आवर्त सारणी (Periodic Table)
📖 परिचय – आवर्त सारणी (Periodic Table) रसायन विज्ञान में तत्वों को व्यवस्थित रूप से समझने का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। वर्तमान में ज्ञात सभी तत्वों को उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number), इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic Configuration) तथा रासायनिक एवं भौतिक गुणों के आधार पर आधुनिक आवर्त सारणी में व्यवस्थित किया गया है।
आवर्त सारणी का विकास एक दिन में नहीं हुआ। सबसे पहले डॉबेरेनर के त्रिक (Dobereiner’s Triads), फिर न्यूलैंड का अष्टक नियम (Newlands’ Law of Octaves) और उसके बाद मेंडलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table) ने तत्वों के वर्गीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अंततः हेनरी मोसले (Henry Moseley) द्वारा दिए गए आधुनिक आवर्त नियम के आधार पर आज की आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table) विकसित हुई।
इस अध्याय में आप तत्वों के वर्गीकरण का इतिहास, आधुनिक आवर्त सारणी, आवर्त एवं समूह, धातु, अधातु एवं उपधातु, आवर्तीय प्रवृत्तियाँ, इलेक्ट्रॉन विन्यास तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्यों का सरल भाषा में अध्ययन करेंगे। यह नोट्स CBSE, NCERT, SSC, Railway, UPSC, MPPSC, CUET, NEET तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं।
📚 विषय सूची (Table of Contents)
- 🧪 तत्वों के वर्गीकरण की आवश्यकता
- 🔺 डॉबेरेनर के त्रिक (Dobereiner’s Triads)
- 🎵 न्यूलैंड का अष्टक नियम (Newlands’ Law of Octaves)
- 📜 मेंडलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table)
- ⚛️ आधुनिक आवर्त नियम (Modern Periodic Law)
- 📋 आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table)
- 📐 आवर्त (Periods)
- 📊 समूह (Groups)
- 🧱 s, p, d एवं f ब्लॉक
- 🪨 धातु, अधातु एवं उपधातु
- ⚛️ इलेक्ट्रॉन विन्यास (Electronic Configuration)
- 📈 आवर्तीय प्रवृत्तियाँ (Periodic Trends)
- 📊 महत्वपूर्ण अंतर (Difference Tables)
- 🎯 प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण तथ्य
- ❓Frequently Asked Questions (FAQs)
- 📝 निष्कर्ष
🌟 तत्वों के वर्गीकरण की आवश्यकता
प्राचीन समय में केवल कुछ ही तत्व ज्ञात थे, इसलिए उन्हें याद रखना और उनके गुणों का अध्ययन करना आसान था। लेकिन समय के साथ नए-नए तत्वों की खोज होने लगी। वर्तमान में 118 तत्व ज्ञात हैं। इतने अधिक तत्वों के गुण, उपयोग और रासायनिक व्यवहार को समझना कठिन हो गया। इसलिए वैज्ञानिकों ने समान गुणों वाले तत्वों को एक साथ व्यवस्थित करने के लिए विभिन्न वर्गीकरण प्रणालियाँ विकसित कीं।
तत्वों के वर्गीकरण से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं—
- समान गुणों वाले तत्वों का अध्ययन एक साथ किया जा सकता है।
- नए तत्वों के गुणों का अनुमान लगाया जा सकता है।
- तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणों की तुलना करना आसान हो जाता है।
- रासायनिक अभिक्रियाओं को समझने में सहायता मिलती है।
- वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में अध्ययन सरल हो जाता है।
🔺 डॉबेरेनर के त्रिक (Dobereiner’s Triads)
✨ परिचय
1817 ई. में जर्मन वैज्ञानिक जोहान वोल्फगैंग डॉबेरेनर (Johann Wolfgang Dobereiner) ने तत्वों को उनके समान रासायनिक गुणों के आधार पर तीन-तीन के समूह (Triads) में व्यवस्थित किया। इन्हें डॉबेरेनर के त्रिक कहा जाता है।
उन्होंने पाया कि प्रत्येक त्रिक में मध्य तत्व का परमाणु द्रव्यमान लगभग पहले और तीसरे तत्व के परमाणु द्रव्यमानों के औसत के बराबर होता है।
📜 डॉबेरेनर का सिद्धांत
यदि तीन तत्वों के रासायनिक गुण समान हों, तो उनके परमाणु द्रव्यमानों में एक विशेष संबंध पाया जाता है।
मध्य तत्व का परमाणु द्रव्यमान ≈ (पहले + तीसरे तत्व का परमाणु द्रव्यमान) ÷ 2
📊 उदाहरण 1 : लिथियम त्रिक
| तत्व | परमाणु द्रव्यमान |
|---|---|
| लिथियम (Li) | 7 |
| सोडियम (Na) | 23 |
| पोटैशियम (K) | 39 |
औसत = (7 + 39) ÷ 2 = 23
जो कि सोडियम के परमाणु द्रव्यमान के बराबर है।
📊 उदाहरण 2 : कैल्शियम त्रिक
| तत्व | परमाणु द्रव्यमान |
|---|---|
| कैल्शियम (Ca) | 40 |
| स्ट्रॉन्शियम (Sr) | 88 |
| बेरियम (Ba) | 137 |
औसत = (40 + 137) ÷ 2 = 88.5
जो स्ट्रॉन्शियम के परमाणु द्रव्यमान के लगभग बराबर है।
✅ डॉबेरेनर के त्रिक की विशेषताएँ
- तत्वों को पहली बार वैज्ञानिक आधार पर वर्गीकृत किया गया।
- समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों को एक समूह में रखा गया।
- परमाणु द्रव्यमान और रासायनिक गुणों के बीच संबंध स्थापित किया गया।
- आगे आने वाली आवर्त सारणियों के विकास का आधार बना।
❌ डॉबेरेनर के त्रिक की सीमाएँ
- केवल कुछ ही तत्व त्रिक बना सके।
- अधिकांश तत्व इस नियम में फिट नहीं हुए।
- सभी ज्ञात तत्वों का वर्गीकरण संभव नहीं था।
- यह नियम सार्वभौमिक नहीं था।
🎵 न्यूलैंड का अष्टक नियम (Newlands’ Law of Octaves)
✨ परिचय
1864 ई. में अंग्रेज़ वैज्ञानिक जॉन न्यूलैंड (John Newlands) ने तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया।
उन्होंने देखा कि हर आठवें तत्व के गुण पहले तत्व के समान होते हैं।
उन्होंने इसकी तुलना संगीत के सप्तक (Octave) से की, जहाँ आठवाँ स्वर पहले स्वर से मिलता-जुलता होता है। इसलिए इसे अष्टक नियम (Law of Octaves) कहा गया।
📜 न्यूलैंड का अष्टक नियम
यदि तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में रखा जाए, तो प्रत्येक आठवाँ तत्व पहले तत्व के समान गुण प्रदर्शित करता है।
📊 उदाहरण
| क्रम | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तत्व | Li | Be | B | C | N | O | F | Ne | Na | Mg | Al | Si | P | S | Cl | Ar | K | Ca | – | – |
यहाँ Li और Na के रासायनिक गुण समान हैं।
इसी प्रकार—
Be → Mg
B → Al
C → Si
✅ न्यूलैंड के अष्टक नियम की उपलब्धियाँ
- तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम में व्यवस्थित किया।
- समान गुणों वाले तत्वों को एक साथ रखने का प्रयास किया।
- आवर्तता (Periodicity) की अवधारणा प्रस्तुत की।
- आधुनिक आवर्त सारणी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
❌ न्यूलैंड के अष्टक नियम की सीमाएँ
- यह नियम केवल कैल्शियम (Ca) तक ही सही पाया गया।
- बाद में खोजे गए तत्व इस नियम का पालन नहीं करते थे।
- कुछ असमान गुणों वाले तत्व एक ही समूह में आ गए।
- नए तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं छोड़ा गया।
📜 मेंडलीफ की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table)
✨ परिचय
1869 ई. में रूसी वैज्ञानिक दिमित्री इवानोविच मेंडलीफ (Dmitri Ivanovich Mendeleev) ने तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान (Atomic Mass) के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया।
उन्होंने समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा। उनकी आवर्त सारणी इतनी प्रभावी थी कि आज भी उन्हें “आवर्त सारणी का जनक (Father of Periodic Table)” कहा जाता है।
📜 मेंडलीफ का आवर्त नियम
“तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्ती फलन (Periodic Function) होते हैं।”
✅ मेंडलीफ की आवर्त सारणी की प्रमुख विशेषताएँ
- तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के आधार पर व्यवस्थित किया।
- समान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा।
- अज्ञात तत्वों के लिए खाली स्थान छोड़े।
- कई नए तत्वों के गुणों की सही भविष्यवाणी की।
- आज की आधुनिक आवर्त सारणी की नींव रखी।
⭐ मेंडलीफ की महत्वपूर्ण भविष्यवाणियाँ
मेंडलीफ ने जिन तत्वों के लिए पहले से स्थान छोड़ा था, वे बाद में खोजे गए—
उन्होंने अनुमानित तत्वों के लिए ये नाम दिए थे:
| मेंडलीफ का दिया गया नाम | बाद में खोजा गया तत्व |
|---|---|
| एका-बोरॉन (Eka-boron) | स्कैंडियम (Scandium, Sc) |
| एका-एलुमिनियम (Eka-aluminium) | गैलियम (Gallium, Ga) |
| एका-सिलिकॉन (Eka-silicon) | जर्मेनियम (Germanium, Ge) |
इन तत्वों के गुण लगभग वही पाए गए जिनकी भविष्यवाणी मेंडलीफ ने की थी।
❌ मेंडलीफ की आवर्त सारणी की सीमाएँ
- हाइड्रोजन (Hydrogen) का निश्चित स्थान स्पष्ट नहीं था।
- समस्थानिकों (Isotopes) के लिए उचित स्थान नहीं था।
- कुछ तत्वों का क्रम परमाणु द्रव्यमान के अनुसार नहीं था।
- दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) का उचित स्थान निर्धारित नहीं किया जा सका।
⚛️ आधुनिक आवर्त नियम (Modern Periodic Law)
मेंडलीफ की आवर्त सारणी में कुछ कमियाँ थीं, जैसे समस्थानिकों (Isotopes) का स्थान, हाइड्रोजन की स्थिति तथा कुछ तत्वों का गलत क्रम। इन कमियों को दूर करने के लिए 1913 ई. में अंग्रेज़ वैज्ञानिक हेनरी मोसले (Henry Moseley) ने तत्वों का वर्गीकरण परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के आधार पर किया।
इसी आधार पर आधुनिक आवर्त नियम प्रस्तुत किया गया।
📜 आधुनिक आवर्त नियम
“तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक (Atomic Number) के आवर्ती फलन (Periodic Function) होते हैं।”
अर्थात यदि तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के क्रम में रखा जाए, तो निश्चित अंतराल के बाद उनके गुणों की पुनरावृत्ति (Periodicity) होती है।
📋 आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table)
आधुनिक आवर्त सारणी में सभी ज्ञात 118 तत्वों को उनके परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया गया है।
आधुनिक आवर्त सारणी की मुख्य विशेषताएँ
- कुल 118 तत्व हैं।
- कुल 7 आवर्त (Periods) हैं।
- कुल 18 समूह (Groups) हैं।
- तत्वों का क्रम परमाणु क्रमांक के अनुसार होता है।
- समान गुणों वाले तत्व एक ही समूह में रखे जाते हैं।
- समस्थानिकों का स्थान एक ही होता है क्योंकि उनका परमाणु क्रमांक समान होता है।
- लैंथेनाइड एवं एक्टिनाइड श्रृंखला को मुख्य सारणी के नीचे अलग दर्शाया जाता है।
📐 आवर्त (Periods)
आधुनिक आवर्त सारणी की क्षैतिज पंक्तियों (Horizontal Rows) को आवर्त (Periods) कहते हैं।
कुल 7 आवर्त होते हैं।
आवर्तों में तत्वों की संख्या
| आवर्त | तत्वों की संख्या |
|---|---|
| प्रथम | 2 |
| द्वितीय | 8 |
| तृतीय | 8 |
| चतुर्थ | 18 |
| पंचम | 18 |
| षष्ठ | 32 |
| सप्तम | 32 (अपूर्ण) |
आवर्तों की विशेषताएँ
- बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है।
- सभी तत्वों में इलेक्ट्रॉन कोशों (Shells) की संख्या समान होती है।
- परमाणु त्रिज्या घटती है।
- धात्विक गुण घटता है।
- अधात्विक गुण बढ़ता है।
- संयोजक इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है।
📊 समूह (Groups)
- आधुनिक आवर्त सारणी की ऊर्ध्वाधर स्तम्भों (Vertical Columns) को समूह (Groups) कहते हैं।
- कुल 18 समूह होते हैं।
- समूहों की विशेषताएँ
- एक समूह के सभी तत्वों के संयोजक इलेक्ट्रॉनों (Valence Electrons) की संख्या समान होती है।
- इनके रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं।
- ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है।
- धात्विक गुण बढ़ता है।
- इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति घटती है।
📌 प्रमुख समूह
| समूह | नाम |
|---|---|
| समूह 1 | क्षार धातुएँ (Alkali Metals) |
| समूह 2 | क्षारीय मृदा धातुएँ (Alkaline Earth Metals) |
| समूह 17 | हैलोजन (Halogens) |
| समूह 18 | उत्कृष्ट गैसें (Noble Gases) |
🧱 s, p, d एवं f ब्लॉक
संयोजक इलेक्ट्रॉन जिस उपकोश (Subshell) में प्रवेश करता है, उसी के आधार पर तत्वों को चार ब्लॉकों में बाँटा गया है।
1️⃣ s-ब्लॉक
समूह 1 एवं 2
बाह्य इलेक्ट्रॉन s-उपकोश में
अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ
उदाहरण: H, Li, Na, K, Be, Mg, Ca
2️⃣ p-ब्लॉक
समूह 13 से 18
बाह्य इलेक्ट्रॉन p-उपकोश में
धातु, अधातु तथा उपधातु तीनों पाए जाते हैं।
उदाहरण: C, N, O, F, Cl, Ne
3️⃣ d-ब्लॉक
समूह 3 से 12
संक्रमण तत्व (Transition Elements)
बाह्य इलेक्ट्रॉन d-उपकोश में
उदाहरण: Fe, Cu, Zn, Cr, Mn
4️⃣ f-ब्लॉक
लैंथेनाइड एवं एक्टिनाइड
मुख्य सारणी के नीचे दर्शाए जाते हैं।
बाह्य इलेक्ट्रॉन f-उपकोश में
उदाहरण: Ce, Th, U
चित्र – आधुनिक आवर्त सारणी का रंगीन चित्र
🪨 धातु (Metals)
धातुएँ वे तत्व हैं जो आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (Cation) बनाते हैं।
धातुओं के गुण
- चमकीली होती हैं।
- ऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी चालक होती हैं।
- तन्य एवं आघातवर्धनीय होती हैं।
- अधिकांश ठोस होती हैं।
- ऑक्साइड प्रायः क्षारीय होते हैं।
उदाहरण: Na, Mg, Al, Fe, Cu
🌿 अधातु (Non-metals)
अधातुएँ वे तत्व हैं जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखती हैं।
अधातुओं के गुण
- विद्युत की खराब चालक
- भंगुर
- चमकहीन
- ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
उदाहरण: H, C, N, O, S, Cl
⚖️ उपधातु (Metalloids)
उपधातुओं में धातुओं एवं अधातुओं दोनों के गुण पाए जाते हैं।
प्रमुख उपधातु
बोरॉन (B)
सिलिकॉन (Si)
जर्मेनियम (Ge)
आर्सेनिक (As)
एंटिमनी (Sb)
टेल्यूरियम (Te)
इनका उपयोग मुख्य रूप से अर्धचालक (Semiconductor) बनाने में किया जाता है।
📍 आवर्त सारणी में धातु, अधातु एवं उपधातु की स्थिति
धातुएँ → आवर्त सारणी के बाएँ एवं मध्य भाग में।
अधातुएँ → दाएँ ऊपरी भाग में।
उपधातुएँ → धातुओं एवं अधातुओं के बीच जिग-जैग (Staircase) रेखा के आसपास स्थित होती हैं।
⚛️ इलेक्ट्रॉन विन्यास (Electronic Configuration)
🌟 परिचय
किसी परमाणु के विभिन्न ऊर्जा स्तरों (Energy Levels), कोशों (Shells) तथा उपकोशों (Subshells) में इलेक्ट्रॉनों के वितरण को इलेक्ट्रॉन विन्यास (Electronic Configuration) कहते हैं।
इलेक्ट्रॉन विन्यास से किसी तत्व की संयोजकता (Valency), रासायनिक गुण, आवर्त, समूह तथा अभिक्रियाशीलता का पता चलता है।
📜 इलेक्ट्रॉन विन्यास के नियम
1️⃣ ऑफबाऊ सिद्धांत (Aufbau Principle)
इलेक्ट्रॉन सबसे पहले कम ऊर्जा वाले कक्ष (Lowest Energy Orbital) में प्रवेश करते हैं, उसके बाद अधिक ऊर्जा वाले कक्ष में जाते हैं।
2️⃣ पॉली अपवर्जन सिद्धांत (Pauli Exclusion Principle)
किसी भी ऑर्बिटल में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन रह सकते हैं तथा दोनों के स्पिन विपरीत होते हैं।
3️⃣ हुंड का अधिकतम बहुलता नियम (Hund’s Rule)
समान ऊर्जा वाले ऑर्बिटलों में इलेक्ट्रॉन पहले एक-एक करके भरते हैं, उसके बाद युग्म (Pair) बनाते हैं।
📊 2n² नियम (Bohr–Bury Rule)
किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या का सूत्र—
अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n²
जहाँ,
| कोश | n | अधिकतम इलेक्ट्रॉन |
|---|---|---|
| K | 1 | 2 |
| L | 2 | 8 |
| M | 3 | 18 |
| N | 4 | 32 |
📚 कुछ महत्वपूर्ण तत्वों का इलेक्ट्रॉन विन्यास
| तत्व | परमाणु क्रमांक | इलेक्ट्रॉन विन्यास |
|---|---|---|
| हाइड्रोजन | 1 | 1 |
| हीलियम | 2 | 2 |
| लिथियम | 3 | 2,1 |
| कार्बन | 6 | 2,4 |
| ऑक्सीजन | 8 | 2,6 |
| सोडियम | 11 | 2,8,1 |
| मैग्नीशियम | 12 | 2,8,2 |
| क्लोरीन | 17 | 2,8,7 |
| पोटैशियम | 19 | 2,8,8,1 |
| कैल्शियम | 20 | 2,8,8,2 |
🎯 इलेक्ट्रॉन विन्यास का महत्व
- तत्व का समूह ज्ञात होता है।
- तत्व का आवर्त ज्ञात होता है।
- संयोजक इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात होती है।
- रासायनिक गुणों का अनुमान लगाया जा सकता है।
- तत्व की अभिक्रियाशीलता समझी जा सकती है।
📈 आवर्तीय प्रवृत्तियाँ (Periodic Trends)
आधुनिक आवर्त सारणी में बाएँ से दाएँ तथा ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के गुणों में नियमित परिवर्तन होता है। इन्हें आवर्तीय प्रवृत्तियाँ कहते हैं।
1️⃣ परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius)
परिभाषा
परमाणु के केन्द्रक से सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन तक की औसत दूरी को परमाणु त्रिज्या कहते हैं।
आवर्त में परिवर्तन
➡️ बाएँ से दाएँ घटती है।
कारण: केन्द्रकीय आकर्षण बढ़ता है।
समूह में परिवर्तन
⬇️ ऊपर से नीचे बढ़ती है।
कारण: नए इलेक्ट्रॉन कोश जुड़ते जाते हैं।
2️⃣ आयनीकरण ऊर्जा (Ionization Energy)
परिभाषा
गैसीय अवस्था में किसी परमाणु से सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को आयनीकरण ऊर्जा कहते हैं।
आवर्त में
➡️ बढ़ती है।
समूह में
⬇️ घटती है।
3️⃣ इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron Affinity)
परिभाषा
किसी गैसीय परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर मुक्त होने वाली ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं।
आवर्त में
➡️ बढ़ती है।
समूह में
⬇️ घटती है।
4️⃣ विद्युतऋणात्मकता (Electronegativity)
परिभाषा
बंध बनाने के दौरान साझा इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को विद्युतऋणात्मकता कहते हैं।
आवर्त में
➡️ बढ़ती है।
समूह में
⬇️ घटती है।
5️⃣ धात्विक गुण (Metallic Character)
धातुओं की इलेक्ट्रॉन त्यागने की क्षमता को धात्विक गुण कहते हैं।
आवर्त में
➡️ घटता है।
समूह में
⬇️ बढ़ता है।
6️⃣ अधात्विक गुण (Non-metallic Character)
इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता को अधात्विक गुण कहते हैं।
आवर्त में
➡️ बढ़ता है।
समूह में
⬇️ घटता है।
7️⃣ संयोजकता (Valency)
आवर्त में
पहले 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर 4 से 0 तक घटती है।
समूह में
एक ही समूह के सभी तत्वों की संयोजकता समान होती है।
8️⃣ अभिक्रियाशीलता (Reactivity)
धातुओं की
- समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है।
- आवर्त में बाएँ से दाएँ घटती है।
अधातुओं की
- समूह में नीचे जाने पर घटती है।
- आवर्त में बाएँ से दाएँ बढ़ती है।
चित्र- आवर्तीय प्रवृत्तियों का चित्र
📊मेंडलीफ की आवर्त सारणी एवं आधुनिक आवर्त सारणी में अंतर
| आधार | मेंडलीफ की आवर्त सारणी | आधुनिक आवर्त सारणी |
|---|---|---|
| आधार | परमाणु द्रव्यमान | परमाणु क्रमांक |
| आवर्त नियम | परमाणु द्रव्यमान पर आधारित | परमाणु क्रमांक पर आधारित |
| समस्थानिक | उचित स्थान नहीं | उचित स्थान प्राप्त |
| हाइड्रोजन | स्थिति स्पष्ट नहीं | उचित स्थान दिया गया |
| समूह | 8 समूह | 18 समूह |
| आवर्त | 7 आवर्त | 7 आवर्त |
धातु, अधातु एवं उपधातु में अंतर
| गुण | धातु | अधातु | उपधातु |
|---|---|---|---|
| चमक | चमकीली | चमकहीन | मध्यम |
| विद्युत चालकता | अच्छी | खराब | अर्धचालक |
| इलेक्ट्रॉन प्रवृत्ति | त्यागते हैं | ग्रहण करते हैं | दोनों प्रकार |
| ऑक्साइड | क्षारीय | अम्लीय | उभयधर्मी/मिश्रित |
🎯 प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण तथ्य
- आधुनिक आवर्त नियम हेनरी मोसले ने 1913 में दिया।
- आधुनिक आवर्त सारणी में 118 तत्व हैं।
- कुल 7 आवर्त और 18 समूह होते हैं।
- समूह 1 – क्षार धातुएँ।
- समूह 2 – क्षारीय मृदा धातुएँ।
- समूह 17 – हैलोजन।
- समूह 18 – उत्कृष्ट गैसें।
- d-ब्लॉक के तत्व संक्रमण तत्व कहलाते हैं।
- f-ब्लॉक में लैंथेनाइड एवं एक्टिनाइड होते हैं।
- फ्लोरीन सबसे अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व है।
- हीलियम की आयनीकरण ऊर्जा सर्वाधिक होती है।
- सीज़ियम सबसे अधिक धात्विक तत्वों में से एक है।
- फ्रैंशियम सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु माना जाता है।
- फ्लोरीन सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु है।
- एका-बोरॉन → स्कैंडियम, एका-एलुमिनियम → गैलियम, एका-सिलिकॉन → जर्मेनियम।
- डॉबेरेनर ने त्रिक सिद्धांत दिया।
- न्यूलैंड ने अष्टक नियम दिया।
- मेंडलीफ को “आवर्त सारणी का जनक” कहा जाता है।
❓ Frequently Asked Questions (FAQs)
- आधुनिक आवर्त नियम किसने दिया?
हेनरी मोसले ने 1913 में आधुनिक आवर्त नियम प्रस्तुत किया।
- आधुनिक आवर्त सारणी का आधार क्या है?
परमाणु क्रमांक (Atomic Number)।
- आधुनिक आवर्त सारणी में कितने आवर्त और समूह हैं?
7 आवर्त तथा 18 समूह।
- मेंडलीफ की आवर्त सारणी किस आधार पर बनाई गई थी?
परमाणु द्रव्यमान के आधार पर।
- आधुनिक आवर्त सारणी में कितने तत्व हैं?
वर्तमान में 118 ज्ञात तत्व हैं।
- डॉबेरेनर के त्रिक क्या हैं?
समान गुणों वाले तीन तत्वों का समूह, जिसमें मध्य तत्व का परमाणु द्रव्यमान पहले और तीसरे के औसत के लगभग बराबर होता है।
- न्यूलैंड का अष्टक नियम क्या है?
हर आठवें तत्व के गुण पहले तत्व के समान होते हैं।
- उपधातु क्या होते हैं?
वे तत्व जिनमें धातुओं एवं अधातुओं दोनों के गुण पाए जाते हैं।
- सबसे अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व कौन-सा है?
फ्लोरीन (F)।
- समस्थानिकों का स्थान आधुनिक आवर्त सारणी में कैसे निर्धारित किया जाता है?
समान परमाणु क्रमांक होने के कारण समस्थानिकों का स्थान एक ही होता है।
- आवर्तीय प्रवृत्तियाँ क्या हैं?
आवर्त सारणी में बाएँ से दाएँ तथा ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों के गुणों में होने वाले नियमित परिवर्तन को आवर्तीय प्रवृत्तियाँ कहते हैं।
- इलेक्ट्रॉन विन्यास का क्या महत्व है?
इलेक्ट्रॉन विन्यास से तत्व का समूह, आवर्त, संयोजकता तथा रासायनिक गुणों का पता चलता है।
📝 निष्कर्ष
आवर्त सारणी रसायन विज्ञान की आधारभूत अवधारणा है। डॉबेरेनर के त्रिक, न्यूलैंड का अष्टक नियम और मेंडलीफ की आवर्त सारणी ने तत्वों के वर्गीकरण का मार्ग प्रशस्त किया, जबकि हेनरी मोसले के आधुनिक आवर्त नियम ने परमाणु क्रमांक के आधार पर तत्वों का वैज्ञानिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया। आधुनिक आवर्त सारणी के माध्यम से तत्वों के गुण, इलेक्ट्रॉन विन्यास, आवर्तीय प्रवृत्तियाँ तथा रासायनिक व्यवहार को सरलता से समझा जा सकता है। यह अध्याय NCERT, CBSE, NEET, JEE, SSC, Railway, UPSC, MPPSC, CUET सहित सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


