Class 10 Science Notes

नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination): कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 6

📘 परिचय – नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination)- जीवित जीव अपने आसपास के वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को पहचानकर उनके अनुसार उचित प्रतिक्रिया करते हैं। किसी भी उद्दीपन (Stimulus) को पहचानना, उसके अनुसार शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों का संचालन करना तथा सभी क्रियाओं में तालमेल बनाए रखना नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) कहलाता है। यह कार्य मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र (Nervous System) एवं हार्मोन (Hormones) द्वारा किया जाता है। पौधों में समन्वय मुख्यतः हार्मोनों एवं वृद्धि संबंधी गतियों द्वारा होता है, जबकि जंतुओं में तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र दोनों मिलकर शरीर का नियंत्रण करते हैं। यह अध्याय NCERT के अनुसार जीवों में उद्दीपन, प्रतिक्रिया, मस्तिष्क, प्रतिवर्ती क्रिया, पादपों में अनुवर्तन तथा हार्मोनों की कार्यप्रणाली को समझाता है। 

📚 विषय सूची

  • जंतुओं में तंत्रिका तंत्र (Animals – Nervous System)
  • प्रतिवर्ती क्रिया एवं प्रतिवर्ती चाप
  • मानव मस्तिष्क (Human Brain)
  • मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु का संरक्षण
  • तंत्रिका ऊतक द्वारा क्रिया का नियंत्रण
  • पादपों में समन्वय (Coordination in Plants)
  • पादपों में अनुवर्तन (Tropic Movements)
  • पादप हार्मोन (Plant Hormones)
  • जंतुओं में हार्मोन (Hormones in Animals)
  • फीडबैक तंत्र (Feedback Mechanism)
  • महत्वपूर्ण हार्मोन एवं उनके कार्य
  • 📊 तुलनात्मक सारणियाँ
  • ✅ महत्वपूर्ण तथ्य
  • ❓FAQs
  • 🎯 प्रतियोगी परीक्षा टिप्स
  • 🏁 निष्कर्ष

जंतुओं में तंत्रिका तंत्र (Animals – Nervous System)

जंतुओं में शरीर की विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण, उद्दीपन को पहचानना तथा अंगों के बीच समन्वय स्थापित करने वाले तंत्र को तंत्रिका तंत्र (Nervous System) कहते हैं।

जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य मुख्य रूप से तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) तथा पेशीय ऊतक (Muscular Tissue) द्वारा किया जाता है। हमारे शरीर के संवेदी अंग (Sense Organs) वातावरण से उद्दीपन (Stimulus) प्राप्त करते हैं। ये उद्दीपन तंत्रिका कोशिकाओं के माध्यम से विद्युत आवेग (Electrical Impulse) के रूप में मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक पहुँचते हैं। वहाँ सूचना का विश्लेषण होने के बाद उपयुक्त प्रतिक्रिया मांसपेशियों या ग्रंथियों तक भेजी जाती है, जिससे शरीर उचित क्रिया करता है। 

तंत्रिका तंत्र के प्रमुख कार्य

  • वातावरण से उद्दीपन (Stimulus) प्राप्त करना।
  • उद्दीपन को विद्युत आवेग (Nerve Impulse) में परिवर्तित करना।
  • मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु तक सूचना पहुँचाना।
  • सूचना का विश्लेषण कर उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करना।
  • शरीर के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय स्थापित करना।

तंत्रिका कोशिका (Neuron)

तंत्रिका कोशिका (Neuron) तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई (Structural and Functional Unit) है।

न्यूरॉन विशेष प्रकार की कोशिका होती है, जो शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) का संचरण करती है। लाखों-करोड़ों न्यूरॉन मिलकर तंत्रिका तंत्र का निर्माण करते हैं। 

नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) तंत्रिका तंत्र (Nervous System) के न्यूरॉन (Neuron) का विस्तृत लेबलयुक्त चित्र, जिसमें डेंड्राइट (Dendrites), कोशिका काय (Cell Body), नाभिक (Nucleus), एक्सॉन (Axon), मायेलिन शीथ (Myelin Sheath), रैनवियर की गाँठ (Node of Ranvier) तथा एक्सॉन टर्मिनल (Axon Terminal) को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। ऊतक (Tissues) अध्याय का न्यूरॉन (Neuron) का लेबलयुक्त चित्र, जिसमें डेंड्राइट्स (Dendrites), कोशिका काय (Cell Body), नाभिक (Nucleus), एक्सॉन (Axon), मायेलिन शीथ (Myelin Sheath), रैनवियर की गाँठ (Node of Ranvier) तथा एक्सॉन टर्मिनल (Axon Terminal) को हिंदी लेबल और अंग्रेज़ी नाम (ब्रैकेट में) सहित दर्शाया गया है।

चित्र – तंत्रिका तंत्र का नामांकित चित्र 

न्यूरॉन के प्रमुख भाग एवं कार्य

  • डेंड्राइट (Dendrite) – उद्दीपन या सूचना को ग्रहण करता है।
  • कोशिका काय (Cell Body/Cyton) – कोशिका का नियंत्रण केंद्र, जिसमें केंद्रक (Nucleus) होता है।
  • ऐक्सॉन (Axon) – तंत्रिका आवेग को कोशिका से आगे पहुँचाता है।
  • ऐक्सॉन सिरा (Axon Terminal) – अगले न्यूरॉन या मांसपेशी / ग्रंथि तक संदेश पहुँचाता है।

तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse)

तंत्रिका कोशिका में प्रवाहित होने वाले विद्युत-रासायनिक संदेश को तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) कहते हैं।

जब कोई उद्दीपन संवेदी ग्राही (Receptor) द्वारा प्राप्त किया जाता है, तो न्यूरॉन के डेंड्राइट में रासायनिक परिवर्तन के कारण विद्युत आवेग उत्पन्न होता है। यह आवेग डेंड्राइट से कोशिका काय, फिर ऐक्सॉन तथा अंत में ऐक्सॉन सिरे तक पहुँचता है। वहाँ से यह अगले न्यूरॉन या प्रभावी अंग (Effector) तक पहुँचकर प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। 

तंत्रिका आवेग का मार्ग

ग्राही (Receptor) → डेंड्राइट → कोशिका काय → ऐक्सॉन → ऐक्सॉन सिरा → अगला न्यूरॉन / मांसपेशी / ग्रंथि

सिनैप्स (Synapse)

दो न्यूरॉनों अथवा एक न्यूरॉन एवं प्रभावी अंग (मांसपेशी/ग्रंथि) के बीच उपस्थित सूक्ष्म अंतराल को सिनैप्स (Synapse) कहते हैं।

सिनैप्स पर एक न्यूरॉन का ऐक्सॉन सिरा दूसरे न्यूरॉन के डेंड्राइट के निकट होता है। यहाँ विद्युत आवेग सीधे नहीं जाता, बल्कि रासायनिक संदेशवाहकों (Neurotransmitters) के माध्यम से अगले न्यूरॉन में नया विद्युत आवेग उत्पन्न होता है। इसी प्रकार सूचना एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुँचती है। 

न्यूरोमस्कुलर जंक्शन (Neuromuscular Junction)

जिस स्थान पर किसी न्यूरॉन का ऐक्सॉन सिरा मांसपेशी कोशिका (Muscle Cell) से जुड़ता है, उसे न्यूरोमस्कुलर जंक्शन (Neuromuscular Junction) कहते हैं।

जब तंत्रिका आवेग ऐक्सॉन सिरे तक पहुँचता है, तब वहाँ से रासायनिक संदेशवाहक निकलते हैं। ये मांसपेशी कोशिका को उद्दीप्त करते हैं, जिससे मांसपेशियाँ संकुचित (Contract) या शिथिल (Relax) होकर आवश्यक गति उत्पन्न करती हैं। इसी प्रकार तंत्रिका तंत्र मांसपेशियों की क्रियाओं का नियंत्रण करता है। 

प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)

किसी उद्दीपन (Stimulus) के प्रति बिना सोचे-समझे, तुरंत एवं स्वतः होने वाली अनैच्छिक प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) कहते हैं।

प्रतिवर्ती क्रिया शरीर की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। जब कोई व्यक्ति गर्म वस्तु को छूता है, तेज प्रकाश आँखों पर पड़ता है या नुकीली वस्तु चुभती है, तब शरीर बिना मस्तिष्क के सोचने की प्रतीक्षा किए तुरंत प्रतिक्रिया करता है। यह क्रिया मुख्यतः मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा नियंत्रित होती है, जबकि सूचना बाद में मस्तिष्क तक भी पहुँचती है। 

प्रतिवर्ती क्रिया के उदाहरण

  • गर्म वस्तु को छूते ही हाथ पीछे खींच लेना।
  • आँख में धूल जाने पर पलकें झपकना।
  • तेज प्रकाश पड़ने पर पुतली का सिकुड़ना।
  • सुई चुभने पर हाथ या पैर तुरंत हटा लेना।
  • भोजन देखकर मुँह में लार आना (कुछ स्थितियों में प्रतिवर्ती प्रतिक्रिया)।

प्रतिवर्ती क्रिया की विशेषताएँ

  • यह बहुत तेज होती है।
  • इसमें सोचने की आवश्यकता नहीं होती।
  • मुख्य नियंत्रण मेरुरज्जु द्वारा होता है।
  • इसका उद्देश्य शरीर को हानि से बचाना होता है।

प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc)

प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान तंत्रिका आवेग जिस निश्चित मार्ग से होकर गुजरता है, उसे प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) कहते हैं।

प्रतिवर्ती चाप शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया देने में सहायता करता है। इसमें सूचना पहले मेरुरज्जु तक पहुँचती है, जहाँ से तुरंत आदेश वापस मांसपेशियों को भेज दिया जाता है। इसी कारण प्रतिक्रिया बहुत शीघ्र होती है। बाद में यह सूचना मस्तिष्क तक भी पहुँचती है, जिससे हमें दर्द या स्पर्श का अनुभव होता है। 

प्रतिवर्ती चाप के प्रमुख भाग एवं कार्य

  • ग्राही (Receptor) – उद्दीपन को ग्रहण करता है।
  • संवेदी न्यूरॉन (Sensory Neuron) – सूचना को मेरुरज्जु तक पहुँचाता है।
  • मेरुरज्जु (Spinal Cord) – सूचना का विश्लेषण कर तुरंत आदेश देता है।
  • गतिवाही न्यूरॉन (Motor Neuron) – आदेश को मांसपेशियों तक पहुँचाता है।
  • प्रभावी अंग (Effector) – मांसपेशी या ग्रंथि, जो प्रतिक्रिया करती है।

नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) तंत्रिका तंत्र (Nervous System) में प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) का शैक्षिक चित्र, जिसमें ग्राही (Receptor), संवेदी न्यूरॉन (Sensory Neuron), मेरुरज्जु (Spinal Cord), संयोजी न्यूरॉन (Interneuron), प्रेरक न्यूरॉन (Motor Neuron) तथा प्रभावी अंग (Effector) के माध्यम से प्रतिवर्ती क्रिया के क्रम को हिंदी लेबल एवं अंग्रेज़ी नाम (ब्रैकेट में) सहित दर्शाया गया है।

चित्र – प्रतिवर्ती चाप का नामांकित चित्र 

प्रतिवर्ती चाप का क्रम

उद्दीपन → ग्राही → संवेदी न्यूरॉन → मेरुरज्जु → गतिवाही न्यूरॉन → मांसपेशी (प्रभावी अंग) → प्रतिक्रिया

मानव मस्तिष्क (Human Brain)

मानव मस्तिष्क (Human Brain) शरीर का मुख्य नियंत्रण एवं समन्वय केंद्र है।

मस्तिष्क शरीर के सभी भागों से सूचना प्राप्त करता है, उनका विश्लेषण करता है तथा आवश्यकतानुसार मांसपेशियों एवं ग्रंथियों को आदेश भेजता है। मस्तिष्क और मेरुरज्जु मिलकर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System – CNS) का निर्माण करते हैं, जबकि मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु से निकलने वाली तंत्रिकाएँ परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System – PNS) बनाती हैं। 

मानव मस्तिष्क के तीन प्रमुख भाग होते हैं—

  • अग्र मस्तिष्क (Fore Brain)
  • मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)
  • पश्च मस्तिष्क (Hind Brain) 

नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अध्याय के लिए मानव मस्तिष्क (Human Brain) का रंगीन NCERT शैली का लेबलयुक्त आरेख। इसमें कपाल (खोपड़ी) [Cranium/Skull], सेरिब्रम (Cerebrum), अग्र मस्तिष्क (Fore-brain), मध्य मस्तिष्क (Mid-brain), पश्च मस्तिष्क (Hind-brain), हाइपोथैलेमस (Hypothalamus), पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland), पोंस (Pons), मेडुला (Medulla), सेरिबेलम (Cerebellum) तथा मेरुरज्जु (Spinal Cord) को बड़े, स्पष्ट हिंदी लेबल एवं अंग्रेज़ी नामों (ब्रैकेट में) के साथ सफेद पृष्ठभूमि पर दर्शाया गया है।

चित्र – मानव मस्तिष्क (Human Brain) का रंगीन लेबलयुक्त आरेख

अग्र मस्तिष्क (Fore Brain)

अग्र मस्तिष्क (Fore Brain) मस्तिष्क का सबसे बड़ा एवं सबसे विकसित भाग है, जो सोचने, सीखने, स्मृति, बुद्धि तथा स्वैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।

यह संवेदी अंगों (आँख, कान, नाक, जीभ एवं त्वचा) से सूचना प्राप्त करता है, उनका विश्लेषण करता है तथा उचित निर्णय लेकर स्वैच्छिक मांसपेशियों को आदेश भेजता है। इसी भाग में भूख, प्यास, भावनाओं एवं स्मृति से संबंधित केंद्र भी पाए जाते हैं। 

अग्र मस्तिष्क के प्रमुख कार्य

  • सोचने एवं तर्क करने का कार्य।
  • स्मरण शक्ति एवं सीखने की क्षमता।
  • दृष्टि, श्रवण, स्वाद, गंध एवं स्पर्श से प्राप्त सूचना का विश्लेषण।
  • स्वैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण।
  • भूख एवं तृप्ति का अनुभव।

मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)

मध्य मस्तिष्क (Mid Brain) अग्र मस्तिष्क एवं पश्च मस्तिष्क के बीच स्थित भाग है, जो कुछ प्रतिवर्ती क्रियाओं तथा अनैच्छिक प्रतिक्रियाओं के समन्वय में सहायता करता है।

यह विशेष रूप से दृष्टि एवं श्रवण से संबंधित प्रतिवर्ती प्रतिक्रियाओं का समन्वय करता है तथा मस्तिष्क के विभिन्न भागों के बीच तंत्रिका आवेगों के संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

पश्च मस्तिष्क (Hind Brain)

पश्च मस्तिष्क (Hind Brain) मस्तिष्क का वह भाग है, जो शरीर की अनेक अनैच्छिक क्रियाओं, संतुलन तथा शारीरिक समन्वय का नियंत्रण करता है।

पश्च मस्तिष्क मुख्यतः सेरिबेलम (Cerebellum), मेडुला (Medulla Oblongata) तथा पोंस (Pons) से मिलकर बना होता है। यह शरीर के संतुलन, मुद्रा (Posture), श्वसन, हृदयगति तथा अन्य अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। 

मेडुला (Medulla Oblongata)

मेडुला (Medulla) पश्च मस्तिष्क का भाग है, जो शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।

यह श्वसन, हृदयगति, रक्तचाप, निगलना, लार का स्राव तथा वमन (Vomiting) जैसी महत्वपूर्ण अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है। इसलिए मेडुला जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक भाग माना जाता है। 

सेरिबेलम (Cerebellum)

सेरिबेलम (Cerebellum) पश्च मस्तिष्क का वह भाग है, जो शरीर का संतुलन, मुद्रा तथा स्वैच्छिक मांसपेशियों की सटीक गतिविधियों का समन्वय करता है।

चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, लिखना, गेंद पकड़ना तथा सीधी रेखा में चलना जैसी क्रियाएँ सेरिबेलम के कारण ही सुचारु रूप से संभव होती हैं। यह शरीर की मुद्रा (Posture), संतुलन (Balance) तथा मांसपेशियों के समन्वय (Muscular Coordination) को बनाए रखता है। 

हाइपोथैलेमस (Hypothalamus)

हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) अग्र मस्तिष्क (Fore Brain) का एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जो शरीर की अनेक अनैच्छिक क्रियाओं तथा अंतःस्रावी तंत्र का नियंत्रण करता है।

हाइपोथैलेमस मस्तिष्क और अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी (Link) का कार्य करता है। यह पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) को नियंत्रित करता है तथा शरीर की आंतरिक परिस्थितियों (Homeostasis) को संतुलित बनाए रखता है।

हाइपोथैलेमस के प्रमुख कार्य

  • शरीर के तापमान (Body Temperature) को नियंत्रित करता है।
  • भूख (Hunger) एवं तृप्ति (Satiety) का नियंत्रण करता है।
  • प्यास (Thirst) का नियंत्रण करता है।
  • नींद एवं जागने के चक्र (Sleep-Wake Cycle) को नियंत्रित करता है।
  • भावनाओं (Emotions) जैसे क्रोध, भय एवं आनंद के नियंत्रण में सहायता करता है।
  • पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) के हार्मोन स्राव को नियंत्रित करता है।
  • शरीर की होमियोस्टैसिस (Homeostasis) अर्थात् आंतरिक संतुलन बनाए रखता है।

मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु का संरक्षण

मस्तिष्क (Brain) एवं मेरुरज्जु (Spinal Cord) अत्यंत कोमल एवं महत्वपूर्ण अंग हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा के लिए शरीर में विशेष संरचनाएँ पाई जाती हैं।

मस्तिष्क शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है, जबकि मेरुरज्जु मस्तिष्क एवं शरीर के अन्य भागों के बीच तंत्रिका आवेगों का आदान-प्रदान करती है। इनकी सुरक्षा के लिए प्रकृति ने मजबूत अस्थियों एवं द्रव (Fluid) की व्यवस्था की है। �

मस्तिष्क का संरक्षण

कपाल (Skull/Cranium) – मस्तिष्क एक मजबूत अस्थिमय कपाल (Skull) के भीतर सुरक्षित रहता है।

मस्तिष्कावरण (Meninges) – मस्तिष्क तीन सुरक्षात्मक झिल्लियों से घिरा रहता है।

  • सबसे बाहरी झिल्ली → दृढ़तानिका (Dura Mater)
  • सबसे मध्य झिल्ली → जालतानिका (Arachnoid Mater)
  • सबसे भीतरी झिल्ली → मृदुतानिका (Pia Mater)

मस्तिष्कमेरु द्रव (Cerebrospinal Fluid – CSF) – यह द्रव मस्तिष्क को झटकों से बचाता है तथा पोषण एवं सुरक्षा प्रदान करता है। 

मेरुरज्जु का संरक्षण

  • मेरुरज्जु (Spinal Cord) रीढ़ की हड्डी (Vertebral Column) के भीतर सुरक्षित रहती है।
  • कशेरुकाएँ (Vertebrae) मेरुरज्जु को बाहरी चोटों से बचाती हैं। 

तंत्रिका ऊतक द्वारा क्रिया का नियंत्रण

तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) शरीर में सूचना का संचार करके विभिन्न अंगों की क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करता है।

जब कोई उद्दीपन (Stimulus) संवेदी अंगों द्वारा ग्रहण किया जाता है, तब तंत्रिका कोशिकाएँ उसे विद्युत आवेग में परिवर्तित करती हैं। यह आवेग मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक पहुँचता है, जहाँ उसका विश्लेषण होता है। इसके बाद आदेश गतिवाही तंत्रिकाओं द्वारा मांसपेशियों या ग्रंथियों तक पहुँचता है, जिससे उपयुक्त प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। 

तंत्रिका ऊतक द्वारा क्रिया का क्रम

उद्दीपन → ग्राही (Receptor) → संवेदी न्यूरॉन → मस्तिष्क/मेरुरज्जु → गतिवाही न्यूरॉन → मांसपेशी/ग्रंथि → प्रतिक्रिया

तंत्रिका ऊतक की विशेषताएँ

  • सूचना का तीव्र गति से संचार करता है।
  • शरीर के विभिन्न अंगों में समन्वय स्थापित करता है।
  • विद्युत आवेग (Electrical Impulse) के माध्यम से संदेश पहुँचाता है।
  • मांसपेशियों एवं ग्रंथियों की क्रियाओं को नियंत्रित करता है।

पादपों में समन्वय (Coordination in Plants)

पौधों में उद्दीपन के प्रति उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने तथा विभिन्न क्रियाओं में तालमेल स्थापित करने की प्रक्रिया को पादपों में समन्वय (Coordination in Plants) कहते हैं।

पौधों में जंतुओं की तरह तंत्रिका तंत्र एवं मांसपेशियाँ नहीं होतीं, फिर भी वे प्रकाश, गुरुत्व, जल, स्पर्श तथा रसायनों जैसे उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। यह समन्वय मुख्यतः पादप हार्मोनों तथा कोशिकाओं में होने वाले परिवर्तनों द्वारा नियंत्रित होता है। 

उद्दीपन के प्रति तात्कालिक प्रतिक्रिया

बिना वृद्धि के, किसी उद्दीपन के प्रति तुरंत होने वाली प्रतिक्रिया को तात्कालिक प्रतिक्रिया (Immediate Response to Stimulus) कहते हैं।

इस प्रकार की गति में पौधे की लंबाई नहीं बढ़ती। कोशिकाओं में जल की मात्रा बदलने के कारण उनका आकार बदलता है, जिससे गति उत्पन्न होती है। इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण छुईमुई (Mimosa pudica) का पौधा है, जिसकी पत्तियाँ स्पर्श करते ही मुड़ जाती हैं। 

प्रमुख उदाहरण

  • छुईमुई (Mimosa) की पत्तियों का स्पर्श करने पर बंद हो जाना।
  • कुछ पुष्पों का दिन या रात में खुलना एवं बंद होना।

वृद्धि के कारण होने वाली गति

जब किसी उद्दीपन के प्रभाव से पौधे के किसी भाग में असमान वृद्धि होती है और उसके कारण दिशा-विशिष्ट गति होती है, तो उसे वृद्धि के कारण होने वाली गति (Movement Due to Growth) कहते हैं।

इस प्रकार की गति धीरे-धीरे होती है तथा यह स्थायी होती है। इसमें पौधे का कोई भाग किसी उद्दीपन की दिशा में या उससे विपरीत दिशा में बढ़ता है। ऐसी गतियों को आगे अनुवर्तन (Tropic Movements) कहा जाता है। 

प्रमुख उदाहरण

  • तना प्रकाश की ओर बढ़ता है।
  • जड़ गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ती है।
  • जड़ जल की ओर बढ़ती है।
  • परागनली बीजांड की ओर बढ़ती है।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • तात्कालिक प्रतिक्रिया में वृद्धि नहीं होती।
  • वृद्धि के कारण होने वाली गति में कोशिकाओं की वृद्धि होती है।

अनुवर्तन (Tropism) इसी प्रकार की वृद्धि-आधारित गति है ।

पादपों में अनुवर्तन (Tropic Movements)

किसी बाह्य उद्दीपन (Stimulus) के प्रभाव से पौधे के किसी भाग की एक निश्चित दिशा में होने वाली वृद्धि-आधारित गति को अनुवर्तन (Tropic Movement) कहते हैं।

पौधों में प्रकाश, गुरुत्व, जल तथा रसायनों जैसे उद्दीपनों के कारण होने वाली दिशात्मक वृद्धि को अनुवर्तन कहते हैं। यदि वृद्धि उद्दीपन की दिशा में होती है तो धनात्मक (Positive Tropism) तथा यदि उद्दीपन से विपरीत दिशा में होती है तो ऋणात्मक (Negative Tropism) कहलाती है। 

अनुवर्तन के प्रमुख प्रकार

  • प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)
  • गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism)
  • जलानुवर्तन (Hydrotropism)
  • रसायनानुवर्तन (Chemotropism)

प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)

प्रकाश के प्रभाव से पौधे के किसी भाग की दिशा-विशिष्ट वृद्धि को प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) कहते हैं।

जब प्रकाश एक ओर से पड़ता है, तब ऑक्सिन (Auxin) हार्मोन तने के छायादार भाग में अधिक एकत्रित हो जाता है। इससे उस भाग की कोशिकाएँ अधिक बढ़ती हैं और तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है। दूसरी ओर, जड़ें सामान्यतः प्रकाश से दूर बढ़ती हैं। 

उदाहरण

  • पौधे का तना प्रकाश की ओर बढ़ना।
  • जड़ का प्रकाश से दूर बढ़ना।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • तना – धनात्मक प्रकाशानुवर्तन
  • जड़ – ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन

गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism)

गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के प्रभाव से पौधों के भागों की दिशा-विशिष्ट वृद्धि को गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) कहते हैं।

गुरुत्वाकर्षण के कारण जड़ें पृथ्वी की ओर बढ़ती हैं, जबकि तना पृथ्वी के विपरीत दिशा में बढ़ता है। इससे पौधे को मिट्टी में दृढ़ता तथा सूर्य का प्रकाश प्राप्त करने में सहायता मिलती है। 

उदाहरण

  • जड़ का नीचे की ओर बढ़ना।
  • तने का ऊपर की ओर बढ़ना।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • जड़ – धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन
  • तना – ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन

जलानुवर्तन (Hydrotropism)

जल (Water) के प्रभाव से पौधे के किसी भाग की दिशा-विशिष्ट वृद्धि को जलानुवर्तन (Hydrotropism) कहते हैं।

जब मिट्टी के किसी भाग में जल की मात्रा अधिक होती है, तब पौधे की जड़ें उसी दिशा में बढ़ती हैं। इससे पौधे को पर्याप्त जल प्राप्त होता है, जो उसकी वृद्धि एवं जीवन के लिए आवश्यक है। 

उदाहरण

  • जड़ों का जल की ओर बढ़ना।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • जड़ें धनात्मक जलानुवर्तन प्रदर्शित करती हैं।

रसायनानुवर्तन (Chemotropism)

रासायनिक पदार्थों (Chemicals) के प्रभाव से पौधे के किसी भाग की दिशा-विशिष्ट वृद्धि को रसायनानुवर्तन (Chemotropism) कहते हैं।

रसायनानुवर्तन में पौधे का भाग किसी विशेष रासायनिक पदार्थ की दिशा में बढ़ता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण निषेचन के समय परागनली (Pollen Tube) का बीजांड (Ovule) की ओर बढ़ना है। 

उदाहरण

  • परागनली का बीजांड की ओर बढ़ना।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • रसायनानुवर्तन पौधों के लैंगिक जनन (Sexual Reproduction) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पादप हार्मोन (Plant Hormones)

पौधों में बनने वाले ऐसे रासायनिक संदेशवाहक, जो पौधों की वृद्धि, विकास तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं, उन्हें पादप हार्मोन (Plant Hormones) कहते हैं।

पादप हार्मोन पौधे के एक भाग में बनते हैं तथा दूसरे भाग में पहुँचकर अपना प्रभाव दिखाते हैं। ये पौधों की वृद्धि, कोशिका विभाजन, पुष्पन, फलन, बीज अंकुरण तथा उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। NCERT में मुख्यतः ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन तथा एब्सिसिक अम्ल का अध्ययन किया गया है। 

ऑक्सिन (Auxin)

ऑक्सिन (Auxin) एक वृद्धि-प्रवर्द्धक (Growth Promoting) पादप हार्मोन है, जो मुख्यतः तने एवं प्ररोह (Shoot) के अग्रभाग में बनता है।

जब प्रकाश एक ओर से पड़ता है, तब ऑक्सिन छायादार भाग की ओर अधिक एकत्रित हो जाता है। इससे उस भाग की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं और तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है। यही प्रक्रिया प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) का कारण बनती है। 

ऑक्सिन के प्रमुख कार्य

  • तने की लंबाई में वृद्धि करना।
  • कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाना।
  • प्रकाशानुवर्तन में सहायता करना।
  • जड़ों एवं तनों की दिशा-विशिष्ट वृद्धि को नियंत्रित करना।
  • कलम (Cutting) में जड़ बनने में सहायता करना।

जिबरेलिन (Gibberellin)

जिबरेलिन (Gibberellin) एक वृद्धि-प्रवर्द्धक पादप हार्मोन है, जो तने की लंबाई बढ़ाने तथा बीजों के अंकुरण में सहायता करता है।

यह हार्मोन पौधों की ऊँचाई बढ़ाने, पुष्पन एवं फलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

जिबरेलिन के प्रमुख कार्य

  • तने की लंबाई बढ़ाना।
  • बीज अंकुरण को प्रोत्साहित करना।
  • पुष्पन एवं फल विकास में सहायता करना।
  • कुछ पौधों में सुप्तावस्था (Dormancy) समाप्त करना।

साइटोकाइनिन (Cytokinin)

साइटोकाइनिन (Cytokinin) वह पादप हार्मोन है, जो कोशिका विभाजन (Cell Division) को प्रोत्साहित करता है।

यह हार्मोन विशेष रूप से उन भागों में अधिक पाया जाता है जहाँ तीव्र कोशिका विभाजन होता है, जैसे— फल, बीज तथा बढ़ते हुए ऊतक। 

साइटोकाइनिन के प्रमुख कार्य

  • कोशिका विभाजन को बढ़ावा देना।
  • नई शाखाओं एवं कलियों के विकास में सहायता करना।
  • पत्तियों के वृद्धावस्था (Senescence) को विलंबित करना।
  • फल एवं बीज के विकास में सहायता करना।

एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA)

एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid) एक वृद्धि-निरोधी (Growth Inhibiting) पादप हार्मोन है, जो पौधों की वृद्धि को नियंत्रित करता है।

जब पौधे को जल की कमी या प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, तब एब्सिसिक अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है। यह पौधे की वृद्धि को धीमा करता है तथा जल की हानि कम करने में सहायता करता है। 

एब्सिसिक अम्ल के प्रमुख कार्य

  • पौधे की वृद्धि को रोकना।
  • रंध्र (Stomata) को बंद करने में सहायता करना।
  • पत्तियों एवं फलों के झड़ने में भूमिका निभाना।
  • बीजों की सुप्तावस्था (Dormancy) बनाए रखना।
  • प्रतिकूल परिस्थितियों में पौधे की रक्षा करना।

जंतुओं में हार्मोन (Hormones in Animals)

जंतुओं के अंतःस्रावी (Endocrine) ग्रंथियों द्वारा स्रावित ऐसे रासायनिक संदेशवाहक, जो शरीर की विभिन्न जैविक क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं, उन्हें हार्मोन (Hormones) कहते हैं।

हार्मोन सीधे रक्त (Blood) में स्रावित होते हैं और रक्त के माध्यम से लक्ष्य अंग (Target Organ) तक पहुँचकर अपना प्रभाव दिखाते हैं। ये शरीर की वृद्धि, विकास, उपापचय (Metabolism), प्रजनन, रक्त शर्करा, जल संतुलन तथा तनाव की स्थिति में शरीर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन का प्रभाव सामान्यतः तंत्रिका तंत्र की तुलना में धीमा, लेकिन अधिक समय तक बना रहता है। 

अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands)

वे ग्रंथियाँ जिनमें नलिकाएँ (Ducts) नहीं होतीं तथा जो अपने हार्मोन सीधे रक्त में स्रावित करती हैं, उन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands) कहते हैं।

मानव शरीर में अनेक अंतःस्रावी ग्रंथियाँ होती हैं, जिनमें पीयूष ग्रंथि (Pituitary), थायरॉयड, अधिवृक्क (Adrenal), अग्न्याशय (Pancreas), वृषण (Testes) एवं अंडाशय (Ovaries) प्रमुख हैं। प्रत्येक ग्रंथि विशिष्ट हार्मोन का स्राव करती है, जो शरीर की विशेष क्रियाओं का नियंत्रण करता है। 

नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) का लेबलयुक्त चित्र, जिसमें पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland), पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland), थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid Gland), पैराथायरॉयड ग्रंथि (Parathyroid Gland), थाइमस (Thymus), अधिवृक्क ग्रंथियाँ (Adrenal Glands), अग्न्याशय (Pancreas) तथा जनन ग्रंथियों (Gonads) को हिंदी लेबल एवं अंग्रेज़ी नाम (ब्रैकेट में) सहित स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

चित्र – अंतःस्रावी ग्रंथियों का नामांकित चित्र 

एड्रेनालिन (Adrenaline)

एड्रेनालिन (Adrenaline) अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) द्वारा स्रावित हार्मोन है, जिसे आपातकालीन या “Fight or Flight Hormone” कहा जाता है।

जब शरीर भय, तनाव, क्रोध या किसी आपातकालीन स्थिति का सामना करता है, तब अधिवृक्क ग्रंथि एड्रेनालिन का स्राव करती है। यह हार्मोन शरीर को तुरंत कार्य करने के लिए तैयार करता है। 

एड्रेनालिन के प्रमुख कार्य

  • हृदयगति (Heart Rate) बढ़ाता है।
  • रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ाता है।
  • श्वसन दर (Breathing Rate) बढ़ाता है।
  • मांसपेशियों तक अधिक रक्त पहुँचाता है।
  • यकृत से ग्लूकोज़ मुक्त कर ऊर्जा उपलब्ध कराता है।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

एड्रेनालिन को “आपातकालीन हार्मोन (Emergency Hormone)” भी कहा जाता है।

थायरॉक्सिन (Thyroxin)

थायरॉक्सिन (Thyroxin) थायरॉयड ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन है, जो शरीर के उपापचय (Metabolism), वृद्धि एवं विकास का नियंत्रण करता है।

थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन (Iodine) आवश्यक होता है। यदि भोजन में आयोडीन की कमी हो जाए, तो थायरॉयड ग्रंथि बढ़ जाती है और घेंघा (Goitre) रोग हो सकता है। 

थायरॉक्सिन के प्रमुख कार्य

  • शरीर की उपापचय दर (Metabolic Rate) नियंत्रित करना।
  • शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायता करना।
  • ऊर्जा उत्पादन को नियंत्रित करना।
  • शरीर का तापमान संतुलित रखना।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्रोत ग्रंथि – थायरॉयड ग्रंथि
  • आवश्यक तत्व – आयोडीन
  • कमी से – घेंघा (Goitre)

वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone)

वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) द्वारा स्रावित हार्मोन है, जो शरीर की सामान्य वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करता है।

यह हार्मोन विशेष रूप से बचपन एवं किशोरावस्था में हड्डियों, मांसपेशियों तथा अन्य ऊतकों की वृद्धि के लिए आवश्यक होता है। 

वृद्धि हार्मोन के प्रमुख कार्य

  • हड्डियों की लंबाई में वृद्धि।
  • मांसपेशियों का विकास।
  • कोशिकाओं की वृद्धि एवं विभाजन को बढ़ावा देना।
  • शरीर की सामान्य वृद्धि बनाए रखना।

वृद्धि हार्मोन का असंतुलन

  • कमी → बौनापन (Dwarfism)
  • अधिकता → दानवता (Gigantism) (बचपन में)
  • वयस्क अवस्था में अधिकता → एक्रोमेगेली (Acromegaly)

टेस्टोस्टेरोन (Testosterone)

टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) पुरुषों के वृषण (Testes) द्वारा स्रावित प्रमुख लैंगिक हार्मोन है, जो पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों (Secondary Sexual Characters) के विकास को नियंत्रित करता है। 

यौवनावस्था (Puberty) में टेस्टोस्टेरोन का स्राव बढ़ जाता है, जिससे शरीर में अनेक शारीरिक एवं प्रजनन संबंधी परिवर्तन होते हैं।

टेस्टोस्टेरोन के प्रमुख कार्य

  • पुरुष जनन अंगों का विकास करना।
  • शुक्राणुओं (Sperms) के निर्माण में सहायता करना।
  • दाढ़ी एवं मूँछ का विकास करना।
  • आवाज को भारी बनाना।
  • मांसपेशियों एवं हड्डियों के विकास को बढ़ावा देना।
  • पुरुषों में लैंगिक परिपक्वता लाना।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्रोत ग्रंथि – वृषण (Testes)
  • मुख्य कार्य – पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास

एस्ट्रोजन (Oestrogen)

📝 परीक्षा हेतु परिभाषा

एस्ट्रोजन (Oestrogen) महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) द्वारा स्रावित प्रमुख लैंगिक हार्मोन है, जो महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों एवं जनन तंत्र के विकास को नियंत्रित करता है। 

यौवनावस्था में एस्ट्रोजन का स्राव बढ़ने से महिलाओं में प्रजनन अंगों का विकास तथा मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) प्रारम्भ होता है।

एस्ट्रोजन के प्रमुख कार्य

  • स्त्री जनन अंगों का विकास करना।
  • मासिक धर्म चक्र का नियंत्रण करना।
  • स्तनों का विकास करना।
  • शरीर में स्त्रियोचित लक्षणों का विकास करना।
  • गर्भधारण के लिए शरीर को तैयार करना।

प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)

प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) के कॉर्पस ल्यूटियम (Corpus Luteum) तथा गर्भावस्था के दौरान अपरा (Placenta) द्वारा स्रावित हार्मोन है, जो गर्भाशय को गर्भधारण एवं भ्रूण के विकास के लिए तैयार करता है।

प्रोजेस्टेरोन मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करने तथा गर्भावस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निषेचन (Fertilization) होने पर यह हार्मोन गर्भाशय की आंतरिक परत (Endometrium) को बनाए रखता है, जिससे भ्रूण का विकास सुचारु रूप से हो सके।

प्रोजेस्टेरोन के प्रमुख कार्य

  • गर्भाशय को निषेचित अंडे के आरोपण (Implantation) के लिए तैयार करना।
  • गर्भावस्था को बनाए रखना।
  • गर्भाशय की आंतरिक परत (Endometrium) को सुरक्षित रखना।
  • मासिक धर्म चक्र का नियमन करना।
  • स्तन ग्रंथियों को दुग्ध उत्पादन के लिए तैयार करने में सहायता करना।

इंसुलिन (Insulin)

इंसुलिन (Insulin) अग्न्याशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) की बीटा (β) कोशिकाओं द्वारा स्रावित हार्मोन है, जो रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा को नियंत्रित करता है। 

भोजन करने के बाद रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाती है। इस समय अग्न्याशय इंसुलिन का स्राव करता है। इंसुलिन कोशिकाओं को ग्लूकोज़ ग्रहण करने के लिए प्रेरित करता है तथा अतिरिक्त ग्लूकोज़ को यकृत (Liver) एवं मांसपेशियों में ग्लाइकोजन (Glycogen) के रूप में संग्रहित करवाता है। इससे रक्त में शर्करा का स्तर सामान्य बना रहता है।

इंसुलिन के प्रमुख कार्य

  • रक्त शर्करा (Blood Glucose) को नियंत्रित करना।
  • कोशिकाओं में ग्लूकोज़ के प्रवेश को बढ़ाना।
  • अतिरिक्त ग्लूकोज़ को ग्लाइकोजन के रूप में संग्रहित करवाना।
  • शरीर को ऊर्जा उपलब्ध कराने में सहायता करना।

इंसुलिन की कमी

इंसुलिन की कमी या उचित कार्य न करने पर मधुमेह (Diabetes Mellitus) रोग हो जाता है, जिसमें रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है।

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्रोत ग्रंथि – अग्न्याशय (Pancreas)
  • स्रावित कोशिकाएँ – बीटा (β) कोशिकाएँ
  • मुख्य कार्य – रक्त शर्करा का नियंत्रण
  • कमी से – मधुमेह (Diabetes Mellitus)

फीडबैक तंत्र (Feedback Mechanism)

जब शरीर में किसी हार्मोन की मात्रा बढ़ने या घटने पर उसका स्राव स्वतः नियंत्रित हो जाता है, तो इस नियंत्रण प्रणाली को फीडबैक तंत्र (Feedback Mechanism) कहते हैं। 

यह तंत्र शरीर में हार्मोनों का संतुलन बनाए रखता है, जिससे शरीर की सभी क्रियाएँ सामान्य रूप से चलती रहती हैं।

फीडबैक तंत्र की कार्यप्रणाली

  • शरीर में किसी हार्मोन का स्तर कम या अधिक होता है।
  • मस्तिष्क (मुख्यतः हाइपोथैलेमस एवं पीयूष ग्रंथि) इसकी जानकारी प्राप्त करता है।
  • संबंधित अंतःस्रावी ग्रंथि को अधिक या कम हार्मोन स्रावित करने का संकेत दिया जाता है।
  • हार्मोन का स्तर सामान्य होने पर उसका स्राव स्वतः नियंत्रित हो जाता है।

उदाहरण

  • थायरॉक्सिन का स्तर कम होने पर पीयूष ग्रंथि अधिक TSH स्रावित करती है।
  • थायरॉक्सिन का स्तर सामान्य होने पर TSH का स्राव कम हो जाता है।
  • इसी प्रकार इंसुलिन रक्त शर्करा के स्तर के अनुसार नियंत्रित होता है।

महत्वपूर्ण हार्मोन एवं उनके कार्य (Updated Table)

हार्मोन स्रावित करने वाली ग्रंथि मुख्य कार्य
एड्रेनालिन अधिवृक्क ग्रंथि आपातकालीन परिस्थितियों में शरीर को सक्रिय करना
थायरॉक्सिन थायरॉयड ग्रंथि उपापचय, वृद्धि एवं विकास का नियंत्रण
वृद्धि हार्मोन पीयूष ग्रंथि शरीर की वृद्धि एवं विकास
इंसुलिन अग्न्याशय रक्त शर्करा का नियंत्रण
टेस्टोस्टेरोन वृषण पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास
एस्ट्रोजन अंडाशय महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास
प्रोजेस्टेरोन अंडाशय (कॉर्पस ल्यूटियम) / अपरा (गर्भावस्था में) गर्भाशय को गर्भधारण के लिए तैयार करना तथा गर्भावस्था को बनाए रखना

📊 तुलनात्मक सारणियाँ

  1. तंत्रिका नियंत्रण एवं हार्मोनल नियंत्रण में अंतर
आधार तंत्रिका नियंत्रण (Nervous Control) हार्मोनल नियंत्रण (Hormonal Control)
नियंत्रण का माध्यम तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) हार्मोन (Hormones)
संदेश का मार्ग तंत्रिका तंत्र रक्त (Blood)
गति बहुत तेज अपेक्षाकृत धीमी
प्रभाव की अवधि अल्पकालिक दीर्घकालिक
नियंत्रक अंग मस्तिष्क, मेरुरज्जु एवं तंत्रिकाएँ अंतःस्रावी ग्रंथियाँ
उदाहरण गर्म वस्तु छूने पर हाथ हटाना इंसुलिन द्वारा रक्त शर्करा का नियंत्रण
  1. प्रतिवर्ती क्रिया एवं स्वैच्छिक क्रिया में अंतर
आधार प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) स्वैच्छिक क्रिया (Voluntary Action)
नियंत्रण मुख्यतः मेरुरज्जु मस्तिष्क
इच्छा का प्रभाव इच्छा के बिना होती है इच्छा के अनुसार होती है
गति बहुत तेज अपेक्षाकृत धीमी
उद्देश्य शरीर की सुरक्षा सामान्य दैनिक कार्य
उदाहरण गर्म वस्तु छूने पर हाथ हटाना लिखना, चलना, बोलना
  1. पादप हार्मोनों की तुलना
हार्मोन मुख्य कार्य प्रमुख प्रभाव
ऑक्सिन (Auxin) कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाना तने की वृद्धि, प्रकाशानुवर्तन
जिबरेलिन (Gibberellin) तने की लंबाई एवं बीज अंकुरण वृद्धि एवं पुष्पन को बढ़ावा
साइटोकाइनिन (Cytokinin) कोशिका विभाजन नई कलियों एवं शाखाओं का विकास
एब्सिसिक अम्ल (ABA) वृद्धि को रोकना रंध्र बंद करना, सुप्तावस्था एवं जल संरक्षण

✅ महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

  • नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) शरीर की विभिन्न क्रियाओं में तालमेल स्थापित करने की प्रक्रिया है।
  • तंत्रिका कोशिका (Neuron) तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
  • सिनैप्स (Synapse) दो न्यूरॉनों के बीच का सूक्ष्म अंतराल है, जहाँ न्यूरोट्रांसमीटर द्वारा संदेश का संचार होता है।
  • प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) का मुख्य नियंत्रण मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा होता है।
  • अग्र मस्तिष्क (Fore Brain) सोचने, स्मृति, बुद्धि तथा स्वैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
  • सेरिबेलम (Cerebellum) शरीर का संतुलन एवं मांसपेशियों के समन्वय को नियंत्रित करता है।
  • मेडुला ऑब्लोंगाटा (Medulla Oblongata) श्वसन, हृदयगति एवं रक्तचाप जैसी अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
  • मस्तिष्क की सुरक्षा कपाल (Skull), मस्तिष्कावरण (Meninges) तथा मस्तिष्कमेरु द्रव (CSF) द्वारा होती है।
  • पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, उनका समन्वय पादप हार्मोन एवं वृद्धि-आधारित गतियों द्वारा होता है।
  • प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) में तना प्रकाश की ओर तथा जड़ प्रकाश से दूर बढ़ती है।
  • गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) में जड़ धनात्मक तथा तना ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन प्रदर्शित करता है।
  • जलानुवर्तन (Hydrotropism) में जड़ जल की दिशा में बढ़ती है।
  • ऑक्सिन (Auxin) प्रकाशानुवर्तन तथा कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने वाला प्रमुख पादप हार्मोन है।
  • जिबरेलिन (Gibberellin) तने की लंबाई बढ़ाने एवं बीज अंकुरण में सहायता करता है।
  • एब्सिसिक अम्ल (ABA) वृद्धि-निरोधी हार्मोन है, जो रंध्रों को बंद करने एवं जल संरक्षण में सहायता करता है।
  • अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands) नलिकाविहीन होती हैं तथा अपने हार्मोन सीधे रक्त में स्रावित करती हैं।
  • एड्रेनालिन को आपातकालीन (Emergency/Fight or Flight) हार्मोन कहा जाता है।
  • थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है; इसकी कमी से घेंघा (Goitre) रोग हो सकता है।
  • इंसुलिन अग्न्याशय की बीटा (β) कोशिकाओं द्वारा स्रावित होता है तथा रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है।
  • फीडबैक तंत्र (Feedback Mechanism) शरीर में हार्मोनों का संतुलन बनाए रखता है और आवश्यकता के अनुसार उनके स्राव को नियंत्रित करता है।

❓FAQs (CBSE Board PYQs आधारित)

  1. नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) क्या है?

उत्तर: शरीर की विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण तथा विभिन्न अंगों के बीच तालमेल स्थापित करने की प्रक्रिया को नियंत्रण एवं समन्वय कहते हैं।

  1. न्यूरॉन (Neuron) क्या है? इसके प्रमुख भागों के नाम लिखिए।

उत्तर: न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है। इसके प्रमुख भाग हैं—

  • डेंड्राइट (Dendrite)
  • कोशिका काय (Cell Body)
  • ऐक्सॉन (Axon)
  • ऐक्सॉन सिरा (Axon Terminal)
  1. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) क्या है? एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: बिना सोचे-समझे किसी उद्दीपन के प्रति तुरंत होने वाली अनैच्छिक प्रतिक्रिया प्रतिवर्ती क्रिया कहलाती है।

उदाहरण: गर्म वस्तु को छूते ही हाथ पीछे खींच लेना।

  1. प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) क्या है?

उत्तर: प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान तंत्रिका आवेग जिस निश्चित मार्ग से होकर गुजरता है, उसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं।

  1. मानव मस्तिष्क के तीन प्रमुख भागों के नाम लिखिए।

उत्तर:

  • अग्र मस्तिष्क (Fore Brain)
  • मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)
  • पश्च मस्तिष्क (Hind Brain)
  1. सेरिबेलम (Cerebellum) का मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर: सेरिबेलम शरीर का संतुलन बनाए रखता है तथा मांसपेशियों की गतिविधियों का समन्वय करता है।

  1. मेडुला (Medulla Oblongata) किन क्रियाओं का नियंत्रण करता है?

उत्तर: मेडुला श्वसन, हृदयगति, रक्तचाप, निगलना तथा अन्य अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करता है।

  1. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) क्या है?

उत्तर: प्रकाश के प्रभाव से पौधे के किसी भाग की दिशा-विशिष्ट वृद्धि को प्रकाशानुवर्तन कहते हैं।

  1. जलानुवर्तन (Hydrotropism) क्या है?

उत्तर: जल के प्रभाव से जड़ों का जल की दिशा में बढ़ना जलानुवर्तन कहलाता है।

  1. ऑक्सिन (Auxin) का मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर: ऑक्सिन कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाता है तथा प्रकाशानुवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  1. अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands) क्या हैं?

उत्तर: वे ग्रंथियाँ जिनमें नलिकाएँ नहीं होतीं तथा जो अपने हार्मोन सीधे रक्त में स्रावित करती हैं, अंतःस्रावी ग्रंथियाँ कहलाती हैं।

  1. इंसुलिन किस ग्रंथि द्वारा स्रावित होता है? इसका मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर: इंसुलिन अग्न्याशय (Pancreas) द्वारा स्रावित होता है। इसका मुख्य कार्य रक्त में ग्लूकोज़ (शर्करा) की मात्रा को नियंत्रित करना है।

  1. थायरॉक्सिन हार्मोन के निर्माण के लिए कौन-सा खनिज आवश्यक है?

उत्तर: आयोडीन (Iodine)।

  1. फीडबैक तंत्र (Feedback Mechanism) क्या है?

उत्तर: शरीर में हार्मोन की मात्रा बढ़ने या घटने पर उसके स्राव का स्वतः नियंत्रित होना फीडबैक तंत्र कहलाता है।

  1. एड्रेनालिन (Adrenaline) को आपातकालीन हार्मोन क्यों कहा जाता है?

उत्तर: क्योंकि यह भय, तनाव या आपातकालीन परिस्थितियों में शरीर को तुरंत कार्य करने के लिए तैयार करता है।

🎯 प्रतियोगी परीक्षा टिप्स

  • न्यूरॉन, प्रतिवर्ती चाप एवं मानव मस्तिष्क के लेबलयुक्त चित्रों का नियमित अभ्यास करें।
  • अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क एवं पश्च मस्तिष्क के कार्यों में अंतर याद रखें।
  • तंत्रिका नियंत्रण एवं हार्मोनल नियंत्रण में अंतर से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
  • ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन एवं एब्सिसिक अम्ल के कार्यों को सारणी के माध्यम से याद करें।
  • एड्रेनालिन, थायरॉक्सिन, इंसुलिन, वृद्धि हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन के स्रोत और कार्य अवश्य याद रखें।
  • घेंघा (Goitre), मधुमेह (Diabetes Mellitus), बौनापन (Dwarfism) तथा दानवता (Gigantism) जैसे हार्मोन संबंधी विकार परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
  • बोर्ड परीक्षा में परिभाषाएँ, अंतर (Differences), कारण तथा चित्र आधारित प्रश्न विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
  • NCERT की सभी मुख्य परिभाषाएँ, चित्र एवं गतिविधियाँ अवश्य दोहराएँ।

🏁 निष्कर्ष

नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) जीवों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण जीवन प्रक्रिया है, जो शरीर के सभी अंगों के बीच समन्वय स्थापित करती है। जंतुओं में यह कार्य तंत्रिका तंत्र एवं अंतःस्रावी तंत्र (हार्मोन) द्वारा किया जाता है, जबकि पौधों में पादप हार्मोन एवं अनुवर्तन (Tropic Movements) प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इस अध्याय के अध्ययन से हम समझते हैं कि शरीर किस प्रकार उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया करता है, मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण कैसे करते हैं तथा हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास और उपापचय को किस प्रकार नियंत्रित करते हैं। NCERT के सिद्धांतों, प्रमुख परिभाषाओं, तुलनात्मक सारणियों, चित्रों तथा महत्वपूर्ण तथ्यों का नियमित अभ्यास करने से बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *