Class 10 Science Notes

धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) : कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3

📖 परिचय – धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) एक महत्वपूर्ण रसायन विज्ञान अध्याय है। इस अध्याय में धातुओं (Metals) एवं अधातुओं (Non-metals) के भौतिक एवं रासायनिक गुण, अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series), आयनिक (वैद्युत संयोजी) बंध, धातुओं का निष्कर्षण (Metallurgy), संक्षारण (Corrosion) तथा मिश्रधातुओं (Alloys) का अध्ययन किया जाता है। यह अध्याय CBSE बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ NEET Foundation, Olympiad तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

हमारे दैनिक जीवन में लोहे, ताँबे, एल्यूमिनियम, सोने, चाँदी जैसी धातुओं तथा ऑक्सीजन, कार्बन, सल्फर, क्लोरीन जैसी अधातुओं का व्यापक उपयोग होता है। इनके गुणों को समझे बिना आधुनिक विज्ञान, उद्योग एवं प्रौद्योगिकी की कल्पना नहीं की जा सकती। इस अध्याय में आप जानेंगे कि धातुएँ चमकदार क्यों होती हैं, बिजली की अच्छी चालक क्यों होती हैं, कुछ धातुएँ पानी या अम्लों के साथ तीव्र अभिक्रिया क्यों करती हैं तथा अयस्कों से शुद्ध धातु कैसे प्राप्त की जाती है।

📚 विषय सूची

  • धातुओं के भौतिक गुण
  • धात्विक चमक (Metallic Lustre)
  • कठोरता
  • आघातवर्धनीयता (Malleability)
  • तन्यता (Ductility)
  • ऊष्मा एवं विद्युत चालकता
  • ध्वन्यात्मकता (Sonority)
  • अधातुओं के भौतिक गुण
  • धातुओं के रासायनिक गुण
  • वायु के साथ अभिक्रिया
  • जल के साथ अभिक्रिया
  • अम्लों के साथ अभिक्रिया
  • धातु लवणों के विलयनों के साथ अभिक्रिया
  • अभिक्रियाशीलता श्रेणी
  • आयनिक बंध
  • धातुओं का निष्कर्षण
  • संक्षारण
  • मिश्रधातु
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • सभी महत्वपूर्ण सूत्र
  • बोर्ड परीक्षा FAQs
  • प्रतियोगी परीक्षा टिप्स
  • निष्कर्ष

धातुओं के भौतिक गुण (Physical Properties of Metals)

किसी पदार्थ की पहचान उसके भौतिक गुणों के आधार पर भी की जाती है। धातुओं में कुछ ऐसे सामान्य गुण पाए जाते हैं जो उन्हें अधातुओं से अलग बनाते हैं। हालांकि कुछ अपवाद भी मिलते हैं, फिर भी अधिकांश धातुएँ समान भौतिक गुण प्रदर्शित करती हैं। 

धातुओं के प्रमुख भौतिक गुण हैं—

  • धात्विक चमक
  • कठोरता
  • आघातवर्धनीयता
  • तन्यता
  • ऊष्मा एवं विद्युत चालकता
  • ध्वन्यात्मकता

✨धात्विक चमक (Metallic Lustre)

शुद्ध धातुओं की सतह सामान्यतः चमकदार (Shiny) होती है। इस गुण को धात्विक चमक (Metallic Lustre) कहते हैं।

यदि किसी धातु की सतह पर धूल या ऑक्साइड की परत जम जाए, तो उसकी चमक कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में सैंडपेपर से रगड़ने पर धातु पुनः चमकने लगती है। यही कारण है कि ताँबे, एल्यूमिनियम और चाँदी के बर्तन समय-समय पर साफ किए जाते हैं। 

दैनिक जीवन के उदाहरण

  • सोने के आभूषण
  • चाँदी के बर्तन
  • स्टील के बर्तन
  • एल्यूमिनियम फॉयल

🔨 कठोरता (Hardness)

अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं। अर्थात् इन्हें आसानी से काटा या तोड़ा नहीं जा सकता। परन्तु सभी धातुओं की कठोरता समान नहीं होती।

उदाहरण के लिए—

  • लोहा कठोर होता है।
  • ताँबा अपेक्षाकृत कम कठोर होता है।
  • सोडियम, लिथियम (Li) तथा पोटैशियम इतने मुलायम होते हैं कि इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है। 

NOTE – लिथियम (Li), सोडियम (Na) तथा पोटैशियम (K) अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ हैं।  ये वायु में उपस्थित ऑक्सीजन एवं नमी के संपर्क में आते ही तीव्र अभिक्रिया करने लगती हैं तथा कभी-कभी आग भी पकड़ सकती हैं। इसलिए इन्हें वायु और नमी के सीधे संपर्क से बचाने के लिए मिट्टी के तेल (Kerosene Oil) में सुरक्षित रखा जाता है।

🔨 आघातवर्धनीयता (Malleability)

धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें पीटकर पतली चादरों (Sheets) में बदला जा सकता है, आघातवर्धनीयता कहलाता है।

इस गुण के कारण धातुओं से अनेक प्रकार की वस्तुएँ बनाई जाती हैं।

उदाहरण

  • एल्यूमिनियम फॉयल
  • स्टील की प्लेटें
  • ताँबे की चादरें
  • सोना (Gold) तथा चाँदी (Silver) सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं। 

उपयोग

  • आभूषण निर्माण
  • बर्तन निर्माण
  • वाहन उद्योग
  • मशीनों के भाग

🧵तन्यता (Ductility)

धातुओं का वह गुण जिसके कारण उन्हें पतले तारों (Wires) में खींचा जा सकता है, तन्यता (Ductility) कहलाता है।

उदाहरण

  • ताँबे के विद्युत तार
  • एल्यूमिनियम के तार
  • स्टील वायर
  • सोना संसार की सबसे अधिक तन्य धातु है। केवल 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किलोमीटर लंबा तार बनाया जा सकता है। 

उपयोग

  • विद्युत तार
  • केबल
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
  • दूरसंचार

🔥⚡ ऊष्मा एवं विद्युत चालकता

धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत दोनों की अच्छी चालक होती हैं।

इसी कारण—

  • खाना बनाने के बर्तन एल्यूमिनियम एवं ताँबे के बनाए जाते हैं।
  • विद्युत तारों में मुख्यतः ताँबे तथा एल्यूमिनियम का उपयोग किया जाता है।
  • चाँदी (Silver) ऊष्मा एवं विद्युत की सर्वोत्तम चालक है, जबकि ताँबा (Copper) कम लागत होने के कारण अधिक उपयोग में लाया जाता है। 

🔔 ध्वन्यात्मकता (Sonority)

जब किसी धातु पर चोट की जाती है, तो उससे घनघनाहट जैसी स्पष्ट ध्वनि उत्पन्न होती है। इस गुण को ध्वन्यात्मकता (Sonority) कहते हैं।

इसी कारण—

  • स्कूल की घंटियाँ
  • मंदिर की घंटियाँ
  • पीतल की घंटियाँ
  • धातुओं से बनाई जाती हैं। 

📖 इस भाग में आपने क्या सीखा?

  • ✅ धातुएँ चमकदार होती हैं।
  • ✅ अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं।
  • ✅ धातुओं को पीटकर चादर बनाई जा सकती है।
  • ✅ धातुओं से तार बनाए जा सकते हैं।
  • ✅ धातुएँ ऊष्मा एवं विद्युत की अच्छी चालक होती हैं।
  • ✅ धातुओं पर चोट करने से ध्वनि उत्पन्न होती है।

धातुओं के रासायनिक गुण (Chemical Properties of Metals)

धातुओं के रासायनिक गुणों का अध्ययन यह समझने के लिए किया जाता है कि वे विभिन्न पदार्थों के साथ किस प्रकार अभिक्रिया करती हैं। धातुएँ सामान्यतः ऑक्सीजन, जल, अम्ल तथा धातु लवणों के विलयनों के साथ अभिक्रिया करके नए यौगिक बनाती हैं। इन अभिक्रियाओं के आधार पर उनकी अभिक्रियाशीलता का निर्धारण किया जाता है। 

वायु (ऑक्सीजन) के साथ अभिक्रिया

लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड (Metal Oxide) बनाती हैं।

सामान्य अभिक्रिया

धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड

उदाहरण:

2Mg + O₂ → 2MgO

  • मैग्नीशियम की पट्टी को जलाने पर वह चमकीली सफेद लौ के साथ जलती है तथा सफेद रंग का मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) बनाती है। 

धातु ऑक्साइडों की प्रकृति

अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय (Basic) होते हैं। जब ये जल के साथ अभिक्रिया करते हैं, तो क्षार (Base) बनाते हैं।

उदाहरण:

MgO + H₂O → Mg(OH)₂

कुछ धातु ऑक्साइड जैसे एल्यूमिनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO) उभयधर्मी (Amphoteric) होते हैं। ये अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं। 

जल के साथ अभिक्रिया

सभी धातुएँ जल के साथ समान प्रकार से अभिक्रिया नहीं करतीं। कुछ धातुएँ ठंडे जल, कुछ गर्म जल तथा कुछ केवल भाप (Steam) के साथ अभिक्रिया करती हैं। जबकि कुछ धातुएँ जल के साथ बिल्कुल भी अभिक्रिया नहीं करतीं।

ठंडे जल के साथ अभिक्रिया

पोटैशियम (K) और सोडियम (Na) ठंडे जल के साथ अत्यधिक तीव्र अभिक्रिया करते हैं। इस अभिक्रिया में अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है तथा हाइड्रोजन गैस निकलती है, जो कई बार आग भी पकड़ सकती है।

2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑

कैल्शियम (Ca) भी ठंडे जल के साथ अभिक्रिया करता है, लेकिन इसकी अभिक्रिया सोडियम एवं पोटैशियम की तुलना में कम तीव्र होती है।

Ca + 2H₂O → Ca(OH)₂ + H₂↑

गर्म जल के साथ अभिक्रिया

मैग्नीशियम (Mg) ठंडे जल के साथ बहुत धीमी अभिक्रिया करता है, लेकिन गर्म जल के साथ इसकी अभिक्रिया तेज हो जाती है।

भाप (Steam) के साथ अभिक्रिया

एल्यूमिनियम (Al), जिंक (Zn) तथा लोहा (Fe) सामान्य जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते, लेकिन भाप के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।

उदाहरण:

3Fe + 4H₂O (Steam) → Fe₃O₄ + 4H₂↑

जल के साथ अभिक्रिया न करने वाली धातुएँ

कुछ धातुएँ बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं, इसलिए वे जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।

इनमें प्रमुख हैं—

  • ताँबा (Cu)
  • चाँदी (Ag)
  • सोना (Au)
  • प्लैटिनम (Pt)

अम्लों के साथ अभिक्रिया (Reaction of Metals with Acids)

अधिकांश धातुएँ तनु अम्लों (Dilute Acids) के साथ अभिक्रिया करके लवण (Salt) तथा हाइड्रोजन गैस (H₂) बनाती हैं। यह धातुओं का एक महत्वपूर्ण रासायनिक गुण है। हालांकि सभी धातुएँ समान प्रकार से अभिक्रिया नहीं करतीं। अत्यधिक कम अभिक्रियाशील धातुएँ, जैसे ताँबा, चाँदी और सोना, तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।

सामान्य अभिक्रिया

धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस

उदाहरण

Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑

Mg + 2HCl → MgCl₂ + H₂↑

इन अभिक्रियाओं में बनने वाली हाइड्रोजन गैस को जलती हुई तीली के पास लाने पर ‘पॉप’ (Pop) ध्वनि के साथ जलती है, जिससे उसकी पहचान की जाती है। 

नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) के साथ अभिक्रिया

सामान्यतः नाइट्रिक अम्ल धातुओं के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस उत्पन्न नहीं करता, क्योंकि यह एक प्रबल ऑक्सीकारक (Strong Oxidising Agent) है। यह बनने वाली हाइड्रोजन गैस का जल में ऑक्सीकरण कर देता है तथा स्वयं नाइट्रोजन के ऑक्साइडों में अपचयित हो जाता है।

रासायनिक समीकरण:

Cu + 4HNO₃ (सांद्र) → Cu(NO₃)₂ + 2NO₂ + 2H₂O

इसी प्रकार, तनु नाइट्रिक अम्ल (Dilute Nitric Acid) के साथ अभिक्रिया करने पर:

3Cu + 8HNO₃ (तनु) → 3Cu(NO₃)₂ + 2NO + 4H₂O

अपवाद: बहुत तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ मैग्नीशियम (Mg) तथा मैंगनीज (Mn) हाइड्रोजन गैस उत्पन्न कर सकते हैं। 

उदाहरण 1:

Mg + 2HNO₃ (बहुत तनु) → Mg(NO₃)₂ + H₂↑

उदाहरण 2:

Mn + 2HNO₃ (बहुत तनु) → Mn(NO₃)₂ + H₂↑

धातु लवणों के विलयनों के साथ अभिक्रिया (Reaction of Metals with Salt Solutions)

अधिक अभिक्रियाशील धातु, कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित (Displace) कर देती है। इसे विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction) कहते हैं। यदि धातु कम अभिक्रियाशील हो, तो वह किसी अन्य धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित नहीं कर सकती। 

उदाहरण 1

Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu

धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय का चित्र, जिसमें जिंक की पट्टी को कॉपर सल्फेट विलयन में डालने पर ताँबे का विस्थापन दिखाया गया है।

चित्र – जिंक एवं कॉपर सल्फेट की विस्थापन अभिक्रिया

इस अभिक्रिया में जिंक, कॉपर सल्फेट के विलयन से ताँबे को विस्थापित कर देता है। परिणामस्वरूप नीले रंग का कॉपर सल्फेट विलयन धीरे-धीरे रंगहीन हो जाता है तथा जिंक की सतह पर ताँबे की लाल-भूरी परत जम जाती है। 

उदाहरण 2

Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu

इस अभिक्रिया में लोहा, कॉपर सल्फेट के विलयन से ताँबे को विस्थापित कर देता है।

ध्यान दें

यदि ताँबे की पट्टी को जिंक सल्फेट (ZnSO₄) के विलयन में रखा जाए, तो कोई अभिक्रिया नहीं होती क्योंकि ताँबा, जिंक से कम अभिक्रियाशील है। 

अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series)

धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर जो सूची प्राप्त होती है, उसे अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) कहते हैं। यह श्रेणी यह बताती है कि कौन-सी धातु अधिक अभिक्रियाशील है तथा कौन-सी कम। 

अभिक्रियाशीलता श्रेणी

K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > (H) > Cu > Hg > Ag > Au

धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय का चार्ट, जिसमें पोटैशियम से सोने तक धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी तथा हाइड्रोजन की स्थिति दर्शाई गई है।

चित्र  – धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी

इस श्रेणी में—

  • ऊपर की धातुएँ अधिक अभिक्रियाशील होती हैं।
  • नीचे की धातुएँ कम अभिक्रियाशील होती हैं।
  • हाइड्रोजन को तुलना के लिए इस श्रेणी में रखा गया है, यद्यपि वह धातु नहीं है। 

अभिक्रियाशीलता श्रेणी का महत्व

  • धातुओं की विस्थापन अभिक्रिया का अनुमान लगाया जा सकता है।
  • किसी धातु के निष्कर्षण की विधि का चयन करने में सहायता मिलती है।
  • धातुओं की जल एवं अम्लों के साथ अभिक्रियाशीलता को समझना आसान होता है।
  • उद्योगों में उपयुक्त धातु के चयन में इसका उपयोग किया जाता है।

धातु एवं अधातु कैसे अभिक्रिया करते हैं? (How Do Metals and Non-metals React?)

धातुएँ तथा अधातुएँ आपस में अभिक्रिया करके आयनिक यौगिक (Ionic Compounds) बनाती हैं। इस प्रक्रिया में धातु अपने बाह्यतम कक्ष (Valence Shell) के इलेक्ट्रॉनों का त्याग करती है, जबकि अधातु उन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती है। परिणामस्वरूप विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच उत्पन्न वैद्युत आकर्षण बल के कारण आयनिक यौगिक का निर्माण होता है। 

धातुएँ सामान्यतः धनायन (Cation) बनाती हैं, जबकि अधातुएँ ऋणायन (Anion) बनाती हैं।

उदाहरण के लिए—

सोडियम (Na) एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर Na⁺ बनाता है।

क्लोरीन (Cl) एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ बनाता है।

इन दोनों आयनों के बीच वैद्युत आकर्षण के कारण सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण होता है। 

आयनिक (वैद्युत संयोजी) बंध (Ionic Bond)

विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच उत्पन्न वैद्युत आकर्षण बल को आयनिक या वैद्युत संयोजी बंध कहते हैं।

इस बंध के बनने में इलेक्ट्रॉनों का साझा (Sharing) नहीं, बल्कि स्थानांतरण (Transfer) होता है। यही आयनिक बंध को सहसंयोजक बंध से अलग बनाता है। 

आयनिक बंध बनने की प्रक्रिया

  • धातु अपने संयोजक इलेक्ट्रॉन त्यागती है।
  • अधातु उन इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती है।
  • धनायन एवं ऋणायन बनते हैं।
  • दोनों आयनों के बीच आकर्षण बल उत्पन्न होता है।
  • आयनिक यौगिक का निर्माण हो जाता है।

सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण

सोडियम के परमाणु के बाह्यतम कक्ष में 1 इलेक्ट्रॉन होता है, जबकि क्लोरीन के बाह्यतम कक्ष में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं। स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए सोडियम अपना एक इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को दे देता है।

Na → Na⁺ + e⁻

Cl + e⁻ → Cl⁻

इसके बाद—

Na⁺ + Cl⁻ → NaCl

इस प्रकार सोडियम क्लोराइड का निर्माण होता है। 

धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय का चित्र, जिसमें सोडियम द्वारा इलेक्ट्रॉन त्यागकर क्लोरीन को देने तथा NaCl के आयनिक बंध बनने की प्रक्रिया दर्शाई गई है।

चित्र – सोडियम क्लोराइड का निर्माण

मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl₂) का निर्माण

मैग्नीशियम के बाह्यतम कक्ष में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह दोनों इलेक्ट्रॉन त्यागकर Mg²⁺ आयन बनाता है। दूसरी ओर, दो क्लोरीन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके 2Cl⁻ आयन बनाते हैं।

Mg → Mg²⁺ + 2e⁻

2Cl + 2e⁻ → 2Cl⁻

इसके बाद—

Mg²⁺ + 2Cl⁻ → MgCl₂

इस प्रकार मैग्नीशियम क्लोराइड का निर्माण होता है। 

धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय का चित्र, जिसमें मैग्नीशियम द्वारा दो इलेक्ट्रॉन त्यागकर दो क्लोरीन परमाणुओं के साथ MgCl₂ बनने की प्रक्रिया दिखाई गई है।

चित्र – मैग्नीशियम क्लोराइड का निर्माण

आयनिक यौगिकों के गुण (Properties of Ionic Compounds)

आयनिक यौगिकों के गुण उनके आयनों के बीच उपस्थित प्रबल वैद्युत आकर्षण बल के कारण होते हैं। इसी कारण इनके भौतिक गुण सामान्य सहसंयोजक यौगिकों से भिन्न होते हैं। 

(i) भौतिक प्रकृति

आयनिक यौगिक सामान्यतः कठोर एवं भंगुर ठोस होते हैं। इन पर अधिक बल लगाने पर ये टूट जाते हैं।

(ii) गलनांक एवं क्वथनांक

आयनिक यौगिकों में आयनों के बीच आकर्षण बल बहुत अधिक होता है। इसलिए इन्हें पिघलाने या उबालने के लिए अधिक ऊष्मा की आवश्यकता होती है। इसी कारण इनका गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होता है। 

(iii) विलेयता

अधिकांश आयनिक यौगिक जल में घुलनशील होते हैं, जबकि पेट्रोल, मिट्टी का तेल तथा अन्य कार्बनिक विलायकों में सामान्यतः नहीं घुलते। 

(iv) विद्युत चालकता

ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि उनके आयन स्वतंत्र रूप से गति नहीं कर सकते।

लेकिन गलित (Molten) अवस्था या जलीय विलयन में आयन स्वतंत्र रूप से गति करते हैं, इसलिए ये विद्युत का चालन करते हैं। 

धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय का चित्र, जिसमें ठोस तथा पिघले हुए सोडियम क्लोराइड की विद्युत चालकता की तुलना दिखाई गई है।

चित्र – आयनिक यौगिकों की विद्युत चालकता

धातुओं की उपलब्धता (Occurrence of Metals)

प्रकृति में अधिकांश धातुएँ मुक्त अवस्था में नहीं पाई जातीं, क्योंकि वे वायु, जल तथा अन्य तत्वों के साथ अभिक्रिया करके यौगिक बना लेती हैं। केवल कम अभिक्रियाशील धातुएँ, जैसे सोना (Au), चाँदी (Ag) तथा प्लैटिनम (Pt), कभी-कभी मुक्त अवस्था में प्राप्त होती हैं। अधिकतर धातुएँ पृथ्वी की भूपर्पटी में ऑक्साइड, सल्फाइड, कार्बोनेट अथवा अन्य यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं। 

खनिज (Minerals)

पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले वे पदार्थ जिनमें धातुएँ या उनके यौगिक उपस्थित होते हैं, खनिज (Minerals) कहलाते हैं।

उदाहरण—

  • बॉक्साइट (एल्यूमिनियम)
  • हेमेटाइट (लोहा)
  • सिनेबार (पारा)

सभी खनिजों से धातु प्राप्त करना आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं होता। 

अयस्क (Ores)

वे खनिज जिनसे धातु का निष्कर्षण सरलता से तथा कम लागत में किया जा सके, अयस्क (Ore) कहलाते हैं।

अर्थात् प्रत्येक अयस्क एक खनिज होता है, लेकिन प्रत्येक खनिज अयस्क नहीं होता। 

उदाहरण

धातु अयस्क
एल्युमिनियम बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O)
लोहा हेमेटाइट (Fe₂O₃)
जिंक जिंक ब्लेंड (ZnS)
ताँबा कॉपर पाइराइट (CuFeS₂)

गैंग (Gangue)

अयस्क में धातु के अतिरिक्त उपस्थित मिट्टी, रेत, पत्थर तथा अन्य अवांछित अशुद्धियाँ गैंग (Gangue) कहलाती हैं।

धातु प्राप्त करने से पहले इन अशुद्धियों को हटाना आवश्यक होता है। 

धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals)

अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातुओं का निष्कर्षण (Metallurgy) कहते हैं।

धातु के निष्कर्षण की विधि उसकी अभिक्रियाशीलता पर निर्भर करती है। अधिक अभिक्रियाशील धातुओं के लिए अलग तथा कम अभिक्रियाशील धातुओं के लिए अलग विधियाँ अपनाई जाती हैं। 

अयस्कों का सांद्रण (Concentration of Ores)

निष्कर्षण का पहला चरण अयस्क से गैंग को हटाना होता है। इस प्रक्रिया को अयस्कों का सांद्रण कहते हैं।

सांद्रण के लिए विभिन्न विधियाँ अपनाई जाती हैं, जैसे—

  • हाथ से चुनना
  • हाइड्रोलिक धुलाई
  • चुंबकीय पृथक्करण
  • झाग उत्प्लावन (Froth Flotation)

उपयुक्त विधि का चयन अयस्क एवं अशुद्धियों के गुणों के आधार पर किया जाता है। 

कम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण

कम अभिक्रियाशील धातुएँ, जैसे पारा (Hg) तथा ताँबा (Cu), सामान्यतः उनके सल्फाइड अयस्कों से प्राप्त की जाती हैं।

इनके सल्फाइड अयस्कों को गर्म करने पर पहले ऑक्साइड बनते हैं और बाद में ऑक्साइडों के अपघटन से धातु प्राप्त हो जाती है। 

मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण

जिंक, लोहा, सीसा आदि मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं के अयस्कों को पहले ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। इसके बाद कार्बन या कार्बन मोनोऑक्साइड की सहायता से उनका अपचयन करके धातु प्राप्त की जाती है। 

भर्जन (Roasting)

सल्फाइड अयस्कों को वायु की उपस्थिति में उच्च ताप पर गर्म करने की प्रक्रिया भर्जन (Roasting) कहलाती है।

उदाहरण

2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂

निस्तापन (Calcination)

कार्बोनेट अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित वायु में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया निस्तापन (Calcination) कहलाती है।

उदाहरण

ZnCO₃ → ZnO + CO₂

अपचयन (Reduction)

धातु ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाकर धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया अपचयन कहलाती है।

उदाहरण

ZnO + C → Zn + CO

 

थर्मिट अभिक्रिया (Thermit Reaction)

जब एल्यूमिनियम चूर्ण द्वारा किसी धातु ऑक्साइड का अपचयन किया जाता है, तो इसे थर्मिट अभिक्रिया कहते हैं।

Fe₂O₃ + 2Al → Al₂O₃ + 2Fe + ऊष्मा

यह अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। इससे प्राप्त पिघला हुआ लोहा रेलवे पटरियों तथा मशीनों के टूटे हुए भागों को जोड़ने में उपयोग किया जाता है।

अधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण

सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा एल्यूमिनियम जैसी अधिक अभिक्रियाशील धातुओं को कार्बन द्वारा अपचयित नहीं किया जा सकता। इसलिए इनका निष्कर्षण विद्युत अपघटन (Electrolysis) द्वारा उनके पिघले हुए यौगिकों से किया जाता है। 

धातुओं का शोधन (Electrolytic Refining)

निष्कर्षण (Extraction) के बाद प्राप्त धातुओं में अनेक प्रकार की अशुद्धियाँ उपस्थित रहती हैं। इन अशुद्धियों को हटाकर उच्च शुद्धता वाली धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया धातुओं का शोधन (Electrolytic Refining) कहलाती है। इस विधि का उपयोग मुख्य रूप से ताँबा (Copper), जिंक (Zinc), निकेल (Nickel), चाँदी (Silver), सोना (Gold) आदि धातुओं के शोधन के लिए किया जाता है। 

विद्युत अपघटनी शोधन में प्रयुक्त भाग

  1. एनोड (Anode)

एनोड के रूप में उसी धातु की अशुद्ध (Impure) एवं मोटी पट्टी लगाई जाती है जिसका शोधन (Refining) किया जाना होता है। 

  1. कैथोड (Cathode)

कैथोड के रूप में उसी धातु की शुद्ध (Pure) एवं पतली पट्टी लगाई जाती है जिसका शोधन (Refining) किया जाना होता है।

  1. विद्युत अपघट्य (Electrolyte)

विद्युत अपघट्य के रूप में उसी धातु के किसी उपयुक्त लवण का जलीय विलयन प्रयोग किया जाता है जिसका शोधन (Refining) किया जाना होता है। उदाहरण के लिए, ताँबे (Copper) के शोधन में कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का जलीय विलयन (आवश्यकतानुसार तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ) विद्युत अपघट्य के रूप में उपयोग किया जाता है। 

धातुओं के शोधन की प्रक्रिया

धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) अध्याय का चित्र, जिसमें विद्युत अपघटनी शोधन की प्रक्रिया, एनोड, कैथोड, विद्युत अपघट्य, धातु आयनों की गति तथा एनोड मड का निर्माण दर्शाया गया है।

चित्र – विद्युत अपघटनी शोधन

जब परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तब सबसे पहले एनोड पर लगी अशुद्ध धातु के परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागकर धातु आयनों (Metal Ions) में परिवर्तित हो जाते हैं। ये धातु आयन विद्युत अपघट्य में घुल जाते हैं।

इसके बाद ये धातु आयन विद्युत अपघट्य के माध्यम से कैथोड की ओर गति करते हैं। कैथोड पर पहुँचने पर ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं और पुनः शुद्ध धातु के रूप में परिवर्तित होकर कैथोड की सतह पर जमा होने लगते हैं।

जैसे-जैसे यह प्रक्रिया चलती रहती है, एनोड का आकार धीरे-धीरे घटता जाता है, जबकि कैथोड पर शुद्ध धातु की परत मोटी होती जाती है।

जो अशुद्धियाँ विद्युत अपघट्य में घुलती नहीं हैं, वे एनोड से अलग होकर पात्र के तल में एकत्र हो जाती हैं। इन्हें एनोड मड (Anode Mud) कहते हैं। कई बार इस एनोड मड में सोना (Gold), चाँदी (Silver) तथा अन्य मूल्यवान धातुएँ भी प्राप्त होती हैं, जिन्हें बाद में अलग करके उपयोग में लाया जाता है। 

संक्षारण (Corrosion)

जब कोई धातु लंबे समय तक वायु, नमी, ऑक्सीजन, अम्लीय गैसों या अन्य रासायनिक पदार्थों के संपर्क में रहती है, तो उसकी सतह पर धीरे-धीरे रासायनिक अभिक्रिया होने लगती है। इस कारण धातु की सतह खराब हो जाती है और उसका क्षय होने लगता है। इस प्रक्रिया को संक्षारण (Corrosion) कहते हैं।

संक्षारण के कारण धातु की चमक कम हो जाती है, उसकी मजबूती घट जाती है तथा समय के साथ वह उपयोग के योग्य नहीं रहती। 

संक्षारण के प्रमुख उदाहरण

  1. लोहे पर जंग लगना (Rusting of Iron)

जब लोहा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी के संपर्क में आता है, तब उसकी सतह पर लाल-भूरे रंग की परत बन जाती है, जिसे जंग (Rust) कहते हैं।

  1. चाँदी का काला पड़ना

चाँदी वायु में उपस्थित हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) से अभिक्रिया करके अपनी सतह पर सिल्वर सल्फाइड (Ag₂S) की काली परत बना लेती है।

  1. ताँबे पर हरी परत बनना

ताँबा वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन तथा नमी के साथ अभिक्रिया करके क्षारीय कॉपर कार्बोनेट [(CuCO₃·Cu(OH)₂)] की हरी परत बना लेता है।

संक्षारण से होने वाली हानियाँ

  • धातुओं की चमक नष्ट हो जाती है।
  • धातुओं की मजबूती कम हो जाती है।
  • मशीनों, वाहनों तथा भवनों की आयु घट जाती है।
  • धातुओं के रखरखाव पर अधिक खर्च करना पड़ता है। 

संक्षारण की रोकथाम (Prevention of Corrosion)

संक्षारण को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन उचित उपाय अपनाकर इसकी गति को काफी कम किया जा सकता है।

  1. पेंट करना (Painting)

धातु की सतह पर पेंट की परत चढ़ाने से उसका संपर्क वायु एवं नमी से नहीं होता, जिससे संक्षारण रुक जाता है।

  1. तेल या ग्रीस लगाना (Oiling or Greasing)

मशीनों के चलने वाले भागों पर तेल या ग्रीस लगाने से धातु वायु और नमी के सीधे संपर्क में नहीं आती।

  1. गैल्वनीकरण (Galvanization)

लोहे या इस्पात की सतह पर जिंक (Zn) की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया गैल्वनीकरण कहलाती है। यह जिंक की परत लोहे को जंग लगने से बचाती है।

  1. विद्युत लेपन (Electroplating)

किसी धातु की सतह पर दूसरी धातु की पतली परत विद्युत धारा की सहायता से चढ़ाई जाती है। इससे धातु का संक्षारण कम होता है तथा उसका स्वरूप भी आकर्षक बनता है।

  1. मिश्रधातु बनाना (Alloying)

कुछ धातुओं को मिलाकर ऐसी मिश्रधातुएँ बनाई जाती हैं जो सामान्य धातुओं की तुलना में संक्षारण के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती हैं।

मिश्रधातुएँ (Alloys)

दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु तथा एक अधातु को निश्चित अनुपात में मिलाकर प्राप्त समांगी पदार्थ को मिश्रधातु (Alloy) कहते हैं।

मिश्रधातुएँ सामान्य धातुओं की तुलना में अधिक मजबूत, कठोर, टिकाऊ तथा संक्षारण-रोधी होती हैं। इसलिए दैनिक जीवन एवं उद्योगों में इनका व्यापक उपयोग किया जाता है। 

मिश्रधातु बनाने के उद्देश्य

  • धातु की कठोरता बढ़ाना।
  • संक्षारण से सुरक्षा प्रदान करना।
  • मजबूती एवं टिकाऊपन बढ़ाना।
  • विशेष भौतिक एवं रासायनिक गुण प्राप्त करना।

प्रमुख मिश्रधातुएँ एवं उनके उपयोग

मिश्रधातु संघटन प्रमुख उपयोग
पीतल (Brass) ताँबा + जिंक बर्तन, सजावटी वस्तुएँ, संगीत वाद्ययंत्र
काँसा (Bronze) ताँबा + टिन मूर्तियाँ, पदक, घंटियाँ
सोल्डर (Solder) सीसा + टिन विद्युत तारों एवं इलेक्ट्रॉनिक परिपथों की जोड़ाई
स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) लोहा + क्रोमियम + निकेल (तथा थोड़ी कार्बन) रसोई के बर्तन, चिकित्सा उपकरण, मशीनें

स्टेनलेस स्टील क्यों नहीं जंग खाता?

उत्तर स्टेनलेस स्टील में उपस्थित क्रोमियम इसकी सतह पर एक अत्यंत पतली एवं मजबूत क्रोमियम ऑक्साइड की सुरक्षात्मक परत बना देता है। यह परत वायु एवं नमी को धातु के संपर्क में आने से रोकती है, जिससे स्टेनलेस स्टील आसानी से जंग नहीं खाता।

अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

  • धातुएँ सामान्यतः चमकदार, कठोर, तन्य (Ductile) तथा आघातवर्धनीय (Malleable) होती हैं।
  • अधातुएँ सामान्यतः भंगुर होती हैं तथा ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं।
  • धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं।
  • अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, जबकि कुछ (जैसे एल्यूमिनियम ऑक्साइड एवं जिंक ऑक्साइड) उभयधर्मी (Amphoteric) होते हैं।
  • धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।
  • अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है।
  • धातुओं की अभिक्रियाशीलता का क्रम अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) द्वारा दर्शाया जाता है।
  • धातु एवं अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से आयनिक बंध बनता है।
  • आयनिक यौगिकों के गलनांक एवं क्वथनांक सामान्यतः उच्च होते हैं।
  • आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते, लेकिन गलित अवस्था एवं जलीय विलयन में विद्युत का चालन करते हैं।
  • सभी खनिज अयस्क नहीं होते, लेकिन प्रत्येक अयस्क एक खनिज होता है।
  • अधिक अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है।
  • मध्यम अभिक्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण उनके ऑक्साइडों के अपचयन द्वारा किया जाता है।
  • धातुओं की शुद्धता बढ़ाने के लिए विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining) किया जाता है।
  • धातुओं का वायु एवं नमी के प्रभाव से धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है।
  • मिश्रधातुएँ सामान्य धातुओं की तुलना में अधिक मजबूत एवं संक्षारण-रोधी होती हैं।

महत्वपूर्ण सामान्य नाम (Common Names)

रासायनिक नाम रासायनिक सूत्र सामान्य नाम
Sodium Chloride NaCl साधारण नमक (Common Salt)
Ferric Oxide (Hydrated) Fe₂O₃·xH₂O जंग (Rust)
Copper Sulphate CuSO₄·5H₂O नीला थोथा (Blue Vitriol)
Zinc Oxide ZnO जिंक ऑक्साइड
Aluminium Oxide Al₂O₃ एल्युमिनियम ऑक्साइड
Silver Sulphide Ag₂S चाँदी की काली परत (Tarnish)
Basic Copper Carbonate CuCO₃·Cu(OH)₂ ताँबे की हरी परत (Patina)
Hydrochloric Acid HCl हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
Sulphuric Acid H₂SO₄ गंधक का अम्ल
Nitric Acid HNO₃ शोरा अम्ल
Magnesium Oxide MgO मैग्नीशियम ऑक्साइड
Calcium Hydroxide Ca(OH)₂ बुझा हुआ चूना (Slaked Lime)
Calcium Oxide CaO बिना बुझा चूना (Quick Lime)
Carbon Monoxide CO कार्बन मोनोऑक्साइड
Carbon Dioxide CO₂ कार्बन डाइऑक्साइड

 धातु एवं अधातु – FAQs

  1. धातु एवं अधातु में क्या अंतर है?

उत्तर: धातुएँ सामान्यतः चमकदार, तन्य एवं विद्युत की चालक होती हैं, जबकि अधातुएँ सामान्यतः भंगुर तथा विद्युत की कुचालक होती हैं।

  1. धातुओं के प्रमुख भौतिक गुण कौन-कौन से हैं?

उत्तर: धातुओं में धात्विक चमक, कठोरता, आघातवर्धनीयता, तन्यता, ऊष्मा एवं विद्युत चालकता तथा ध्वन्यात्मकता पाई जाती है।

  1. उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides) क्या होते हैं?

उत्तर: जो धातु ऑक्साइड अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं, उन्हें उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं। जैसे- ZnO और Al₂O₃।

  1. धातुएँ अम्लों के साथ कैसी अभिक्रिया करती हैं?

उत्तर: अधिकांश धातुएँ तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण एवं हाइड्रोजन गैस बनाती हैं।

  1. अभिक्रियाशीलता श्रेणी (Reactivity Series) क्या है?

उत्तर: धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित सूची को अभिक्रियाशीलता श्रेणी कहते हैं।

  1. आयनिक बंध (Ionic Bond) कैसे बनता है?

उत्तर: धातु द्वारा इलेक्ट्रॉन त्यागने और अधातु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से विपरीत आवेश वाले आयनों के बीच आयनिक बंध बनता है।

  1. सोडियम क्लोराइड (NaCl) का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर: सोडियम एक इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को देकर Na⁺ और Cl⁻ आयन बनाता है, जिनके आकर्षण से NaCl बनता है।

  1. आयनिक यौगिकों के प्रमुख गुण क्या हैं?

उत्तर: आयनिक यौगिक कठोर होते हैं, उच्च गलनांक रखते हैं तथा गलित या जलीय अवस्था में विद्युत का चालन करते हैं।

  1. खनिज (Mineral) एवं अयस्क (Ore) में क्या अंतर है?

उत्तर: प्रत्येक अयस्क खनिज होता है, लेकिन प्रत्येक खनिज अयस्क नहीं होता क्योंकि सभी खनिजों से धातु निकालना आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं होता।

  1. भर्जन (Roasting) एवं निस्तापन (Calcination) में क्या अंतर है?

उत्तर: भर्जन में सल्फाइड अयस्कों को वायु में गर्म किया जाता है, जबकि निस्तापन में कार्बोनेट अयस्कों को सीमित या बिना वायु के गर्म किया जाता है।

  1. थर्मिट अभिक्रिया (Thermit Reaction) क्या है?

उत्तर: एल्यूमिनियम द्वारा धातु ऑक्साइड का अपचयन करके धातु प्राप्त करने वाली ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया को थर्मिट अभिक्रिया कहते हैं।

  1. विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining) क्या है?

उत्तर: विद्युत धारा की सहायता से धातु की अशुद्धियाँ हटाकर शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया विद्युत अपघटनी शोधन कहलाती है।

  1. संक्षारण (Corrosion) क्या है?

उत्तर: वायु, नमी तथा अन्य रासायनिक पदार्थों के प्रभाव से धातुओं का धीरे-धीरे नष्ट होना संक्षारण कहलाता है।

  1. संक्षारण की रोकथाम कैसे की जाती है?

उत्तर: पेंट, तेल या ग्रीस, गैल्वनीकरण, विद्युत लेपन तथा मिश्रधातु बनाकर संक्षारण को रोका जा सकता है।

  1. मिश्रधातु (Alloy) क्या है?

उत्तर: दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु एवं एक अधातु के मिश्रण से बना समांगी पदार्थ मिश्रधातु कहलाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष टिप्स

  • अभिक्रियाशीलता श्रेणी का क्रम अवश्य याद रखें।
  • उभयधर्मी ऑक्साइडों (ZnO, Al₂O₃) पर विशेष ध्यान दें।
  • भर्जन, निस्तापन तथा अपचयन के अंतर को अच्छी तरह समझें।
  • आयनिक यौगिकों के गुण अक्सर MCQ में पूछे जाते हैं।
  • थर्मिट अभिक्रिया तथा उसके उपयोग को याद रखें।
  • विद्युत अपघटनी शोधन में एनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य की भूमिका स्पष्ट रखें।
  • संक्षारण तथा उसकी रोकथाम के उदाहरण याद रखें।
  • प्रमुख मिश्रधातुओं (पीतल, काँसा, सोल्डर, स्टेनलेस स्टील) के संघटन एवं उपयोग का अभ्यास करें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक एवं रासायनिक गुण, उनकी अभिक्रियाशीलता, आयनिक यौगिकों का निर्माण एवं उनके गुण, खनिज एवं अयस्क, धातुओं के निष्कर्षण की विभिन्न विधियाँ, विद्युत अपघटनी शोधन, संक्षारण तथा उसकी रोकथाम और मिश्रधातुओं के बारे में विस्तार से अध्ययन किया। इन सभी अवधारणाओं की समझ न केवल CBSE बोर्ड परीक्षा बल्कि NEET, JEE, NTSE, Olympiad तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय रसायन विज्ञान की आगे की पढ़ाई के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

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