ऊतक (Tissues)
🌿 परिचय (Introduction) –ऊतक (Tissues)- सभी जीवित पौधों एवं जंतुओं का शरीर असंख्य कोशिकाओं (Cells) से मिलकर बना होता है। जब समान संरचना (Structure) तथा समान कार्य (Function) करने वाली कोशिकाएँ मिलकर किसी विशेष कार्य को करती हैं, तो उन्हें ऊतक (Tissues) कहा जाता है। ऊतक जीवों में कार्यों का कुशल एवं व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करते हैं।
पौधों एवं जंतुओं में ऊतकों की संरचना तथा कार्य अलग-अलग होते हैं। पौधों में विभज्योतक (Meristematic) एवं स्थायी (Permanent) ऊतक पाए जाते हैं, जबकि जंतुओं में उपकला, संयोजी, पेशीय तथा तंत्रिका ऊतक विभिन्न जैविक कार्यों का संचालन करते हैं।
यह अध्याय NCERT, CBSE, NEET, CUET, SSC, Railway एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें ऊतकों की परिभाषा, प्रकार, संरचना, कार्य तथा महत्वपूर्ण अंतर का सरल एवं विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
📚 विषय सूची (Table of Contents)
- ऊतक (Tissues) क्या हैं?
- ऊतकों की खोज (Discovery of Tissues)
- ऊतकों का महत्व
- ऊतकों का वर्गीकरण
- पादप ऊतक (Plant Tissues)
- विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
- विभज्योतक ऊतक के प्रकार
- स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
- सरल स्थायी ऊतक
- जटिल स्थायी ऊतक
- जंतु ऊतक (Animal Tissues)
- उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
- संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
- पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)
- तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
- पादप एवं जंतु ऊतक में अंतर
- विभज्योतक एवं स्थायी ऊतक में अंतर
- महत्वपूर्ण अंतर सारणियाँ
- प्रतियोगी परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- निष्कर्ष
🌿 ऊतक (Tissues) क्या हैं?
ऊतक (Tissues) समान संरचना (Structure), समान उत्पत्ति (Origin) तथा समान कार्य (Function) करने वाली कोशिकाओं (Cells) का वह समूह है, जो मिलकर किसी विशिष्ट कार्य को संपन्न करता है।
बहुकोशिकीय (Multicellular) जीवों में प्रत्येक कोशिका अलग-अलग सभी कार्य नहीं करती। इसके स्थान पर समान कार्य करने वाली कोशिकाएँ एक समूह बनाकर विशेष कार्य करती हैं। इस व्यवस्था को श्रम-विभाजन (Division of Labour) कहा जाता है। इसी कारण जीवों के शरीर में कार्य अधिक कुशलता और गति से संपन्न होते हैं।
उदाहरण के लिए, पौधों में जल एवं खनिजों का परिवहन जाइलम (Xylem) ऊतक द्वारा तथा भोजन का परिवहन फ्लोएम (Phloem) ऊतक द्वारा किया जाता है। इसी प्रकार मनुष्य में मांसपेशीय ऊतक (Muscular Tissue) शरीर को गति प्रदान करते हैं, जबकि तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue) पूरे शरीर में संदेशों का संचार करते हैं।
🔬 ऊतकों की खोज (Discovery of Tissues)
ऊतक (Tissue) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम फ्रांसीसी वैज्ञानिक मैरी फ्रांस्वा जेवियर बिशा (Marie François Xavier Bichat) ने वर्ष 1801 में किया था। उन्हें “ऊतक विज्ञान (Histology) का जनक” भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सूक्ष्मदर्शी (Microscope) के सीमित उपयोग के बावजूद विभिन्न प्रकार के ऊतकों का अध्ययन एवं वर्गीकरण किया।
बाद में सूक्ष्मदर्शी के विकास के साथ वैज्ञानिकों ने ऊतकों की संरचना एवं कार्यों का अधिक विस्तृत अध्ययन किया, जिससे आधुनिक ऊतक विज्ञान (Histology) का विकास हुआ।
Histology (ऊतक विज्ञान): जीवों के ऊतकों की सूक्ष्म संरचना एवं कार्यों का अध्ययन करने वाली जीवविज्ञान की शाखा।
⭐ ऊतकों का महत्व (Importance of Tissues)
ऊतक जीवों के शरीर में अनेक महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इनके कारण शरीर की सभी जैविक क्रियाएँ व्यवस्थित एवं कुशलता से संपन्न होती हैं।
- ✅ ऊतकों का महत्व
- ✅ समान कार्य करने वाली कोशिकाओं को एक समूह में संगठित करते हैं।
- ✅ शरीर में श्रम-विभाजन (Division of Labour) को संभव बनाते हैं।
- ✅ विभिन्न अंग (Organs) एवं अंग-तंत्र (Organ Systems) के निर्माण में सहायता करते हैं।
- ✅ शरीर की वृद्धि, विकास एवं मरम्मत (Growth, Development and Repair) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ✅ पौधों में जल, खनिज एवं भोजन के परिवहन में सहायता करते हैं।
- ✅ जंतुओं में सुरक्षा, गति, संवेदन एवं संदेशों के संचार का कार्य करते हैं।
- ✅ शरीर की कार्यक्षमता एवं ऊर्जा उपयोग की दक्षता बढ़ाते हैं।
🌱 ऊतकों का वर्गीकरण (Classification of Tissues)
जीवों में पाए जाने वाले ऊतकों को मुख्यतः दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है।
- 🌿 पादप ऊतक (Plant Tissues)
पौधों में पाए जाने वाले ऊतक पादप ऊतक कहलाते हैं। ये पौधों की वृद्धि, सहारा, जल एवं भोजन के परिवहन तथा संरक्षण का कार्य करते हैं।
पादप ऊतक दो प्रकार के होते हैं—
- विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
- स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
- 🐾 जंतु ऊतक (Animal Tissues)
जंतुओं में पाए जाने वाले ऊतक जंतु ऊतक कहलाते हैं। ये शरीर को सुरक्षा, गति, संवेदन, सहारा तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं का संचालन करने में सहायता करते हैं।
जंतु ऊतक चार प्रकार के होते हैं—
- उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
- संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
- पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)
- तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
🌿 पादप ऊतक (Plant Tissues)
पौधों में पाए जाने वाले ऊतकों को पादप ऊतक (Plant Tissues) कहा जाता है। ये ऊतक पौधों की वृद्धि, विकास, मजबूती, जल एवं खनिजों के परिवहन, भोजन के संचयन तथा विभिन्न जैविक क्रियाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पौधे एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं जा सकते, इसलिए उनके ऊतकों की संरचना जंतुओं के ऊतकों से भिन्न होती है। पादप ऊतक मुख्य रूप से पौधों को सहारा देने, नई कोशिकाएँ बनाने तथा भोजन एवं जल का परिवहन करने का कार्य करते हैं।
🌱 पादप ऊतकों का वर्गीकरण (Classification of Plant Tissues)
पादप ऊतकों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा गया है—
- विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
- स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
🌱 विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) वे ऊतक हैं जिनकी कोशिकाएँ निरंतर विभाजित होकर नई कोशिकाओं का निर्माण करती रहती हैं। इन्हीं कोशिकाओं के कारण पौधों में जीवनभर वृद्धि (Growth) होती रहती है।
विभज्योतक ऊतक केवल पौधों में पाए जाते हैं और ये पौधों की लंबाई, मोटाई तथा नई शाखाओं एवं पत्तियों के निर्माण के लिए उत्तरदायी होते हैं।
🔍 विभज्योतक ऊतक की विशेषताएँ
- ✅ कोशिकाएँ जीवित (Living) होती हैं।
- ✅ कोशिकाएँ लगातार विभाजन करती रहती हैं।
- ✅ कोशिकाएँ आकार में छोटी एवं लगभग समान होती हैं।
- ✅ कोशिका भित्ति (Cell Wall) पतली होती है।
- ✅ कोशिकाओं के बीच अंतःकोशिकीय स्थान (Intercellular Space) नहीं होता।
- ✅ केंद्रक (Nucleus) बड़ा एवं स्पष्ट होता है।
- ✅ रसधानी (Vacuole) बहुत छोटी या अनुपस्थित होती है।
- ✅ कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) सघन होता है।
📍 विभज्योतक ऊतक का स्थान
पौधों में विभज्योतक ऊतक निम्न स्थानों पर पाए जाते हैं—
- जड़ (Root) के अग्रभाग पर
- तने (Stem) के अग्रभाग पर
- शाखाओं की बढ़ती हुई कलियों में
- गाँठों (Nodes) के आधार पर (कुछ पौधों में)
- तने एवं जड़ों के पार्श्व भाग में
🌿 विभज्योतक ऊतक के प्रकार (Types of Meristematic Tissue)
चित्र – विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) का लेबलयुक्त चित्र
स्थिति (Position) के आधार पर विभज्योतक ऊतक तीन प्रकार के होते हैं—
- शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem)
शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ तथा तने के शीर्ष (Tip) पर पाया जाता है। यह पौधे की लंबाई (Primary Growth) बढ़ाने का कार्य करता है।
मुख्य कार्य
- ✅ जड़ एवं तने की लंबाई बढ़ाना।
- ✅ नई पत्तियों एवं शाखाओं का निर्माण करना।
- ✅ प्राथमिक वृद्धि (Primary Growth) कराना।
- अंतर्वर्ती विभज्योतक (Intercalary Meristem)
यह विभज्योतक पत्तियों के आधार, गाँठों (Nodes) तथा पर्वों (Internodes) के पास पाया जाता है। यह विशेष रूप से घास एवं बाँस जैसे पौधों में विकसित होता है।
मुख्य कार्य
- ✅ पौधे के पर्वों की लंबाई बढ़ाना।
- ✅ कटने या चरने के बाद पौधे की पुनः वृद्धि करना।
- पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem)
यह तने एवं जड़ों के पार्श्व भाग में पाया जाता है। इसे कैम्बियम (Cambium) भी कहा जाता है।
यह पौधे की मोटाई (Secondary Growth) बढ़ाने का कार्य करता है।
मुख्य कार्य
- ✅ तने एवं जड़ों की मोटाई बढ़ाना।
| आधार | शीर्षस्थ विभज्योतक | अंतर्वर्ती विभज्योतक | पार्श्व विभज्योतक |
|---|---|---|---|
| स्थान | जड़ एवं तने के शीर्ष पर | गाँठों एवं पर्वों के आधार पर | तने एवं जड़ों के किनारों पर |
| मुख्य कार्य | लंबाई बढ़ाना | पर्वों की वृद्धि | मोटाई बढ़ाना |
| वृद्धि का प्रकार | प्राथमिक वृद्धि | प्राथमिक वृद्धि | द्वितीयक वृद्धि |
| उदाहरण | जड़ एवं तने का शीर्ष | घास, बाँस | कैम्बियम |
🌿 स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
जब विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) की कोशिकाएँ विभाजन (Cell Division) करना बंद कर देती हैं और एक निश्चित आकार, संरचना तथा कार्य प्राप्त कर लेती हैं, तब वे स्थायी ऊतक (Permanent Tissue) कहलाती हैं।
इन ऊतकों की कोशिकाएँ सामान्यतः विभाजित नहीं होतीं, बल्कि पौधे में विशेष कार्य जैसे भोजन का निर्माण एवं संचय, सहारा प्रदान करना तथा जल एवं खनिजों का परिवहन करती हैं।
⭐ स्थायी ऊतक की विशेषताएँ
- ✅ कोशिकाएँ विभाजन नहीं करती हैं।
- ✅ कोशिकाएँ पूर्ण विकसित (Mature) होती हैं।
- ✅ कोशिकाओं का आकार एवं कार्य निश्चित होता है।
- ✅ कोशिकाओं में बड़ी रसधानी (Large Vacuole) पाई जाती है।
- ✅ कोशिकाओं के बीच अंतःकोशिकीय स्थान (Intercellular Spaces) हो सकते हैं।
- ✅ कोशिकाएँ जीवित या मृत दोनों प्रकार की हो सकती हैं।
🌱 स्थायी ऊतकों का वर्गीकरण (Classification of Permanent Tissue)
स्थायी ऊतक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—
- सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue)
- जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue)
🌿 1. सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue)
सरल स्थायी ऊतक एक ही प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं। इनका मुख्य कार्य भोजन का निर्माण एवं संचय, पौधे को सहारा देना तथा सुरक्षा प्रदान करना है।
सरल स्थायी ऊतक तीन प्रकार के होते हैं—
- मृदूतक (Parenchyma)
- स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma)
- दृढ़ोतक (Sclerenchyma)
🌾 (A) मृदूतक (Parenchyma)
मृदूतक (Parenchyma) पौधों में सबसे अधिक पाया जाने वाला जीवित ऊतक है। इसकी कोशिकाएँ पतली भित्ति वाली, गोल या बहुभुजाकार होती हैं तथा इनके बीच पर्याप्त अंतःकोशिकीय स्थान पाया जाता है।
📍 स्थान
- पत्तियों में
- तनों में
- जड़ों में
- फलों एवं बीजों में
⭐ कार्य
- ✅ भोजन का निर्माण (प्रकाश संश्लेषण)
- ✅ भोजन एवं जल का संचय
- ✅ घाव भरने में सहायता
- ✅ गैसों का आदान-प्रदान
🌿 मृदूतक के विशेष प्रकार
(i) हरित मृदूतक (Chlorenchyma)
इसमें हरितलवक (Chloroplast) पाए जाते हैं।
कार्य: प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाना।
(ii) वातोतक (Aerenchyma)
इसमें बड़े-बड़े वायु कक्ष (Air Spaces) पाए जाते हैं।
कार्य:
- ✅ जलीय पौधों को तैरने में सहायता।
- ✅ गैसों का संचरण।
🌾 (B) स्थूलकोण ऊतक (Collenchyma)
यह जीवित ऊतक है जिसकी कोशिकाओं के कोनों पर सेल्यूलोज एवं पेक्टिन का जमाव होता है।
📍 स्थान
- पत्तियों के डंठल
- युवा तनों में
- पत्तियों की मध्य शिरा
⭐ कार्य
- ✅ पौधे को लचीलापन प्रदान करना।
- ✅ यांत्रिक सहारा देना।
- ✅ पौधे को बिना टूटे मुड़ने में सहायता करना।
🌾 (C) दृढ़ोतक (Sclerenchyma)
दृढ़ोतक मृत कोशिकाओं से बना ऊतक है। इसकी कोशिकाओं की भित्तियाँ लिग्निन (Lignin) के कारण अत्यधिक मोटी एवं कठोर होती हैं।
📍 स्थान
- नारियल का बाहरी आवरण
- बीजों का कठोर आवरण
- अखरोट का छिलका
⭐ कार्य
- ✅ पौधे को मजबूती प्रदान करना।
- ✅ कठोरता एवं सुरक्षा देना।
📋 सरल स्थायी ऊतकों में अंतर
| आधार | मृदूतक | स्थूलकोण ऊतक | दृढ़ोतक |
|---|---|---|---|
| कोशिका | जीवित | जीवित | मृत |
| कोशिका भित्ति | पतली | कोनों पर मोटी | बहुत मोटी एवं लिग्निनयुक्त |
| मुख्य कार्य | भोजन निर्माण एवं संचय | लचीलापन एवं सहारा | कठोरता एवं सुरक्षा |
| अंतःकोशिकीय स्थान | उपस्थित | बहुत कम | अनुपस्थित |
🌿 2. जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue)
जटिल स्थायी ऊतक विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं। इनका मुख्य कार्य पौधे के विभिन्न भागों में जल, खनिज लवण एवं भोजन का परिवहन करना है।
जटिल स्थायी ऊतक दो प्रकार के होते हैं—
- जाइलम (Xylem)
- फ्लोएम (Phloem)
🌊 (A) जाइलम (Xylem)
जाइलम पौधे की जड़ों द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज लवण को तने एवं पत्तियों तक पहुँचाता है।
जाइलम के प्रमुख घटक
- ट्रैकिड (Tracheids)
- वाहिकाएँ (Vessels)
- जाइलम तंतु (Xylem Fibres)
- जाइलम मृदूतक (Xylem Parenchyma)
चित्र – जाइलम का रंगीन चित्र
⭐ कार्य
- ✅ जल का परिवहन
- ✅ खनिज लवणों का परिवहन
- ✅ पौधे को यांत्रिक सहारा देना
🍃 (B) फ्लोएम (Phloem)
फ्लोएम पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा बने भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।
फ्लोएम के प्रमुख घटक
- चालनी नलिकाएँ (Sieve Tubes)
- सहचारी कोशिकाएँ (Companion Cells)
- फ्लोएम तंतु (Phloem Fibres)
- फ्लोएम मृदूतक (Phloem Parenchyma)
चित्र – फ्लोएम का रंगीन चित्र
⭐ कार्य
- ✅ भोजन का परिवहन
- ✅ पौधे के सभी भागों तक पोषक पदार्थ पहुँचाना
📋 जाइलम एवं फ्लोएम में अंतर
| आधार | जाइलम (Xylem) | फ्लोएम (Phloem) |
|---|---|---|
| परिवहन | जल एवं खनिज | भोजन |
| दिशा | मुख्यतः नीचे से ऊपर | दोनों दिशाओं में |
| मुख्य कोशिकाएँ | ट्रैकिड एवं वाहिकाएँ | चालनी नलिकाएँ एवं सहचारी कोशिकाएँ |
| मुख्य कार्य | जल का परिवहन | भोजन का परिवहन |
🐾 जंतु ऊतक (Animal Tissues)
जंतुओं के शरीर में पाए जाने वाले ऊतकों को जंतु ऊतक (Animal Tissues) कहा जाता है। ये ऊतक शरीर की सुरक्षा, गति, संवेदन, पोषण, पदार्थों के परिवहन तथा विभिन्न अंगों के कार्यों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पौधों की अपेक्षा जंतुओं में ऊतक अधिक विकसित एवं विशिष्ट (Specialized) होते हैं क्योंकि जंतु एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं और विभिन्न प्रकार की जैविक क्रियाएँ करते हैं।
🌿 जंतु ऊतकों का वर्गीकरण (Classification of Animal Tissues)
जंतु ऊतक मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं—
- उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
- संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
- पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)
- तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
🧱 1. उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
उपकला ऊतक शरीर की बाहरी सतह तथा आंतरिक अंगों की भीतरी सतह को ढकते हैं। यह शरीर की प्रथम सुरक्षा परत (Protective Layer) होती है।
⭐ विशेषताएँ
- ✅ कोशिकाएँ सघन रूप से व्यवस्थित होती हैं।
- ✅ अंतःकोशिकीय स्थान बहुत कम होता है।
- ✅ यह बेसमेंट झिल्ली (Basement Membrane) पर स्थित होता है।
🔍 कार्य
- ✅ शरीर की सुरक्षा करना।
- ✅ अवशोषण (Absorption) करना।
- ✅ स्राव (Secretion) करना।
- ✅ गैसों का आदान-प्रदान करना।
प्रकार
- सरल शल्की उपकला (Simple Squamous Epithelium)
- घनाकार उपकला (Cuboidal Epithelium)
- स्तंभाकार उपकला (Columnar Epithelium)
- रोमयुक्त उपकला (Ciliated Epithelium)
- ग्रंथिल उपकला (Glandular Epithelium)
i) सरल शल्की उपकला (Simple Squamous Epithelium)
यह एक परत वाली पतली एवं चपटी कोशिकाओं से बनी उपकला होती है। यह पदार्थों के तीव्र विसरण (Diffusion) एवं छनन (Filtration) में सहायता करती है।
📍 स्थान: फेफड़ों की वायुकोष्ठिकाएँ (Alveoli), रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत।
✅ कार्य: गैसों का आदान-प्रदान तथा पदार्थों का विसरण।
ii) घनाकार उपकला (Cuboidal Epithelium)
यह घनाकार (Cube-shaped) कोशिकाओं से बनी उपकला होती है। यह मुख्यतः अवशोषण (Absorption) एवं स्राव (Secretion) का कार्य करती है।
📍 स्थान: वृक्क नलिकाएँ (Kidney Tubules), लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands), थायरॉयड ग्रंथि।
✅ कार्य: स्राव एवं अवशोषण।
iii) स्तंभाकार उपकला (Columnar Epithelium)
यह लंबी स्तंभ जैसी कोशिकाओं से बनी होती है। यह भोजन के अवशोषण एवं श्लेष्मा (Mucus) के स्राव में सहायक होती है।
📍 स्थान: आमाशय (Stomach), छोटी आंत (Small Intestine)।
✅ कार्य: भोजन का अवशोषण एवं स्राव।
iv) रोमयुक्त उपकला (Ciliated Epithelium)
इस उपकला की कोशिकाओं की सतह पर छोटे-छोटे रोम (Cilia) पाए जाते हैं, जो लगातार गति करते रहते हैं।
📍 स्थान: श्वासनली (Trachea), अंडवाहिनी (Fallopian Tube)।
✅ कार्य: धूल एवं श्लेष्मा को बाहर निकालना तथा अंडाणु को आगे बढ़ाना।
v) ग्रंथिल उपकला (Glandular Epithelium)
यह विशेष प्रकार की उपकला है, जिसकी कोशिकाएँ विभिन्न प्रकार के पदार्थों का स्राव करती हैं।
📍 स्थान: स्वेद ग्रंथियाँ (Sweat Glands), लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands), अंतःस्रावी एवं बहिःस्रावी ग्रंथियाँ।
✅ कार्य: एंजाइम, हार्मोन, लार, पसीना तथा अन्य स्रावित पदार्थों का निर्माण एवं स्राव।
🦴 2. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
संयोजी ऊतक शरीर के विभिन्न अंगों एवं ऊतकों को जोड़ने, सहारा देने तथा सुरक्षा प्रदान करने का कार्य करता है।
⭐ कार्य
- ✅ विभिन्न अंगों को जोड़ना।
- ✅ शरीर को सहारा देना।
- ✅ ऊर्जा का संचय करना।
- ✅ पदार्थों का परिवहन करना।
प्रमुख प्रकार
- अस्थि (Bone)
- उपास्थि (Cartilage)
- रक्त (Blood)
- लसिका (Lymph)
- वसा ऊतक (Adipose Tissue)
- स्नायु (Tendon)
- अस्थिबंध (Ligament)
1. अस्थि (Bone)
अस्थि एक कठोर एवं मजबूत संयोजी ऊतक है, जिसमें कैल्शियम एवं फॉस्फोरस जैसे खनिज पाए जाते हैं। यह शरीर को आकार, मजबूती एवं सुरक्षा प्रदान करती है।
📍 स्थान: शरीर की सभी हड्डियाँ।
✅ कार्य: शरीर को सहारा देना, आंतरिक अंगों की रक्षा करना तथा रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करना।
2. उपास्थि (Cartilage)
उपास्थि एक लचीला (Flexible) संयोजी ऊतक है, जो अस्थियों के सिरों पर पाया जाता है और झटकों को सहन करने में सहायता करता है।
📍 स्थान: नाक, बाह्य कर्ण (Ear), श्वासनली तथा जोड़ों के सिरे।
✅ कार्य: लचीलापन प्रदान करना तथा हड्डियों के बीच घर्षण कम करना।
3. रक्त (Blood)
रक्त एक तरल संयोजी ऊतक (Fluid Connective Tissue) है, जिसमें प्लाज्मा, लाल रक्त कण (RBC), श्वेत रक्त कण (WBC) एवं प्लेटलेट्स पाए जाते हैं।
📍 स्थान: रक्त वाहिकाओं के भीतर।
✅ कार्य: ऑक्सीजन, पोषक तत्व, हार्मोन एवं अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करना तथा रोगों से रक्षा करना।
4. लसिका (Lymph)
लसिका हल्के पीले रंग का तरल संयोजी ऊतक है, जो लसिका वाहिकाओं में प्रवाहित होता है।
📍 स्थान: लसिका वाहिकाएँ (Lymph Vessels) एवं लसिका ग्रंथियाँ।
✅ कार्य: शरीर की प्रतिरक्षा बढ़ाना, ऊतकों से अतिरिक्त द्रव को रक्त में वापस पहुँचाना तथा वसा के अवशोषण में सहायता करना।
5. वसा ऊतक (Adipose Tissue)
वसा ऊतक विशेष कोशिकाओं से बना संयोजी ऊतक है, जिसमें वसा (Fat) संग्रहित रहती है।
📍 स्थान: त्वचा के नीचे, गुर्दों तथा हृदय के आसपास।
✅ कार्य: ऊर्जा का संचय, शरीर को ऊष्मा से बचाना तथा आंतरिक अंगों की सुरक्षा करना।
6. स्नायु (Tendon)
स्नायु मजबूत एवं कम लचीला रेशेदार संयोजी ऊतक है, जो मांसपेशियों को अस्थियों से जोड़ता है।
📍 स्थान: मांसपेशी एवं अस्थि के बीच।
✅ कार्य: मांसपेशियों द्वारा उत्पन्न बल को अस्थियों तक पहुँचाकर शरीर की गति में सहायता करना।
7. अस्थिबंध (Ligament)
अस्थिबंध मजबूत एवं लचीला रेशेदार संयोजी ऊतक है, जो दो अस्थियों को आपस में जोड़ता है।
📍 स्थान: जोड़ों (Joints) पर।
✅ कार्य: अस्थियों को जोड़कर जोड़ों को स्थिरता प्रदान करना तथा अनावश्यक गति को रोकना।
💪 3. पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)
पेशीय ऊतक संकुचन (Contraction) एवं प्रसार (Relaxation) करके शरीर को गति प्रदान करते हैं।
⭐ कार्य
- ✅ शरीर की गति कराना।
- ✅ हृदय की धड़कन बनाए रखना।
- ✅ भोजन को आगे बढ़ाना।
प्रकार
- रेखित पेशी (Striated Muscle)
इच्छानुसार कार्य करती है।
हाथ एवं पैरों में पाई जाती है।
- अरेखित पेशी (Smooth Muscle)
अनैच्छिक होती है।
आँत, आमाशय, मूत्राशय आदि में पाई जाती है।
- हृदय पेशी (Cardiac Muscle)
केवल हृदय में पाई जाती है।
जीवनभर लगातार कार्य करती है।
चित्र- पेशीय ऊतक (Muscular Tissue) का चित्र
🧠 4. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
तंत्रिका ऊतक शरीर के विभिन्न भागों में संदेशों का आदान-प्रदान करता है।
इसकी मूल इकाई न्यूरॉन (Neuron) है।
चित्र – न्यूरॉन (Neuron) का लेबलयुक्त चित्र
⭐ कार्य
- ✅ उद्दीपनों (Stimuli) को ग्रहण करना।
- ✅ संदेशों का संचार करना।
- ✅ शरीर की क्रियाओं का नियंत्रण एवं समन्वय करना।
📋 पादप एवं जंतु ऊतक में अंतर
| आधार | पादप ऊतक | जंतु ऊतक |
|---|---|---|
| गति | पौधे स्थिर होते हैं | जंतु गतिशील होते हैं |
| वृद्धि | जीवनभर होती है | सीमित समय तक होती है |
| मुख्य प्रकार | विभज्योतक एवं स्थायी | उपकला, संयोजी, पेशीय, तंत्रिका |
| विशेषता | सहारा एवं परिवहन | गति एवं समन्वय |
✅ प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण बिंदु
✅ ऊतक (Tissues) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम मैरी फ्रांस्वा जेवियर बिशा (1801) ने किया था।
✅ ऊतक विज्ञान (Histology) ऊतकों के अध्ययन की शाखा है।
✅ विभज्योतक ऊतक केवल पौधों में पाए जाते हैं।
✅ शीर्षस्थ विभज्योतक पौधे की लंबाई बढ़ाता है।
✅ पार्श्व विभज्योतक (कैम्बियम) पौधे की मोटाई बढ़ाता है।
✅ मृदूतक (Parenchyma) सबसे अधिक पाया जाने वाला जीवित ऊतक है।
✅ दृढ़ोतक (Sclerenchyma) मृत कोशिकाओं से बना होता है।
✅ जाइलम जल एवं खनिजों का परिवहन करता है।
✅ फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।
✅ रक्त (Blood) एक तरल संयोजी ऊतक है।
✅ न्यूरॉन तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
✅ हृदय पेशी जीवनभर बिना रुके कार्य करती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- ऊतक (Tissues) क्या हैं?
उत्तर: समान उत्पत्ति, समान संरचना तथा समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक (Tissues) कहते हैं।
- ऊतक (Tissues) शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था?
उत्तर: मैरी फ्रांस्वा जेवियर बिशा (Marie François Xavier Bichat) ने वर्ष 1801 में सबसे पहले “ऊतक” शब्द का प्रयोग किया था।
- ऊतक विज्ञान (Histology) क्या है?
उत्तर: ऊतकों की सूक्ष्म संरचना एवं उनके अध्ययन की शाखा को ऊतक विज्ञान (Histology) कहा जाता है।
- पादप ऊतक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: पादप ऊतक दो प्रकार के होते हैं—
- विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)
- स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
- विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) क्या है?
उत्तर: वह ऊतक जिसकी कोशिकाएँ निरंतर विभाजित होकर नई कोशिकाओं का निर्माण करती हैं, विभज्योतक ऊतक कहलाता है।
- विभज्योतक ऊतक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: तीन प्रकार—
- शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem)
- अंतर्वर्ती विभज्योतक (Intercalary Meristem)
- पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem)
- शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem) का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: यह जड़ एवं तने की प्राथमिक वृद्धि (Primary Growth) अर्थात लंबाई बढ़ाने का कार्य करता है।
- पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem) का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: यह तने एवं जड़ों की द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth) अर्थात मोटाई बढ़ाने का कार्य करता है।
- स्थायी ऊतक (Permanent Tissue) क्या है?
उत्तर: विभज्योतक ऊतक की वे कोशिकाएँ जो विभाजन करना बंद कर देती हैं और एक निश्चित कार्य करने लगती हैं, स्थायी ऊतक कहलाती हैं।
- जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: जाइलम जल एवं खनिज लवणों का परिवहन करता है, जबकि फ्लोएम पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।
- जंतु ऊतक कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: जंतु ऊतक चार प्रकार के होते हैं—
- उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)
- संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
- पेशीय ऊतक (Muscular Tissue)
- तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
- सबसे अधिक पाया जाने वाला पादप ऊतक कौन-सा है?
उत्तर: मृदूतक (Parenchyma) पौधों में सबसे अधिक पाया जाने वाला ऊतक है।
- रक्त (Blood) किस प्रकार का ऊतक है?
उत्तर: रक्त एक तरल संयोजी ऊतक (Fluid Connective Tissue) है, जो ऑक्सीजन, पोषक तत्वों एवं हार्मोनों का परिवहन करता है।
- न्यूरॉन (Neuron) क्या है?
उत्तर: न्यूरॉन तंत्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई (Structural and Functional Unit) है, जो तंत्रिका आवेगों का संचार करती है।
उत्तर: मृदूतक (Parenchyma)।
📝 निष्कर्ष
ऊतक (Tissues) बहुकोशिकीय जीवों की संरचना एवं कार्य का आधार हैं। पौधों में विभज्योतक एवं स्थायी ऊतक वृद्धि, सहारा तथा पदार्थों के परिवहन का कार्य करते हैं, जबकि जंतुओं में उपकला, संयोजी, पेशीय एवं तंत्रिका ऊतक शरीर की सुरक्षा, गति, समन्वय एवं विभिन्न जैविक क्रियाओं का संचालन करते हैं। इस अध्याय की अच्छी समझ NCERT, CBSE, CUET, NEET, SSC, Railway तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।





