कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and its Compounds) : कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 4
📘 परिचय –कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and its Compounds)- कार्बन (Carbon) प्रकृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। हमारे भोजन, दवाइयों, ईंधन, प्लास्टिक, कपड़ों तथा अधिकांश कार्बनिक पदार्थों में कार्बन पाया जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह अपने समान तथा अन्य तत्वों के साथ सहसंयोजक बंध बनाकर लाखों प्रकार के यौगिकों का निर्माण करता है। इसी कारण कार्बन को बहुमुखी तत्व (Versatile Element) कहा जाता है। इस अध्याय में हम कार्बन में बंधन, कार्बनिक यौगिकों, एथेनॉल, एथेनोइक अम्ल तथा साबुन एवं अपमार्जकों का अध्ययन करेंगे।
📚 विषय सूची
- कार्बन में बंधन – सहसंयोजक बंध
- इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
- एकल, द्वि एवं त्रि-आबंध
- मीथेन (CH₄) की संरचना
- सहसंयोजक यौगिकों के गुण
- कार्बन के अपररूप
- कार्बन की बहुमुखी प्रकृति
- कार्बनिक यौगिक
- संतृप्त एवं असंतृप्त कार्बन यौगिक
- श्रृंखलाएँ, शाखाएँ एवं वलय
- हाइड्रोकार्बन
- क्रियात्मक समूह
- समजातीय श्रेणी
- कार्बन यौगिकों का नामकरण
- कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण
- एथेनॉल एवं एथेनोइक अम्ल
- साबुन एवं अपमार्जक
कार्बन में बंधन – सहसंयोजक बंध (Bonding in Carbon – The Covalent Bond)
सहसंयोजक बंध (Covalent Bond) दो परमाणुओं के बीच संयोजक इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनने वाला रासायनिक बंध है।
कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,4 होता है। इसकी बाह्यतम कक्षा में 4 संयोजक इलेक्ट्रॉन होते हैं। स्थिर अष्टक (Octet) प्राप्त करने के लिए कार्बन को 4 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। लेकिन 4 इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण या त्याग करना ऊर्जा की दृष्टि से संभव नहीं होता। इसलिए कार्बन अन्य परमाणुओं के साथ इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (Sharing of Electrons) करता है।
इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना (Electron Dot Structure)
इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना (Electron Dot Structure) किसी तत्व के रासायनिक प्रतीक (Chemical Symbol) के चारों ओर उसकी बाह्यतम कक्षा के संयोजक इलेक्ट्रॉनों (Valence Electrons) को बिंदुओं (•) अथवा क्रॉस (×) द्वारा दर्शाने की विधि है। इसमें केवल संयोजक इलेक्ट्रॉनों को ही दर्शाया जाता है, क्योंकि रासायनिक बंधों के निर्माण में यही भाग लेते हैं।
एकल, द्वि एवं त्रि-आबंध (Single, Double and Triple Bond)
एकल, द्वि एवं त्रि-आबंध परमाणुओं के बीच साझा किए गए इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या के आधार पर बनाए जाते हैं।
(क) एकल आबंध (Single Bond)
जब दो परमाणु एक इलेक्ट्रॉन युग्म साझा करते हैं, तो एकल आबंध (Single Bond) बनता है। इसे एक रेखा (—) द्वारा दर्शाया जाता है।
उदाहरण: H₂, Cl₂, CH₄
(ख) द्वि-आबंध (Double Bond)
जब दो परमाणु दो इलेक्ट्रॉन युग्म साझा करते हैं, तो द्वि-आबंध (Double Bond) बनता है। इसे दो समानांतर रेखाओं (=) द्वारा दर्शाया जाता है।
उदाहरण: O₂, CO₂
(ग) त्रि-आबंध (Triple Bond)
जब दो परमाणु तीन इलेक्ट्रॉन युग्म साझा करते हैं, तो त्रि-आबंध (Triple Bond) बनता है। इसे तीन समानांतर रेखाओं (≡) द्वारा दर्शाया जाता है।
उदाहरण: N₂, C₂H₂ (एथाइन)
चित्र – एकल, द्वि एवं त्रि-आबंध का Lewis Dot Diagram
मीथेन (CH₄) की संरचना
मीथेन (CH₄) कार्बन का सबसे सरल यौगिक है। यह बायोगैस (Biogas) तथा संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) का प्रमुख घटक है और ईंधन के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
कार्बन के चार संयोजक इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए यह चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ चार एकल सहसंयोजक बंध बनाता है। इससे कार्बन अपना अष्टक (Octet) तथा प्रत्येक हाइड्रोजन द्विक (Duplet) पूरा कर लेता है और मीथेन का स्थिर अणु बनता है।
चित्र – मीथेन की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना
सहसंयोजक यौगिकों के गुण (Properties of Covalent Compounds)
सहसंयोजक यौगिक (Covalent Compounds) वे यौगिक हैं, जिनमें परमाणु सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े होते हैं। इन यौगिकों में मुक्त आयन नहीं होते, इसलिए इनके गुण आयनिक यौगिकों से भिन्न होते हैं।
प्रमुख गुण
- इनका गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः कम होता है।
- ये सामान्यतः विद्युत के कुचालक होते हैं।
- इनमें मुक्त आयन नहीं पाए जाते।
- अधिकांश सहसंयोजक यौगिक गैस या द्रव अवस्था में पाए जाते हैं।
- ये सामान्यतः कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं।
सहसंयोजक एवं आयनिक यौगिकों की तुलना
| आधार | सहसंयोजक यौगिक (Covalent Compounds) | आयनिक यौगिक (Ionic Compounds) |
|---|---|---|
| बंध बनने का तरीका | इलेक्ट्रॉनों के साझाकरण (Sharing) से | इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण (Transfer) से |
| गलनांक एवं क्वथनांक | कम होते हैं | अधिक होते हैं |
| विद्युत चालकता | सामान्यतः विद्युत का चालन नहीं करते | जलीय विलयन एवं गलित अवस्था में विद्युत का चालन करते हैं |
| भौतिक अवस्था | अधिकांश गैस या द्रव, कुछ ठोस | अधिकांश ठोस एवं कठोर |
| विलेयता | कार्बनिक विलायकों में अधिक घुलनशील | जल में अधिक घुलनशील |
| उदाहरण | CH₄, H₂O, CO₂ | NaCl, KCl, MgO |
कार्बन के अपररूप (Allotropes of Carbon)
कार्बन के अपररूप (Allotropes of Carbon) वे विभिन्न रूप हैं, जिनमें कार्बन के परमाणु अलग-अलग प्रकार से व्यवस्थित होते हैं। रासायनिक गुण लगभग समान होने पर भी उनकी संरचना भिन्न होने के कारण उनके भौतिक गुण अलग-अलग होते हैं। कार्बन के प्रमुख अपररूप हीरा (Diamond), ग्रेफाइट (Graphite) तथा फुलरीन (Fullerene) हैं।
हीरा (Diamond)
हीरा (Diamond) कार्बन का सबसे कठोर अपररूप है। इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंध बनाकर त्रिविमीय (3D) जालक संरचना बनाता है। इसी मजबूत संरचना के कारण हीरा अत्यधिक कठोर होता है।
प्रमुख गुण
- प्रकृति का सबसे कठोर पदार्थ।
- विद्युत का कुचालक होता है।
- अत्यधिक चमकदार होता है।
- आभूषण तथा काँच काटने वाले औजारों में उपयोग किया जाता है।
ग्रेफाइट (Graphite)
ग्रेफाइट (Graphite) कार्बन का एक नरम अपररूप है। इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़कर षट्कोणीय (Hexagonal) परतें बनाता है। इन परतों के बीच आकर्षण बल कम होने के कारण ये आसानी से एक-दूसरे पर फिसल जाती हैं। यही कारण है कि ग्रेफाइट मुलायम एवं चिकना होता है। यह कार्बन का एकमात्र प्रमुख अपररूप है जो विद्युत का अच्छा चालक है।
प्रमुख गुण
- मुलायम एवं चिकना होता है।
- विद्युत का अच्छा चालक होता है।
- परतदार संरचना होती है।
- पेंसिल की लीड, इलेक्ट्रोड तथा स्नेहक (Lubricant) के रूप में उपयोग किया जाता है।
फुलरीन (Fullerene)
फुलरीन (Fullerene) कार्बन का एक आधुनिक अपररूप है। इसका सबसे प्रसिद्ध रूप C₆₀ (बकमिन्स्टरफुलरीन) है, जिसमें 60 कार्बन परमाणु फुटबॉल जैसी गोलाकार संरचना बनाते हैं। इसका नाम अमेरिकी वास्तुकार बकमिन्स्टर फुलर के नाम पर रखा गया है।
प्रमुख गुण
- गोलाकार पिंजरे जैसी संरचना होती है।
- C₆₀ इसका सबसे प्रसिद्ध रूप है।
- नैनो प्रौद्योगिकी एवं वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग किया जाता है।
चित्र – कार्बन के अपररूप
कार्बन की बहुमुखी प्रकृति (Versatile Nature of Carbon)
कार्बन की बहुमुखी प्रकृति (Versatile Nature of Carbon) वह गुण है, जिसके कारण कार्बन लाखों प्रकार के यौगिकों का निर्माण करता है। इसका मुख्य कारण श्रृंखलन (Catenation) तथा चतुसंयोजकता (Tetravalency) है।
श्रृंखलन (Catenation)
श्रृंखलन (Catenation) कार्बन का वह गुण है, जिसके कारण कार्बन परमाणु आपस में सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखाएँ तथा वलय (Rings) बनाते हैं। इसी गुण के कारण कार्बन लाखों प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करता है।
चतुसंयोजकता (Tetravalency)
चतुसंयोजकता (Tetravalency) कार्बन का वह गुण है, जिसके अनुसार कार्बन अपने चार संयोजक इलेक्ट्रॉनों के कारण चार सहसंयोजक बंध बना सकता है। इसी गुण के कारण कार्बन हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन तथा अन्य तत्वों के साथ अनेक स्थायी यौगिक बनाता है।
कार्बनिक यौगिक (Organic Compounds)
कार्बनिक यौगिक (Organic Compounds) वे यौगिक हैं, जिनमें मुख्य रूप से कार्बन उपस्थित होता है। सामान्यतः कार्बाइड, कार्बन के ऑक्साइड, कार्बोनेट तथा हाइड्रोजनकार्बोनेट को छोड़कर अधिकांश कार्बन यौगिक कार्बनिक यौगिक कहलाते हैं। कार्बन की चतुसंयोजकता तथा श्रृंखलन के कारण इनकी संख्या लाखों में है।
संतृप्त एवं असंतृप्त कार्बन यौगिक (Saturated and Unsaturated Carbon Compounds)
संतृप्त कार्बन यौगिक (Saturated Compounds) वे यौगिक हैं, जिनमें कार्बन-कार्बन के बीच केवल एकल सहसंयोजक बंध (Single Bond) होता है। इन्हें एल्केन (Alkanes) भी कहा जाता है।
उदाहरण: मीथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆), प्रोपेन (C₃H₈)
असंतृप्त कार्बन यौगिक (Unsaturated Compounds) वे यौगिक हैं, जिनमें कार्बन-कार्बन के बीच द्वि-आबंध (Double Bond) या त्रि-आबंध (Triple Bond) पाया जाता है। इन्हें क्रमशः एल्कीन (Alkenes) तथा एल्काइन (Alkynes) कहा जाता है।
उदाहरण: एथीन (C₂H₄), एथाइन (C₂H₂)
संतृप्त एवं असंतृप्त कार्बन यौगिक में अन्तर
| आधार | संतृप्त कार्बन यौगिक (Saturated Compounds) | असंतृप्त कार्बन यौगिक (Unsaturated Compounds) |
|---|---|---|
| कार्बन-कार्बन बंध | केवल एकल बंध (C–C) होते हैं। | एक या अधिक द्विबंध (C=C) अथवा त्रिबंध (C≡C) होते हैं। |
| अभिक्रियाशीलता | कम अभिक्रियाशील होते हैं। | अधिक अभिक्रियाशील होते हैं। |
| मुख्य अभिक्रिया | प्रतिस्थापन (Substitution) अभिक्रिया करते हैं। | योग (Addition) अभिक्रिया करते हैं। |
| उदाहरण | मीथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆), प्रोपेन (C₃H₈) | एथीन (C₂H₄), एथाइन (C₂H₂), प्रोपीन (C₃H₆) |
| हाइड्रोजन की मात्रा | अधिक होती है। | तुलनात्मक रूप से कम होती है। |
| सामान्य वर्ग | एल्केन (Alkanes) | एल्कीन (Alkenes) एवं एल्काइन (Alkynes) |
श्रृंखलाएँ, शाखाएँ एवं वलय (Chains, Branches and Rings)
कार्बन परमाणु आपस में जुड़कर सीधी श्रृंखला (Straight Chain), शाखायुक्त श्रृंखला (Branched Chain) तथा वलय (Ring) का निर्माण कर सकते हैं। यही कारण है कि समान आणविक सूत्र वाले कार्बन यौगिकों की संरचना अलग-अलग हो सकती है।
प्रमुख प्रकार
- सीधी श्रृंखला (Straight Chain): कार्बन परमाणु एक सीधी पंक्ति में जुड़े रहते हैं।
- शाखायुक्त श्रृंखला (Branched Chain): मुख्य श्रृंखला से एक या अधिक शाखाएँ निकलती हैं।
- वलय (Ring Structure): कार्बन परमाणु मिलकर बंद वलय बनाते हैं। उदाहरण: साइक्लोहेक्सेन (C₆H₁₂), बेंजीन (C₆H₆)
चित्र – कार्बन की श्रृंखलाएँ, शाखाएँ एवं वलय
हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons)
हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons) वे कार्बनिक यौगिक हैं, जिनमें केवल कार्बन (C) तथा हाइड्रोजन (H) परमाणु उपस्थित होते हैं।
हाइड्रोकार्बन मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं—
| प्रकार | सामान्य सूत्र | उदाहरण |
|---|---|---|
| एल्केन (Alkane) | CₙH₂ₙ₊₂ | मीथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆) |
| एल्कीन (Alkene) | CₙH₂ₙ | एथीन (C₂H₄) |
| एल्काइन (Alkyne) | CₙH₂ₙ₋₂ | एथाइन (C₂H₂) |
क्रियात्मक समूह (Functional Groups)
क्रियात्मक समूह (Functional Group) परमाणुओं का वह समूह है, जो किसी कार्बनिक यौगिक के विशिष्ट रासायनिक गुणों एवं अभिक्रियाओं को निर्धारित करता है।
| प्रमुख क्रियात्मक समूह | क्रियात्मक समूह | सूत्र | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| हैलो (Halo) | –Cl, –Br | R–Cl, R–Br | क्लोरोएथेन |
| एल्कोहॉल (Alcohol) | –OH | R–OH | एथेनॉल |
| एल्डिहाइड (Aldehyde) | –CHO | R–CHO | एथेनाल |
| कीटोन (Ketone) | >C=O | R–CO–R’ | प्रोपेनोन |
| कार्बोक्सिलिक अम्ल | –COOH | R–COOH | एथेनोइक अम्ल |
समजातीय श्रेणी (Homologous Series)
समजातीय श्रेणी (Homologous Series) समान क्रियात्मक समूह वाले कार्बनिक यौगिकों की वह श्रेणी है, जिसमें क्रमागत दो सदस्यों के आणविक सूत्र में –CH₂– का अंतर होता है तथा उनके रासायनिक गुण समान होते हैं।
समजातीय श्रेणी की विशेषताएँ
- सभी यौगिकों का क्रियात्मक समूह समान होता है।
- क्रमागत दो सदस्यों में –CH₂– का अंतर होता है।
- रासायनिक गुण समान होते हैं।
- आणविक द्रव्यमान बढ़ने पर भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है।
कार्बन यौगिकों का नामकरण (Nomenclature of Carbon Compounds)
कार्बन यौगिकों का नामकरण (Nomenclature) IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है।
किसी भी कार्बनिक यौगिक का नाम सामान्यतः तीन भागों से मिलकर बनता है—
उपसर्ग (Prefix) + मूल नाम (Root Name) + प्रत्यय (Suffix)
नामकरण के सामान्य नियम
- सबसे पहले कार्बन परमाणुओं की सबसे लंबी सतत (Continuous) श्रृंखला का चयन करें।
- इसके बाद श्रृंखला का क्रमांकन (Numbering) इस प्रकार किया जाता है कि एल्काइल समूह या साइड समूह को सबसे छोटी संख्या (Lowest Locant) प्राप्त हो
- चयनित मुख्य श्रृंखला में उपस्थित कार्बन परमाणुओं (C₁, C₂, C₃…) की संख्या के आधार पर Root Name निर्धारित करें।
- यदि सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single Bond) हों, तो एन (ane) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- यदि द्वि-आबंध (Double Bond) हो, तो ईन (ene) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- यदि त्रि-आबंध (Triple Bond) हो, तो आइन (yne) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
- यदि यौगिक में कोई क्रियात्मक समूह (Functional Group) उपस्थित हो, तो उसके अनुसार उपयुक्त प्रत्यय (Suffix) जोड़ा जाता है।
कार्बन परमाणुओं के अनुसार Root Name
| कार्बन परमाणु | Root Name |
|---|---|
| C₁ | Meth (मेथ) |
| C₂ | Eth (एथ) |
| C₃ | Prop (प्रोप) |
| C₄ | But (ब्यूट) |
| C₅ | Pent (पेंट) |
| C₆ | Hex (हेक्स) |
| C₇ | Hept (हेप्ट) |
| C₈ | Oct (ऑक्ट) |
एल्केन (Alkane) का नामकरण
क) सीधी श्रृंखला (Straight Chain)- यदि सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single Bond) हों, तो Root Name के साथ एन (ane) जोड़ा जाता है।
| आणविक सूत्र | IUPAC नाम |
|---|---|
| CH₄ | मीथेन (Methane) |
| C₂H₆ | एथेन (Ethane) |
| C₃H₈ | प्रोपेन (Propane) |
| C₄H₁₀ | ब्यूटेन (Butane) |
ख) शाखायुक्त एल्केन (Branched Alkane) का नामकरण
यदि मुख्य कार्बन श्रृंखला से एक या अधिक शाखाएँ जुड़ी हों, तो सबसे पहले सबसे लंबी सतत कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है। इसके बाद शाखा की स्थिति (Position) के अनुसार उसका नाम मुख्य श्रृंखला के पहले लिखा जाता है।
उदाहरण:
| संरचना | IUPAC नाम |
|---|---|
| CH₃–CH(CH₃)–CH₃ | 2-मेथाइलप्रोपेन (2-Methylpropane) |
| CH₃–CH(CH₃)–CH₂–CH₃ | 2-मेथाइलब्यूटेन (2-Methylbutane) |
ध्यान दें: यदि एक से अधिक शाखाएँ हों, तो उन्हें वर्णक्रम (Alphabetical Order) तथा उचित स्थान संख्या (Locant) के अनुसार लिखा जाता है।
ग) साइक्लोएल्केन (Cycloalkane) का नामकरण
यदि कार्बन परमाणु मिलकर बंद वलय (Ring) बनाते हैं तथा उनके बीच केवल एकल आबंध होते हैं, तो ऐसे यौगिक साइक्लोएल्केन (Cycloalkane) कहलाते हैं। इनके नाम के पहले Cyclo (साइक्लो-) उपसर्ग लगाया जाता है।
उदाहरण:
| आणविक सूत्र | IUPAC नाम |
|---|---|
| C₃H₆ | साइक्लोप्रोपेन (Cyclopropane) |
| C₄H₈ | साइक्लोब्यूटेन (Cyclobutane) |
| C₅H₁₀ | साइक्लोपेंटेन (Cyclopentane) |
| C₆H₁₂ | साइक्लोहेक्सेन (Cyclohexane) |
एल्कीन (Alkene) का नामकरण
एल्कीन (Alkene) वे हाइड्रोकार्बन हैं, जिनमें कार्बन-कार्बन के बीच कम-से-कम एक द्वि-आबंध (C=C) होता है। इनके नामकरण में सबसे पहले द्वि-आबंध को शामिल करने वाली सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है। इसके बाद श्रृंखला का क्रमांकन (Numbering) उस सिरे से किया जाता है, जहाँ से द्वि-आबंध को सबसे छोटी संख्या प्राप्त हो। अंत में Root Name के साथ –ीन (ene) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
नामकरण के उदाहरण
| संरचना | IUPAC नाम |
|---|---|
| CH₂=CH₂ | एथीन (Ethene) |
| CH₂=CH–CH₃ | प्रोपीन (Propene) |
| CH₂=CH–CH₂–CH₃ | ब्यूट-1-ईन (But-1-ene) |
| CH₃–CH=CH–CH₃ | ब्यूट-2-ईन (But-2-ene) |
एल्काइन (Alkyne) का नामकरण
एल्काइन (Alkyne) वे हाइड्रोकार्बन हैं, जिनमें कार्बन-कार्बन के बीच कम-से-कम एक त्रि-आबंध (C≡C) होता है। इनके नामकरण में सबसे पहले त्रि-आबंध को शामिल करने वाली सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है। इसके बाद श्रृंखला का क्रमांकन (Numbering) उस सिरे से किया जाता है, जहाँ से त्रि-आबंध को सबसे छोटी संख्या प्राप्त हो। अंत में Root Name के साथ –ाइन (yne) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
नामकरण के उदाहरण
| संरचना | IUPAC नाम |
|---|---|
| HC≡CH | एथाइन (Ethyne) |
| HC≡C–CH₃ | प्रोपाइन (Propyne) |
| HC≡C–CH₂–CH₃ | ब्यूट-1-आइन (But-1-yne) |
| CH₃–C≡C–CH₃ | ब्यूट-2-आइन (But-2-yne) |
क्रियात्मक समूह वाले यौगिकों का नामकरण (Nomenclature of Compounds with Functional Groups)
यदि कार्बनिक यौगिक में कोई क्रियात्मक समूह (Functional Group) उपस्थित हो, तो उसी के अनुसार यौगिक का नाम रखा जाता है। नामकरण में सबसे पहले सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है, फिर क्रियात्मक समूह को सबसे छोटी संख्या (Lowest Locant) दी जाती है। अंत में उपयुक्त उपसर्ग (Prefix) या प्रत्यय (Suffix) जोड़ा जाता है।
| प्रमुख क्रियात्मक समूह | क्रियात्मक समूह | सूत्र | उपसर्ग/प्रत्यय | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| हेलोएल्केन (Haloalkane) | –Cl, –Br, –I | R–Cl, R–Br, R–I | Fluoro-, Chloro-, Bromo-, Iodo- | क्लोरोमीथेन (CH₃Cl), ब्रोमोएथेन (C₂H₅Br) |
| एल्कोहॉल (Alcohol) | –OH | R–OH | –ऑल (ol) | एथेनॉल (C₂H₅OH) |
| एल्डिहाइड (Aldehyde) | –CHO | R–CHO | –एल (al) | एथेनाल (CH₃CHO) |
| कीटोन (Ketone) | >C=O | R–CO–R’ | –ओन (one) | प्रोपेनोन (CH₃COCH₃) |
| कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid) | –COOH | R–COOH | –ओइक अम्ल (oic acid) | एथेनोइक अम्ल (CH₃COOH) |
उदाहरण
CH₃Cl → क्लोरोमीथेन (Chloromethane)
C₂H₅OH → एथेनॉल (Ethanol)
CH₃CHO → एथेनाल (Ethanal)
CH₃COCH₃ → प्रोपेनोन (Propanone)
CH₃COOH → एथेनोइक अम्ल (Ethanoic Acid)
हेलोएल्केन (Haloalkane) का नामकरण
हेलोएल्केन (Haloalkane) वे कार्बनिक यौगिक हैं, जिनमें एल्केन के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं के स्थान पर हैलोजन (F, Cl, Br, I) उपस्थित होते हैं। इनके नामकरण में सबसे पहले सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है। इसके बाद श्रृंखला का क्रमांकन (Numbering) इस प्रकार किया जाता है कि हैलोजन को सबसे छोटी संख्या (Lowest Locant) प्राप्त हो। अंत में हैलोजन का नाम उपसर्ग (Prefix) के रूप में तथा एल्केन का नाम लिखा जाता है।
नामकरण के उदाहरण
| संरचना | IUPAC नाम |
|---|---|
| CH₃Cl | क्लोरोमीथेन (Chloromethane) |
| CH₃Br | ब्रोमोमीथेन (Bromomethane) |
| CH₃CH₂Cl | क्लोरोएथेन (Chloroethane) |
| CH₃CH₂CH₂Br | 1-ब्रोमोप्रोपेन (1-Bromopropane) |
| CH₃CHBrCH₃ | 2-ब्रोमोप्रोपेन (2-Bromopropane) |
ध्यान दें: यदि एक से अधिक हैलोजन उपस्थित हों, तो उनके नाम वर्णक्रम (Alphabetical Order) में लिखे जाते हैं तथा di-, tri-, tetra- जैसे उपसर्गों का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण:
CH₂Cl₂ → डाइक्लोरोमीथेन (Dichloromethane)
CHCl₃ → ट्राइक्लोरोमीथेन (Trichloromethane / Chloroform)
CCl₄ → टेट्राक्लोरोमीथेन (Tetrachloromethane)
एल्कोहॉल (Alcohol) का नामकरण
एल्कोहॉल (Alcohol) वे कार्बनिक यौगिक हैं, जिनमें हाइड्रॉक्सिल समूह (–OH) उपस्थित होता है। इनके नामकरण में सबसे पहले –OH समूह को शामिल करने वाली सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है। इसके बाद श्रृंखला का क्रमांकन (Numbering) उस सिरे से किया जाता है, जहाँ से –OH समूह को सबसे छोटी संख्या (Lowest Locant) प्राप्त हो। अंत में एल्केन के –ेन (ane) को हटाकर –ऑल (ol) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
नामकरण के उदाहरण
| संरचना | IUPAC नाम |
|---|---|
| CH₃OH | मेथेनॉल (Methanol) |
| CH₃CH₂OH | एथेनॉल (Ethanol) |
| CH₃CH₂CH₂OH | प्रोपेन-1-ऑल (Propan-1-ol) |
| CH₃CHOHCH₃ | प्रोपेन-2-ऑल (Propan-2-ol) |
| CH₃CH₂CH₂CH₂OH | ब्यूटेन-1-ऑल (Butan-1-ol) |
ध्यान दें: यदि यौगिक में –OH समूह एक से अधिक हों, तो diol, triol आदि प्रत्ययों का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण:
HO–CH₂–CH₂–OH → एथेन-1,2-डाइऑल (Ethane-1,2-diol)
HO–CH₂–CHOH–CH₂–OH → प्रोपेन-1,2,3-ट्राइऑल (Propane-1,2,3-triol)
एल्डिहाइड (Aldehyde) का नामकरण
एल्डिहाइड (Aldehyde) वे कार्बनिक यौगिक हैं, जिनमें एल्डिहाइड समूह (–CHO) कार्बन श्रृंखला के अंतिम कार्बन परमाणु पर उपस्थित होता है। इनके नामकरण में सबसे पहले –CHO समूह को शामिल करने वाली सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है। एल्डिहाइड समूह सदैव श्रृंखला के अंतिम कार्बन पर होता है, इसलिए इसका स्थान 1 माना जाता है। अंत में एल्केन के एन (ane) को हटाकर एल (al) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
नामकरण के उदाहरण
| संरचना | IUPAC नाम |
|---|---|
| HCHO | मेथेनाल (Methanal) |
| CH₃CHO | एथेनाल (Ethanal) |
| CH₃CH₂CHO | प्रोपेनाल (Propanal) |
| CH₃CH₂CH₂CHO | ब्यूटेनाल (Butanal) |
| CH₃(CH₂)₃CHO | पेंटेनाल (Pentanal) |
ध्यान दें: एल्डिहाइड समूह (–CHO) सदैव कार्बन श्रृंखला के अंतिम कार्बन पर होता है, इसलिए सामान्यतः इसकी स्थिति (Position Number) नहीं लिखी जाती। यदि >C=O समूह श्रृंखला के मध्य में हो, तो वह यौगिक कीटोन (Ketone) कहलाता है।
कीटोन (Ketone) का नामकरण
कीटोन (Ketone) वे कार्बनिक यौगिक हैं, जिनमें कार्बोनिल समूह (>C=O) कार्बन श्रृंखला के मध्य में उपस्थित होता है। इनके नामकरण में सबसे पहले >C=O समूह को शामिल करने वाली सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है। इसके बाद श्रृंखला का क्रमांकन (Numbering) उस सिरे से किया जाता है, जहाँ से >C=O समूह को सबसे छोटी संख्या (Lowest Locant) प्राप्त हो। अंत में एल्केन के –ेन (ane) को हटाकर –ओन (one) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
नामकरण के उदाहरण
| संरचना | IUPAC नाम |
|---|---|
| CH₃COCH₃ | प्रोपेनोन (Propanone) |
| CH₃COCH₂CH₃ | ब्यूटेन-2-ओन (Butan-2-one) |
| CH₃CH₂COCH₂CH₃ | पेंटेन-3-ओन (Pentan-3-one) |
ध्यान दें: कीटोन में >C=O समूह कभी भी कार्बन श्रृंखला के अंतिम कार्बन पर नहीं होता। यदि कार्बोनिल समूह श्रृंखला के अंतिम कार्बन पर हो, तो वह यौगिक एल्डिहाइड (Aldehyde) कहलाता है।
कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid) का नामकरण
कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid) वे कार्बनिक यौगिक हैं, जिनमें कार्बोक्सिल समूह (–COOH) उपस्थित होता है। इनके नामकरण में सबसे पहले –COOH समूह को शामिल करने वाली सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है। कार्बोक्सिल समूह सदैव श्रृंखला के अंतिम कार्बन परमाणु पर होता है, इसलिए इसका स्थान 1 माना जाता है। अंत में एल्केन के –ेन (ane) को हटाकर –ओइक अम्ल (oic acid) प्रत्यय जोड़ा जाता है।
नामकरण के उदाहरण
| संरचना | IUPAC नाम |
|---|---|
| HCOOH | मेथेनोइक अम्ल (Methanoic Acid) |
| CH₃COOH | एथेनोइक अम्ल (Ethanoic Acid) |
| CH₃CH₂COOH | प्रोपेनोइक अम्ल (Propanoic Acid) |
| CH₃CH₂CH₂COOH | ब्यूटेनोइक अम्ल (Butanoic Acid) |
| CH₃(CH₂)₃COOH | पेंटेनोइक अम्ल (Pentanoic Acid) |
कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण (Chemical Properties of Carbon Compounds)
कार्बन यौगिक अनेक प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएँ करते हैं। इनमें दहन (Combustion), ऑक्सीकरण (Oxidation), योग अभिक्रिया (Addition Reaction) तथा प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction) प्रमुख हैं। ये अभिक्रियाएँ कार्बनिक रसायन के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
दहन (Combustion)
दहन (Combustion) वह रासायनिक अभिक्रिया है, जिसमें कार्बन यौगिक ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), जल (H₂O) तथा ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
उदाहरण
CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + ऊष्मा
C₂H₅OH + 3O₂ → 2CO₂ + 3H₂O + ऊष्मा
दहन के प्रकार
पूर्ण दहन (Complete Combustion): पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने पर नीली एवं स्वच्छ ज्वाला के साथ होता है।
अपूर्ण दहन (Incomplete Combustion): ऑक्सीजन की कमी होने पर पीली धुएँदार ज्वाला बनती है तथा कार्बन (कालिख) या कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बन सकती है।
ऑक्सीकरण (Oxidation)
ऑक्सीकरण (Oxidation) वह अभिक्रिया है, जिसमें किसी पदार्थ में ऑक्सीजन जुड़ती है अथवा हाइड्रोजन निकलती है। कार्बनिक रसायन में ऑक्सीकरण के लिए सामान्यतः क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (Alkaline KMnO₄) अथवा अम्लीकृत पोटैशियम डाइक्रोमेट (Acidified K₂Cr₂O₇) का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण
CH₃CH₂OH + [O] → CH₃COOH + H₂O
(एथेनॉल → एथेनोइक अम्ल)
ध्यान दें: ऑक्सीकारक (Oxidising Agent) पदार्थ को ऑक्सीकरण करता है तथा स्वयं अपचयित हो जाता है।
योग अभिक्रिया (Addition Reaction)
योग अभिक्रिया (Addition Reaction) वह अभिक्रिया है, जिसमें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के द्वि या त्रि-आबंध पर अन्य परमाणु या परमाणुओं का समूह जुड़ जाता है, जिससे संतृप्त यौगिक बनता है।
सामान्य समीकरण
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन + H₂ ⟶ संतृप्त हाइड्रोकार्बन
(उत्प्रेरक: Ni/Pd/Pt)
उदाहरण
CH₂=CH₂ + H₂ → CH₃–CH₃
(एथीन → एथेन)
इस अभिक्रिया में निकल (Ni), प्लेटिनम (Pt) अथवा पैलेडियम (Pd) उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
इस प्रक्रिया को हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) कहते हैं।
प्रमुख उपयोग
- वनस्पति तेलों को वनस्पति घी (Vanaspati Ghee) में बदलने के लिए।
- खाद्य उद्योग में वसा के निर्माण में।
- रासायनिक उद्योग में विभिन्न संतृप्त यौगिकों के निर्माण में।
हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें असंतृप्त कार्बन यौगिक (एल्कीन या एल्काइन) के द्विबंध (C=C) या त्रिबंध (C≡C) पर हाइड्रोजन (H₂) का योग कर उन्हें संतृप्त यौगिक (एल्केन) में परिवर्तित किया जाता है। यह अभिक्रिया सामान्यतः निकेल (Ni), पैलेडियम (Pd) या प्लैटिनम (Pt) उत्प्रेरक की उपस्थिति में होती है।
प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction)
प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction) वह अभिक्रिया है, जिसमें किसी संतृप्त हाइड्रोकार्बन के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं के स्थान पर कोई अन्य परमाणु या परमाणुओं का समूह आ जाता है।
उदाहरण
CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl
(मीथेन → क्लोरोमीथेन)
यह अभिक्रिया सूर्य के प्रकाश अथवा पराबैंगनी (UV) प्रकाश की उपस्थिति में होती है।
ध्यान दें: प्रतिस्थापन अभिक्रिया मुख्यतः संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Alkanes) में होती है, जबकि योग अभिक्रिया असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Alkenes एवं Alkynes) में होती है।
कुछ महत्त्वपूर्ण कार्बन यौगिक – एथेनॉल एवं एथेनोइक अम्ल (Some Important Carbon Compounds – Ethanol and Ethanoic Acid)
दैनिक जीवन में अनेक कार्बनिक यौगिकों का उपयोग किया जाता है, जिनमें एथेनॉल (Ethanol) तथा एथेनोइक अम्ल (Ethanoic Acid) सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनका उपयोग उद्योगों, औषधियों, खाद्य पदार्थों तथा रासायनिक अभिक्रियाओं में व्यापक रूप से किया जाता है।
एथेनॉल (Ethanol)
एथेनॉल (Ethanol) एक रंगहीन, वाष्पशील तथा ज्वलनशील द्रव है, जिसका रासायनिक सूत्र C₂H₅OH है। यह एक एल्कोहॉल है तथा इसमें हाइड्रॉक्सिल समूह (–OH) उपस्थित होता है।
एथेनॉल के प्रमुख गुण
- रंगहीन एवं ज्वलनशील द्रव है।
- जल में पूर्णतः घुलनशील होता है।
- अच्छा विलायक (Solvent) है।
- औषधियों, इत्र, वार्निश तथा ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
ध्यान दें: एथेनॉल का अधिक मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है तथा यह यकृत (Liver) और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है।
एथेनॉल की अभिक्रियाएँ (Reactions of Ethanol)
(क) सोडियम के साथ अभिक्रिया
एथेनॉल, सोडियम धातु के साथ अभिक्रिया करके सोडियम एथॉक्साइड तथा हाइड्रोजन गैस बनाता है।
रासायनिक समीकरण:
2C₂H₅OH + 2Na → 2C₂H₅ONa + H₂↑
(ख) निर्जलीकरण अभिक्रिया (Dehydration Reaction)
सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (Conc. H₂SO₄) की उपस्थिति में लगभग 443 K (170°C) पर एथेनॉल से जल का एक अणु निकल जाता है तथा एथीन (C₂H₄) बनती है।
रासायनिक समीकरण:
C₂H₅OH → C₂H₄ + H₂O
एथेनोइक अम्ल (Ethanoic Acid)
एथेनोइक अम्ल (Ethanoic Acid) एक रंगहीन, तीव्र गंध वाला कार्बोक्सिलिक अम्ल है, जिसका रासायनिक सूत्र CH₃COOH है। इसे सामान्यतः एसीटिक अम्ल (Acetic Acid) भी कहा जाता है।
एथेनोइक अम्ल के प्रमुख गुण
- रंगहीन द्रव होता है।
- तीखी गंध होती है।
- जल में पूर्णतः घुलनशील होता है।
- सिरके (Vinegar) का मुख्य घटक है।
रोचक तथ्य: शुद्ध एथेनोइक अम्ल का गलनांक लगभग 16.6°C होता है। ठंडे वातावरण में यह बर्फ जैसा दिखाई देने लगता है, इसलिए इसे हिमानी एसीटिक अम्ल (Glacial Acetic Acid) कहा जाता है।
एस्टरीकरण अभिक्रिया (Esterification Reaction)
एस्टरीकरण (Esterification) वह अभिक्रिया है, जिसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा एल्कोहॉल की अभिक्रिया से एस्टर (Ester) तथा जल बनते हैं। यह अभिक्रिया सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (Conc. H₂SO₄) की उपस्थिति में होती है।
रासायनिक समीकरण
CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O
(एथेनोइक अम्ल + एथेनॉल → एथिल एथेनोएट + जल)
एस्टर सामान्यतः फलों जैसी सुगंध वाले होते हैं, इसलिए इनका उपयोग इत्र एवं खाद्य पदार्थों में किया जाता है।
साबुनीकरण अभिक्रिया (Saponification Reaction)
साबुनीकरण (Saponification) एस्टर की क्षार (NaOH) के साथ होने वाली अभिक्रिया है, जिसमें एल्कोहॉल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण (साबुन) बनता है।
रासायनिक समीकरण
CH₃COOC₂H₅ + NaOH → CH₃COONa + C₂H₅OH
(एथिल एथेनोएट + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → सोडियम एथेनोएट + एथेनॉल)
क्षारों के साथ अभिक्रिया (Reaction with Bases)
एथेनोइक अम्ल क्षारों के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं जल बनाता है।
रासायनिक समीकरण
CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O
कार्बोनेट एवं हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया
एथेनोइक अम्ल, कार्बोनेट एवं हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस उत्पन्न करता है।
रासायनिक समीकरण
2CH₃COOH + Na₂CO₃ → 2CH₃COONa + H₂O + CO₂↑
CH₃COOH + NaHCO₃ → CH₃COONa + H₂O + CO₂↑
साबुन एवं अपमार्जक (Soaps and Detergents)
साबुन एवं अपमार्जक ऐसे पदार्थ हैं, जिनका उपयोग कपड़े, बर्तन तथा अन्य वस्तुओं की सफाई के लिए किया जाता है। दोनों की सफाई करने की विधि लगभग समान होती है, लेकिन उनकी संरचना एवं कठोर जल में कार्य करने की क्षमता अलग-अलग होती है।
साबुन (Soap)
साबुन (Soap) उच्च वसीय अम्लों (Higher Fatty Acids) के सोडियम (Na⁺) अथवा पोटैशियम (K⁺) लवण होते हैं।
ये सामान्यतः वनस्पति तेलों या वसा की क्षार के साथ अभिक्रिया (साबुनीकरण) द्वारा प्राप्त किए जाते हैं। साबुन का प्रत्येक अणु एक जलरागी (Hydrophilic) शीर्ष तथा एक जलविरागी (Hydrophobic) लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ से मिलकर बना होता है, जिसके कारण यह चिकनाई एवं मैल को हटाने में सक्षम होता है।
साबुन की सफाई क्रिया (Cleaning Action of Soap)
साबुन (Soap) उच्च वसीय अम्लों (Higher Fatty Acids) के सोडियम अथवा पोटैशियम लवण होते हैं। साबुन का प्रत्येक अणु दो भागों से मिलकर बना होता है—
- जलरागी (Hydrophilic) शीर्ष – जल की ओर आकर्षित होता है।
- जलविरागी (Hydrophobic) पूँछ – तेल एवं चिकनाई की ओर आकर्षित होती है।
जब साबुन को पानी में मिलाया जाता है, तो इसकी जलविरागी पूँछ चिकनाई से चिपक जाती है तथा जलरागी शीर्ष पानी की ओर रहता है, इस प्रकार बनी संरचना को माइसेल कहते हैं और चिकनाई छोटे-छोटे कणों में टूटकर पानी के साथ बह जाती है।
चित्र – साबुन की सफाई क्रिया
माइसेल (Micelle)
माइसेल (Micelle) साबुन के अणुओं द्वारा पानी में चिकनाई (Grease/Oil) के कण के चारों ओर बनाई गई गोलाकार संरचना है। इसमें साबुन की जलविरागी (Hydrophobic) लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ चिकनाई के कण की ओर अर्थात् अंदर की ओर रहती है, जबकि जलरागी (Hydrophilic) शीर्ष पानी की ओर अर्थात् बाहर की ओर रहता है। इस प्रकार चिकनाई माइसेल के अंदर घिर जाती है और पानी से धोने पर आसानी से बाहर निकल जाती है।
कठोर एवं मृदु जल में साबुन की क्रिया
मृदु जल (Soft Water) में साबुन आसानी से झाग बनाता है तथा सफाई अच्छी होती है।
कठोर जल (Hard Water) में उपस्थित कैल्शियम (Ca²⁺) एवं मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयन साबुन के साथ अभिक्रिया करके अघुलनशील मैल (Scum) बना देते हैं। इसलिए कठोर जल में साबुन कम झाग बनाता है तथा सफाई भी कम प्रभावी होती है।
अपमार्जक (Detergents)
अपमार्जक (Detergents) कृत्रिम (Synthetic) सफाई पदार्थ हैं, जो सामान्यतः सल्फोनिक अम्ल (–SO₃H) अथवा सल्फेट (–OSO₃H) के सोडियम लवणों से बनाए जाते हैं।
इनकी संरचना भी साबुन की तरह जलरागी शीर्ष तथा जलविरागी लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ वाली होती है, इसलिए ये चिकनाई को प्रभावी ढंग से हटाते हैं। अपमार्जक कठोर जल में भी आसानी से कार्य करते हैं, क्योंकि ये कैल्शियम (Ca²⁺) एवं मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयनों के साथ अघुलनशील मैल (Scum) नहीं बनाते।
अपमार्जकों के प्रमुख गुण
- कठोर जल में भी अच्छी सफाई करते हैं।
- अधिक झाग बनाते हैं।
- कपड़े धोने के पाउडर एवं शैंपू में उपयोग किए जाते हैं।
✅ महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)
- कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है।
- कार्बन की संयोजकता 4 होती है।
- सहसंयोजक बंध इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनता है।
- मीथेन सबसे सरल हाइड्रोकार्बन है।
- हीरा कार्बन का सबसे कठोर अपररूप है।
- ग्रेफाइट विद्युत का अच्छा चालक है।
- फुलरीन का प्रसिद्ध रूप C₆₀ है।
- श्रृंखलन के कारण कार्बन लाखों यौगिक बनाता है।
- संतृप्त यौगिकों में केवल एकल आबंध होते हैं।
- असंतृप्त यौगिकों में द्वि या त्रि-आबंध होते हैं।
- एथेनॉल का सूत्र C₂H₅OH है।
- एथेनोइक अम्ल का सूत्र CH₃COOH है।
- एस्टरीकरण से एस्टर एवं जल बनते हैं।
- साबुनीकरण में एस्टर से साबुन बनता है।
- माइसेल साबुन की सफाई क्रिया का आधार है।
📝 महत्वपूर्ण रासायनिक सूत्र एवं सामान्य नाम
| यौगिक | रासायनिक सूत्र | सामान्य नाम |
|---|---|---|
| मीथेन | CH₄ | Marsh Gas |
| एथीन | C₂H₄ | Ethylene |
| एथाइन | C₂H₂ | Acetylene |
| मेथेनॉल | CH₃OH | Wood Spirit |
| एथेनॉल | C₂H₅OH | Alcohol / Spirit |
| मेथेनोइक अम्ल | HCOOH | Formic Acid |
| एथेनोइक अम्ल | CH₃COOH | Acetic Acid / Vinegar (Dilute Solution) |
| एथिल एथेनोएट | CH₃COOC₂H₅ | Ester |
| ग्लूकोज़ | C₆H₁₂O₆ | Grape Sugar |
| सुक्रोज़ | C₁₂H₂₂O₁₁ | Cane Sugar |
❓FAQs (CBSE Board PYQs)
- सहसंयोजक बंध क्या है?
उत्तर: दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनने वाला बंध सहसंयोजक बंध कहलाता है।
- कार्बन की संयोजकता कितनी होती है?
उत्तर: कार्बन की संयोजकता 4 होती है।
- कार्बन का सबसे कठोर अपररूप कौन-सा है?
उत्तर: हीरा (Diamond)।
- ग्रेफाइट विद्युत का चालक क्यों है?
उत्तर: इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं।
- श्रृंखलन क्या है?
उत्तर: कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ बनाना।
- एथेनॉल का रासायनिक सूत्र क्या है?
उत्तर: C₂H₅OH
- एथेनोइक अम्ल का सामान्य नाम क्या है?
उत्तर: एसीटिक अम्ल (Acetic Acid)
- एस्टरीकरण अभिक्रिया में क्या बनता है?
उत्तर: एस्टर एवं जल।
- साबुनीकरण क्या है?
उत्तर: एस्टर की क्षार के साथ अभिक्रिया से साबुन बनना।
- माइसेल क्या है?
उत्तर: पानी में साबुन के अणुओं द्वारा बनी गोलाकार संरचना।
- कठोर जल में साबुन कम झाग क्यों बनाता है?
उत्तर: क्योंकि Ca²⁺ एवं Mg²⁺ आयनों के साथ अघुलनशील मैल बनता है।
- अपमार्जक का एक लाभ लिखिए।
उत्तर: यह कठोर जल में भी प्रभावी सफाई करता है।
- सबसे सरल हाइड्रोकार्बन कौन-सा है?
उत्तर: मीथेन (CH₄)
- संतृप्त यौगिक किसे कहते हैं?
उत्तर: जिनमें केवल एकल आबंध होते हैं।
- असंतृप्त यौगिक किसे कहते हैं?
उत्तर: जिनमें द्वि या त्रि-आबंध पाए जाते हैं।
🎯 प्रतियोगी परीक्षा टिप्स
- हीरा, ग्रेफाइट एवं फुलरीन के गुणों की तुलना याद रखें।
- संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में अंतर अवश्य पढ़ें।
- सभी प्रमुख क्रियात्मक समूह एवं उनके प्रत्यय याद रखें।
- एस्टरीकरण एवं साबुनीकरण की रासायनिक अभिक्रियाएँ अभ्यास करें।
- एथेनॉल एवं एथेनोइक अम्ल के उपयोग तथा अभिक्रियाएँ बोर्ड एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण हैं।
- साबुन एवं अपमार्जक में अंतर अवश्य याद रखें।
🏁 निष्कर्ष
कार्बन अपनी चतुसंयोजकता एवं श्रृंखलन के कारण लाखों कार्बनिक यौगिकों का निर्माण करता है। यही कारण है कि यह जीवन तथा उद्योग दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। इस अध्याय में हमने सहसंयोजक बंध, कार्बन के अपररूप, हाइड्रोकार्बन, क्रियात्मक समूह, कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण, एथेनॉल, एथेनोइक अम्ल तथा साबुन एवं अपमार्जकों का अध्ययन किया। इन अवधारणाओं की अच्छी समझ बोर्ड परीक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी है।





