पदार्थ के गुण (Properties of Matter)
📘 परिचय – पदार्थ के गुण (Properties of Matter) –हमारे चारों ओर उपस्थित सभी वस्तुएँ पदार्थ (Matter) से बनी हैं। पदार्थ अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग व्यवहार करता है। किसी पदार्थ का बाहरी बल के प्रति व्यवहार, उसके आकार में परिवर्तन, द्रव की सतह के गुण तथा द्रव के प्रवाह का विरोध करने की क्षमता आदि उसके महत्वपूर्ण भौतिक गुण हैं।
पदार्थ के गुण (Properties of Matter) का अध्ययन यह समझने में सहायता करता है कि ठोस, द्रव और गैस बाहरी बल के प्रभाव में किस प्रकार व्यवहार करते हैं।
इस अध्याय में हम मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण गुणों का अध्ययन करेंगे—
- प्रत्यास्थता (Elasticity)
- पृष्ठ तनाव (Surface Tension)
- श्यानता (Viscosity)
- केशिकत्व (Capillarity)
ये अवधारणाएँ न केवल दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि NEET, CUET, SSC, Railway, Nursing, State PSC, CET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इनसे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
📚 विषय सूची
- ⚙️ पदार्थ के गुण (Properties of Matter)
- 🧲 प्रत्यास्थता (Elasticity)
- 💧 पृष्ठ तनाव (Surface Tension)
- 🌊 श्यानता (Viscosity)
- 🧪 केशिकत्व (Capillarity)
- 📌 प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- ❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- 🎯 प्रतियोगी परीक्षा टिप्स
- 🏁 निष्कर्ष
- ✍️ प्रतियोगी परीक्षा अभ्यास प्रश्न
⚙️ पदार्थ के गुण (Properties of Matter)
पदार्थ के विभिन्न गुणों को समझने के लिए यह देखना आवश्यक है कि बाहरी बल लगाने पर पदार्थ किस प्रकार प्रतिक्रिया करता है।
उदाहरण के लिए—
- किसी रबर बैंड को खींचने पर उसकी लंबाई बढ़ जाती है।
- पानी की सतह पर कुछ हल्की वस्तुएँ तैर सकती हैं।
- शहद पानी की तुलना में धीरे बहता है।
- पतली नली में पानी ऊपर चढ़ सकता है।
इन घटनाओं के पीछे क्रमशः प्रत्यास्थता, पृष्ठ तनाव, श्यानता और केशिकत्व जैसी अवधारणाएँ कार्य करती हैं।
🧲 प्रत्यास्थता (Elasticity)
प्रत्यास्थता (Elasticity) पदार्थ का वह गुण है, जिसके कारण बाहरी बल हटाने पर पदार्थ अपनी मूल आकृति एवं आकार में वापस आने की प्रवृत्ति रखता है।
उदाहरण के लिए, किसी स्प्रिंग को थोड़ी सीमा तक खींचकर छोड़ने पर वह अपनी मूल लंबाई में वापस आ जाता है।
प्रत्यास्थ वस्तु का उदाहरण
- स्प्रिंग (Spring) और रबर बैंड (Rubber Band) प्रत्यास्थता के सामान्य उदाहरण हैं।
🔄 विरूपण (Deformation)
बाहरी बल लगाने पर किसी वस्तु की मूल आकृति, लंबाई या आयतन में होने वाले परिवर्तन को विरूपण (Deformation) कहते हैं।
उदाहरण:
यदि किसी तार को खींचने पर उसकी लंबाई बढ़ जाती है, तो तार में विरूपण उत्पन्न हुआ है।
⚖️ प्रतिबल (Stress)
किसी पदार्थ के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगाया गया आंतरिक प्रतिरोधी बल प्रतिबल (Stress) कहलाता है।
सूत्र
प्रतिबल (Stress) = बल ÷ क्षेत्रफल
Stress = Force ÷ Area
प्रतिबल की SI इकाई: पास्कल (Pa)
📝 उदाहरण
प्रश्न: किसी तार पर 100 N का बल 0.01 m² क्षेत्रफल पर लगाया जाता है। प्रतिबल ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया—
बल = 100 N
क्षेत्रफल = 0.01 m²
सूत्र:
Stress = Force ÷ Area
Stress = 100 ÷ 0.01
Stress = 10,000 Pa
उत्तर: प्रतिबल = 10,000 Pa
📏 विकृति (Strain)
बाहरी बल के कारण वस्तु के आकार या लंबाई में हुए परिवर्तन तथा उसकी मूल लंबाई का अनुपात विकृति (Strain) कहलाता है।
सूत्र
विकृति = लंबाई में परिवर्तन ÷ मूल लंबाई
Strain = Change in Length ÷ Original Length
NOTE – विकृति एक विमाहीन राशि (Dimensionless Quantity) है, इसलिए इसकी कोई SI इकाई नहीं होती।
💡 Concept Check
प्रश्न: क्या विकृति की कोई SI इकाई होती है?
उत्तर: नहीं। विकृति दो समान विमा वाली राशियों का अनुपात है, इसलिए यह विमाहीन होती है।
📈 हुक का नियम (Hooke’s Law)
हुक के नियम (Hooke’s Law) के अनुसार, प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit) के भीतर किसी पदार्थ में उत्पन्न विकृति, लगाए गए प्रतिबल के समानुपाती होती है।
Stress ∝ Strain
अर्थात्,
Stress = Elastic Modulus × Strain
🧮 प्रत्यास्थता गुणांक (Modulus of Elasticity)
प्रतिबल और विकृति के अनुपात को प्रत्यास्थता गुणांक (Modulus of Elasticity) कहते हैं।
प्रत्यास्थता गुणांक = प्रतिबल ÷ विकृति
Modulus of Elasticity = Stress ÷ Strain
इसकी SI इकाई पास्कल (Pa) होती है।
📝 उदाहरण
प्रश्न: किसी पदार्थ में प्रतिबल 200 Pa तथा विकृति 0.01 है। प्रत्यास्थता गुणांक ज्ञात कीजिए।
हल:
Modulus = Stress ÷ Strain
= 200 ÷ 0.01
= 20,000 Pa
उत्तर: प्रत्यास्थता गुणांक = 20,000 Pa
💡 Concept Check
प्रश्न: यदि किसी पदार्थ का प्रत्यास्थता गुणांक अधिक है, तो पदार्थ की कठोरता कैसी होगी?
उत्तर: सामान्यतः पदार्थ अधिक कठोर (Stiff/Rigid) होगा और समान प्रतिबल पर कम विकृति उत्पन्न करेगा।
📌 प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit)
वह अधिकतम सीमा, जहाँ तक किसी पदार्थ पर बल लगाने के बाद बल हटाने पर वह अपनी मूल आकृति एवं आकार में वापस आ सकता है, प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit) कहलाती है।
यदि लगाए गए बल के कारण पदार्थ इस सीमा से आगे चला जाए, तो वह स्थायी रूप से विकृत हो सकता है।
चित्र- प्रत्यास्थता का चित्र
💧 पृष्ठ तनाव (Surface Tension)
पृष्ठ तनाव (Surface Tension) द्रव (Liquid) का वह गुण है, जिसके कारण उसकी मुक्त सतह (Free Surface) खिंची हुई लोचदार झिल्ली (Stretched Elastic Membrane) की तरह व्यवहार करती है।
द्रव की सतह पर उपस्थित अणुओं पर लगने वाले असंतुलित अंतराअणुक आकर्षण बल (Intermolecular Forces) के कारण पृष्ठ तनाव उत्पन्न होता है।
🔬 पृष्ठ तनाव का कारण
- द्रव के अंदर स्थित किसी अणु पर चारों ओर से लगभग समान आकर्षण बल लगता है। इसलिए उस पर परिणामी बल लगभग शून्य होता है।
- लेकिन द्रव की सतह पर स्थित अणु के ऊपर उसी प्रकार के द्रव अणु नहीं होते। इसलिए उस पर अंदर की ओर परिणामी आकर्षण बल कार्य करता है।
- इसी कारण द्रव अपनी सतह का क्षेत्रफल कम करने की प्रवृत्ति रखता है और पृष्ठ तनाव (Surface Tension) प्रदर्शित करता है।
⚙️ पृष्ठ तनाव की परिभाषा
द्रव की सतह पर खींची गई किसी काल्पनिक रेखा की प्रति इकाई लंबाई पर सतह के लंबवत कार्य करने वाले स्पर्शीय बल को पृष्ठ तनाव कहते हैं।
सूत्र
पृष्ठ तनाव (T) = बल (F) ÷ लंबाई (L)
T = F/L
जहाँ—
T = पृष्ठ तनाव
F = पृष्ठ के समानांतर कार्य करने वाला बल
L = वह लंबाई जिस पर बल कार्य करता है
SI इकाई – न्यूटन प्रति मीटर (N/m)
📝 उदाहरण
प्रश्न: किसी द्रव की सतह पर 0.5 m लंबी रेखा के साथ 0.1 N बल कार्य करता है। पृष्ठ तनाव ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया—
बल = 0.1 N
लंबाई = 0.5 m
सूत्र:
T = F/L
T = 0.1 ÷ 0.5
T = 0.2 N/m
उत्तर: पृष्ठ तनाव = 0.2 N/m
🫧 पृष्ठ ऊर्जा (Surface Energy)
द्रव की सतह का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्य को पृष्ठ ऊर्जा (Surface Energy) कहते हैं।
द्रव अपनी सतह के क्षेत्रफल को कम करने की प्रवृत्ति रखता है। इसलिए मुक्त द्रव सतह सामान्यतः न्यूनतम क्षेत्रफल प्राप्त करने का प्रयास करती है।
🌐 पृष्ठ तनाव और पृष्ठ क्षेत्रफल
पृष्ठ तनाव के कारण द्रव की सतह अपना क्षेत्रफल कम करने की प्रवृत्ति रखती है।
इसी कारण—
- पानी की छोटी बूंद लगभग गोलाकार होती है।
- साबुन के बुलबुले गोलाकार बनने की प्रवृत्ति रखते हैं।
- वर्षा की बूंदें लगभग गोलाकार दिखाई देती हैं।
- गोलाकार आकृति समान आयतन के लिए न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल प्रदान करती है।
📝 उदाहरण
प्रश्न: पानी की छोटी बूंद गोलाकार क्यों होती है?
उत्तर: पृष्ठ तनाव के कारण पानी अपनी सतह का क्षेत्रफल न्यूनतम करने की प्रवृत्ति रखता है। समान आयतन के लिए गोले का पृष्ठ क्षेत्रफल न्यूनतम होता है, इसलिए पानी की बूंद गोलाकार बनने की प्रवृत्ति रखती है।
💡 आसान भाषा में
पृष्ठ तनाव → सतह को छोटा करने की प्रवृत्ति → सबसे कम सतह वाला आकार = गोला → बूंद गोलाकार
🦟 पानी की सतह पर हल्की वस्तुओं का तैरना
कुछ हल्की वस्तुएँ, जैसे छोटी सुई या कुछ कीट, पानी की सतह पर दिखाई दे सकते हैं। इसका कारण पृष्ठ तनाव (Surface Tension) है।
यदि वस्तु को सावधानीपूर्वक पानी की सतह पर रखा जाए, तो सतह का तनाव उसके भार को संतुलित करने में सहायता कर सकता है।
💡 Concept Check
प्रश्न: कुछ कीट पानी की सतह पर कैसे चल पाते हैं?
उत्तर: पानी के पृष्ठ तनाव के कारण उसकी सतह एक खिंची हुई झिल्ली की तरह व्यवहार करती है, जो कीट के भार को सहारा देने में सहायता करती है।
🧼 साबुन और डिटर्जेंट का प्रभाव
- साबुन एवं डिटर्जेंट पानी का पृष्ठ तनाव कम कर देते हैं।
- पृष्ठ तनाव कम होने पर पानी कपड़े या गंदगी की सतह पर अधिक आसानी से फैल सकता है।
- इसी कारण साबुन एवं डिटर्जेंट सफाई में उपयोगी होते हैं।
📝 उदाहरण
प्रश्न: कपड़े धोने में साबुन का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर: साबुन पानी का पृष्ठ तनाव कम करता है, जिससे पानी कपड़े के रेशों में अधिक आसानी से फैलता है और गंदगी हटाने में सहायता मिलती है।
🌡️ तापमान का पृष्ठ तनाव पर प्रभाव
सामान्यतः तापमान बढ़ने पर द्रव का पृष्ठ तनाव घटता है।
तापमान बढ़ने पर द्रव के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है और अंतराअणुक आकर्षण का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो जाता है।
इसलिए—
तापमान ↑ → पृष्ठ तनाव ↓
🫧 साबुन के बुलबुले (Soap Bubble)
साबुन के बुलबुले की सतह पर पृष्ठ तनाव कार्य करता है। साबुन मिलाने से पानी का पृष्ठ तनाव कम हो जाता है और बुलबुले का बनना आसान हो जाता है।
बुलबुले में दो सतहें (Two Surfaces) होती हैं—
- बाहरी सतह
- आंतरिक सतह
इसी कारण साबुन के बुलबुले से संबंधित सूत्रों में दो सतहों का प्रभाव शामिल होता है।
चित्र- पृष्ठ तनाव का चित्र
📌 पृष्ठ तनाव के दैनिक जीवन में उदाहरण
- पानी की बूंद का गोलाकार होना।
- साबुन के बुलबुले का बनना।
- कुछ कीटों का पानी की सतह पर चलना।
- सुई का सावधानी से रखने पर पानी की सतह पर टिकना।
- पौधों में जल के परिवहन में पृष्ठीय घटनाओं की भूमिका।
- साबुन एवं डिटर्जेंट द्वारा सफाई में सहायता।
💡 Concept Check
प्रश्न: साबुन पानी का पृष्ठ तनाव बढ़ाता है या घटाता है?
उत्तर: साबुन पानी का पृष्ठ तनाव घटाता है।
🌊 श्यानता (Viscosity)
श्यानता (Viscosity) द्रव की वह विशेषता है जिसके कारण वह अपनी विभिन्न परतों के बीच सापेक्ष गति का विरोध करता है। सरल शब्दों में, यह द्रव के बहने के प्रतिरोध (Resistance to Flow) को दर्शाती है।
उदाहरण के लिए, शहद (Honey) पानी की तुलना में धीरे बहता है, क्योंकि शहद की श्यानता अधिक होती है।
🔬 श्यानता का कारण
द्रव की विभिन्न परतें अलग-अलग वेग से गति कर सकती हैं। इन परतों के बीच अंतराअणुक आकर्षण बल (Intermolecular Forces) के कारण एक परत दूसरी परत की गति का विरोध करती है।
इसी आंतरिक विरोध को श्यानता (Viscosity) कहा जाता है।
📌 श्यान बल (Viscous Force)
द्रव की एक परत को दूसरी परत के सापेक्ष गति कराने पर उनके बीच जो विरोधी बल उत्पन्न होता है, उसे श्यान बल (Viscous Force) कहते हैं।
श्यानता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
- द्रव का प्रकार
- तापमान
- द्रव की परतों के बीच वेग का अंतर
📐 न्यूटन का श्यानता नियम (Newton’s Law of Viscosity)
न्यूटन के श्यानता नियम के अनुसार, दो समानांतर द्रव परतों के बीच श्यान बल, वेग प्रवणता (Velocity Gradient) तथा संपर्क क्षेत्रफल के समानुपाती होता है।
F ∝ A × (dv/dy)
अर्थात्,
F = ηA(dv/dy)
जहाँ—
F = श्यान बल (Viscous Force)
η = श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity)
A = परतों का क्षेत्रफल
dv/dy = वेग प्रवणता (Velocity Gradient)
🧮 श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity)
श्यानता गुणांक को η (Eta) से दर्शाया जाता है।
उपरोक्त समीकरण से—
η = F ÷ [A(dv/dy)]
SI इकाई – पास्कल-सेकंड (Pa·s)
इसे N·s/m² भी लिखा जा सकता है।
📝 उदाहरण
प्रश्न: किसी द्रव में श्यान बल 0.4 N, क्षेत्रफल 2 m² तथा वेग प्रवणता 0.5 s⁻¹ है। श्यानता गुणांक ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया—
F = 0.4 N
A = 2 m²
dv/dy = 0.5 s⁻¹
सूत्र:
η = F ÷ [A(dv/dy)]
η = 0.4 ÷ (2 × 0.5)
η = 0.4 ÷ 1
η = 0.4 Pa·s
उत्तर: श्यानता गुणांक = 0.4 Pa·s
💡 Concept Check
प्रश्न: शहद और पानी में किसकी श्यानता अधिक होती है?
उत्तर: शहद की श्यानता अधिक होती है, इसलिए वह पानी की तुलना में धीरे बहता है।
🌡️ तापमान का श्यानता पर प्रभाव
द्रवों में सामान्यतः तापमान बढ़ने पर श्यानता घटती है।
अर्थात्—
तापमान ↑ → द्रव की श्यानता ↓
इसीलिए गर्म शहद अपेक्षाकृत आसानी से बहता है।
नोट: गैसों में तापमान बढ़ने पर श्यानता सामान्यतः बढ़ती है।
📝 उदाहरण
प्रश्न: गर्म करने पर शहद अधिक आसानी से क्यों बहने लगता है?
उत्तर: तापमान बढ़ने पर शहद की श्यानता कम हो जाती है, इसलिए उसका प्रवाह आसान हो जाता है।
🌊 श्यानता के दैनिक जीवन में उदाहरण
- शहद का धीरे बहना।
- तेल का पानी की तुलना में अलग गति से बहना।
- इंजन ऑयल का मशीन के भागों के बीच घर्षण कम करने में उपयोग।
- वाहनों में उपयुक्त श्यानता वाले lubricants का प्रयोग।
- रक्त का रक्त वाहिकाओं में प्रवाहित होना।
🏃 टर्मिनल वेग (Terminal Velocity)
जब कोई छोटी गोल वस्तु किसी श्यान द्रव में नीचे गिरती है, तो प्रारंभ में उसका वेग बढ़ता है।
लेकिन कुछ समय बाद उस पर लगने वाला श्यान बल और उत्प्लावन बल (Buoyant Force) उसके भार को संतुलित कर देते हैं। इसके बाद वस्तु स्थिर अधिकतम वेग से गिरती है। इस वेग को टर्मिनल वेग (Terminal Velocity) कहते हैं।
📐 स्टोक्स का नियम (Stokes’ Law)
श्यान द्रव में धीरे-धीरे गति करने वाली छोटी गोलाकार वस्तु पर लगने वाला श्यान बल स्टोक्स के नियम (Stokes’ Law) के अनुसार—
F = 6πηrv
जहाँ—
F = श्यान बल
η = द्रव का श्यानता गुणांक
r = गोलाकार वस्तु की त्रिज्या
v = वस्तु का वेग
📝 उदाहरण
प्रश्न: यदि किसी छोटी गोल वस्तु की त्रिज्या बढ़ा दी जाए और अन्य सभी राशियाँ समान रहें, तो उस पर लगने वाला श्यान बल कैसे बदलेगा?
हल:
स्टोक्स के नियम के अनुसार—
F = 6πηrv
इसलिए,
F ∝ r
अर्थात् त्रिज्या बढ़ने पर श्यान बल भी बढ़ता है।
उत्तर: श्यान बल बढ़ेगा।
💡 Concept Check
प्रश्न: टर्मिनल वेग प्राप्त होने के बाद वस्तु का वेग कैसा रहता है?
उत्तर: वस्तु स्थिर वेग (Constant Velocity) से गति करती है।
🧪 केशिकत्व (Capillarity)
केशिकत्व (Capillarity) वह घटना है जिसमें किसी बहुत पतली नली (Capillary Tube) में द्रव का स्तर सामान्य द्रव स्तर की तुलना में ऊपर उठता या नीचे गिरता है।
यह मुख्यतः पृष्ठ तनाव (Surface Tension) तथा आसंजन (Adhesion) और संसंजन (Cohesion) बलों के कारण होता है।
🌱 केशिकत्व के उदाहरण
- पौधों में जल का ऊपर की ओर जाना।
- मिट्टी में पानी का ऊपर उठना।
- ब्लॉटिंग पेपर द्वारा स्याही का सोखना।
- दीपक की बत्ती में तेल का ऊपर चढ़ना।
- कपड़े द्वारा पानी का सोखना।
💧 जल का केशिकत्व
काँच की पतली नली में पानी का स्तर ऊपर उठता है क्योंकि पानी और काँच के बीच आसंजन बल, पानी के अणुओं के बीच संसंजन बल की तुलना में अधिक प्रभावी होता है।
🪔 पारे (Mercury) का केशिकत्व
काँच की पतली नली में पारे का स्तर नीचे गिरता है क्योंकि पारे के अणुओं के बीच संसंजन बल, पारे और काँच के बीच आसंजन बल से अधिक होता है।
📝 उदाहरण
प्रश्न: पौधों में पानी के ऊपर चढ़ने में केशिकत्व की क्या भूमिका है?
उत्तर: पौधों की बहुत पतली नलिकाओं में केशिकत्व पानी को ऊपर की ओर उठने में सहायता करता है।
💡 Concept Check
प्रश्न: पतली केशिका नली में पानी का स्तर ऊपर क्यों उठता है?
उत्तर: पानी और नली की दीवार के बीच आसंजन बल तथा पृष्ठ तनाव के कारण पानी ऊपर उठता है।
📐 केशिका में द्रव के उठने की ऊँचाई
आदर्श स्थिति में केशिका में द्रव के ऊपर उठने की ऊँचाई—
h = 2T cosθ ÷ ρgr
जहाँ—
h = द्रव के उठने की ऊँचाई
T = पृष्ठ तनाव
θ = संपर्क कोण (Angle of Contact)
ρ = द्रव का घनत्व
g = गुरुत्वीय त्वरण
r = केशिका नली की त्रिज्या
📌 सूत्र से महत्वपूर्ण निष्कर्ष
h ∝ 1/r
अर्थात् केशिका की त्रिज्या कम होने पर द्रव के ऊपर उठने की ऊँचाई बढ़ जाती है।
चित्र केशिकत्व का चित्र
📝 उदाहरण
प्रश्न: यदि केशिका नली की त्रिज्या आधी कर दी जाए और अन्य सभी राशियाँ समान रहें, तो पानी के ऊपर उठने की ऊँचाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
हल:
h ∝ 1/r
इसलिए त्रिज्या आधी होने पर—
h → 2h
उत्तर: द्रव के ऊपर उठने की ऊँचाई दोगुनी हो जाएगी।
💡 Concept Check
प्रश्न: बहुत पतली केशिका में द्रव अधिक ऊँचाई तक क्यों चढ़ता है?
उत्तर: क्योंकि केशिका की त्रिज्या कम होने पर h ∝ 1/r, इसलिए द्रव के उठने की ऊँचाई बढ़ जाती है।
📊 श्यानता और केशिकत्व में अंतर
| आधार | श्यानता (Viscosity) | केशिकत्व (Capillarity) |
|---|---|---|
| अर्थ | द्रव के प्रवाह का विरोध | पतली नली में द्रव के ऊपर उठने/नीचे गिरने की घटना |
| मुख्य कारण | द्रव की परतों के बीच आंतरिक घर्षण | पृष्ठ तनाव, आसंजन एवं संसंजन |
| उदाहरण | शहद का धीरे बहना | पौधों में पानी का ऊपर जाना |
| प्रमुख सूत्र | F = ηA(dv/dy) | h = 2T cosθ ÷ ρgr |
📐 प्रत्यास्थता, पृष्ठ तनाव, श्यानता एवं केशिकत्व के महत्वपूर्ण सूत्र
इस भाग में पदार्थ के गुण (Properties of Matter) से संबंधित प्रमुख सूत्रों और उनके अनुप्रयोगों को प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से समझेंगे।
🧲 यंग गुणांक (Young’s Modulus)
यंग गुणांक (Young’s Modulus) किसी पदार्थ के अनुदैर्ध्य प्रतिबल (Longitudinal Stress) और अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal Strain) के अनुपात को कहते हैं।
सूत्र
Y = Longitudinal Stress ÷ Longitudinal Strain
अर्थात्,
Y = (F/A) ÷ (ΔL/L)
इससे,
Y = FL ÷ AΔL
जहाँ—
Y = यंग गुणांक
F = लगाया गया बल
A = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
L = मूल लंबाई
ΔL = लंबाई में परिवर्तन
SI इकाई – पास्कल (Pa)
📝 उदाहरण
प्रश्न: किसी तार की मूल लंबाई 2 m है। उस पर बल लगाने से उसकी लंबाई में 0.001 m की वृद्धि होती है। यदि तार का क्षेत्रफल 0.0001 m² और लगाया गया बल 10 N है, तो यंग गुणांक ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया—
F = 10 N
L = 2 m
ΔL = 0.001 m
A = 0.0001 m²
सूत्र:
Y = FL ÷ AΔL
Y = (10 × 2) ÷ (0.0001 × 0.001)
Y = 20 ÷ 10⁻⁷
Y = 2 × 10⁸ Pa
उत्तर: यंग गुणांक = 2 × 10⁸ Pa
🧱 प्रत्यास्थता के प्रमुख गुणांक
प्रत्यास्थता के अध्ययन में मुख्यतः तीन प्रकार के प्रत्यास्थता गुणांक महत्वपूर्ण हैं—
- यंग गुणांक (Young’s Modulus)
- आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus)
- कतरनी गुणांक (Shear Modulus)
प्रतियोगी परीक्षाओं में इनकी परिभाषा और सूत्रों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
📦 आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus)
किसी पदार्थ के आयतन प्रतिबल (Volume Stress) और आयतन विकृति (Volume Strain) के अनुपात को आयतन प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं।
सूत्र
K = Volume Stress ÷ Volume Strain
K = -ΔP ÷ (ΔV/V)
यहाँ ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि दाब बढ़ने पर आयतन सामान्यतः घटता है।
SI इकाई – पास्कल (Pa)
📝 उदाहरण
प्रश्न: किसी पदार्थ पर दाब बढ़ाने पर उसके आयतन में कमी आती है। इस गुण को किस प्रत्यास्थता गुणांक से व्यक्त किया जाता है?
उत्तर: आयतन प्रत्यास्थता गुणांक (Bulk Modulus)।
✂️ कतरनी गुणांक (Shear Modulus)
किसी पदार्थ के कतरनी प्रतिबल (Shearing Stress) और कतरनी विकृति (Shearing Strain) के अनुपात को कतरनी गुणांक कहते हैं।
सूत्र
G = Shearing Stress ÷ Shearing Strain
SI इकाई – पास्कल (Pa)
💧 पृष्ठ तनाव से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
पृष्ठ तनाव के कारण द्रव की मुक्त सतह न्यूनतम क्षेत्रफल प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखती है।
इसी कारण—
- पानी की छोटी बूंद गोलाकार होती है।
- साबुन के बुलबुले लगभग गोलाकार होते हैं।
- कुछ कीट पानी की सतह पर चल सकते हैं।
- पतली नली में द्रव ऊपर या नीचे जा सकता है।
🫧 साबुन के बुलबुले में दाब
साबुन के बुलबुले में दो सतहें होती हैं—एक अंदरूनी और एक बाहरी।
साबुन के बुलबुले के अंदर अतिरिक्त दाब का सूत्र है—
ΔP = 4T/r
जहाँ—
ΔP = अतिरिक्त दाब
T = पृष्ठ तनाव
r = बुलबुले की त्रिज्या
📝 उदाहरण
प्रश्न: किसी साबुन के बुलबुले की त्रिज्या बढ़ा दी जाए, तो उसके अंदर अतिरिक्त दाब पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
हल:
ΔP = 4T/r
अर्थात्,
ΔP ∝ 1/r
इसलिए त्रिज्या बढ़ने पर अतिरिक्त दाब कम हो जाएगा।
💧 द्रव की बूंद में अतिरिक्त दाब
एक साधारण द्रव बूंद की केवल एक सतह होती है।
इसलिए बूंद के अंदर अतिरिक्त दाब—
ΔP = 2T/r
जबकि साबुन के बुलबुले में दो सतहें होने के कारण—
ΔP = 4T/r
📝 उदाहरण
प्रश्न: समान त्रिज्या और समान पृष्ठ तनाव के लिए साबुन के बुलबुले तथा पानी की बूंद में अतिरिक्त दाब का अनुपात क्या होगा?
हल:
साबुन का बुलबुला:
ΔP₁ = 4T/r
द्रव की बूंद:
ΔP₂ = 2T/r
इसलिए,
ΔP₁ : ΔP₂ = 4 : 2 = 2 : 1
उत्तर: 2 : 1
🌊 श्यानता से संबंधित महत्वपूर्ण सूत्र
श्यानता गुणांक के लिए—
η = F ÷ [A(dv/dy)]
और छोटी गोल वस्तु के लिए स्टोक्स का नियम—
F = 6πηrv
🏃 टर्मिनल वेग का संबंध
श्यान द्रव में गिरती हुई छोटी गोल वस्तु के लिए टर्मिनल वेग—
vₜ = 2r²(ρₛ – ρf)g ÷ 9η
जहाँ—
vₜ = टर्मिनल वेग
r = वस्तु की त्रिज्या
ρₛ = वस्तु का घनत्व
ρf = द्रव का घनत्व
η = द्रव की श्यानता
g = गुरुत्वीय त्वरण
महत्वपूर्ण संबंध
vₜ ∝ r²
इसलिए समान परिस्थितियों में वस्तु की त्रिज्या बढ़ने पर टर्मिनल वेग तेजी से बढ़ता है।
📝 उदाहरण
प्रश्न: यदि किसी छोटी गोल वस्तु की त्रिज्या दोगुनी कर दी जाए और अन्य सभी राशियाँ समान रहें, तो उसका टर्मिनल वेग कितने गुना हो जाएगा?
हल:
vₜ ∝ r²
नई त्रिज्या = 2r
इसलिए—
नया vₜ ∝ (2r)²
= 4r²
उत्तर: टर्मिनल वेग 4 गुना हो जाएगा।
🧪 केशिकत्व का सूत्र
केशिका नली में द्रव के ऊपर उठने की ऊँचाई—
h = 2T cosθ ÷ ρgr
इससे स्पष्ट है कि—
h ∝ T
h ∝ 1/ρ
h ∝ 1/r
📊 प्रमुख सूत्रों का त्वरित पुनरावलोकन
| अवधारणा | सूत्र | SI इकाई |
|---|---|---|
| प्रतिबल (Stress) | Stress = F/A | Pa |
| विकृति (Strain) | Strain = ΔL/L | कोई इकाई नहीं |
| यंग गुणांक | Y = FL/AΔL | Pa |
| आयतन गुणांक | K = -ΔP/(ΔV/V) | Pa |
| कतरनी गुणांक | G = Shear Stress/Shear Strain | Pa |
| पृष्ठ तनाव | T = F/L | N/m |
| श्यानता गुणांक | η = F/[A(dv/dy)] | Pa·s |
| स्टोक्स का नियम | F = 6πηrv | N |
| केशिकत्व | h = 2T cosθ/ρgr | m |
| द्रव बूंद का अतिरिक्त दाब | ΔP = 2T/r | Pa |
| साबुन बुलबुले का अतिरिक्त दाब | ΔP = 4T/r | Pa |
💡 Concept Check
प्रश्न: साबुन के बुलबुले में अतिरिक्त दाब द्रव की बूंद से अधिक क्यों होता है?
उत्तर: साबुन के बुलबुले की दो सतहें होती हैं, जबकि साधारण द्रव की बूंद की केवल एक सतह होती है। इसलिए बुलबुले के लिए अतिरिक्त दाब 4T/r और बूंद के लिए 2T/r होता है।
चित्र द्रव बूंद और साबुन बुलबुले का चित्र
📌 प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- प्रत्यास्थता (Elasticity) पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण बाहरी बल हटाने पर वह अपनी मूल आकृति एवं आकार में लौटने की प्रवृत्ति रखता है।
- प्रतिबल (Stress) का अर्थ प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है।
- Stress = F/A
- विकृति (Strain) लंबाई में परिवर्तन और मूल लंबाई का अनुपात है।
- Strain = ΔL/L
- विकृति एक विमाहीन राशि (Dimensionless Quantity) है।
- हुक का नियम (Hooke’s Law) प्रत्यास्थ सीमा के भीतर लागू होता है।
- Stress ∝ Strain
- यंग गुणांक (Young’s Modulus) अनुदैर्ध्य प्रतिबल और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात है।
- यंग गुणांक, आयतन गुणांक और कतरनी गुणांक की SI इकाई पास्कल (Pa) है।
- पृष्ठ तनाव (Surface Tension) की SI इकाई N/m है।
- पृष्ठ तनाव के कारण द्रव अपनी मुक्त सतह का क्षेत्रफल कम करने की प्रवृत्ति रखता है।
- समान आयतन के लिए गोला न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल वाला आकार होता है; इसलिए छोटी द्रव बूंदें लगभग गोलाकार होती हैं।
- तापमान बढ़ने पर सामान्यतः द्रवों का पृष्ठ तनाव घटता है।
- साबुन और डिटर्जेंट सामान्यतः पानी का पृष्ठ तनाव कम करते हैं।
- श्यानता (Viscosity) द्रव के प्रवाह का आंतरिक प्रतिरोध है।
- श्यानता गुणांक की SI इकाई Pa·s या N·s/m² है।
- सामान्यतः तापमान बढ़ने पर द्रवों की श्यानता घटती है, जबकि गैसों की श्यानता बढ़ती है।
- स्टोक्स का नियम: F = 6πηrv
- श्यान द्रव में गिरती छोटी गोल वस्तु कुछ समय बाद टर्मिनल वेग (Terminal Velocity) प्राप्त कर सकती है।
- टर्मिनल वेग के लिए, अन्य राशियाँ समान होने पर vₜ ∝ r² होता है।
- केशिकत्व (Capillarity) पतली नली में द्रव के ऊपर उठने या नीचे गिरने की घटना है।
- केशिका की त्रिज्या कम होने पर द्रव के उठने की ऊँचाई बढ़ती है। h ∝ 1/r
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- यदि किसी तार पर समान बल लगाया जाए, तो किस तार में अधिक लंबाई बढ़ेगी?
उत्तर: समान पदार्थ और लंबाई के लिए पतले तार में, क्योंकि उसका क्षेत्रफल कम होता है।
- विकृति (Strain) की SI इकाई क्या है?
उत्तर: विकृति विमाहीन राशि है, इसलिए इसकी कोई SI इकाई नहीं होती।
- पृष्ठ तनाव की SI इकाई क्या है?
उत्तर: न्यूटन प्रति मीटर (N/m)।
- तापमान बढ़ाने पर द्रव के पृष्ठ तनाव में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर: सामान्यतः पृष्ठ तनाव घटता है।
- साबुन के बुलबुले में अतिरिक्त दाब का सूत्र क्या है?
उत्तर:
ΔP = 4T/r
- द्रव की बूंद के अंदर अतिरिक्त दाब का सूत्र क्या है?
उत्तर:
ΔP = 2T/r
- समान त्रिज्या और पृष्ठ तनाव के लिए साबुन के बुलबुले तथा द्रव की बूंद के अतिरिक्त दाब का अनुपात क्या होगा?
उत्तर: 2 : 1
- यदि केशिका की त्रिज्या आधी कर दी जाए, तो द्रव के उठने की ऊँचाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: द्रव के उठने की ऊँचाई दोगुनी हो जाएगी।
🔹 Concept Based FAQs
- प्रत्यास्थता (Elasticity) क्या है?
उत्तर: बाहरी बल हटाने पर पदार्थ का अपनी मूल आकृति एवं आकार में लौटने की प्रवृत्ति प्रत्यास्थता कहलाती है।
- हुक का नियम कब लागू होता है?
उत्तर: प्रत्यास्थ सीमा (Elastic Limit) के भीतर।
- श्यानता (Viscosity) क्या है?
उत्तर: द्रव की विभिन्न परतों के बीच सापेक्ष गति का विरोध करने वाले गुण को श्यानता कहते हैं।
- शहद पानी की तुलना में धीरे क्यों बहता है?
उत्तर: शहद की श्यानता पानी से अधिक होती है।
- केशिकत्व क्या है?
उत्तर: पतली नली में द्रव के सामान्य स्तर से ऊपर उठने या नीचे गिरने की घटना को केशिकत्व कहते हैं।
- पौधों में पानी ऊपर चढ़ने में कौन-सी घटना सहायता करती है?
उत्तर: केशिकत्व (Capillarity) सहित कई घटनाएँ इसमें भूमिका निभाती हैं।
- साबुन पानी की सफाई क्षमता को कैसे बढ़ाता है?
उत्तर: साबुन पानी का पृष्ठ तनाव कम करता है, जिससे पानी सतह पर अधिक आसानी से फैलता है और सफाई में सहायता करता है।
🎯 प्रतियोगी परीक्षा टिप्स
- Stress, Strain और Elastic Modulus के बीच संबंध अच्छी तरह याद रखें।
- Stress की इकाई Pa और Surface Tension की इकाई N/m को भ्रमित न करें।
- Liquid Drop → 2T/r और Soap Bubble → 4T/r जरूर याद रखें।
- केशिकत्व में h ∝ 1/r बहुत महत्वपूर्ण संबंध है।
- स्टोक्स के नियम में F ∝ r होता है।
- टर्मिनल वेग में vₜ ∝ r² होता है।
- तापमान के प्रभाव में Liquid और Gas के व्यवहार का अंतर याद रखें।
- Young’s Modulus, Bulk Modulus और Shear Modulus की परिभाषा तथा SI इकाई से प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
- Numerical में सबसे पहले दिए गए मानों और इकाइयों को लिखें।
- सूत्र आधारित प्रश्नों में radius और diameter के अंतर पर विशेष ध्यान दें।
🏁 निष्कर्ष
पदार्थ के गुण (Properties of Matter) भौतिक विज्ञान की महत्वपूर्ण अवधारणाओं में से एक हैं। प्रत्यास्थता, पृष्ठ तनाव, श्यानता और केशिकत्व पदार्थ के विभिन्न व्यवहारों को समझने में सहायता करते हैं।
प्रत्यास्थता के अंतर्गत Stress, Strain, Hooke’s Law और Elastic Moduli महत्वपूर्ण हैं। द्रवों के अध्ययन में Surface Tension, Viscosity और Capillarity विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इनके सूत्रों और दैनिक जीवन में होने वाले अनुप्रयोगों को समझना NEET, CUET, SSC, Railway, Nursing, CET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।
✍️ प्रतियोगी परीक्षा अभ्यास प्रश्न
- किसी तार पर 50 N का बल 0.005 m² क्षेत्रफल पर लगाया जाता है। तार में उत्पन्न प्रतिबल ज्ञात कीजिए।
- किसी द्रव की श्यानता 0.2 Pa·s है। यदि अन्य आवश्यक राशियाँ दी गई हों, तो श्यान बल ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त सूत्र लिखिए।
- किसी केशिका नली की त्रिज्या 1 mm से घटाकर 0.5 mm कर दी जाती है। यदि अन्य सभी परिस्थितियाँ समान हों, तो द्रव के उठने की ऊँचाई में कितना परिवर्तन होगा?




