विविधता (Variation)

बदलती परिस्थितियों में प्रजाति के अस्तित्व में सहायता

डीएनए copying में विविधता उत्पन्न होने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी होती है। अलग-अलग पीढ़ियों में जमा हुई विविधताओं के कारण अलग-अलग जीवों में विविधताओं के अलग संयोजन बन सकते हैं। दो अलग व्यक्तियों की विविधताओं के संयोजन से नई संतति में नए संयोजन उत्पन्न हो सकते हैं। यही विचार आगे लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) के महत्व को समझने में मदद करता है।

🔄 अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)

अलैंगिक प्रजनन (Asexual Reproduction) वह प्रक्रिया है जिसमें बिना नर और मादा युग्मकों (Gametes) के संलयन के एक ही जनक (Single Parent) द्वारा नई संतति उत्पन्न की जाती है। इस प्रकार उत्पन्न संतति आनुवंशिक (Genetically) और शारीरिक रूप से पूरी तरह अपने जनक के समान या क्लोन (Clone) होती है ।

🌱 अलैंगिक जनन की मुख्य बातें

  • इसमें सामान्यतः एक ही जनक भाग लेता है।
  • नई संतति के निर्माण के लिए दो अलग-अलग जनकों की आवश्यकता नहीं होती।
  • इसकी विधि जीव की शरीर संरचना (Body Design) पर निर्भर करती है।
  • एककोशिकीय जीवों में कोशिका विभाजन द्वारा नई संतति बन सकती है।
  • सरल बहुकोशिकीय जीवों में भी अलैंगिक जनन की अलग-अलग विधियाँ पाई जाती हैं। 

✂️ द्विखंडन (Binary Fission)

जब एक कोशिका विभाजित होकर दो नई संतति कोशिकाएँ बनाती है, तो इसे द्विखंडन (Binary Fission) कहते हैं।

🔬 मुख्य बिंदु

  • यह मुख्यतः एककोशिकीय जीवों (Unicellular Organisms) में पाया जाता है।
  • कोशिका विभाजन के बाद एक जीव से दो नई कोशिकाएँ बनती हैं।
  • अमीबा (Amoeba) में विभाजन किसी भी दिशा में हो सकता है।
  • लीशमैनिया (Leishmania) में शरीर की निश्चित संरचना के कारण विभाजन एक निश्चित दिशा में होता है। 

🦠 बहुखंडन (Multiple Fission)

  • जब एक कोशिका एक साथ विभाजित होकर अनेक नई संतति कोशिकाएँ बनाती है, तो इसे बहुखंडन (Multiple Fission) कहते हैं।
  • इसमें एक मूल कोशिका से दो से अधिक संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
  • प्लास्मोडियम (Plasmodium) में बहुखंडन पाया जाता है। 

🧩 विखंडन (Fragmentation)

जब किसी सरल बहुकोशिकीय जीव का शरीर छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है और प्रत्येक टुकड़ा विकसित होकर नया जीव बनाता है, तो इसे विखंडन (Fragmentation) कहते हैं।

उदाहरण – 

🌿 स्पाइरोगाइरा में विखंडन

  • स्पाइरोगाइरा (Spirogyra) में यह विधि पाई जाती है।
  • परिपक्व होने पर इसका तंतु छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट सकता है।
  • प्रत्येक टुकड़ा आगे बढ़कर नया जीव बना सकता है। 

♻️ पुनर्जनन (Regeneration)

शरीर के अलग हुए भाग से नए पूर्ण जीव के विकसित होने की क्षमता को पुनर्जनन (Regeneration) कहते हैं।

🔬 मुख्य बिंदु

  • यह कुछ सरल बहुकोशिकीय जीवों में पाया जाता है।
  • हाइड्रा (Hydra) और प्लैनैरिया (Planaria) इसके उदाहरण हैं।
  • शरीर का भाग अलग होने पर विशेष कोशिकाएँ तेजी से विभाजित होती हैं।
  • आगे ये कोशिकाएँ अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं और ऊतकों में विकसित होती हैं।
  • इस प्रकार अलग हुआ भाग पूर्ण जीव का रूप ले सकता है। 

नोट – पुनरुद्भवन (Regeneration/Reproduction overlap):- यह किसी जीव के क्षतिग्रस्त अंगों या कटे हुए भागों को पुनः प्राप्त करने या सुधारने की प्रक्रिया है। उदाहरण के लिए—छिपकली की कटी हुई पूंछ का दोबारा उगना।

🌱 मुकुलन (Budding)

जब जनक के शरीर पर एक छोटी कली जैसी संरचना बनती है, जो विकसित होकर अलग होने के बाद नया जीव बन जाती है, तो इसे मुकुलन (Budding) कहते हैं।

🦠 हाइड्रा में मुकुलन

जीव जनन कैसे करते हैं (How Do Organisms Reproduce) हाइड्रा में मुकुलन (Budding) द्वारा नए जीव के निर्माण की प्रक्रिया, जो जनन (Reproduction) की अलैंगिक विधि है।

चित्र – हाइड्रा में मुकुलन

  • हाइड्रा (Hydra) में शरीर के एक निश्चित स्थान पर कोशिका विभाजन से एक छोटी कली बनती है।
  • कली धीरे-धीरे विकसित होकर छोटे हाइड्रा का रूप लेती है।
  • पूर्ण विकसित होने पर कली जनक शरीर से अलग हो जाती है।
  • अलग होने के बाद यह स्वतंत्र जीव के रूप में जीवन बिताती है। 

🌿 कायिक प्रवर्धन और बीजाणु निर्माण

🌱 कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)

जब पौधे के जड़, तना या पत्ती जैसे कायिक भागों से नया पौधा विकसित होता है, तो इसे कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) कहते हैं।

🌿 मुख्य बिंदु

  • इसमें नया पौधा बीज के बिना पौधे के कायिक भागों से बनता है।
  • जड़ (Root), तना (Stem) और पत्ती (Leaf) से नए पौधे विकसित हो सकते हैं।
  • यह पौधों में अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) का एक तरीका है।
  • कृषि और बागवानी में इसका उपयोग पौधों की संख्या तेजी से बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • लेयरिंग (Layering) और ग्राफ्टिंग (Grafting) जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।
  • कायिक प्रवर्धन से तैयार पौधे सामान्यतः जनक पौधे के समान आनुवंशिक विशेषताएँ रखते हैं। 

🌾 उदाहरण

गन्ना, गुलाब और अंगूर जैसे पौधों को कायिक प्रवर्धन द्वारा उगाया जा सकता है। कुछ पौधे, जैसे केला, संतरा, गुलाब और चमेली, ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें बीज बनाने की क्षमता कम या समाप्त हो गई हो। 

⭐ कायिक प्रवर्धन के लाभ

  • पौधे बीज से उगाए गए पौधों की तुलना में जल्दी फूल और फल दे सकते हैं।
  • जिन पौधों में बीज बनने की क्षमता नहीं होती, उनका भी प्रवर्धन किया जा सकता है।
  • नए पौधों में जनक पौधे के उपयोगी लक्षण बने रहते हैं।

🍄 बीजाणु निर्माण (Spore Formation)

बीजाणुओं (Spores) द्वारा नए जीव के निर्माण की अलैंगिक जनन विधि को बीजाणु निर्माण (Spore Formation) कहते हैं।

🍞 राइजोपस में बीजाणु निर्माण

जीव जनन कैसे करते हैं (How Do Organisms Reproduce) राइजोपस में बीजाणु निर्माण (Spore Formation) द्वारा नए जीव के निर्माण की प्रक्रिया, जो जनन (Reproduction) की अलैंगिक विधि है।

चित्र – राइजोपस में बीजाणु निर्माण

  • राइजोपस (Rhizopus) एक सामान्य ब्रेड मोल्ड है।
  • इसके धागेनुमा भाग कवकतंतु (Hyphae) कहलाते हैं।
  • कुछ विशेष संरचनाओं के सिरों पर बीजाणुधानी (Sporangium) बनती है।
  • बीजाणुधानी के अंदर बहुत-से बीजाणु (Spores) बनते हैं।
  • बीजाणुओं की बाहरी दीवार उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों से बचाने में सहायता करती है।
  • अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर बीजाणु अंकुरित होकर नया राइजोपस बना सकते हैं।

🛡️ बीजाणु निर्माण का लाभ

बीजाणुओं की सुरक्षात्मक संरचना उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में सुरक्षित रहने में सहायता करती है। अनुकूल वातावरण मिलने पर वे अंकुरित होकर नए जीव का निर्माण कर सकते हैं।

🔄 अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियाँ की तुलनात्मक सारणी 

विधि मुख्य विशेषता उदाहरण
✂️ द्विखंडन (Binary Fission) एक जीव से दो संततियाँ अमीबा
🦠 बहुखंडन (Multiple Fission) एक जीव से अनेक संततियाँ प्लास्मोडियम
🧩 विखंडन (Fragmentation) शरीर के टुकड़ों से नए जीव स्पाइरोगाइरा
♻️ पुनर्जनन (Regeneration) शरीर के भाग से नया जीव प्लैनैरिया
🌱 मुकुलन (Budding) कली से नया जीव हाइड्रा
🍃 कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) जड़, तना या पत्ती से नया पौधा गुलाब, गन्ना
🍄 बीजाणु निर्माण (Spore Formation) बीजाणुओं से नया जीव राइजोपस

ये सभी विधियाँ अलैंगिक जनन के अंतर्गत आती हैं क्योंकि इनमें नई पीढ़ी के निर्माण के लिए एक ही जनक पर्याप्त होता है।

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction) वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा दो जनकों द्वारा उत्पन्न युग्मकों (Gametes) के संलयन से नए जीव की उत्पत्ति होती है। 

लैंगिक प्रजनन की मुख्य विशेषताएं

  • दो जनकों की आवश्यकता: इसमें नर और मादा दोनों भाग लेते हैं।
  • युग्मक निर्माण: नर जनन अंग शुक्राणु (Sperm) और मादा जनन अंग अंडाणु (Ovum) बनाते हैं।
  • निषेचन (Fertilization): नर और मादा युग्मक के मिलने की क्रिया को निषेचन कहते हैं, जिससे युग्मनज (Zygote) बनता है।
  • आनुवंशिक विविधता: इसमें माता-पिता दोनों के गुणसूत्र मिलते हैं, जिससे संतति आनुवंशिक रूप से भिन्न होती है।
  • उदाहरण – पुष्पीय पौधे और मानव

🌸 पुष्पीय पौधों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Flowering Plants)

पुष्पीय पौधों में जनन से संबंधित प्रमुख अंग फूल (Flower) में पाए जाते हैं। फूल में पुंकेसर (Stamen) और स्त्रीकेसर (Pistil) जनन में मुख्य भूमिका निभाते हैं। 

🌼 फूल के जनन भाग

फूल के वे भाग जो जनन की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेते हैं, जनन भाग (Reproductive Parts) कहलाते हैं।

  • पुंकेसर (Stamen) — नर जनन भाग।
  • स्त्रीकेसर (Pistil) — मादा जनन भाग।

🌺 फूल के प्रकार

  • एकलिंगी फूल (Unisexual Flower): जिसमें केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर उपस्थित होता है।

              उदाहरण: पपीता (Papaya), तरबूज (Watermelon)

  • द्विलिंगी फूल (Bisexual Flower): जिसमें पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों उपस्थित होते हैं।

             उदाहरण: गुड़हल (Hibiscus), सरसों (Mustard) 

🌾 पुंकेसर (Stamen)

फूल के नर जनन भाग को पुंकेसर (Stamen) कहते हैं।

🔬 मुख्य बिंदु

  • पुंकेसर फूल का नर जनन भाग है।
  • यह परागकण (Pollen Grains) बनाता है।
  • परागकण सामान्यतः पीले रंग के दिखाई दे सकते हैं।
  • परागकण नर जनन कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

🌸 स्त्रीकेसर (Pistil)

  • फूल के मादा जनन भाग को स्त्रीकेसर (Pistil) कहते हैं।
  • स्त्रीकेसर सामान्यतः फूल के मध्य भाग में स्थित होता है।
  • यह मादा जनन भाग है।

इसके प्रमुख भाग होते हैं:

  • वर्तिकाग्र (Stigma)
  • वर्तिका (Style)
  • अंडाशय (Ovary) – इसके के अंदर बीजांड (Ovules) पाए जाते हैं।

जीव जनन कैसे करते हैं (How Do Organisms Reproduce) पादप विज्ञान (Botany) में पुष्प की संरचना का शैक्षिक चित्र, जिसमें बाह्यदल, दल, पुंकेसर, तंतु, परागकोष, परागकण, वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय और बीजांड को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

चित्र – पुष्प की संरचना का नामांकित चित्र

🐝 परागण (Pollination)

परागकणों के परागकोष से स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण (Pollination) कहते हैं।

🌼 परागण के बाद

  • परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं।
  • इसके बाद परागकण से संबंधित संरचनाएँ मादा जनन भाग की ओर आगे बढ़ती हैं।
  • आगे चलकर निषेचन (Fertilisation) की प्रक्रिया होती है।
  • निषेचन के बाद नई संतति के विकास की प्रक्रिया शुरू होती है। 

विशेष बिन्दू – परागण और निषेचन एक ही प्रक्रिया नहीं हैं। परागण में परागकण का वर्तिकाग्र तक पहुँचना शामिल है, जबकि निषेचन में नर और मादा जनन कोशिकाओं का संलयन होता है।

🧬 निषेचन (Fertilisation)

  • नर और मादा जनन कोशिकाओं के संलयन से युग्मनज (Zygote) बनने की प्रक्रिया को निषेचन (Fertilisation) कहते हैं।
  • निषेचन के बाद बनने वाला युग्मनज (Zygote) आगे विभाजित होकर नए पौधे के विकास की शुरुआत करता है।

🌸 पुष्पीय पौधों में निषेचन के बाद की प्रक्रिया

पुष्पीय पौधों में परागण के बाद परागकण से एक परागनलिका (Pollen Tube) विकसित होती है। यह वर्तिका से होकर अंडाशय तक पहुँचती है, जहाँ बीजांड स्थित होते हैं। 

🌱 परागनलिका का विकास

🔬 मुख्य बिंदु

  • परागकण उपयुक्त वर्तिकाग्र (Stigma) पर पहुँचने के बाद अंकुरित होता है।
  • परागकण से एक नलिका निकलती है, जिसे परागनलिका (Pollen Tube) कहते हैं।
  • यह नलिका वर्तिका (Style) से होकर अंडाशय की ओर बढ़ती है।
  • परागनलिका बीजांड तक पहुँचती है।
  • नर जनन कोशिका बीजांड में उपस्थित मादा जनन कोशिका तक पहुँचती है। 

🧬 युग्मनज का निर्माण

नर जनन कोशिका और मादा जनन कोशिका के संलयन से युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है । 

  • अंडाशय में बीजांड (Ovule) पाए जाते हैं।
  • प्रत्येक बीजांड में अंड कोशिका (Egg Cell) उपस्थित होती है।
  • परागकण से बनी नर जनन कोशिका बीजांड में उपस्थित मादा जनन कोशिका तक पहुँचती है।
  • दोनों जनन कोशिकाओं के संलयन से युग्मनज (Zygote) बनता है।
  • युग्मनज आगे विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) का निर्माण करता है। 

🌱 निषेचन के बाद बीज और फल का निर्माण

निषेचन के बाद फूल के विभिन्न भागों में परिवर्तन होने लगते हैं।

🌰 बीज का निर्माण

  • निषेचन के बाद युग्मनज कई बार विभाजित होता है।
  • इससे बीजांड के अंदर भ्रूण (Embryo) विकसित होता है।
  • बीजांड के चारों ओर सुरक्षात्मक आवरण विकसित होता है।
  • धीरे-धीरे बीजांड बीज (Seed) में परिवर्तित हो जाता है।
  • बीज में भविष्य के पौधे का भ्रूण मौजूद रहता है। 

🍎 फल का निर्माण

  • निषेचन के बाद अंडाशय (Ovary) तेजी से विकसित होता है।
  • परिपक्व होने पर अंडाशय फल (Fruit) में बदल जाता है।
  • फूल की पंखुड़ियाँ, बाह्यदल, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र जैसे भाग सामान्यतः सूखकर गिर सकते हैं। 

🌱 बीज का अंकुरण (Seed Germination)

उपयुक्त परिस्थितियों में बीज से नए पौधे के विकसित होने की प्रक्रिया को बीज का अंकुरण (Seed Germination) कहते हैं।

🌿 अंकुरण के लिए आवश्यक बातें

  • बीज को उचित जल (Water) मिलना चाहिए।
  • उपयुक्त तापमान (Temperature) आवश्यक होता है।
  • बीज को उचित परिस्थितियाँ मिलने पर भ्रूण सक्रिय होकर विकास शुरू करता है।
  • धीरे-धीरे बीज से नया पौधा (Seedling) विकसित होता है। 

🔄 पुष्पीय पौधों में लैंगिक जनन का क्रम

परागण (Pollination)

परागकण का अंकुरण

परागनलिका का निर्माण

निषेचन (Fertilisation)

युग्मनज (Zygote)

भ्रूण (Embryo)

बीज (Seed)

फल (Fruit)

अंकुरण (Germination)

नया पौधा

👨 मानव में जनन (Reproduction in Human Beings)

मनुष्य में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) होता है। इसके लिए नर और मादा जनन कोशिकाओं का निर्माण, उनका मिलन तथा भ्रूण का विकास आवश्यक है। मानव जनन तंत्र में ऐसे विशेष अंग होते हैं जो जनन कोशिकाओं के निर्माण, उनके परिवहन और निषेचन में सहायता करते हैं। 

🌱 यौवनारंभ और लैंगिक परिपक्वता (Puberty and Sexual Maturation)

वह अवस्था जिसमें शरीर में ऐसे परिवर्तन होने लगते हैं जो उसे जनन के लिए सक्षम बनाते हैं, यौवनारंभ (Puberty) कहलाती है।

🔹 प्रमुख परिवर्तन

  • लड़कों में चेहरे पर बालों का आना और शरीर में अन्य शारीरिक परिवर्तन दिखाई देते हैं।
  • लड़कियों में स्तनों का विकास और अन्य शारीरिक परिवर्तन होते हैं।
  • इन परिवर्तनों के साथ जनन अंग भी परिपक्व होने लगते हैं।
  • ये परिवर्तन लैंगिक परिपक्वता (Sexual Maturation) के संकेत हैं। 

👨 पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System)

पुरुष शरीर में जनन कोशिकाओं के निर्माण, उनके परिवहन तथा निषेचन के लिए आवश्यक अंगों के समूह को पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System) कहते हैं।

पुरुष जनन तंत्र के प्रमुख भाग हैं:

  • वृषण (Testes)
  • अंडकोश (Scrotum)
  • शुक्रवाहिका (Vas Deferens)
  • शुक्राशय (Seminal Vesicles)
  • प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland)
  • मूत्रमार्ग (Urethra)
  • लिंग (Penis) 

जीव जनन कैसे करते हैं (How Do Organisms Reproduce) प्रजनन तंत्र (Reproductive System) का लेबलयुक्त चित्र, जिसमें पुरुष प्रजनन तंत्र के प्रमुख अंग—वृषण (Testes), अंडकोश (Scrotum), अधिवृषण (Epididymis), शुक्रवाहिनी (Vas Deferens), वीर्य पुटिका (Seminal Vesicle), प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland), कूपर ग्रंथि (Bulbourethral Gland), मूत्रमार्ग (Urethra) तथा लिंग (Penis)—को बड़े हिंदी लेबल एवं अंग्रेज़ी नाम (ब्रैकेट में) सहित स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

चित्र – पुरुष प्रजनन तंत्र

🧬 वृषण (Testes)

  • वृषण पुरुष जनन कोशिकाएँ अर्थात शुक्राणु (Sperms) बनाते हैं।
  • ये अंडकोश में स्थित होते हैं।
  • शुक्राणु निर्माण के लिए शरीर के सामान्य तापमान से कुछ कम तापमान आवश्यक होता है, इसलिए वृषण शरीर के बाहर अंडकोश में स्थित होते हैं।
  • वृषण टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) हार्मोन का स्राव भी करते हैं।
  • टेस्टोस्टेरोन शुक्राणु निर्माण को नियंत्रित करने के साथ यौवनावस्था में लड़कों में होने वाले कई शारीरिक परिवर्तनों में भूमिका निभाता है। 

🚚 शुक्राणुओं का परिवहन

  • वृषण में बने शुक्राणु शुक्रवाहिका (Vas Deferens) द्वारा आगे ले जाए जाते हैं।
  • शुक्रवाहिका मूत्राशय से आने वाली नली से जुड़ती है।
  • मूत्रमार्ग (Urethra) शुक्राणुओं और मूत्र के लिए सामान्य मार्ग का कार्य करता है।
  • मार्ग में शुक्राशय (Seminal Vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland) अपने स्राव मिलाती हैं।
  • इन स्रावों से ऐसा द्रव बनता है जो शुक्राणुओं के परिवहन को आसान बनाता है और उन्हें पोषण भी प्रदान करता है। 

🔬 शुक्राणु (Sperm)

शुक्राणु (Sperm) नर जनन कोशिका है। इसमें मुख्यतः आनुवंशिक पदार्थ होता है और इसकी लंबी पूँछ इसे मादा जनन कोशिका की ओर गति करने में सहायता करती है। 

👩 महिला जनन तंत्र (Female Reproductive System)

मानव महिला जनन तंत्र में वे अंग शामिल होते हैं जो मादा जनन कोशिका (Female Gamete) के निर्माण, उसके परिवहन तथा निषेचन और भ्रूण के विकास में सहायता करते हैं। इसके प्रमुख अंग अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय और योनि हैं। 

जीव जनन कैसे करते हैं (How Do Organisms Reproduce) प्रजनन तंत्र (Reproductive System) का शैक्षिक चित्र, जिसमें महिला प्रजनन तंत्र के प्रमुख अंग—अंडाशय (Ovaries), अंडवाहिनी (Fallopian Tube), गर्भाशय (Uterus), गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) तथा योनि (Vagina)—को बड़े हिंदी लेबल एवं अंग्रेज़ी नाम (ब्रैकेट में) सहित स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

चित्र – महिला प्रजनन तंत्र

🥚 अंडाशय (Ovaries)

  • महिला जनन तंत्र में अंडाणु (Eggs) बनाने वाले तथा कुछ हार्मोन स्रावित करने वाले अंगों को अंडाशय (Ovaries) कहते हैं।
  • अंडाशय में मादा जनन कोशिकाएँ अर्थात अंडाणु (Eggs) बनते हैं।
  • जन्म के समय अंडाशय में हजारों अपरिपक्व अंडाणु मौजूद होते हैं।
  • यौवनारंभ के बाद इनमें से कुछ अंडाणु परिपक्व होने लगते हैं।
  • सामान्यतः प्रत्येक महीने एक अंडाणु अंडाशय से निकलता है। 

🛤️ अंडवाहिनी (Fallopian Tube)

  • अंडाशय से अंडाणु को गर्भाशय की ओर ले जाने वाली नली को अंडवाहिनी (Fallopian Tube) कहते हैं।
  • अंडाशय से निकलने वाला अंडाणु अंडवाहिनी से होकर गर्भाशय की ओर जाता है।
  • निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी (Fallopian Tube) में होता है। 

🤰 गर्भाशय (Uterus)

  • वह अंग जिसमें निषेचन के बाद भ्रूण का आरोपण और विकास होता है, गर्भाशय (Uterus) कहलाता है।
  • दोनों अंडवाहिनियाँ गर्भाशय से जुड़ती हैं।
  • गर्भाशय की आंतरिक परत भ्रूण के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार करती है।
  • निषेचित अंडाणु से बना भ्रूण गर्भाशय की परत में आरोपित (Implanted) होता है।
  • इसके बाद भ्रूण विकसित होकर आगे भ्रूणीय शिशु (Foetus) का रूप लेता है। 

🚪 योनि (Vagina)

गर्भाशय का निचला भाग गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के माध्यम से योनि से जुड़ता है। योनि महिला जनन तंत्र का बाहरी मार्ग है और जनन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

🧬 निषेचन और भ्रूण का विकास (Fertilisation and Embryonic Development)

नर और मादा जनन कोशिकाओं के संलयन से युग्मनज (Zygote) बनने और उसके आगे विकसित होने की प्रक्रिया को निषेचन एवं भ्रूण विकास (Fertilisation and Embryonic Development) कहते हैं।

🔄 प्रक्रिया

शुक्राणु (Sperm) महिला जनन मार्ग में प्रवेश करते हैं और अंडवाहिनी की ओर आगे बढ़ते हैं। यदि वहाँ अंडाणु उपस्थित हो, तो शुक्राणु और अंडाणु का संलयन होकर युग्मनज (Zygote) बनता है। 

इसके बाद:

युग्मनज

कोशिका विभाजन

भ्रूण (Embryo)

गर्भाशय की परत में आरोपण

भ्रूणीय शिशु (Foetus)

जन्म

भ्रूण गर्भाशय की परत में स्थापित होने के बाद वहीं विकसित होता है और उसके अंग धीरे-धीरे विकसित होते हैं। 

🫀 अपरा (Placenta) और भ्रूण का पोषण

माता और भ्रूण के बीच पोषक पदार्थों, ऑक्सीजन तथा अपशिष्ट पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करने वाले विशेष ऊतक को अपरा (Placenta) कहते हैं।

🌱 अपरा के मुख्य कार्य

  • अपरा गर्भाशय की दीवार में स्थित एक विशेष ऊतक है।
  • इसमें भ्रूण की ओर विल्ली (Villi) जैसी संरचनाएँ होती हैं।
  • यह भ्रूण को माँ के रक्त से ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन प्राप्त करने में सहायता करता है।
  • भ्रूण द्वारा बनाए गए कुछ अपशिष्ट पदार्थ माँ के रक्त में स्थानांतरित किए जा सकते हैं।
  • इस प्रकार भ्रूण को विकास के लिए आवश्यक पदार्थ प्राप्त होते हैं। 

मानव भ्रूण का विकास माँ के शरीर के अंदर लगभग नौ महीने तक होता है। इसके बाद गर्भाशय की मांसपेशियों के लयबद्ध संकुचन से शिशु का जन्म होता है।

🩸 मासिक धर्म (Menstruation)

निषेचन न होने पर गर्भाशय की मोटी आंतरिक परत के रक्त और श्लेष्मा के साथ योनि से बाहर निकलने की मासिक प्रक्रिया को मासिक धर्म (Menstruation) कहते हैं।

🔄 मासिक धर्म की प्रक्रिया

  • अंडाशय से सामान्यतः प्रत्येक महीने एक अंडाणु निकलता है।
  • गर्भाशय की आंतरिक परत संभावित भ्रूण के पोषण के लिए मोटी और रक्त से भरपूर हो जाती है।
  • यदि अंडाणु का निषेचन (Fertilisation) नहीं होता, तो यह अंडाणु लगभग एक दिन तक जीवित रहता है।
  • निषेचन न होने पर गर्भाशय की मोटी परत की आवश्यकता नहीं रहती।
  • यह परत धीरे-धीरे टूटकर रक्त और श्लेष्मा के साथ योनि से बाहर निकलती है।
  • इस मासिक चक्र को मासिक धर्म (Menstruation) कहते हैं।
  • यह सामान्यतः लगभग 2 से 8 दिनों तक चल सकता है। 

🛡️ प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health)

जनन से संबंधित शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को बनाए रखने की स्थिति को प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) कहा जाता है।

यौवनारंभ के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तन धीरे-धीरे विकसित होते हैं। केवल शारीरिक रूप से लैंगिक परिपक्वता आ जाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि व्यक्ति जनन से जुड़ी सभी जिम्मेदारियों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार है। 

🌱 प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख पक्ष

  • जनन तंत्र के स्वास्थ्य का ध्यान रखना।
  • जनन से संबंधित सही वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त करना।
  • गर्भधारण के संबंध में उचित और जिम्मेदार निर्णय लेना।
  • अनचाहे गर्भधारण से बचने के लिए उपयुक्त गर्भनिरोधक विधियों की जानकारी रखना।
  • यौन संचारित संक्रमणों से बचाव के उपायों को समझना।
  • जनन से संबंधित सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक रहना।

🛡️ गर्भनिरोध (Contraception)

  • गर्भधारण को रोकने के लिए अपनाई जाने वाली विधियों को गर्भनिरोध (Contraception) कहते हैं।
  • गर्भनिरोधक विधियों का उपयोग मुख्यतः अनचाहे गर्भधारण से बचने, बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने और परिवार के आकार की योजना बनाने के लिए किया जा सकता है। 

🔹 गर्भनिरोध की प्रमुख विधियाँ

🛡️ 1. यांत्रिक अवरोध विधि (Barrier Method)

  • इसमें ऐसी बाधा का उपयोग किया जाता है जिससे शुक्राणु अंडाणु तक नहीं पहुँच पाते।
  • कंडोम (Condom) इसका प्रमुख उदाहरण है।
  • यह पुरुष या महिला जनन मार्ग में शुक्राणुओं के पहुँचने को रोकने में सहायता करता है।
  • कंडोम कई यौन संचारित संक्रमणों (Sexually Transmitted Infections) के संक्रमण को कुछ हद तक रोकने में भी सहायता करता है। 

💊 2. मौखिक गर्भनिरोधक गोलियाँ (Oral Contraceptive Pills)

  • ये शरीर के हार्मोन संतुलन (Hormonal Balance) को प्रभावित करती हैं।
  • इनके प्रभाव से अंडाणु का निकलना रुक सकता है और निषेचन नहीं होता।
  • इनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
  • हार्मोनल परिवर्तन के कारण इनके कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 

🟠 3. अंतर्गर्भाशयी युक्ति (Intrauterine Device)

  • कॉपर-टी (Copper-T) गर्भाशय में स्थापित की जाने वाली गर्भनिरोधक युक्ति है।
  • यह गर्भधारण को रोकने में सहायता करती है।
  • कुछ युक्तियों के कारण गर्भाशय में जलन या अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 

✂️ 4. शल्य गर्भनिरोधक विधि (Surgical Method)

  • पुरुष में शुक्रवाहिका (Vas Deferens) को अवरुद्ध किया जा सकता है।
  • महिला में अंडवाहिनी (Fallopian Tube) को अवरुद्ध किया जा सकता है।
  • इससे शुक्राणु और अंडाणु के मिलने की संभावना समाप्त हो जाती है।
  • ऐसी प्रक्रियाएँ शल्य विधि द्वारा की जाती हैं। 

🦠 यौन संचारित संक्रमण (Sexually Transmitted Infections)

यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाले संक्रमणों को यौन संचारित संक्रमण (Sexually Transmitted Infections) कहते हैं।

🦠 प्रमुख उदाहरण

  • सूजाक (Gonorrhoea)
  • उपदंश (Syphilis)
  • जननांग मस्से (Genital Warts)
  • एचआईवी संक्रमण और एड्स (HIV-AIDS)

इनमें कुछ संक्रमण जीवाणु (Bacteria) और कुछ विषाणु (Viruses) के कारण होते हैं। 

🛡️ बचाव

कंडोम का सही उपयोग कई यौन संचारित संक्रमणों के संक्रमण के जोखिम को कुछ हद तक कम करने में सहायता कर सकता है। 

⚖️ जिम्मेदार प्रजनन और सामाजिक जागरूकता

प्रजनन से जुड़े निर्णयों में व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक तैयारी महत्वपूर्ण है। गर्भधारण और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी को समझकर निर्णय लेना आवश्यक है। गर्भनिरोधक विधियाँ अनचाहे गर्भधारण से बचने और परिवार नियोजन में सहायता कर सकती हैं। 

साथ ही, भ्रूण के लिंग का चयन करके गर्भपात करना सामाजिक और कानूनी रूप से गंभीर समस्या है। पाठ के अनुसार प्रसवपूर्व लिंग निर्धारण कानून द्वारा प्रतिबंधित है और स्वस्थ समाज के लिए स्त्री-पुरुष अनुपात का संतुलन आवश्यक है। 

🌱 अलैंगिक और लैंगिक जनन में अंतर

आधार अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
जनकों की संख्या एक सामान्यतः दो
जनन कोशिकाएँ नर-मादा जनन कोशिकाओं का संलयन नहीं नर और मादा जनन कोशिकाएँ भाग लेती हैं
प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल अपेक्षाकृत जटिल
विविधता सामान्यतः कम अधिक विविधता उत्पन्न हो सकती है
उदाहरण मुकुलन, द्विखंडन, कायिक प्रवर्धन मानव, पुष्पीय पौधे

👨‍🦱 पुरुष और 👩 महिला जनन तंत्र अन्तर 

आधार पुरुष जनन तंत्र महिला जनन तंत्र
प्रमुख जनन कोशिका शुक्राणु (Sperm) अंडाणु (Egg)
मुख्य जनन अंग वृषण (Testes) अंडाशय (Ovaries)
प्रमुख हार्मोन टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) मुख्यतः एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन
निषेचन में भूमिका शुक्राणु उपलब्ध कराता है अंडाणु उपलब्ध कराता है और भ्रूण के विकास का स्थान प्रदान करता है

🔬 जनन से जुड़े महत्वपूर्ण क्रम

🧬 डीएनए और विविधता

डीएनए की प्रतिलिपि → छोटे आनुवंशिक अंतर → विविधता → बदलती परिस्थितियों में अनुकूलन की संभावना

🌸 पुष्पीय पौधों में

परागण → परागनलिका → निषेचन → युग्मनज → भ्रूण → बीज

👨‍👩‍👧 मानव में

शुक्राणु + अंडाणु → निषेचन → युग्मनज → भ्रूण → गर्भाशय में आरोपण → भ्रूणीय शिशु → जन्म

📝 बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण PYQ — प्रश्नोत्तर

अमीबा में अलैंगिक जनन की कौन-सी विधि होती है

उत्तर: द्विखंडन (Binary Fission)

हाइड्रा में अलैंगिक जनन की कौन-सी विधि पाई जाती है

उत्तर: मुकुलन (Budding)

राइजोपस में अलैंगिक जनन किसके द्वारा होता है

उत्तर: बीजाणु (Spores)

फूल का नर जनन भाग कौन-सा है

उत्तर: पुंकेसर (Stamen)

फूल का मादा जनन भाग कौन-सा है

उत्तर: स्त्रीकेसर (Pistil)

पुंकेसर किसका निर्माण करता है

उत्तर: परागकण (Pollen Grains)

स्त्रीकेसर के अंडाशय में क्या पाए जाते हैं

उत्तर: बीजांड (Ovules)

नर और मादा जनन कोशिकाओं के संलयन की प्रक्रिया क्या कहलाती है

उत्तर: निषेचन (Fertilisation)

निषेचन के बाद बनने वाली पहली कोशिका क्या कहलाती है

उत्तर: युग्मनज (Zygote)

निषेचन के बाद बीजांड किसमें विकसित होता है

उत्तर: बीज (Seed)

निषेचन के बाद अंडाशय किसमें विकसित होता है

उत्तर: फल (Fruit)

मानव में शुक्राणु कहाँ बनते हैं

उत्तर: वृषण (Testes)

मानव में अंडाणु कहाँ बनते हैं

उत्तर: अंडाशय (Ovaries)

मानव में निषेचन सामान्यतः कहाँ होता है

उत्तर: अंडवाहिनी (Fallopian Tube)

निषेचन न होने पर गर्भाशय की परत के बाहर निकलने की प्रक्रिया क्या कहलाती है

उत्तर: मासिक धर्म (Menstruation)

✅ महत्वपूर्ण तथ्य

  • जनन (Reproduction) किसी व्यक्तिगत जीव के जीवित रहने के लिए आवश्यक नहीं है, लेकिन प्रजाति की निरंतरता के लिए आवश्यक है।
  • डीएनए (DNA) में आनुवंशिक सूचना (Genetic Information) होती है।
  • डीएनए की प्रतिलिपि (DNA Copying) में छोटे अंतर विविधता (Variation) उत्पन्न कर सकते हैं।
  • अमीबा में अलैंगिक जनन द्विखंडन (Binary Fission) द्वारा होता है।
  • हाइड्रा में अलैंगिक जनन मुकुलन (Budding) द्वारा होता है।
  • स्पाइरोगाइरा में विखंडन (Fragmentation) द्वारा जनन होता है।
  • राइजोपस में बीजाणु निर्माण (Spore Formation) द्वारा अलैंगिक जनन होता है।
  • कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) में पौधे के कायिक भागों से नए पौधे बनते हैं।
  • लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) में दो जनन कोशिकाओं की आनुवंशिक जानकारी शामिल होती है।
  • अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) द्वारा जनन कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है। 
  • फूल में पुंकेसर (Stamen) नर जनन भाग और स्त्रीकेसर (Pistil) मादा जनन भाग है।
  • पुंकेसर परागकण (Pollen Grains) बनाता है।
  • स्त्रीकेसर के अंडाशय (Ovary) में बीजांड (Ovules) पाए जाते हैं। 
  • निषेचन (Fertilisation) के बाद युग्मनज (Zygote) बनता है।
  • निषेचन के बाद बीजांड बीज (Seed) और अंडाशय फल (Fruit) में विकसित होता है।
  • मानव में शुक्राणु (Sperms) वृषण (Testes) में बनते हैं।
  • वृषण टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) हार्मोन का स्राव करते हैं। 
  • मानव में अंडाणु (Eggs) अंडाशय (Ovaries) में बनते हैं।
  • मानव में निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी (Fallopian Tube) में होता है।
  • निषेचन न होने पर गर्भाशय की परत के बाहर निकलने की प्रक्रिया मासिक धर्म (Menstruation) कहलाती है। 

🏁 निष्कर्ष

जनन (Reproduction) जीवों की प्रजातिगत निरंतरता के लिए आवश्यक जैविक प्रक्रिया है। डीएनए की प्रतिलिपि बनने से आनुवंशिक सूचना अगली पीढ़ी तक पहुँचती है और उत्पन्न विविधताएँ बदलते पर्यावरण में प्रजाति के अस्तित्व में सहायक हो सकती हैं। अलैंगिक जनन में एक जनक से संतति बनती है, जबकि लैंगिक जनन में जनन कोशिकाओं की भागीदारी से अधिक विविधता उत्पन्न हो सकती है। पुष्पीय पौधों और मनुष्यों में लैंगिक जनन की संरचनाएँ अलग होते हुए भी मूल उद्देश्य नई संतति का निर्माण और प्रजाति की निरंतरता बनाए रखना है। प्रजनन स्वास्थ्य, जिम्मेदार गर्भनिरोध और यौन संचारित संक्रमणों से बचाव भी जनन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू हैं।

 

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