सांख्यिकी (Statistics) : कक्षा 10 गणित अध्याय 13
📖 परिचय – सांख्यिकी (Statistics) गणित की वह शाखा है जिसमें आँकड़ों (Data) का संग्रह, वर्गीकरण, विश्लेषण तथा उनसे निष्कर्ष निकालना सीखा जाता है। कक्षा 9 में आपने अवर्गीकृत आँकड़ों के लिए माध्य (Mean), माध्यक (Median) तथा बहुलक (Mode) का अध्ययन किया था। इस अध्याय में इन्हीं संकल्पनाओं को वर्गीकृत आँकड़ों (Grouped Data) के लिए समझाया गया है। साथ ही संचयी बारंबारता (Cumulative Frequency) तथा ओजाइव (Ogive) की सहायता से माध्यक ज्ञात करना भी बताया गया है।
📚 विषय सूची
- वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य
- प्रत्यक्ष विधि (Direct Method)
- कल्पित माध्य विधि (Assumed Mean Method)
- पग-विचलन विधि (Step Deviation Method)
- तीनों विधियों की तुलना
- वर्गीकृत आँकड़ों का बहुलक
- वर्गीकृत आँकड़ों का माध्यक
- संचयी बारंबारता
- ओजाइव (Ogive)
- महत्वपूर्ण बिंदु
- सभी महत्वपूर्ण सूत्र
- FAQs
- प्रतियोगी परीक्षा टिप्स
📊 वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य (Mean of Grouped Data)
किसी भी आँकड़ा समूह का माध्य (Mean) उसका औसत मान होता है। जब आँकड़ों को वर्ग-अंतराल (Class Interval) तथा बारंबारता (Frequency) के रूप में व्यवस्थित किया जाता है, तब उनका माध्य निकालने के लिए विशेष विधियों का प्रयोग किया जाता है। NCERT में वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य ज्ञात करने की तीन प्रमुख विधियाँ बताई गई हैं।
माध्य ज्ञात करने की तीन विधियाँ
- ✅ प्रत्यक्ष विधि (Direct Method)
- ✅ कल्पित माध्य विधि (Assumed Mean Method)
- ✅ पग-विचलन विधि (Step Deviation Method)
📌 प्रत्यक्ष विधि (Direct Method)
प्रत्यक्ष विधि वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य ज्ञात करने की सबसे सरल विधि है। इसमें प्रत्येक वर्ग-अंतराल का वर्ग-चिह्न (Class Mark) निकाला जाता है। इसके बाद प्रत्येक वर्ग-चिह्न को उसकी बारंबारता से गुणा करके fx प्राप्त किया जाता है। अंत में सभी fx के योग को कुल बारंबारता से भाग देकर माध्य ज्ञात किया जाता है।
📝 प्रत्यक्ष विधि का सूत्र
x̄ = Σfx / Σf
जहाँ—
x̄ = माध्य (Mean)
f = बारंबारता (Frequency)
x = वर्ग-चिह्न (Class Mark)
Σfx = सभी fx का योग
Σf = कुल बारंबारता
✍️ NCERT उदाहरण
प्रश्न: उदाहरण 1 में दिए गए आँकड़ों को 15 की वर्ग-चौड़ाई वाले वर्ग-अंतरालों का उपयोग करके वर्गीकृत आँकड़ों के रूप में प्रस्तुत कीजिए तथा प्रत्यक्ष विधि द्वारा उनका माध्य ज्ञात कीजिए।
| वर्ग-अंतराल | विद्यार्थियों की संख्या |
|---|---|
| 10–25 | 2 |
| 25–40 | 3 |
| 40–55 | 7 |
| 55–70 | 6 |
| 70–85 | 6 |
| 85–100 | 6 |
हल
| वर्ग-अंतराल | बारंबारता (f) | वर्ग-चिह्न (x) | fx |
|---|---|---|---|
| 10–25 | 2 | 17.5 | 35.0 |
| 25–40 | 3 | 32.5 | 97.5 |
| 40–55 | 7 | 47.5 | 332.5 |
| 55–70 | 6 | 62.5 | 375.0 |
| 70–85 | 6 | 77.5 | 465.0 |
| 85–100 | 6 | 92.5 | 555.0 |
| योग | 30 | — | 1860.0 |
अब,
x̄ = Σfx / Σf
= 1860 / 30
= 62
अतः माध्य = 62
📘 वर्ग-चिह्न (Class Mark) कैसे ज्ञात करें?
किसी वर्ग-अंतराल का प्रतिनिधि मान वर्ग-चिह्न (Class Mark) कहलाता है।
📝 सूत्र
वर्ग-चिह्न = (निम्न वर्ग सीमा + उच्च वर्ग सीमा) / 2
✍️ उदाहरण
यदि वर्ग-अंतराल 10–25 है, तो
वर्ग-चिह्न = (10 + 25) / 2
= 35 / 2
= 17.5
इसी प्रकार अन्य सभी वर्ग-अंतरालों के वर्ग-चिह्न ज्ञात किए जाते हैं।
📌 कल्पित माध्य विधि (Assumed Mean Method)
जब वर्ग-चिह्न (Class Mark) के मान बड़े हों, तब प्रत्येक fx निकालना समय लेने वाला कार्य हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसी एक वर्ग-चिह्न को कल्पित माध्य (Assumed Mean) मान लिया जाता है तथा प्रत्येक वर्ग-चिह्न का उससे विचलन (Deviation) ज्ञात किया जाता है। इससे गणना सरल हो जाती है।
📝 कल्पित माध्य विधि का सूत्र
x̄ = a + (Σfd / Σf)
जहाँ—
x̄ = माध्य
a = कल्पित माध्य
d = x − a
Σfd = सभी fd का योग
Σf = कुल बारंबारता
✍️ NCERT उदाहरण
NCERT के अनुसार,
a = 47.5
| वर्ग-चिह्न (x) | बारंबारता (f) | d = x − 47.5 | fd |
|---|---|---|---|
| 17.5 | 2 | -30 | -60 |
| 32.5 | 3 | -15 | -45 |
| 47.5 | 7 | 0 | 0 |
| 62.5 | 6 | 15 | 90 |
| 77.5 | 6 | 30 | 180 |
| 92.5 | 6 | 45 | 270 |
| योग | 30 | — | 435 |
अब,
x̄ = a + (Σfd / Σf)
= 47.5 + (435 / 30)
= 47.5 + 14.5
= 62
अतः माध्य = 62
📌 पग-विचलन विधि (Step Deviation Method)
यदि सभी वर्ग-अंतराल समान हों तथा सभी विचलन (d) किसी एक संख्या के गुणज हों, तो पग-विचलन विधि सबसे सुविधाजनक होती है। इसमें पहले विचलन को वर्ग-अंतराल की चौड़ाई (h) से भाग देकर u ज्ञात किया जाता है। इससे गणना और भी सरल हो जाती है।
📝 पग-विचलन विधि का सूत्र
x̄ = a + h × (Σfu / Σf)
जहाँ—
x̄ = माध्य
a = कल्पित माध्य
h = वर्ग-अंतराल की चौड़ाई
u = (x − a) / h
Σfu = सभी fu का योग
Σf = कुल बारंबारता
✍️ NCERT उदाहरण
NCERT के अनुसार,
a = 47.5 तथा h = 15
| x | f | u | fu |
|---|---|---|---|
| 17.5 | 2 | -2 | -4 |
| 32.5 | 3 | -1 | -3 |
| 47.5 | 7 | 0 | 0 |
| 62.5 | 6 | 1 | 6 |
| 77.5 | 6 | 2 | 12 |
| 92.5 | 6 | 3 | 18 |
| योग | 30 | — | 29 |
अब,
x̄ = a + h × (Σfu / Σf)
= 47.5 + 15 × (29 / 30)
= 47.5 + 14.5
= 62
अतः माध्य = 62
📋 तीनों विधियों की तुलना
| विधि | कब उपयोग करें? |
|---|---|
| प्रत्यक्ष विधि | जब गणना सरल हो तथा वर्ग-चिह्न छोटे हों। |
| कल्पित माध्य विधि | जब वर्ग-चिह्न बड़े हों और गणना कम करनी हो। |
| पग-विचलन विधि | जब सभी वर्ग-अंतराल समान हों तथा विचलन किसी एक संख्या के गुणज हों। |
ध्यान दें: NCERT के अनुसार प्रत्यक्ष विधि, कल्पित माध्य विधि तथा पग-विचलन विधि — तीनों से प्राप्त माध्य समान होता है। अंतर केवल गणना की सरलता में होता है।
किसे कल्पित माध्य चुनना चाहिए?
✅ किसी भी वर्ग-चिह्न को चुन सकते हैं।
✅ मध्य (Center) का वर्ग-चिह्न चुनना सबसे अच्छा रहता है।
✅ ऐसा मान चुनें जिससे d के मान छोटे आएँ।
✅ इससे Σfd निकालना आसान हो जाता है।
NCERT के उदाहरण में
वर्ग-चिह्न थे:
17.5, 32.5, 47.5, 62.5, 77.5, 92.5
NCERT ने 47.5 को कल्पित माध्य चुना है क्योंकि यह बीच का मान है और इससे विचलन छोटे मिलते हैं।
क्या 62.5 भी चुन सकते हैं?
हाँ। NCERT स्वयं बताती है कि 47.5 या 62.5 दोनों में से कोई भी कल्पित माध्य चुना जा सकता है।
क्या उत्तर बदल जाएगा?
नहीं। चाहे आप 47.5 लें, 62.5 लें या कोई अन्य वर्ग-चिह्न लें, अंतिम माध्य (Mean) समान ही आएगा। केवल गणना (Calculation) थोड़ी आसान या कठिन हो सकती है। NCERT ने गतिविधि 1 में भी यही निष्कर्ष दिया है।
परीक्षा के लिए याद रखें
कल्पित माध्य (a) किसी भी वर्ग-चिह्न को माना जा सकता है, परंतु गणना को सरल बनाने के लिए सामान्यतः बीच वाले (Central) वर्ग-चिह्न को कल्पित माध्य चुना जाता है।
📌 वर्गीकृत आँकड़ों का बहुलक (Mode of Grouped Data)
बहुलक (Mode) वह मान होता है जिसकी बारंबारता (Frequency) सबसे अधिक होती है। अवर्गीकृत आँकड़ों में बहुलक को सीधे ज्ञात किया जा सकता है, लेकिन वर्गीकृत आँकड़ों में केवल सबसे अधिक बारंबारता वाले वर्ग (Class) का पता चलता है। इसलिए वर्गीकृत आँकड़ों में बहुलक ज्ञात करने के लिए एक विशेष सूत्र का उपयोग किया जाता है।
📌 बहुलक वर्ग (Modal Class)
जिस वर्ग-अंतराल (Class Interval) की बारंबारता सबसे अधिक होती है, उसे बहुलक वर्ग (Modal Class) कहते हैं। वास्तविक बहुलक का मान इसी वर्ग के अंदर स्थित होता है।
उदाहरण
| वर्ग-अंतराल | बारंबारता (f) |
|---|---|
| 10–20 | 5 |
| 20–30 | 8 |
| 30–40 | 12 |
| 40–50 | 9 |
| 50–60 | 6 |
यहाँ 30–40 की बारंबारता सबसे अधिक (12) है।
अतः बहुलक वर्ग = 30–40
📝 बहुलक का सूत्र
बहुलक = l + { (f₁ − f₀) / (2f₁ − f₀ − f₂) } × h
जहाँ—
l = बहुलक वर्ग की निम्न सीमा (Lower Limit)
h = वर्ग-अंतराल की चौड़ाई (Class Size)
f₁ = बहुलक वर्ग की बारंबारता
f₀ = बहुलक वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की बारंबारता
f₂ = बहुलक वर्ग के ठीक बाद वाले वर्ग की बारंबारता
✍️ NCERT उदाहरण
NCERT में दिए गए आँकड़ों में—
| परिवार का आकार | परिवारों की संख्या |
|---|---|
| 1–3 | 7 |
| 3–5 | 8 |
| 5–7 | 2 |
| 7–9 | 2 |
| 9–11 | 1 |
सबसे अधिक बारंबारता 8 है।
अतः,
बहुलक वर्ग = 3–5
l = 3
h = 2
f₁ = 8
f₀ = 7
f₂ = 2
अब सूत्र में मान रखने पर—
बहुलक = 3 + {(8 − 7) / (2×8 − 7 − 2)} × 2
= 3 + (1 / 7) × 2
= 3 + 0.286
≈ 3.29
उत्तर : बहुलक ≈ 3.29
💡 बहुलक ज्ञात करते समय ध्यान रखें
- सबसे पहले अधिकतम बारंबारता ज्ञात करें।
- उसी वर्ग को बहुलक वर्ग माना जाता है।
- f₀, f₁ और f₂ सही चुनना सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
- यदि दो वर्गों की अधिकतम बारंबारता समान हो, तो आँकड़ों को बहु-बहुलकी (Multimodal Data) कहा जाता है।
📊 वर्गीकृत आँकड़ों का माध्यक (Median of Grouped Data)
माध्यक (Median) वह मान है जो आँकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करता है। अर्थात आधे प्रेक्षण माध्यक से छोटे तथा आधे प्रेक्षण माध्यक से बड़े होते हैं। वर्गीकृत आँकड़ों में माध्यक ज्ञात करने के लिए पहले संचयी बारंबारता (Cumulative Frequency) ज्ञात की जाती है।
📌 संचयी बारंबारता (Cumulative Frequency)
किसी वर्ग की बारंबारता में उससे पहले की सभी बारंबारताओं को जोड़कर प्राप्त मान संचयी बारंबारता (CF) कहलाता है।
संचयी बारंबारता मुख्यतः दो प्रकार की होती है—
Less Than Cumulative Frequency
More Than Cumulative Frequency
इन दोनों का उपयोग अगले भाग में माध्यक तथा ओजाइव (Ogive) ज्ञात करने में किया जाता है।
📌 Less Than Cumulative Frequency
Less Than Cumulative Frequency में प्रत्येक वर्ग की बारंबारता में उससे पहले के सभी वर्गों की बारंबारताओं को जोड़ते हुए संचयी बारंबारता प्राप्त की जाती है। इसलिए प्रत्येक अगला CF पिछले CF से बड़ा या उसके बराबर होता है।
✍️ उदाहरण
| वर्ग-अंतराल | बारंबारता (f) | Less Than CF |
|---|---|---|
| 10–20 | 5 | 5 |
| 20–30 | 8 | 13 |
| 30–40 | 12 | 25 |
| 40–50 | 9 | 34 |
| 50–60 | 6 | 40 |
गणना
पहला CF = 5
दूसरा CF = 5 + 8 = 13
तीसरा CF = 13 + 12 = 25
चौथा CF = 25 + 9 = 34
पाँचवाँ CF = 34 + 6 = 40
📌 याद रखें
- Less Than CF हमेशा ऊपर से नीचे (Top to Bottom) निकाली जाती है।
- प्रत्येक नई संचयी बारंबारता में पिछले CF को जोड़ना होता है।
- अंतिम CF हमेशा कुल बारंबारता (N) के बराबर होती है।
📌 More Than Cumulative Frequency
More Than Cumulative Frequency में गणना सबसे बड़ी कुल बारंबारता (N) से प्रारम्भ की जाती है। इसके बाद प्रत्येक चरण में पिछले वर्ग की बारंबारता घटाई जाती है।
✍️ उदाहरण
उपरोक्त आँकड़ों के लिए,
कुल बारंबारता (N) = 40
| वर्ग-अंतराल | बारंबारता (f) | More Than CF |
|---|---|---|
| 10–20 | 5 | 40 |
| 20–30 | 8 | 35 |
| 30–40 | 12 | 27 |
| 40–50 | 9 | 15 |
| 50–60 | 6 | 6 |
गणना
पहला CF = 40
दूसरा CF = 40 − 5 = 35
तीसरा CF = 35 − 8 = 27
चौथा CF = 27 − 12 = 15
पाँचवाँ CF = 15 − 9 = 6
📌 याद रखें
- More Than CF हमेशा नीचे की ओर घटती जाती है।
- इसकी शुरुआत कुल बारंबारता (N) से होती है।
- प्रत्येक चरण में पिछले वर्ग की बारंबारता घटाई जाती है।
📌 माध्यक वर्ग (Median Class)
माध्यक ज्ञात करने से पहले N/2 का मान ज्ञात किया जाता है।
इसके बाद Less Than Cumulative Frequency सारणी में वह पहला वर्ग, जिसकी संचयी बारंबारता N/2 के बराबर या उससे अधिक हो, माध्यक वर्ग (Median Class) कहलाता है। यही वर्ग माध्यक निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया NCERT में माध्यक ज्ञात करने की आधारभूत विधि के रूप में दी गई है।
✍️ उदाहरण
मान लीजिए,
कुल बारंबारता (N) = 40
N/2 = 20
अब Less Than CF देखें—
| वर्ग-अंतराल | Less Than CF |
|---|---|
| 10–20 | 5 |
| 20–30 | 13 |
| 30–40 | 25 |
| 40–50 | 34 |
| 50–60 | 40 |
यहाँ 20 से बड़ा या उसके बराबर पहला CF 25 है, जो 30–40 वर्ग से संबंधित है।
अतः माध्यक वर्ग = 30–40
📘 महत्वपूर्ण तथ्य
- पहले कुल बारंबारता (N) ज्ञात करें।
- फिर N/2 निकालें।
- Less Than CF में N/2 के बराबर या उससे अधिक पहला CF खोजें।
- उसी का वर्ग-अंतराल माध्यक वर्ग (Median Class) कहलाता है।
📊 वर्गीकृत आँकड़ों का माध्यक (Median)
माध्यक (Median) ज्ञात करने के लिए सबसे पहले माध्यक वर्ग (Median Class) निर्धारित किया जाता है। इसके बाद उस वर्ग की निम्न सीमा, बारंबारता, संचयी बारंबारता तथा वर्ग-अंतराल का उपयोग करके माध्यक ज्ञात किया जाता है। NCERT में वर्गीकृत आँकड़ों के माध्यक के लिए एक मानक सूत्र दिया गया है।
📝 माध्यक का सूत्र
माध्यक = l + {[(N/2) − cf] / f} × h
📖 जहाँ—
l = माध्यक वर्ग की निम्न सीमा (Lower Boundary)
N = कुल बारंबारता (Σf)
cf = माध्यक वर्ग से ठीक पहले की संचयी बारंबारता
f = माध्यक वर्ग की बारंबारता
h = वर्ग-अंतराल (Class Size)
✍️ NCERT उदाहरण
NCERT में दिए गए आँकड़ों के अनुसार सबसे पहले Less Than Cumulative Frequency सारणी बनाई जाती है। इसके बाद—
कुल बारंबारता (N) = 40
N/2 = 20
माध्यक वर्ग = 35–45
l = 35
cf = 14
f = 8
h = 10
अब सूत्र में मान रखने पर—
माध्यक = 35 + {[(20 − 14) / 8]} × 10
= 35 + (6 / 8) × 10
= 35 + 7.5
= 42.5
अतः माध्यक = 42.5
📈 Less Than Ogive
Less Than Ogive वह संचयी बारंबारता वक्र (Cumulative Frequency Curve) है जिसमें ऊपरी वर्ग सीमाओं (Upper Class Boundaries) को उनके Less Than Cumulative Frequency के साथ आलेख (Graph) पर अंकित किया जाता है। इसके बाद सभी बिंदुओं को एक चिकने वक्र (Smooth Curve) से मिलाया जाता है। इसे Less Than Ogive कहते हैं।
📘 Less Than Ogive बनाने के चरण
- Less Than Cumulative Frequency सारणी बनाएँ।
- X-अक्ष पर ऊपरी वर्ग सीमाएँ अंकित करें।
- Y-अक्ष पर Less Than CF अंकित करें।
- सभी बिंदुओं को एक चिकने वक्र से जोड़ दें।
📉 More Than Ogive
More Than Ogive वह संचयी बारंबारता वक्र है जिसमें निचली वर्ग सीमाओं (Lower Class Boundaries) को More Than Cumulative Frequency के साथ आलेख पर अंकित किया जाता है। सभी बिंदुओं को मिलाकर प्राप्त वक्र को More Than Ogive कहते हैं।
📘 More Than Ogive बनाने के चरण
- More Than Cumulative Frequency सारणी तैयार करें।
- X-अक्ष पर निचली वर्ग सीमाएँ अंकित करें।
- Y-अक्ष पर More Than CF अंकित करें।
- सभी बिंदुओं को एक चिकने वक्र से जोड़ दें।
📍 Ogive द्वारा माध्यक ज्ञात करना
यदि Less Than Ogive तथा More Than Ogive दोनों एक ही ग्राफ पर बनाए जाएँ, तो जहाँ दोनों वक्र एक-दूसरे को काटते (Intersect) हैं, उस बिंदु से X-अक्ष पर खींचा गया लंब (Perpendicular) जिस मान को दर्शाता है, वही माध्यक (Median) होता है। यही कारण है कि Ogive को Cumulative Frequency Curve भी कहा जाता है।
चित्र – Less Than एवं More Than Ogive द्वारा माध्यक (Median) ज्ञात करने का ग्राफ
📘 याद रखने योग्य बातें
- पहले Less Than CF एवं More Than CF सारणी तैयार करें।
- माध्यक ज्ञात करने के लिए पहले N/2 निकालना आवश्यक है।
- माध्यक वर्ग वही होता है जिसकी संचयी बारंबारता N/2 के बराबर या उससे अधिक हो।
- ग्राफ द्वारा माध्यक ज्ञात करने के लिए Ogive का उपयोग किया जाता है।
- Less Than तथा More Than Ogive के प्रतिच्छेदन (Intersection) से माध्यक प्राप्त होता है।
⭐ महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points)
- सांख्यिकी (Statistics) आँकड़ों का संग्रह, वर्गीकरण, विश्लेषण तथा निष्कर्ष निकालने की शाखा है।
- माध्य (Mean) आँकड़ों का औसत मान होता है।
- वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य ज्ञात करने की तीन विधियाँ हैं—प्रत्यक्ष विधि, कल्पित माध्य विधि, पग-विचलन विधि
- तीनों विधियों से प्राप्त माध्य का मान समान होता है।
- वर्ग-चिह्न (Class Mark) प्रत्येक वर्ग-अंतराल का प्रतिनिधि मान होता है।
- कल्पित माध्य (Assumed Mean) किसी भी वर्ग-चिह्न को बनाया जा सकता है, परन्तु बीच वाले वर्ग-चिह्न को चुनने से गणना सरल हो जाती है।
- पग-विचलन विधि तभी अधिक उपयोगी होती है जब सभी वर्ग-अंतराल समान हों।
- बहुलक (Mode) वह मान है जिसकी बारंबारता सबसे अधिक होती है।
- सबसे अधिक बारंबारता वाला वर्ग बहुलक वर्ग (Modal Class) कहलाता है।
- माध्यक (Median) आँकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करता है।
- माध्यक ज्ञात करने से पहले N/2 निकालना आवश्यक होता है।
- Less Than तथा More Than Cumulative Frequency दोनों का उपयोग Ogive बनाने में किया जाता है।
- Ogive को संचयी बारंबारता वक्र (Cumulative Frequency Curve) भी कहा जाता है।
- Less Than Ogive तथा More Than Ogive के प्रतिच्छेदन बिंदु से माध्यक ज्ञात किया जाता है।
- बोर्ड परीक्षा में Mean, Mode और Median के प्रश्न प्रायः सूत्र आधारित पूछे जाते हैं। (यह परीक्षा पैटर्न संबंधी सामान्य अवलोकन है, NCERT का कथन नहीं।)
📝 सभी महत्वपूर्ण सूत्र (Quick Revision)
- वर्ग-चिह्न (Class Mark)
वर्ग-चिह्न = (निम्न वर्ग सीमा + उच्च वर्ग सीमा) / 2
- प्रत्यक्ष विधि
x̄ = Σfx / Σf
- कल्पित माध्य विधि
x̄ = a + (Σfd / Σf)
- पग-विचलन विधि
u = (x − a) / h
x̄ = a + h × (Σfu / Σf)
- बहुलक
बहुलक = l + {(f₁ − f₀) / (2f₁ − f₀ − f₂)} × h
- माध्यक
माध्यक = l + {[(N/2) − cf] / f} × h
❓ FAQs
- सांख्यिकी क्या है?
सांख्यिकी आँकड़ों के संग्रह, विश्लेषण तथा निष्कर्ष निकालने का विज्ञान है।
- वर्गीकृत आँकड़े क्या होते हैं?
वे आँकड़े जिन्हें वर्ग-अंतराल तथा बारंबारता के रूप में व्यवस्थित किया जाता है।
- माध्य क्या होता है?
सभी प्रेक्षणों का औसत मान।
- वर्ग-चिह्न कैसे ज्ञात करते हैं?
(निम्न सीमा + उच्च सीमा) ÷ 2
- कल्पित माध्य क्यों लिया जाता है?
गणना को सरल बनाने के लिए।
- क्या कल्पित माध्य कोई भी वर्ग-चिह्न हो सकता है?
हाँ, कोई भी वर्ग-चिह्न लिया जा सकता है।
- पग-विचलन विधि कब उपयोगी होती है?
जब सभी वर्ग-अंतराल समान हों।
- बहुलक वर्ग क्या होता है?
सबसे अधिक बारंबारता वाला वर्ग।
- माध्यक वर्ग कैसे ज्ञात करते हैं?
जिस वर्ग की Less Than CF पहली बार N/2 के बराबर या उससे अधिक हो।
- Ogive क्या है?
संचयी बारंबारता वक्र।
🎯 प्रतियोगी परीक्षा टिप्स
- Mean, Median और Mode के सभी सूत्र याद रखें।
- Class Mark निकालने का अभ्यास करें।
- N/2 निकालने में गलती न करें।
- Mode में f₀, f₁ तथा f₂ सही पहचानें।
- Median में cf हमेशा माध्यक वर्ग से पहले वाली संचयी बारंबारता होती है।
- Step Deviation में u = (x − a) / h लिखना न भूलें।
- Less Than एवं More Than CF के अंतर को अच्छी तरह समझें।
- Ogive के प्रश्नों में X-अक्ष एवं Y-अक्ष सही अंकित करें।
- गणना करते समय सभी इकाइयाँ एवं सारणी सावधानीपूर्वक बनाएँ।
- परीक्षा में प्रश्न हल करने से पहले उपयुक्त विधि का चयन करें।
🏁 निष्कर्ष
इस अध्याय में आपने वर्गीकृत आँकड़ों का माध्य, बहुलक तथा माध्यक ज्ञात करने की विभिन्न विधियों का अध्ययन किया। साथ ही संचयी बारंबारता, Less Than एवं More Than Ogive तथा Ogive द्वारा माध्यक ज्ञात करने की विधि को भी समझा। इन सभी संकल्पनाओं का नियमित अभ्यास करने से बोर्ड परीक्षा एवं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सांख्यिकी से संबंधित प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है।

